जहाजरानी का संक्षिप्त विवरण
परिवहन क्षेत्र में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में जहाजरानी की प्रमुख भूमिका है। देश का लगभग 90 प्रतिशत (मूल्य स्तर पर 70 प्रतिशत) व्यापार समुद्री मार्ग से होता है। विकासशील वृद्धि देशों में भारत के पास व्यापारिक जहाजों का सबसे बड़ा बेड़ा है। व्यापारिक जहाजरानी बेड़े की दृष्टि से भारत विश्व में 20वें स्थान पर है। 01.06.2008 को इसके बेड़े की सकल पंजीकृत क्षमता (जी.टी) 8.83 लाख टन है और बेड़े की औसत आयु 18 वर्ष है। भारतीय जहाजरानी क्षेत्र न केवल राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय माल की ढुलाई करता है, बल्कि कई तरह की अन्य सेवाएं भी प्रदान करता है, जैसे-माल लादने-उतारने की सेवाएं, पोतों का निर्माण व रखरखाव, माल अग्रेषण (फ्रेट फॉरवर्डिंग), प्रकाश स्तंभ व्यवस्था, तटवर्ती कर्मचारियों का प्रशिक्षण, आदि।
देश की जहाजरानी नीति की विशेषता यह है कि इसमें देश को विदेश व्यापार में आत्मनिर्भर बनाए रखने के साथ-साथ आयात-निर्यात व्यापार में पूंजी निवेशकों के हितों को भी सुरक्षित रखा गया है। देश के राष्ट्रीय ध्वजपोत कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के आयात के लिए परिवहन का अनिवार्य माध्यम हैं। विदेशी मुद्रा अर्जित करने में राष्ट्रीय जहाजरानी का महत्वपूर्ण योगदान है।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 21-05-2010
