हाथी परियोजना
हाथियों की मौजूदा आबादी को उनके प्राकृतिक आवास स्थलों में दीर्घकालिक जीवन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संख्या में हाथियों की आबादी वाले राज्यों की सहायता करने की बाबत फरवरी, 1992 में हाथी परियोजना शुरू की गई थी। इस परियोजना को आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मेघालय, नागालैंड, उड़ीसा, तमिलनाडु, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश ओर पश्चिम बंगाल राज्यों में क्रियान्वित किया जा रहा है। राज्यों को परियोजना के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है। हाथियों की कम संख्या वाले अन्य राज्यों को जनगणना, क्षेत्रीय स्टाफ के प्रशिक्षण एवं मानव-हाथी संघर्ष के लिए भी सहायता प्रदान की गई है।
- देश में पहले हाथी पुनर्वास केंद्र की स्थापना करने के लिए हरियाणा को सहायता प्रदान की गई।
- वर्ष 2007 में पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा पूरे भारत में हाथियों को आंकलन किया गया जबकि पूर्वोत्तर में यह मौसमी स्थिति के कारण शीतकाल में किया जाएगा। प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चला है कि 2002 की तुलना में हाथियों की संख्या में वृद्धि हुई है।
- तीन हाथी अभ्यारण्यों, दो छत्तीसगढ़ में लेमरु ओर बादलखोड नाम से और अरुणाचल प्रदेश में देवमाली की स्थापना करने की अनुमति दी गई।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 12-07-2010
