क्षेत्र

नागर विमानन

नागर‍ विमानन के विकास और नियमन के लिए राष्‍ट्रीय नीतियां तथा कार्यक्रम तैयार करने, नागरिक हवाई यातायात के क्रमिक एवं विस्‍तार के लिए योजनाएं बनाने और उन्‍हें लागू करने का दायित्‍व नागर‍ विमानन मंत्रालय (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) का है। इसके कार्यों में हवाई अड्डा सुविधाओं, हवाई यातायात सेवाओं के अलावा उड्डयन सुरक्षा, विमानों से यात्रियों तथा सामान को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर पहुंचाने आदि कार्यों की देख – रेख भी शामिल है। मंत्रालय रेलवे सुरक्षा आयोग के लिए भी प्रशासनिक रूप से जिम्‍मेवार है, जो रेलवे अधिनियम के अंतर्गत गठित एक वैधानिक संगठन है।

भारत अंतरराष्‍ट्रीय नागर विमानन संगठन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) (आईसीएओ) का सदस्‍य है और शुरू से ही इसकी परिषद में शामिल रहा है। नागर विमानन क्षेत्र की कार्य प्रणाली को तीन मुख्‍य भागों में बांटा जा सकता है – नियामक, परिचालन संबंध और मूलभूत संरचनात्‍मक ढांचा। भारत में हाल के वर्षों में नागर विमानन क्षेत्र में चमत्‍कारिक प्रगति हुई है। इस समय देश में भारी संख्‍या में ऐसी कंपनियां हैं जो यात्री और माल-ढुलाई जैसी सेवाएं दे रही हैं। वायु परिवहन कंपनियां, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों में कार्य कर रही हैं। ये हैं : भारतीय राष्‍ट्रीय विमान कंपनी लिमिटेड (एनएसीआईएल) एयर इंडिया चार्टर्स लिमिटेड और एलायंस एयर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के अलावा निजी क्षेत्र में 8 निर्धारित एयर लायंस हैं : इनमें जेड एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), सहारा एयरलाइन्‍स लिमिटेड (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), डेकन विमानन (प्रा.) लिमिटेड (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), गो एयरवेज (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), किंगफिशर एयरलायंस (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), पैरामाउंट एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) और इंटर ग्‍लोब एविएशन लि. (इंडिगो) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) घरेलू क्षेत्र में संचालित है और यात्रियों को चुनाव का व्‍यापक अवसर मिलता है। इसके अलावा देश में माल वाहक सेवा संचालित करने के लिए ब्‍लू डार्ट विमानन नाम से एक निजी मालवाहक कंपनी है। वर्ष 2007 के दौरान निर्धारित घरेलू उड़ानों के जरिए कुल 5,00,75 उड़ानें (घरेलू) भरी गईं, जिसमें कुल 32.172 मिलियन यात्रियों ने यात्रा की। उपर्युक्‍त निर्धारित उड़ानों के अलावा, इस समय 86 कंपनियां ऐसी हैं जिनके पास गैर निर्धारित उड़ानों को संचालित करने का परमिट है। एनएसीआईएल अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर सेवाएं उपलब्‍ध कराती है। साथ ही पड़ोसी देशों जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों और मध्‍य एशियाई देशों में भी उड़ानें संचालित करता है। एयर इंडिया चार्टर भी मध्‍य पूर्व देशों में सेवाएं देती है। निजी एयरलाइनों में जेट एयरवेज विभिन्‍न अंतरराष्‍ट्रीय क्षेत्रों में सेवाएं संचालित कर रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी पवनहंस हैलीकॉप्‍टर लि. जो ओएनजीसी के समुद्री अभियान के लिए हैलीकॉप्‍टर सेवाएं उपलब्‍ध करा रही है। कई राज्‍य भी पवनहंस हैलीकॉप्‍टर की सेवाएं लेते हैं। विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र में कठिन और दुर्गम स्‍थानों तक पहुंचने के लिए इसका इस्‍तेमाल होता है।

