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काला बाजारी की रोकथाम और अनिवार्य वस्‍तु की आपूर्ति का अनुरक्षण अधिनियम, १९८०

काला बाजारी की रोकथाम और अनिवार्य वस्‍तु की आपूर्ति का अनुरक्षण अधिनियम, 1980  को जमाखोरी रोकने के अभियान के तहत प्रभावी कदम उठाते रहने के लिए राज्‍य सरकारों/केंद्रशासित प्रशासनों को समर्थ बनाने के लिए बनाया गया। यह कानून केंद्र तथा राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता तथा आपूर्ति बनाए रखने के लिए सशक्त बनाता है। इसके तहत केंद्र तथा राज्य सरकारें किसी भी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज सकती हैं, जो कालाबाजारी कर रहा हो, उसमें शामिल हो अथवा उक्त कानून का उल्लंघन कर रहा हो।

सरकार द्वारा मूल्‍य स्‍थिति की फिर समीक्षा की गई थी और मंत्रिमंडल की मंजूरी के साथ यह निर्णय किया गया है कि खाद्य तेल, तिलहन और चावल के संबंध में एक साल की अवधि के लिए 15-02-2002 के केंद्रीय आदेश के कुछ प्रावधानों का स्‍थगन बनाये रखने के लिए ऐसे ही और प्रतिबंध लगाए जाएं ताकि आम आदमी के लिए कीमतों की बढ़ती प्रवृत्ति और इन वस्तुओं की उपलब्‍धता की समस्‍या से निपटा जा सके। फिर यह भी तय किया गया है कि इन वस्तुओं के अंतर्राष्‍ट्रीय आवागमन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा और इन वस्‍तुओं के आयातों को राज्‍य सरकारों द्वारा किसी नियंत्रण के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

राज्य सरकारों से प्राप्त प्रतिवेदन से पता चलता है कि वर्ष 2007 में 119 लोगों को कालाबाजारी के आरोप मे पकड़ा गया था। केंद्र तथा राज्य सरकार के पास यह अधिकार है कि वो पकड़े गए व्यक्ति की सजा को बढ़ा या घटा सकती हैं। पकड़े गए व्यक्ति द्वारा अपनी ओर से अभ्यावेदन के लिए किसी को अधिकृत करना, केंद्र सरकार द्वारा माना अथवा तय किया जाएगा।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 02-06-2010