यह पृष्‍ठ अंग्रेजी में (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

हरित भारत - मिलकर बनाएं बेहतर कल

हरित भारत - मिलकर बनाएं बेहतर कल

"यदि हम पृथ्वी की देखभाल करेंगे तभी वह हमारी देखभाल कर पाएगी"

- अज्ञात

जैसे-जैसे पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ी है वैसे-वैसे उसके संरक्षण की गतिविधियां भी तेज हुई हैं। यह आम धारणा है कि हम हमेशा प्रकृति की दया पर निर्भर रहे हैं और स्पष्ट है कि यह आगे भी जारी रहेगा। इस ग्रह के सक्रिय नागरिक के रूप में आज हम पर्यावरण के लिए जो काम कर रहे हैं उसी से हमारा कल सुरक्षित होगा।

भारत सरकार पर्यावरण पर हो रहे प्रभावों पर गहराई से नजर रखे हुए है और इसे बचाने के लिए आगे भी आई है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं भारत के प्राकृतिक सौंदर्य के संरक्षण और स्वस्थ पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाए रखने के तरीकों और उसकी निगरानी में सक्रिय रूप से शामिल है। कड़े औद्योगिक अपशिष्ठ उपचार नियमों को लागू करने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देकर सरकार ने प्रकृति की रक्षा करने के लिए नीतियां और सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।





जलवायु परिवर्तन से मुकाबला

जलवायु परिवर्तन से मुकाबला

जल संसाधन, स्वास्थ्य, कृषि और खाद्य उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभावों के पीछे प्रमुख कारणों में से एक है जलवायु परिवर्तन का खतरा। यह खतरा उच्च जीवन शैली और औद्योगिक विकास में वृद्धि से पैदा हुए ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन से उत्पन्न हुआ है।

ग्रीनहाउस के प्रभाव से तापमान में वृद्धि हुई है क्योंकि जलवाष्प की तरह ही कुछ गैसों, कार्बन डाइ ऑक्साइड, मिथेन, नाइट्रस आक्साइड आदि से पृथ्वी का तापमान बढ़ा है। इसके लिए 'ग्रीनहाउस प्रभाव' शब्द का उपयोग किया जाता है क्योंकि ग्रीनहाउस में कांच को शीशे की तरह इस्तेमाल किया जाता है और ग्रीनहाउस गैसें सूरज की गर्मी को बढ़ा देती हैं।

भारत अपने ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन के मुद्दे पर कई वर्षों से काम कर रहा है। जलवायु मॉडलिंग अध्ययन के आधार पर भारत के सकल और प्रति व्यक्ति जीएचजी उत्सर्जन का परिणाम अगले दो दशकों में मामूली रहेगा। 2020 में भारत में प्रति व्यक्ति जीएचजी उत्सर्जन का अनुमानित औसत विकसित देशों के मुकाबले नीचे जाने की संभावना है। फिर भी भारत जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर समाधान के लिए सजग है और इसलिए भारत सरकार ने तेजी से काम करते हुए जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं पेश की है जिसमें उपशमन और अनुकूलन उपायों दोनों का सम्मिलन है। भारत ने विज्ञान और अनुसंधान, नीति विकास, नीति के कार्यान्वयन, परस्पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वानिकी क्षेत्रों के तहत जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए 24 कदम (80 KB) - पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है उठाए हैं।

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं (सीपीसीबी) ने पर्यावरण के प्रदूषण को कम करने के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए हैं। यहां सीपीसीबी भारत के सभी नागरिकों को पर्यावरण बचाने में मदद की शपथ लेने के लिए (1.04 MB) - पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है आमंत्रित करता है।



ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत

ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत

पर्यावरण पर प्रभाव, ईंधन की बढ़ती लागत और घटते भंडार ने ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत खोजने की ओर विश्व का ध्यान आकर्षित किया है।

सूर्य से ऊर्जा या सौर ऊर्जा में असीम क्षमता है। इसके कई फायदे भी हैं। यह किफायती होने के साथ ही आसानी से उपलब्ध है और पर्यावरण के अनुकूल भी है:

