सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम
जल एवं विद्युत परामर्श सेवाएं (इंडिया) लि.
जल एवं विद्युत परामर्श सेवाएं (इंडिया) लि. जल संसाधन मंत्रालय के अधीन मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त सार्वजनिक उपक्रम है। 26 जून, 1969 को कंपनी अधिनियम 1956 के तहत निगमित जल एवं विद्युत परामर्श सेवाएं (इंडिया) लि., जल संसाधन, विद्युत और आधारभूत ढांचे के निर्माण से संबंधित मसलों पर देश और विदेशों को सलाह सेवा उपलब्ध कराती आ रही है।
विशेषज्ञता के क्षेत्र
कंपनी की विशेषज्ञता वाले प्रमुख क्षेत्र हैं – सिंचाई और ड्रेनेज, बाढ़ नियंत्रण और भूमि पुन: प्रापण, नदी प्रबंधन; बांध, जल भंडार अभियांत्रिकी और बैराज, समन्वित कृषि विकास, वॉटर शेड प्रबंधन, जल विद्युत और ताप विद्युत उत्पादन, विद्युत पारेषण और वितरण, ग्रामीण विद्युतीकरण, भूजल अन्वेषण, लघु सिंचाई, जलापूर्ति और स्वच्छता (ग्रामीण व शहरी), पर्यावरणीय अभियांत्रिकी जिसमें पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन और पर्यावरणीय लेखा परीक्षण शामिल हैं; बंदरगाह व गोदी और अंतर्देशीय जलमार्ग, वर्षा जल संचयन, सर्वेक्षण और अन्वेषण, मानव संसाधन प्रबंधन, प्रणाली अध्ययन और सूचना प्रौद्योगिकी। जल एवं विद्युत परामर्श सेवाएं (इंडिया) लि. नए क्षेत्रों में भी कदम बढ़ा रहा है- जैसे सॉफ्टवेयर का विकास; नगर विकास योजनाएं, वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, तकनीकी शिक्षा; गुणवत्ता नियंत्रण और निर्माण पर्यवेक्षण, सड़कें और पुल। कंपनी ने हाल ही में अपने आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में संशोधन करके देश-विदेश में विकासशील परियोजनाओं के लिए कमीशनिंग सेवाएं शामिल की हैं।
सलाहकार सेवाओं के प्रकार
जल एवं विद्युत परामर्श सेवाएं (इंडिया) लि. द्वारा प्रदत्त सेवाओं में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां जैसे पूर्व सम्भाव्यता अध्ययन, सम्भाव्यता अध्ययन; सिमुलेशन अध्ययन, नैदानिक अध्ययन, सामाजिक-आर्थिक अध्ययन; मास्टर प्लान और क्षेत्रीय विकास योजनाएं; फील्ड जांच, विस्तृत अभियांत्रिकी, विस्तृत विशेषताएं, टेंडर प्रक्रिया – ठेका और निर्माण प्रबंधन, कमीशनिंग और टेस्टिंग, संचालन और अनुरक्षण, गुणवत्ता आश्वासन और प्रबंधन, सॉफ्टवेयर विकास और मानव संसाधन विकास आदि शामिल हैं।
वित्तीय स्थिति
जल एवं विद्युत परामर्श सेवाएं (इंडिया) लि. की अधिकृत पूंजी 200 लाख की है (प्रदत्त पूंजी यानी सरकार का मूल निवेश 30 लाख रुपए तथा 170 लाख रुपए के बोनस शेयर)।
वर्ष 2008-09 के दौरान प्रदर्शन
वर्ष 2008-09 में कंपनी का कुल टर्नओवर 20507 लाख रुपए का रहा तथा 25246 लाख रुपए के नए आदेश प्राप्त हुए। वर्ष 2008-09 के दौरान कंपनी ने 1.0 अंक प्राप्त किया जो कि सार्वजनिक उपक्रम मूल्यांकन प्रक्रिया में दिया जाने वाला उच्चतम अंक है। कंपनी ने 2008-09 के लिए अपनी प्रदत्त पूंजी का 175 प्रतिशत लाभांश के रूप में वितरण किया, जो कि कंपनी की स्थापना से लेकर अब तक दिया गया अधिकतम लाभांश है।
अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ पंजीयन तथा विदेश में प्रसार