कार्गों

भारतीय एयरपोर्ट प्राधिकरण (एएआई) ने दिल्‍ली, मुम्‍बई, कोलकाता और चेन्‍नई चार महानगरों में एकीकृत माल ढुलाई टर्मिनल स्‍थापित किए ताकि अंतरराष्‍ट्रीय माल ढुलाई के प्रसंस्‍करण और संचालन की प्रक्रिया तेज करने के लिए विनियामक एजेंसियों को एक ही छत के नीचे लाया जा सके। दिल्‍ली और मुम्‍बई एयरपोर्ट पर संयुक्‍त उद्यम की दो अलग-अलग कंपनियां क्रमश: दिल्‍ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड और मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड 3 मई 2006 में कार्य शुरू कर चुकी हैं।

महानगरों के एयरपोर्ट पर उपलब्‍ध मौजूदा मूलभूत सुविधाओं को उपलब्‍ध कराने के भार को कम करने के उद्देश्‍य से आवश्‍यक है कि अंतरराष्‍ट्रीय माल ढुलाई के प्रसंस्‍करण संचालन के लिए एयरपोर्ट के आस पास ही वै‍कल्पिक सुविधाओं को विकसित किया जाए। इसी को ध्‍यान में रखते हुए मंत्रालय अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट पर ‘’कार्गो विलेज’’ स्‍थापित करने की संकल्‍पना पर विचार कर रहा है।

विमान सेवाएं

भारत का 103 देशों के साथ द्विपक्षीय विमान सेवा समझौता है। हाल ही में मेक्सिको और चिली के बीच नए विमान सेवा समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए गए हैं। एक जुलाई 2007 से 30 जून 2008 तक 21 देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत हुई। उजबेकिस्‍तान, मलेशिया, इब्‍सा मालदीव्‍स, हॉन्‍ग कॉन्‍ग, सउदी अरब, ओमान, बंगलादेश, पाकिस्‍तान, इथोपिया, चीन, थाइलैंड, बेल्जियम और जर्मनी के साथ अतिरिक्‍त क्षमता अधिकार और नए बिंदुओं पर बातचीत हुई। द्विपक्षीय अधिकारों के अपेक्षित उपयोग को ध्‍यान में रखकर कम-से-कम पांच वर्षों से घरेलू विमान सेवा उपलब्‍ध कराने वाले और बेड़े में 20 जहाज रखने वाले विमान सेवाओं प्रदाताओं को‍ विदेशी गंतव्‍यों तक विमान सेवा चलाने की अनुमति दी गई है।

हवाई सेवाओं का उदारीकरण

नागर विमानन क्षेत्र में उदारीकरण नीति के अनुसार और अधिक से अधिक विदेशी यात्रियों को आकर्षित करने के नजरिए से सरकारों ने 2007-08 के दौरान अपनी उदार दृष्टिकोण बनाए रखा, साथ ही विभिन्‍न विदेशों के साथ द्विपक्षीय समझौते के तहत ट्रैफिक अधिकारों के मामले में भी उदारता बरती। भारत-अमेरिका और भारत-ब्रिटेन विमानन बाजारों में इन देशों के साथ हुए नए संशोधित हवाई सेवा समझौतों के बाद महत्‍वपूर्ण बढ़त दर्ज हुई है। साथ ही, भारत तक / से बड़ी पहुंच बनाने के लिए 2007-2008 के दौरान विभिन्‍न देशों के बीच यातायात अधिकार बढ़ाए गए हैं। इन देशों में शामिल हैं: सिंगापुर, कंबोडिया, जोर्डन, यूएई (अबुधावी, दुबई और शाहजाह), ओमान, बहरीन, कुवैत, रूस, उज्‍बेकिस्‍तान, चीन और बेल्जियम। इससे न केवल इन देशों से भारत तक उड़ान संख्‍या और बेहतर पहुंच बढ़ेगी बल्कि सभी संचालित विमान कंपनियों को और व्‍यावसायिक अवसर भी मिलेंगे।

पर्यटकों की चार्टर उड़ानें

एरोनॉटिक इंफॉरमेशन-सर्कुलर 5/2006 के अनुसार पर्यटकों की चार्टर उड़ानों को उदार बनाया गया है। जनवरी से दिसंबर 2007 तक भारत में कुल 748 चार्टर उड़ानों का संचालन हुआ जिसमें 1,68,714 विदेशी पर्यटकों का भारत आगमन हुआ।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: ११-०९-२००९