  • गैर - प्रदूषणकारी: सौर विद्युत उत्पादन में किसी प्रकार का उत्सर्जन पैदा नहीं होता है।
  • विनाशाकारी नहीं: सौर ऊर्जा को खनन और पाइपलाइन बिछाने के पर्यावरण विनाशकारी प्रक्रियाओं के बिना एकत्र किया जा सकता है।

11 जनवरी 2010 को भारत के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (312 KB) - पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है - 'सौर भारत' योजना की शुरुआत की। उन्होंने अपने भाषण में राष्ट्र से आग्रह किया कि वे आगे आएं और सिलिकॉन वैली की तर्ज पर कई सौर वैलियों का निर्माण करें। डॉ. सिंह ने कहा, "सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना नवीकरणीय ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों पर आधारित टिकाऊ विकास की पद्धति पर चलने और उसके लिए जीवश्म ईंधन से निर्भरता हटाने की हमारी रणनीति का केंद्रीय घटक है। मुझे पूरी उम्मीद है कि सौर मिशन से भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में न केवल विश्व नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित होगा बल्कि सौर ऊर्जा उत्पादन और इसकी प्रौद्योगिकी के उत्पादन में भी नेतृत्व करेगा।"

मिशन के मुताबिक, इसका महत्व बड़े पैमाने पर बिजली से जुड़े ग्रिड प्रदान करने तक सीमित नहीं है। इसमें भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के रूपांतरण के लिए हमारे प्रयासों में महत्वपूर्ण गुणक प्रदान करने की क्षमता है। पहले अपने विकेन्द्रित और वितरित अनुप्रयोगों में सौर ऊर्जा ने भारत के करोड़ों ऊर्जा विहिन लोगों के जीवन में प्रकाश की शुरुआत की है। सौर ऊर्जा प्रकाश व्यवस्था, सौर जल पंप और अन्य सौर शक्ति आधारित ग्रामीण अनुप्रयोगों से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का चेहरा बदल सकता है।

सूर्य से ऊर्जा के उपयोग के अलावा अक्षय ऊर्जा स्रोतों के अन्य साधन भी हैं। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और विकास के लिए व्यापक कार्यक्रमों के लिए जिम्मेदार है। इनमें बायोगैस संयंत्र, सौर जल हीटर, सौर कुकर, स्ट्रीट लाइट्स, पंप, पवन चक्की वाले जनरेटर, वायु चलित पनचक्की, बायोमास गैसीफायर और छोटे पनबिजली जनरेटर भी शामिल हैं। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर सरकार की पहल पर पहले के स्पॉटलाइट (विशेष कार्यक्रम) में विस्तार से बताया जा चुका है।



वन एवं वन्य जीवों की रक्षा

वन एवं वन्य जीवों की रक्षा

पर्यावरण और वन मंत्रालय - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं देश के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकता के साथ प्रतिबद्ध है। इन प्राकृतिक संसाधनों में झील और नदियां, इसकी जैव विविधता, वन और वन्य जीव, यहां के जानवरों के कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रदूषण की कमी और निवारण भी शामिल है।

जैव विविधता को बनाए रखने और पारिस्थितिकीय संतुलन के रखरखाव में वन अपरिहार्य भूमिका निभाते हैं। वे 'कार्बन सिंक' पर भी प्रभावी होते हैं। कार्बन सिंक एक प्राकृतिक या कृत्रिम संग्रहण क्षेत्र है जहां एक अनिश्चित अवधि के लिए कार्बन वाले रासायनिक यौगिकों को जमा किया जाता है। प्राकृतिक कार्बन सिंक कार्बन डाइ ऑक्साइड का अवशोषण करते हैं और पौधों तथा शैवालों को प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में सहायता करते है। मूलतः इसका मतलब है कि धरती मां को अच्छा बनाने की दिशा में वनीकरण बेहद महत्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री ने हरित भारत अभियान में 6 लाख हेक्टेयर वनीकरण की घोषणा की है। राष्ट्रीय लक्ष्य (542 KB) - वर्ड फाइल जो नई विंडों में खुलती है के तहत वन और पेड़ों से देश के 33% क्षेत्र को आच्छादित करना है, जबकि अभी 23% क्षेत्र में ही वन और पेड़ हैं।

