खाद्य अपमिश्रण रोकथाम कार्यक्रम
उपभोक्ताओं के लिए शुद्ध खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित करना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी है। इसको ध्यान में रखते हुए 1954 में खाद्य अपमिश्रण रोकथाम अधिनियम बनाया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को शुद्ध खाद्य पदार्थ मिलें और उनके साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी नहीं हो। इस अधिनियम में तीन बार (1964, 1976 और 1986 में) संशोधन हुआ है। इन संशोधनों का उद्देश्य अधिनियम की खामियों को दूर कर उसे और कारगर बनाना तथा उसके क्रियान्वयन में उपभोक्ताओं एवं स्वैच्छिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करना है।
संवैधानिक स्थिति और पीएफए अधिनियम का परिपालन
इस अधिनियम की विषय वस्तु संविधान की समवर्ती सूची में शामिल है लेकिन इस कानून का क्रियान्वयन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है। केंद्र सरकार मुख्य रूप से इसके क्रियान्वयन में सलाहकार की भूमिका निभाती है। हालांकि अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक वह अपने विभिन्न वैधानिक दायित्वों को भी निभाती है।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता विनियमित करने वाले कानून देश में 1899 से लागू रहे हैं। सन् 1954 तक कई राज्यों ने इसके लिए अपने कानून बनाए थे लेकिन नियमों और खाद्य पदार्थों के विनिर्देशों में काफी अंतर था जिसके कारण अंतर-प्रांतीय व्यापार में बाधा आती थी। 1937 में भारत सरकार द्वारा नियुक्त केंद्रीय सलाहकार बोर्ड ओर 1943 में गठित खाद्य अपमिश्रण समिति ने खाद्य अपमिश्रण स्थिति की समीक्षा कर एक केंद्रीय कानून की सिफारिश की। खाद्य एवं औषधि अपमिश्रण का विषय संविधान की समवर्ती सूची में शामिल है अत: केंद्र को इस पर कानून बनाने का अधिकार है। अत: भारत सरकार ने एक कानून बनाया, जिसका नाम है खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954। यह अधिनियम 15 जून, 1955 से लागू हुआ। इस अधिनियम ने इससे पहले राज्यों द्वारा बनाए गए सभी कानून रद्द कर दिए।
खाद्य गुणवत्ता नियंत्रण सेवाएं - भारत में खाद्य गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीन स्तर की व्यवस्था है
- भारत सरकार
- राज्य/केंद्रशासित सरकारें
- स्थानीय निकाय।
भारत सरकार की भूमिका - केंद्रीय पीएफए कक्ष : खाद्य अपमिश्रण अधिनियम केंद्रीय कानून है। इसके अंतर्गत निर्धारित मानक देशभर में समान रूप से लागू हैं। नियम और मानक निर्धारित करने के अलावा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय निम्नलिखित गतिविधियां चलाता है -
- खाद्य कानूनों को लागू करने हेतु राज्य/स्थानीय निकायों के साथ निकट संपर्क रखना।
- राज्य की गतिविधियों पर नजर रखना, खाद्य विषाक्तता के मामलों की रिपोर्टें प्राप्त करना और समय-समय पर राज्यों का दौरा करना।
- वरिष्ठ अधिकारियों/निरीक्षकों/विश्लेषकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- प्रद र्शनियां लगाकर और विचार गोष्ठियां/प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करके तथा पुस्तिकाएं प्रकाशित करके इस कार्यक्रम के बारे में उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाना।
- शिशु आहार और शिशुओं को दूध के विकल्पों के लेबल अनुमोदित करना ताकि छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।
- आईएसओ/एफएसओ/डब्ल्यूएचओ और कोडेक्स जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ तालमेल करना।
- खाद्य पदार्थों को खराब करने वाले रंगों के बारे में सर्वेक्षण और मॉनिटरिंग संचालित करना।
- कोलकाता, गाजियाबाद, मैसूर और पूणे स्थित चार केंद्रीय खाद्य प्रयोगशालाओं को प्रशासनिक/वित्तीय/तकनीकी सहायता देना और राज्यों/स्थानीय निकायों द्वारा स्थापित खाद्य प्रयोगशालाओं को तकनीकी दिशा-निर्देश प्रदान करना।
- राष्ट्रीय मॉनीटरिंग एजेंसी के रूप में खाद्य विकिरण संबंधी नीतिगत मुद्दों पर फैसला करने के अपने निहित अधिकार संबंधी गतिविधियां संचालित करना।
भारत में कोडेक्स संपर्क बिंदु : स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय देश में अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानकों से संबंधित एफ.ए.ओ/डब्ल्यू.एच.ओ की संयुक्त संस्था कोडेक्स आहार आयोग और उसकी सहायक समितियों की विभिन्न बैठकों के एजेंडे पर देश के दृष्टिकोण को जांचने और तैयार करने के लिए राष्ट्रीय कोडेक्स संपर्क बिंदु के रूप में काम करता है। भारतीय पक्ष को तैयार करने और उसे अंतिम रूप देने के लिए मंत्रालय के एक राष्ट्रीय कोडेक्स समिति का गठन किया है। इस समिति ने 24 उपसमितियां बनाईं।
भारत कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन की बैठकों में भाग लेता रहा है। वह एशिया की समन्वय समिति और कोडेक्स कमोडिटी कमेटियों की बैठक में भी शामिल होकर भारत का दृष्टिकोण पेश कर बैठकों में उनका बचाव करता है।
कोडेक्स और खाद्य पदार्थों में मिलावट की रोकथाम में समरसता
खाद्य पदार्थों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की व्यवस्था संबंधी एस.पी.एस और टी.बी.टी समझौतों पर भारत द्वारा हस्ताक्षर करने और देश में खाद्यान्नों के आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंध हटाने के बाद खाद्य उत्पादों के मानक को समरस बनाने की प्रक्रिया, खाद्य योजकों के प्रयोग सूक्ष्म जैविक आवश्यकता में तथा नियमों का संतुलन बहुत पहले से कोडेक्स एलिमिन्टेरियस कमीशन तथा अंतर्राष्ट्रीय मानक आयोग द्वारा निर्धारित किए गए अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कर दिए गए हैं।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 10-02-2011

