क्षेत्र

मूल्‍य प्रबंधन

वर्ष 2007-08 के दौरान अनिवार्य वस्‍तुओं की सम्‍पूर्ण उपलब्‍धता और कीमतें सामान्‍यत: संतोषप्रद स्‍तर पर रही। पिछले वर्ष कम उत्‍पादन के साथ-साथ अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल के कारण चावल, कुछ दालों तथा खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि देखी गई। थोक मूल्‍य सूचकांक संख्‍याओं के अर्थ में वार्षिक मुद्रास्‍फीति दर में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि वर्ष 2007-07 के दौरान दर्ज की गई जो एक वर्ष पहले इसी अवधि में 6.6 प्रतिशत की तुलना में थी। उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक के मामले में 2003-04 को समाप्‍त वर्ष के लिए वार्षिक मुद्रास्‍‍फीति दर 3.5 प्रतिशत भी जो 2002-03 में 4.1 प्रतिशत की तुलना में थी। इस महंगाई की वजह कुछ विशेष वस्तुओं जैसेः अनाज, दालों (अरहर एवं मसूर), दूध, खाद्य तेल के दाम में अचानक से आई तेजी थी। आवश्यक वस्तुओं की कीमत को संतुलित स्तर पर बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता में शामिल था। 14 अत्यावश्यक वस्तुओं के मूल्य की निगरानी सरकार उच्च स्तर पर कर रही थी। ऐसी वस्तुएं जिनकी बाजार में उपलब्धता कम हो रही थी, जैसेः खाद्य तेल तथा दालो को सरकार विशेष रूप से आयात करके घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित कर रही थी।

वर्ष 2007-08, उपभोक्‍ता मामले विभाग ने 14 अनिवार्य वस्‍तुओं की खुदरा कीमतों की रोजाना निगरानी शुरू की, जिसमें चावल, गेहूं, आटा, चना दाल, अरहर दाल, चीनी, दूध, मूंगफली का तेल, सरसों का तेल, वनस्पति, नमक, चायपत्ती, आलू और प्याज शामिल हैं। दैनिक आधार के साथ ही थोक मूल्‍य कीमत का साप्‍ताहिक विश्लेषण भी देशभर के 37 केंद्रों में किया जा रहा था। उच्‍चाधिकार प्राप्‍त कीमत निगरानी बोर्ड (एचपीपीएमबी) तथा मूल्यों पर निगरानी के लिए गठित विशेष कैबिनेट समिति (सीसीपी) ने कीमतों और अनिवार्य वस्‍तुओं की उपलब्‍धता की निगरानी की। जो विभाग के कीमत नियंत्रण प्राकेष्‍ठ के द्वारा तैयार समीक्षा पर आधारित था। एचपीपीबीएम कीमत और उपलब्‍धता परिदृश्‍य की समीक्षा करने के लिए प्रत्‍येक माह बैठक की जाती थी। इस समिति के साथ ही सचिवों की भी एक समिति (सीओएस) आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता तथा मूल्यों पर नियमित अंतराल पर निगरानी रखे हुए थी। मूल्य निगरानी सेल अनिवार्य वस्‍तुओं की उपलब्‍धता बढ़ाने, कम आपूर्ति में वस्‍तुओं का आयात पर उपभोक्ता मामले मंत्रालय को सुझाव देता था। एचपीपीएमबी, सीसीपी तथा सीओएस मूल्य तथा उपलब्धता के परिदृश्य का विश्लेषण करके सीधे संबंधित मंत्रालय तथा विभाग को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट प्रेषित कर देते हैं।

थोक मूल्‍य सूचकांक संख्‍याओं में उतार-चढ़ाव 2007-08 के दौरान यह दर्शाया कि विनिर्मित उत्‍पादों का थोक मूल्‍य सूचकांक सम्‍पूर्ण सूचकांक बास्‍केट में उच्‍चतर मूल्‍य 63.75 प्रतिशत था। 6.9 प्रतिशत बढ़ गया। ईंधन मदों की सूचकांक संख्‍या जिसका निम्‍नतर स्तर 14.23 प्रतिशत था, इस अवधि के दौरान उसमें 6.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 02-06-2010