वायदा व्यापार और वायदा बाजार आयोग
वायदा कारोबार आयोग एक वैधानिक निकाय है जिसकी स्थापना वायदा अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1952 के तहत की गई है। यह आयोग उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन काम करता है। आयोग वस्तुओं में वायदा कारोबार को मान्यता प्राप्त संगठनों के माध्यम से नियंत्रित करता है और वस्तुओं में अग्रिम व्यापार संचालन करने वाले संगठनों को मान्यता प्रदान करने/मान्यता समाप्त करने तथा देश में वायदा बाजार की कार्य प्रणाली में सामान्य सुधार लाने की सिफारिश करता है।
वर्तमान में देशभर में कुल 24 एक्सचेंज कार्यरत हैं। इनमें से 3 राष्ट्रीय स्तर के एक्सचेंज हैं जिन्हें देश में भविष्य/वायदा कारोबार के लिए मान्यता प्राप्त है। ये सभी प्रकार की वस्तुओं का कारोबार कर सकते हैं। वर्तमान वर्ष के दौरान 'तापीय कोयला' और 'कार्बन क्रेडिट' के लिए भी मान्यता प्राप्त वस्तु विनिमय के आधार पर व्यापार की अनुमति दी गई है।
भारत में जिंस बाजार के उदारीकरण के मद्देनजर सभी सेवारत एक्सचेंजों को विभिन्न सुधारों को अपनाने के लिए कहा गया है। इनमें ऑनलाइन कारोबार, समय पर मुहर लगाना, व्यापार की गारंटी और सेटलमेंट की व्यवस्था, बोर्ड में एक तिहाई निर्दलीय सदस्यों का प्रतिनिधित्व और स्वाचालित कार्यालयों की व्यवस्था शामिल है। तीन राष्ट्रव्यापी बहुजिंस एक्सचेंजों की स्थापना के अतिरिक्त कई ऐसे सहायक क्षेत्र हैं जहां जिंस के व्युत्पन्न बाजार के क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित विकास की ओर ध्यान दिया जा रहा है। इसमें वस्तुओं के आवागमन और मूल्य पर से नियंत्रण समाप्त करना, करों से संबंधित कुछ मुद्दों का हल, मानकीकरण, प्रमाणीकरण और गोदाम से जुड़े मुद्दे, गोदाम की रसीदों का उपयोग, विभिन्न कारोबारी समूहों, बैंकों, एफआई और एफआईआई की भागीदारी आदि शामिल हैं। सरकार इन सभी दिशाओं की ओर साथ-साथ प्रयास कर रही है।
वस्तु वायदा बाजार को वायदा समझौतों (विनियमन) के अधिनियम, 1952 (एफसीआर अधिनियम) के प्रावधानों के तहत नियंत्रित किया जाता है। इस विभाग ने एफसीआर अधिनियम को कुछ संशोधन प्रस्तावित किए हैं ताकि वस्तु वायदा बाजार में हाल में हुए विकास के साथ तालमेल रखने वाले कुछ नए पहलुओं को शामिल किया जा सके। तदानुसार वायदा समझौता (विनियमन) संशोधन बिल, 2006 लोकसभा में 21-03-2006 को लाया गया। तब से वित्तीय एवं बाजार एकीकरण से संबंधित मुद्दों के लिए सरकार ने वायदा समझौता (विनियमन) अध्यादेश की 31-01-2008 को घोषण करके संशोधन की प्रक्रिया को तेज किया है। संशोधन के मुख्य घटक इस प्रकार हैं :
- वायदा बाजार आयोग के सदस्यों की अधिकतम संख्या को बढ़ाकर चार से नौ करना जिसमें तीन पूर्णकालिक सदस्य और एक अध्यक्ष होगा।
- वायदा बाजार आयोग को शुल्क लगाने का अधिकार प्रदान करना।
- वायदा बाजार आयोग के सामान्य कोष के गठन के लिए प्रदान करना [जिसमें दंड को छोड़कर वायदा बाजार आयोग द्वारा प्राप्त किए सभी अनुदानों, शुल्कों और सभी योगों का आकलन किया जाएगा] और आयोग के खर्चों को पूरा करने के लिए धन का उपयोग करना।
- वायदा बाजार आयोग द्वारा मंजूर की जाने वाली स्कीम के साथ मान्यता प्राप्त एसोसिएशनों के निगमीकरण और गैर परस्परीकरण के लिए प्रावधान बनाना।
- सदस्यों और मध्यस्थों के निजीकरण के लिए प्रावधान बनाना।
- विकल्पों में कारोबार की अनुमति देना।
- वायदा समझौदा विनियमन अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन करने की स्थिति में जांच, प्रवर्तन और दंड के लिए प्रावधान बनाना।
कथित अध्यादेश को प्रतिस्थापित करने के लिए एक नया बिल, वायदा समझौता (विनियमन) संशोधन बिल लोकसभा में 13-03-2008 को लाया गया है। पिछला वायदा समझौता (विनियमन) (ए) बिल, 2006 जो लोकसभा में लंबित पड़ा था, उसे तुरंत वापस ले लिया गया।
वस्तु वायदा बाजार का उदारीकरण और खोला जाना वस्तुओं के वायदा कारोबार के आकार और मूल्य में आए महत्वपूर्ण उछाल के रूप में दिखने लगा है। 2007-08 के दौरान वस्तु वायदा कारोबार 40.66 लाख करोड़ रुपए का हुआ है, जो 2006-07 के दौरान 36.76 लाख करोड़ रुपए के वस्तु वायदा कारोबार की तुलना में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। तीन राष्ट्रीय एक्सचेंजों की स्थापना के बाद कारोबार के आकार और मूल्यों में कई गुना वृद्धि हुई है। नेशनल मल्टी-कोमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया अहमदाबाद (एनएमसीई) ने नवंबर, 2002 में कारोबार शुरू किया और अन्य दो राष्ट्रीय एक्सचेंजों यानी मल्टी कोमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया, लिमिटेड, मुंबई (एमसीएक्स) और नेशनल कोमोडिटी एंड डेरीवेटिव एक्सचेंज लिमिटेड, मुंबई (एनसीडीईएक्स) ने नवंबर, 2003 में कारोबार शुरू किया। निम्नलिखित सारणी इन राष्ट्रीय एक्सचेंजों की स्थापना के बाद से वस्तु वायदा कारोबार के आकार और मूल्य में वृद्धि दर्शाता है।
| 2002-03 से वस्तु वायदा कारोबार मूल्य | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|
वर्ष |
2002-03 |
2003-04 |
2004-05 |
2005-06 |
2006-07 |
2007-08 |
कारोबार का मूल्य |
66,530 |
1,29,363 |
5,71,759 |
21,55,122 |
36,76,926 |
40,65,989 |
(करोड़ रुपए में) |
(92*) |
(94*) |
(341*) |
(274*) |
(70*) |
(10.56*) |
* सारणी में दिए गए आंकड़े पिछले वर्ष की तुलना में परिवर्तन के प्रतिशत हैं।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 02-06-2010
