शिक्षा
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राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद

राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद (बाहरी विंडो में खुलने वाली वेबसाइट) (एनसीटीई) की स्‍थापना अगस्‍त, 1995 में इस लक्ष्‍य के साथ की गई थी कि पूरे देश में अध्‍यापक शिक्षा प्रणाली का नियोजित एवं समन्‍वित विकास किए जाने के साथ ही जरूरी नियम बनाने और अध्‍यापक शिक्षा के मानकों एवं स्‍तरों का उचित संरक्षण किया जा सके। एनसीटीई के कुछ प्रमुख विभिन्‍न अध्‍यापक शिक्षा कार्यक्रमों के लिए स्‍तरों का निर्धारण करना, अध्‍यापक शिक्षा संस्‍थानों को मान्‍यता प्रदान करना, अध्‍यापकों की नियुक्‍ति के लिए न्‍यूनतम शैक्षणिक योग्‍यताओं हेतु दिशा-निर्देश तैयार करना, सर्वेक्षण और अध्‍ययन करना, अनुसंधान एवं नवीन तरीके अपनाना तथा शिक्षा के व्‍यावसायीकरण पर रोक लगाना इत्‍यादि हैं।

परिषद की चार क्षेत्रीय समितियां जयपुर, बैंगलोर, भुवनेश्‍वर तथा भोपाल में गठित की गई हैं तो क्रमश: उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी एवं पश्‍चिमी क्षेत्र के लिए हैं। ये क्षेत्रीय समितियां अपने-अपने क्षेत्र में अध्‍यापक-शिक्षण संस्‍थानों को मान्‍यता देने के कार्य करती हैं। राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत इन्‍हें अध्‍यापक शिक्षण पाठ्यक्रम चलाने के लिए ऐसी संस्‍थाओं को अनुमति देने का अधिकार है।

एक जनवरी, 2007 तक एनसीटीई ने 9045 पाठ्यक्रमों के माध्‍यम से 7.72 लाख प्रशिक्षु अध्‍यापकों को प्रशिक्षण देने हेतु 7461 अध्‍यापाक प्रशिक्षण संस्‍थानों को मान्‍यता प्रदान की। एनसीटीई ने सी.एड, डी.एड, बी.एड, डीपी.एड और एमपी.एड जैसे विभिन्‍न अध्‍यापक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए नए नियम और मानक जारी किए हैं। नए नियम अध्‍यापक कार्यक्रमों की गुणवत्ता सुधारने और अध्‍यापाक शिक्षण संस्‍थानों में अन्‍य सुविधाओं के अलावा बुनियादी मजबूती के लिए बनाए गए हैं।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 07-04-2010