राष्ट्रीय राजमार्ग
राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। इस समय राजमार्गों की कुल लंबाई का नेटवर्क 70548 किलोमीटर तक फैला है। सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव का कार्य परिवहन मंत्रालय, राज्यों के लोक निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और सीमा सड़क संगठन के माध्यम से करती है। देश में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने व्यापक राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना शुरू की है। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना देश की अब तक की सबसे बड़ी राजमार्ग परियोजना है। इस परियोजना का क्रियान्वयन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी I और II) की उपलब्धियां चरण I और चरण II की गतिविधियां इस प्रकार हैं :
- चार महानगरों - दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को 5846 किलोमीटर लंबी राजमार्ग से जोड़ने वाली योजना स्वर्णिम चतुर्भुज
- उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर जिसकी लंबाई 7142 किलोमीटर है और जो क्रमश: कोच्चि-सेलम स्पर मार्ग सहित श्रीनगर को कन्याकुमारी और सिलचर को पोरबंदर से जोड़ता है
- देश के 12 प्रमुख बंदरगाहों को जोड़ने वाले 380 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग को चार लेन वाला बनाए जाने का प्रस्ताव है,
- 962 किलोमीटर लंबे अंतर्राष्ट्रीय राजमार्गों का नवीनीकरण। एनएचडीपी के पहले और दूसरे चरण के तहत कुल 14,145 किलोमीटर लंबाई के राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण और नवीनीकरण के लिए 80,626 करोड़ रुपए का अनुमानित खर्च आएगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना चरण III: एनएचडीपी चरण-III में राज्यों की राजधानियों, प्रमुख पर्यटक स्थलों और आर्थिक महत्व के स्थानों को जोड़ने वाले अत्यधिक यातायात वाले 12,109 किलोमीटर के राजमार्गों को 80,616 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से 4/6 लेन वाला बनाना।
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना चरण-IV: एनएचडीपी के चरण चार में राजमार्गों का 20,000 किलोमीटर हिस्सा फुटपाथ सहित दो लेन का है।
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना चरण-V: एनएचडीपी चरण पांच में डिजाइन बिल्ड फाइनेंस एंड ऑपरेट (डीबीएफओ) के आधार पर चार लेन वाले 6500 किलोमीटर राजमार्गों की 41,210 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से छ: लेन वाला बनाने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज और अन्य राजमार्गों का 5,700 किलोमीटर हिस्सा शामिल है। सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना के अंतर्गत एक लेन मध्यम आकार वाले दो लेन वाले 5000 कि.मी. लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों को चौड़ा करने/सुधारने की मंजूरी दे दी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना चरण-VI: चरण VI में डिजाइन-निर्माण-वित्त-संचालन (डीबीएफओ) के आधार पर सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी के अंतर्गत 1000 कि.मी. के एक्सप्रसे-वे निर्माण की मंजूरी दे दी गई है। इसकी अनुमानित लागत 16680 करोड़ रुपए है।
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना चरण-VII: चरण VII में 16,680 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से रिंग रोड, बाईपास ग्रेड सेपरेटर, फ्लाईओवर, अंडरपास, ओवर ब्रिज एलीवेटेड सड़क के निर्माण की और सड़कों की मरम्मत की मंजूरी शामिल है।
पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष त्वरित सड़क विकास कार्यक्रम
इस कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्वोत्तर राज्यों के जिला मुख्यालय के 58 शहरों को राज्य की राजधानियों से 2/4 लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ा जाएगा और राष्ट्रीय राजमार्गों को चौड़ा किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र के दूर-दराज के स्थानों की सड़कें सुधारना और उन्हें मुख्य मार्गों से जोड़ना है। इस कार्यक्रम में 9760 कि.मी. लंबे सड़क मार्ग को सुधारना शामिल किया गया है (जिसमें 5104 कि.मी. राष्ट्रीय राजमार्ग और लगभग 4656 कि.मी. राज्य राजमार्ग व अन्य सड़कें शामिल हैं)। इस कार्यक्रम को तीन भागों में बांटा गया है। पहले चरण में 2616 कि.मी. लंबे सड़क मार्ग को चरण 'ख' में 4825 कि.मी. और अरुणाचल प्रदेश पैकेज के अन्तर्गत सड़कों और राजमार्गों के 2319 कि.मी. मार्गों को लिया गया है। कार्यक्रम के चरण 'क' को और सड़क और राजमार्गों के अरुणाचल प्रदेश पैकेज को मंत्रिमंडल को मंजूरी दे दी है, जबकि 'ख' की योजना अभी तैयार की जा रही है। इससे आठों पूर्वोत्तर राज्यों के सभी जिला मुख्यालयों को जो अभी तक राष्ट्रीय राजमार्गों से नहीं जुड़े हैं, को जोड़ने का कार्य किया जाएगा। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए त्वरित सड़क विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 30 जून, 2009 तक 1058 कि.मी. लंबे सड़क मार्ग को सुधारने में अनुमानत: 3406 करोड़ रुपए की मंजूरी दे दी गई है। 1058 कि.मी. लंबे सड़क मार्ग में से 450 कि.मी. मार्ग का कार्य 1796 करोड़ रुपए के व्यय से पूरा किया जा चुका है।
कार्यक्रम में चरण 'क' और अरुणाचल प्रदेश पैकेज को सड़क और राजमार्गों में से 1315 कि.मी. मार्ग को सरकारी एवं निजी भागीदारी के तहत शामिल किया गया है, जिसकी लागत लगभग 11,550 करोड़ रुपए है। इसमें से 718 कि.मी. की 2 सड़क परियोजनाओं को पूरा किया जा चुका है।
सरकारी-निजी साझेदारी
शुरू से ही सड़ परियोजनाएं बजट अनुदान से ही धन प्राप्त करती रही हैं और सरकार की ओर से नियंत्रण तथा निगरानी होती रही है। अतीत में सड़क निर्माण क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बहुत सीमित रही है। सड़कों पर दिनों-दिन बढ़ते यातायात दबाव के मद्देनजर सड़क परियोजनाओं को बजट प्रावधान के माध्यम में धन उपलब्ध कराने का परंपरागत तरीका कारगर साबित नहीं हो पाया है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए खर्चीली सड़क परियोजनाओं की वित्त व्यवस्था के लिए नई संभावनाएं तलाशने की जरुरत अनुभव की गई।
सड़क परियोजना के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी की शुरुआत सबसे व्यापक सड़क परियाजना – राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना के रूप में हुई। इस दिशा में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं जिनमें :
- सड़क क्षेत्र को उद्योग घोषित करना।
- परियोजना को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए परियोजना लागत में 40 प्रतिशत की सब्सिडी का प्रावधान।
- किसी भी परियोजना के पहले 20 वर्षों में से शुरुआती निर्माणाधीन 10 वर्ष के लिए करों में शत-प्रतिशत छूट।
- कार्य के लिए बाधा रहित रुझान, इसके अंतर्गत निर्माण से पहले, भूखंड विकास सहित अन्य सभी खर्च सरकार वहन करती है।
- सड़क ब्रिज में 100 प्रतिशत तक प्रत्येक विदेशी पूंजी निवेश।
- उदार विदेशी व्यावसायिक ऋण नियम।
- उच्च रियायत अवधि (30 वर्षों तक)।
- चुंगी वसूलने का अधिकार।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 15-02-2011

