- कृषि (472 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- वाणिज्य (277 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- वित्त (339 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- संचार (131 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- रक्षा (86 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- शिक्षा (405 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- ग्रामीण विकास (94 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- जल संसाधन (122 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- सड़क परिवहन
- उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली
- वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी विकास (355 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (406 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- पर्यावरण (156 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

तौल और माप
तौल और माप अधिनियम, 1956 (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के अधीन देश में एक समान तौल और माप के मानकों की स्थापना की गई है जो मेट्रिक प्रणाली पर आधारित हैं।
अंतरराष्ट्रीय यूनिट प्रणाली स्थापित करने के लिए और भारतीय कानूनों को अंतरराष्ट्रीय तर्ज पर लाने के लिए तथा कुछ त्रुटियों को दूर करने हेतु व्यापक कानून अर्थात तौल और माप मानक अधिनियम, 1976 अधिनियमित किया गया जो 1956 अधिनियम को प्रतिस्थापित करता है। 1976 के अधिनियम में अन्य चीजों के साथ-साथ उपभोक्ताओं को बिकने वाली पैक पूर्व वस्तु के विनियमन के लिए प्रावधान अंतर्निहित हैं ताकि निष्पक्ष व्यापार प्रचलन स्थापित किया जा सकें। पैकज बंद वस्तु संबंधी अधिनियम के प्रावधान और संगत नियमावली अर्थात तौल और माप मानक (पैकज वस्तु) नियमावली, 1977 (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) को सितंबर 1977 से लागू किया गया। इन प्रावधानों के अनुसार खुदरा बिक्री के लिए आशयित प्रत्येक पैकेज में वस्तु का नाम, विनिर्माता या पैकेजर्स का नाम और पता और खुदरा मूल्य अंकित करने की आवश्यकता है। खुदरा बिक्री मूल्य को अनिवार्य घोषणा सभी करों को शामिल करके है। नियमावली में भी भारत में आयात की जाने वाली पैकेज बंद वस्तुओं के विनियमन के लिए यही प्रावधान है।
1976 अधिनियम के प्रावधानों के तहत सभी तौल और मापन उपकरणों का मॉडल का अनुमोदन उनका उत्पादन आरंभ होने के पहले किया जाना चाहिए। संगत नियमावलियों के तहत अर्थात तौल और माप मानक (मॉडल का अनुमोदन) नियमावली 1987, के तहत मान्यताप्राप्त प्रयोगशालाएं मॉडलों का उनकी मानक के अनुरूप होने की जांच करते हैं।
संविधान का बयालीसवां संशोधन तौल और माप प्रवर्तन के विषय को राज्य सूची से समवर्ती सूची में ला दिया है। देश में प्रवर्तन के मामले में एक रूपता सुनिश्चित करने के लिए एक केंद्रीय अधिनियम अर्थात 'तौल और माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम 1985 (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)' को लागू किया गया। इसमें तौल, माप और तौल, मापन उपकरणों के लिए प्रभावी कानूनी नियंत्रण के प्रावधान अंतर्निहित हैं, जिनका उपयोग वाणिज्यिक लेन-देनों, औद्योगिक उत्पादन और लोक स्वास्थ और सुरक्षा वाली सुरक्षा में किया जाता हैं।
भारत अंतरराष्ट्रीय माप विद्या संगठन का एक सदस्य है। इस संगठन का गठन कानूनी माप विद्या (तौल और माप) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुचारू एवं व्यवहारिक बनाने के लिए संबंधित कानूनों की विश्व व्यापी एकरूपता लाने के लिए किया गया था।
राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के तौल और माप के कानूनी मानकों का चार क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाओं, जो अहमदाबाद, भुवनेश्वर, बंगलौर और फरीदाबाद में स्थित हैं, में अंर्शाकन किया जाता है। ये प्रयोगशालाएं अपने संबंधित क्षेत्रों में उद्योगों की अंशांकन सेवाएं प्रदान करते हैं और वे तौल एवं माप उपकरणों संबंधी मॉडल अनुमोदन परीक्षण करने के लिए मान्यताप्राप्त प्रयोगशालाओं में है। आर आर एस एल गुवाहटी के लिए स्थायी परिसर स्थापित करने की योजना, पूर्वोत्तर राज्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए नवीं योजना में शुरू की गई और यह चल रही हैं।
भारतीय कानूनी माप विद्या संस्थान रांची, उपभोक्ता मामले खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणधीन कानूनी माप विज्ञान और अन्य अधीनस्थ विषयों पर प्रशिक्षण चलाता है। राज्यों के प्रवर्तन कर्मचारियों के अतिरिक्त अफ्रीकी, एशियाई और लातीनी अमरीकी देशों से नामजद संस्थान द्वारा चलाए जाने वाले कार्यक्रमों में भाग लेतो हैं। हाल में संस्थान ने राज्यों के उपभोक्ता विवाद निपटान एजेंसियों के गैर व्यवसायिक सदस्यों को भी प्रशिक्षण देना आरंभ किया है।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: १४-०३-२००८
