- कृषि (472 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- वाणिज्य (277 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- वित्त (339 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- संचार (131 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- रक्षा (86 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- शिक्षा (405 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- ग्रामीण विकास (94 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- जल संसाधन (122 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- सड़क परिवहन
- उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली
- वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी विकास (355 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (406 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- पर्यावरण (156 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

वस्तु वार कीमत प्रवृत्तियां
मोटे अनाज: मोटे अनाज का थोक मूल्य सूचकांक 2003-04 के दौरान एक प्रतिशत गिरा जो एक वर्ष पहले इसी अवधि में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में है। व्यक्ति मदों के बीच गेहूँ का थोक मूल्य सूचकांक 4.9 प्रतिशत बढ़ा जबकि चावल का थोक मूल्य सूचकांक 2.4 प्रतिशत गिरा। वर्ष 2003-04 के लिए मोटे अनाज का उत्पादन 195.89 मिलियन टन से अधिक होने का अनुमान है जो वर्ष 2002-03 में 163.05 मिलियन टन की तुलना में है। अनुमानित अधिक उत्पादन और पर्याप्त भण्डारण को देखते हुए इन मदों की कीमत आगामी अवधि में संतोषजनक रूप में जारी कर सकती है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (विभिन्न कल्याण योजना सहित) के लिए गेहूँ और चावल की खरीद वर्ष 2003-04 के दौरान 479.30 लाख टन थी जो 2002-03 में 496.35 लाख टन की तुलना में थीं।
दाल: वर्ष 2003-04 के दौरान दलहनों का उत्पादन 14.89 मिलियन टन परअधिक होने का अनुमान है जो 2002-03 में 11.14 मिलियन टन की तुलना में है। वस्तु की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर को आयात द्वारा कुछ हद तक पूरा कर लिया गया है। तथापि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता में कमी होने के कारण अप्रैल 2003- जनवरी 2004 की अवधि के लिए दलहन का आयात 14.99 लाख टन पर कम था जो विगत वर्ष की इसी अवधि में 17.77 लाख टन की तुलना में था। थोक मूल्य सूचकांक संस्थाओं के अर्थ में दलहनों के उप समूह ने 2003-04 में एक प्रतिशत को नकारात्मक वृद्धि दर्ज किया है जो 2002-03 में 1.1 प्रतिशत की गिरावट की तुलना में है। तथापि, अलग अलग दलहनों के बीच अरहर और मसूर का थोक मूल्य सूचकांक क्रमश: 7.1 प्रतिशत और 15.6 प्रतिशत बढ़ा है।
खाद्य तेल: वर्ष 2003-04 के दौरान खाद्य तेलों की कीमतों में स्थायी वृद्धि दर्ज की गई यह मुख्य रूप से तिलहनों के उत्पादन में 2002-03 में बहुत अधिक कमी के कारण थी, साथ ही अधिक आन्तरिक कीमत, अधिक आयात शुल्क आदि के कारण हुई। वर्ष 2003-04 की अवधि के दौरान खाद्य तेलों का थोक मूल्य सूचकांक उप समूह के रूप में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाया यह 2002-03 में 25.7 प्रतिशत का तेजी से बढ़ोतरी की तुलना में है। सभी मुख्य खाद्य तेलों की कीमत सूचकांकों में 6.3 प्रतिशत (वनस्पति) से लेकर 26.3 प्रतिशत (नारियल तेल) की वृद्धि 2003-04 में हुई, मात्र मूंगफली में 10.4 प्रतिशत की गिरावट अपवाद स्वरूप देखी गई। तथापि, 2003-04 के दौरान खाद्य तिलहनों का उत्पादन 250.08 लाख टन पर अधिक होने का अनुमान लगाया गया। यह 2002-03 में 150.58 लाख टन और 2001-02 में 206.62 लाख टन की तुलना में है। अप्रैल 2003 - जनवरी 2004 के दौरान खाद्य तेलों का आयात 45.37 लाख टन हुआ जो विगत वर्ष की इसी अवधि के दौरान 36.71 लाख टन की तुलना में है।