जल एवं विद्युत परामर्श सेवाएं (इंडिया) लि. ने 40 देशों में सफलतापूर्वक परामर्श सेवाएं पूरी की हैं। यह विश्व बैंक/पुन: निर्माण एवं विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय बैंक, अफ्रीकी विकास बैंक, एशियाई विकास बैंक; खाद्य एवं कृषि संगठन कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय निधि, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, विश्व स्वास्थ्य संगठन, पश्चिम अफ्रीकी विकास बैंक; भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम, समुद्र पारीय आर्थिक सहयोग निधि, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए जापान बैंक, आदि जैसे विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय वित्त पोषण एजेंसियों के पास उनकी परियोजनाओं में भाग लेने के लिए पंजीकृत है। भारत के अतिरिक्त जल एवं विद्युत परामर्श सेवाएं (इंडिया) लि. फिलहाल अफगानिस्तान, भूटान, कंबोडिया, इथोपिया, इरिट्रिया, ऑस्ट्रेलिया, लाओस, लेसेथो, मोजांबिक, रुआंडा, सूडान, स्वाजीलैंड, युगांडा, जांबिया और जिम्वाबे में परामर्श सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।
राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम लिमिटेड
राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम लिमिटेड भारत सरकार का एक उपक्रम है जिसका गठन 1997 में जल संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत देश के विकास के लिए ढांचागत कार्य और अन्य संबद्ध गतिविधियां चलाने के उद्देश्य से किया गया था। एनपीसीसी ने देश-विदेश में आवासन, संस्थानिक भवनों, व्यावसायिक परिसरों, औद्योगिक परियोजनाओं, सड़कों व राजमार्गों, पुल एवं फ्लाईओवरों, खत्तियों, सिंचाई एवं नदी घाटी परियोजनाओं, बांधों एवं बैराजों, जल विद्युत एवं ताप विद्युत परियोजनाओं आदि जैसी विभिन्न प्रकार की परियोजनाओं को पूरा किया है।
एनपीसीसी एक आईएसओ 9001-2000 प्रमाणित अग्रणी अभियांत्रिकी सार्वजनिक उपक्रम है और इसके द्वारा पूरे किए गए/कार्याधीन कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाएं इस प्रकार हैं :
- महाराष्ट्र की पारली और पारस तापीय विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य
- झारखंड के रामगढ़ में इंजीनियर्रिंग कॉलेज/पाकुर, बाहरागोरा, भागा और गोला में पॉलिटेक्निक कॉलेज।
- जोधपुर में डेज़र्ट मेडिकल रिसर्च सेंटर के लिए प्रयोगशाला एवं प्रशासनिक भवन तथा दिल्ली में पटेल चेस्ट संस्थान का सभागार।
- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में गंगा नदी सुरक्षा कार्य।
- उत्तर प्रदेश के नोएडा में फ्लायओवर का निर्माण।
- ईराक में अनाज भंडारागारों का निर्माण।
- भूटान में चुखा जल विद्युत परियोजना।
- ईराक में नाहर-साद नहर परियोजना।
- आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम स्टील प्लांट का निर्माण। ओडिशा में राउरकेला स्टील प्लांट का आधुनिकीकरण।
- पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में असम राइफल्स के भवन।
- उत्तराखंड में मनेरीभाली जल विद्युत परियोजना का निर्माण।
- मध्य प्रदेश में जोबट बांध
- बिहार में गेरुआ पुल का निर्माण।
- बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों का निर्माण।
- भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाना और त्रिपुरा, मिजोरम, असम और मेघालय में सड़क कार्य।
- तिब्बत तथा जम्मू और कश्मीर में भारत-तिब्बत सीमा सड़क का निर्माण।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 17-02-2011

