शिक्षा
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अनुसूचित जाति और जनजातियों के लिए शिक्षा

संवैधानिक प्रावधान

संविधान के अनुच्‍छेद 46 के अनुसार-''राज्‍य विशेष सावधानी के साथ समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जाति/जनजातियों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों के उन्‍नयन को बढ़ावा देगा और सामाजिक अन्‍याय और सभी प्रकार के सामाजिक शोषण से उनकी रक्षा करेगा''। अनुच्‍देद 330, 332, 335, 338 से 342 तथा संविधान के पांचवीं और छठवीं अनुसूची अनुच्‍छेद 46 में दिए गए लक्ष्‍य हेतु विशेष प्रावधानों के संबंध में कार्य करते हैं। समाज के कमजोर वर्ग के लाभार्थ इन प्रावधानों का पूर्ण उपयोग किए जाने की आवश्‍यकता है।

NOTE*

  • 1-->पहली योजना खर्च
  • 2--> दूसरी योजना खर्च
  • 3--> तीसरी योजना खर्च
  • 4-->योजना अवकाश खर्च
  • 5-->चौथी योजना खर्च
  • 7-->छठी योजना खर्च
  • 8-->सातवी योजना खर्चe
  • 9-->1990-92 खर्च
  • 10-->आठवीं योजना खर्च
  • 11-->नौवीं योजना परिव्यय
  • 12-->नौवीं योजना खर्च
  • 13-->दसवीं योजना परिव्यय
शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों पर योजना खर्च(प्रतिशत में)
क्षेत्र 1951-56 1956-61 1961-66 1966-69 1969-74 1974-79 1980-85 1985-90 1990-92 1992-97 1997-2002 1997-2002 2002-07
1* 2* 3* 4* 5* 6* 7* 8* 9* 10* 11* 12* 13*
प्राथमिक शिक्षा 58 (870) 35 (950) 34 (2010) 24 (750) 50 (3743) 52 (5913) 32 (8414) 37 (28494) 37 (17290) 48 (103940) 66 (163696) 65.7 (145233) 65.6 (287500)
माध्यमिक शिक्षा 5 (83) 19 (510) 18 (1030) 16 (530) @- @- 20 (5344) 24 (18315) 22 (10530) 24 (52311) 10 (26035) 10.5 (23227) 9.9 (43250)
व्यस्क शिक्षा - - - - 2 (126) 2 (248) 6 (1533) 6 (4696) 9 (4160) 5 (11421) 3 (6304) 2.4 (5204) 2.9 (12500)
उच्च शिक्षा 8 (117) 18 (480) 15 (870) 24 (770) 25 (1883) 28 (3188) 21 (5604) 16 (12011) 12 (5880) 10 (20944) 10 (25000) 10.3 (22709) 9.5 (41765)
अन्य 15 (227) 10 (300) 12 (730) 11 (370) 13 (936) 9 (1071) 11 (2729) 3 (1980) 2 (1180) 3 (7398) 2 (4314) 1.6 (3492) 1.4 (6235)
तकनीकी शिक्षा 14 (215) 18 (490) 21 (1250) 25 (810) 10 (786) 9 (1015) 10 (2563) 14 (10833) 17 (8230) 10 (21987) 9 (23735) 9.5 (21095) 10.7 (47000)
योग 100 (1512) 100 (2730) 100 (5890) 100 (3230) 100 (7474) 100 (11435) 100 (26187) 100 (76329) 100 (47270) 100 (218001) 100 (249084) 100 (220960) 100 (438250)

राष्‍ट्रीय न्‍यूनतम साझा कार्यक्रम (एनसीएमपी) के संकल्‍प:संप्रग (यूपीए) सरकार ने सुशासन के लिए छ: मूलभूत सिद्धांत निर्धारित किए हैं। उनमें से एक है - "अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्‍य पिछड़ा वर्ग एवं धार्मिक अल्‍पसंख्‍यकों के लिए विशेषकर शिक्षा एवं रोजगार में पूर्ण अवसरों की समानता उपलब्‍ध कराना।"इसके अतिरिक्‍त संप्रग सरकार के राष्‍ट्रीय न्‍यूनतम साझा कार्यक्रम (एनसीएमपी) में इन समुदायों के कल्‍याण एवं सशक्‍तिकरण के लिए निम्‍निलिखित प्रावधान करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है -

