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उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, १९८६

उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) को उपभोक्‍ताओं के बेहतर संरक्षण के लिए अधिनियमित किया गया। 1 जुलाई 1987 से अधिनियम के सभी प्रावधान लागू हो गए हैं।

अधिनियम में 1991 तथा 1993 में संशोधन किया गया। उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम को अधिकाधिक कार्यरत और प्रयोजनपूर्ण बनाने के लिए दिसम्‍बर 2002 में एक व्‍यापक संशोधन लाया गया और 15 मार्च 2003 से लागू किया गया। परिणामस्‍वरूप उपभोक्‍ता संरक्षण नियम, 1987 में भी संशोधन किया गया और 5 मार्च 2004 को अधिसूचित किया गया। अधिनियम की मुख्‍य विशेषताएं हैं:

  1. यह सभी वस्‍तुओं और सेवाओं के लिए लागू होता है जब तक कि केंद्र सरकार द्वारा विशेष छूट न दी जाए।
  2. इसमें सभी क्षेत्र शामिल होते हैं चाहे वह निजी, सरकारी और सहकारी या कोई व्‍यक्ति हो अधिनियम के प्रावधान प्रतिपूरक तथा रोधी एवं दंडात्‍मक प्रकृति के हैं।
  3. इसमें उपभोक्‍ताओं के लिए निम्‍नलिखित अधिकार अंतरनिहित हैं।
    1. ऐसे वस्‍तुओं और सेवाओं के विपणन के विरूद संरक्षण का अधिकार जो जान और माल के लिए खतरनाक है।
    2. वस्‍तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता मात्रा, .क्षमता, शुद्धता, स्‍तर और कीमत के बारे में सूचना का अधिकार ताकि छल कपट व्‍यापार प्रचलन से उपभोक्‍ताओं की रक्षा की जा सके।
    3. जहां कहीं भी संभव हो बीमित होने का अधिकार प्रतिस्‍पर्धात्‍मक कीमत पर विभिन्‍न किस्‍मों की वस्‍तुओं और सेवाओं की पहुँच।
    4. सुनवाई का अधिकार और यह आश्‍वासित होने का अधिकार कि उपभोक्‍ता के हितों पर उपयुक्‍त मंच पर विधिवत रूप से विचार किया जाएगा।
    5. कपटी व्‍यापार या उपभोक्‍ताओं के अविवेकपूर्ण शोषण के विरूद्ध समाधान का अधिकार और
    6. उपभोक्‍ता शिक्षा का अधिकार।
  4. अधिनियम में केंद्र, राज्‍य और जिला स्‍तर पर उपभोक्‍ता संरक्षण परिसद की स्‍थापना करने का अनुमान है जिनका मुख्‍य उद्देश्‍य उपभोक्‍ताओं के अधिकारों की रक्षा और संवर्धन करना होगा।
  5. उपभोक्‍ताओं की शिकायतों का सरल, त्‍वरित और मितव्‍ययी समाधान प्रदान करने के लिए अधिनियम में राष्‍ट्रीय, राज्‍य और जिला स्‍तर पर तीन स्‍तरीय अर्धन्‍यायिक मशीनरी की परिकल्‍पना की गई है। ये हैं राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता विवाद निपटान आयोग, जो राष्‍ट्रीय आयोग के रूप में जाना जाता है और जिला उपभोक्‍ता वि‍वाद निपटान मंच, जो जिला मंच के रूप में जाना जाता है और
  6. इस अधिनियम के प्रावधान इस समय लागू किसी अन्‍य कानून के प्रावधानों के अतिरिक्‍त हैं न कि उनकी अप्रतिष्‍ठा में हैं।

वर्तमान में 35 राज्‍य आयोग हैं प्रत्‍येक राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्र में एक-एक और राष्‍ट्रीय आयोग के अलावा 571 जिला मंच हैं। राज्‍य सरकार जिला मंच और राज्‍य आयोग की स्‍थापना करने के लिए जिम्‍मेदार है। राज्‍यों को अतिरिक्‍त जिला मंच की स्‍थापना करने का अधिकार दिया गया है और राज्‍य आयोग में अतिरिक्‍त सदस्‍य रखने के लिए भी अधिकृत किया गया है ताकि पीठों का गठन और सर्किट पीठों का आयोजन सुकर बनाया जा सकें। केंद्रीय सरकार को राष्‍ट्रीय आयोग की स्‍थापना करने की आवश्‍यकता है। इसे अधिकाधिक पीठों का सृजन करने और सर्किट पीठों का आयोजन करने के लिए सुकर बनाने के लिए अतिरिक्‍त सदस्‍य नियुक्‍त करने के लिए प्राधिकृत किया गया है। राष्‍ट्रीय आयोग की द्वितीय पीठ ने 24 सितम्‍बर, 2003 से कार्य करना आरंभ किया है। सरकार राष्‍ट्रीय आयोग के माध्‍यम से उपभोक्‍ता न्‍यायालयों द्वारा मामलों के निपटान की निगरानी रख रही है। इसकी शुरूआत से मार्च 2004 तक 32,910 मामले दर्ज किए गए उनमें से 24,974 मामलों का राष्‍ट्रीय आयोग में निपटान किया गया। इसी प्रकार 3,01,485 मामले दर्ज किए गए और 1,97,797 मामलों का निपटान राज्‍य आयोगों में किया गया और 18,86,236 मामले दर्ज किए गए और 16,46,698 मामलों का निपटान किया गया जिनमें से 2220631 मामले उल्‍लेखनीय निपटान दर 84.2 प्रतिशत के साथ दर्ज किए गए।

सरकार ने 24 दिसम्‍बर को राष्‍ट्रीय उपभोक्‍ता दिवस घोषित किया है, चूंकि राष्‍ट्रपति ने उसी दिन ऐतिहासिक उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अधिनियम को हरी झंडी दी। इसके अतिरिक्‍त 15 मार्च को प्रत्‍येक वर्ष विश्‍व उपभोक्‍ता अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: १४-०३-२००८