केंद्रीय कल्याण निधि के तहत योजनाएं
जागृति शिविर योजना: एक एकीकृत जागरूकता अभियान जिसका नाम जागृति शिविर योजना (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) है, जून 2001 में आरंभ की गई। योजना का उद्देश्य स्थानीय चुने हुए प्रतिनिधियों के सहयोग से राज्य सरकारों और जिला प्रशासन पदाधिकारियों के माध्यम से शिविर, बैठक समारोहों का आयोजन करके जिला स्तर पर उपभोक्ता जागरूकता फैलाना है। अब तक 34.5 लाख रुपए 65 जिलों के लिए 31 मार्च 2004 तक राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को जारी किए गए थे। वर्तमान में जिला स्तर पर उपभोक्ता कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए प्रत्येक जिला के लिए अनुदान की राशि 50,000 रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए करने का निर्णय लिया गया है।
जिला उपभोक्ता सूचना केंद्र: अक्टूिबर 2000 में पांच लाख रुपए प्रति केंद्र की लागत पर तीन वर्ष की अवधि में चरण बद्ध तरीके से देश के प्रत्येाक जिला में जिला उपभोक्ता9 सूचना केंद्र की स्था पना करने की एक योजना चलाई गई हैं। ये केंद्र जिला परिषदों प्रतिष्ठित स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों/शैक्षिक संस्थापओं द्वारा सतत आधार पर स्थामपित और चलाए जाने हैं। उनसे उपभोक्तात जागरूकता बढाने की आशा की जाती है और उपभोक्ताओं को उनकी शिकायतों का समाधान ढूंढने में सहायता करने की संभावना है। अब तक देश में 96 जिलों के लिए योजना की मंजूरी दी गई है।
उपभोक्ता क्लब: यह योजना 2002 में शुरू की गई इसके अनुसार सरकार से मान्यता प्राप्त बोर्डों/विश्वविद्यालयों से संबद्ध प्रत्येक माध्यमिक/उच्च/उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों/कालेजों में उपभोक्ता क्लब स्थापित किए जाएंगे। इस योजना के तहत स्कूल तथा कॉलेजों के प्रत्येक उपभोक्ता क्लब को 10,000 रुपए का अनुदान मिलेगा। वर्ष 2006 में मार्च के अंत तक आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा, सिक्किम, राष्ट्रीय राजधानी प्रदेश दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, उड़ीसा, राजस्थान, पंजाब, लक्षद्वीप, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश और तमिलनाडु आदि राज्यों में कुल 4,661 उपभोक्ता क्लबों के लिए स्वीकृति दी जा चुकी थी।
उपभोक्ता संरक्षण और कल्याण में अनुसंधान संस्थाओं/विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों आदि की सहभागिता का संवर्धन: उपभोक्ता कल्याण के क्षेत्र में अनुसंधान तथा मूल्यांकन के लिए यह योजना शुरू की गई है ताकि उपभोक्ताओं के कल्याण और सुरक्षा के लिए नीति/कार्यक्रम/योजना को तैयार करने के लिए आवश्यक निवेश उपलब्ध हो सके; तथा उपभोक्ताओं से संबंधित मसलों पर गोष्ठियां/कार्यशालाएं/ सम्मेलन आदि आयोजित किए जा सकें और उपभोक्ताओं के समक्ष उत्पन्न व्यावहारिक समस्याओं के लिए समाधान उपलब्ध कराया जा सके। इस योजना को चलाने के लिए नई दिल्ली के भारतीय सार्वजनिक प्रशासन संस्थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) को मुख्य संगठन के रूप में कार्य सौंपा गया है।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 02-06-2010