  1. संपग्र सरकार पिछले पांच वर्षों से किए जा रहे शिक्षा कें सांप्रदायीकरण को पूरी तरह पलटने के लिए तत्‍काल कदम उठाएगी।
  2. विद्यालयीन पाठ्यक्रमों में शामिल हो चुकी सांप्रदायिक सामग्री को निकालना इस काम के लिए विशेषज्ञों की एक समीक्षा समिति बनाई जाएगी।
  3. संप्रग यह सुनिश्‍चित करेगा कि किसी को भी व्‍यावसायिक शिक्षा से इसलिए वंचित न रखा जाए, क्‍योंकि वह निर्धन है। इसके लिए विशेषज्ञों की एक समीक्षा समिति का गठन किया जाएगा।
  4. सभी आरक्षित सीटों को एक समयबद्ध ढंग से भरा जाएगा। इसमें प्रोन्‍नति से संबंधित सीटें भी शामिल होंगी। सभी आरक्षणों को नियमबद्ध करने के लिए एक आरक्षण अधिनियम लागू किया जाएगा।
  5. संप्रग सरकार निजी क्षेत्र में आरक्षण दिए जाने सहित सकारात्‍मक कार्यवाही के मुद्दे पर अत्‍यधिक संवेदनशील है।

विशेष प्रावधान

स्‍वतंत्रता-प्राप्‍ति के बाद भारत सरकार ने अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के व्‍यक्‍तियों के शैक्षणिक आधार को सुदृढ़ करने के लिए कई कदम उठाए हैं। राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 1986 एवं कार्ययोजना (पी.ओ.ए.) 1992 के अनुपालन में अनुसूचित जाति और जनजातियों के लिए प्राथमिक शिक्षा, साक्षरता एवं माध्‍यमिक और उच्‍च शिक्षा विभाग (बाहरी विंडो में खुलने वाली वेबसाइट) की वर्तमान योजनाओं में निम्‍नलिखित विशेष प्रावधान किए गए हैं -

  1. अब 300 की जनसंख्‍या के स्‍थान पर 200 की जनसंख्‍या हेतु एक किलोमीटर की चलने योग्‍य दूरी के भीतर प्राथमिक स्‍कूल खोला जा सकेगा।
  2. उच्‍च प्राथमिक स्‍तर पर सभी राज्‍यों के सरकारी प्राथमिक स्‍कूलों में शिक्षा शुल्‍क की समाप्‍ति। वस्‍तुत: अधिकतर राज्‍यों ने अनुसूचित जाति/जनजातियों के छात्रों के लिए माध्‍यमिक स्‍तर तक शिक्षा शुल्‍क समाप्‍त कर दिया है।
  3. इन वर्गों के छात्रों के लिए नि:शुल्‍क पुस्‍तकें, वर्दी, स्‍टेशनरी, स्‍कूल बैग इत्‍यादि के रूप में प्रोत्‍साहन।
  4. संविधान का 86वां संशोधन विधेयक : 13 दिसंबर, 2002 को अधिसूचित इस विधेयक में 6-14 वर्ष के आयु वर्ग के सभी बच्‍चों के लिए अनिवार्य एवं नि:शुल्‍क शिक्षा का प्रावधान किया गया है।
  5. सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) : सर्व शिक्षा अभियान (बाहरी विंडो में खुलने वाली वेबसाइट) प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लिए उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। राज्य सरकारों की सहायता से इस योजना के लक्ष्य को तय समय सीमा में प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। देश की प्राथमिक शिक्षा की तस्वीर को बदलने वादा करने वाली यह योजना वर्ष 2010 तक देश के 6-14 वर्ष आयु समूह के सभी बच्चों को उपयोगी और गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा प्रदान करेगी।

कार्यक्रम की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं :

  1. बालिकाओं पर अनुसूचित जन/जाति और अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं पर ध्यान,
  2. विधालय छोड़कर जा चुकी बालिकाओं को वापिस लाने हेतु अभियान चलाना,
  3. लड़कियों के लिए नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें,
  4. बालिकाओं हेतु विशेष (कोचिंग) और तैयारी -कक्षाओ का आयोजन और सीखने के लिए सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाना,
  5. शिक्षा के समान अवसर को बढ़ावा देने हेतु शिक्षक जागरूकता कार्यक्रम,
  6. बालिका शिक्षा से संबंधित प्रयोगात्मक परियोजनाओं पर विशेष ध्यान,
  7. 50 प्रतिशत महिला शिक्षकों की नियुक्ति

जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम (डीपीईपी)

इस योजना का प्रमुख जोर बालिकाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति कामकाजी बच्चों, शहरी वचित बच्चों, विकलांगों आदि की शिक्षा के लिए विशेष सहयोग उपलब्ध कराना है। बालिकाओं एवं अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए विशेष रणनीतिया हैं, तथापि इन समूहों को शामिल करने के लिए समेकित रूप में वास्तविक लक्ष्य भी निर्धारित किये गए हैं। एनआईईपीए द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार डीपीईपी जिलों के स्कूलों में 60 प्रतिशत से अधिक बच्चे अनुसूचित जाति/ जनजाति के हैं।

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स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 19-01-2011