भारत विविध मूल के वन्यजीव प्रजातियों का घर है। उनमें से कई पशुओं का नाम लुप्त हो रही सूची में भी शामिल है। राष्ट्रीय वन्य जीव कार्य योजना वन्य जीवों के संरक्षण के लिए कार्यक्रम और रणनीति की रूपरेखा प्रदान करता है। 1983 की प्रथम राष्ट्रीय वन्य जीव कार्य योजना (एनडब्ल्यूएपी) को संशोधित किया गया है और नए वन्यजीव कार्य योजना (2002-2016) - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं योजना को अपनाया गया है।



आप कैसे सहायता कर सकते हैं

आप कैसे सहायता कर सकते हैं

सरकार और उसके मंत्रालय भविष्य को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ पर्यावरण बनाए रखने के लिए हरसंभव कार्य कर रहे हैं। जैविक खेती, वर्षा जल संचयन (1.80 MB) - पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है , उद्योगों के लिए नियम (2.41 MB) - पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है को बढ़ावा देना पारिस्थितिकी राष्ट्र निर्माण की दिशा में उठाए गए प्रमुख कदम हैं। हम भारत के लोग कुछ बुनियादी नियमों का पालन कर इस नेक उद्देश्य में अपना योगदान दे सकते हैं।

घर पर

  • पानी बर्बाद करने से बचें। नहाने के लिए शावर की बजाय बाल्टी का उपयोग करें। नहाने के पानी को पौधे सींचने में प्रयोग करें। समय-समय पर ऊपरी टैंक और नलों में रिसाव की जांच करते रहें।
  • बाजार जाते समय अपने साथ कागज, जूट या कपड़े का थैला लेकर जाएं। प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल से बचें।
  • कचरे को यहां-वहां न फेंकें। सिर्फ निर्धारित कचरे के डिब्बे में ही इसे डालें।

सड़क पर

  • सार्वजनिक परिवहन और कार पूल का उपयोग करें। पैदल या साइकिल से जाना भी आदर्श होगा।
  • नियमित रूप से वाहनों के प्रदूषण स्तर की जांच करवाते रहें।
  • साइलेंसर में जमा कार्बन को साफ रखें।

जल प्रदूषण की रोकथाम

  • वाशिंग मशीन, डिशवाशर को तभी चलाएं जब वह पूरी तरह से भरी हो।
  • बाहर कपड़े सुखाने की सुविधा हो तो ड्रायर के उपयोग से बचें।
  • प्लास्टिक जानलेवा है और यह जलबहाव को अवरुद्ध कर देता है।
  • सिंचाई के लिए छिड़काव पद्धति का उपयोग करें।

ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम

  • अपने मोटर वाहन और उसके साइलेंसर की जांच हमेशा करवाते रहें।
  • लाउडस्पीकर या ध्वनि विस्तारक प्रणाली की आवाज कम रखें जिससे आपके पड़ोसियों को परेशान न हो।
  • बेवजह हार्न न बजाएं।

ऊर्जा संरक्षण

  • जहां तक संभव हो प्राकृतिक रोशनी का प्रयोग करें।
  • बाहर निकलते समय सभी बत्तियां बंद कर दें।
  • ऊर्जा बचाने के लिए कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट रोशनी ट्यूब (सीएफएल) का उपयोग करें।

क्या करें और क्या न करें - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं की विस्तृत सूची के लिए यहां क्लिक करें।

यह हम पर निर्भर है कि हम अपनी भावी पीढ़ी के लिए स्वच्छ और हरित दुनिया छोड़कर जाएं। हमारे सामूहिक प्रयास से ही यह संभव हो सकता है।



संबंधित लिंक्स