चीनी: वर्ष 2003-04 के दौरान चीनी की कीमतों में कमोबेश स्थायी प्रवृत्ति का प्रदर्शन हुआ, तीसरी और चौथी तिमाही में अंतर कम आया। चीनी की कीमतों में वर्ष 2003-04 की तीसरी और चौथी तिमाही के दौरान वृद्धि दर्शित हुई। यह आगामी चीनी के मौसम में चीनी के उत्पादन में प्रत्याशित गिरावट के साथ-साथ मांग में वृद्धि होने के कारण थी। थोक मूल्य सूचकांक के अर्थ में चीनी की कीमत 2003-04 में 17 प्रतिशत बढ़ी यह 2002-03 में इसी अवधि के दौरान 14.7 प्रतिशत की गिरावट की तुलना में है। कीमत में बढ़ती प्रवृत्ति पर नियंत्रण रखने के लिए खुली बिक्री चीनी की अतिरिक्त मात्रा फरवरी - मार्च 2004 में जारी की गई। खुली बिक्री चीनी और लेवी चीनी कोटा अप्रैल- जून 2004 तिमाही के लिए बहुत अधिक बढ़ा दी गई, जिसके परिणामस्वरूप अप्रैल तीसरा सप्ताह 2004 से चीनी की कीमतें यथावत बनी रहीं। चीनी मौसम 2002-03 (अक्तूबर-सितम्बर) के लिए चीनी का उत्पादन 20.10 मिलियन टन था जो एक वर्ष पहले 18.10 मिलियन टन की तुलना में था। 2003-04 के मौसम के दौरान उत्पादन 14.5 मिलियन टन होना अनुमानित है। 2002-03 मौसम के अंत में चीनी का भंडार 10.89 मिलियन टन का जो विगत वर्ष की इसी अवधि के लिए 11.38 मिलियन टन की तुलना में था।
सब्जियां: सब्जी की कीमत उस परिवर्तनों के अधीन होती है जो उपलब्धता और मौसमी कारकों पर निर्भर करते हैं। सरकार ने सब्जियों की कीमतों और उपलब्धता विशेषकर प्याज तथा आलू पर कड़ी नज़र रखी हुई है। प्याज की कीमत में वृद्धि 2003-04 की तीसरी तिमाही के दौरान उत्पादक क्षेत्रों में बेमौसम वर्षा के कारण देखी गई जिसके परिणाम स्वरूप फसल की कटाई में विलंब हुआ, यह बाद की तिमाही में बड़ी मात्रा में नई रबी फसल के आगमन से नरम पड गया। अधिकांश केंद्रों में प्याज की कीमतें अब गिरावट दर्शा रही हैं। सब्जियों का थोक मूल्य सूचकांक उप-समूह के रूप में वर्ष 2003-04 के दौरान 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो एक वर्ष पूर्ण की इसी अवधि के दौरान 13.6 प्रतिशत गिरावट की तुलना में थी। इस अवधि के दौरान आलू का थोक मूल्य सूचकांक 3.3 प्रतिशत गिरा जबकि प्याज का 57.7 प्रतिशत की वृद्धि मुख्यत: उपलब्धता में मौसमी उतार-चढाव के कारण हुई। वर्ष 2002-03 के लिए प्याज का उत्पादन 5.44 मिलियन टन था और वर्ष 2003-04 के लिए यह लगभग 5.46 मिलियन टन होने की आशा है। वर्ष 2003-04 के दौरान देश से प्याज का कुल निर्यात 8.26 लाख टन था। नाफेड के माध्यम से तथा अन्य राज्य अभिकरणों से निर्यात किया जाना तथा उपलब्धता की समय-समय पर समीक्षा जाना जारी है।
चाय: वर्ष 2003-04 के दौरान चाय का उत्पादन 850.49 मिलियन कि. ग्राम अनुमानित है जो 2002-03 के दौरान 837.60 मिलियन कि. ग्राम की तुलना में है। 2003-04 के दौरान देश में चाय की कीमत और उपलब्धता संतोष जनक बनी रही। चाय का थोक मूल्य सूचकांक 8.7 प्रतिशत गिरा जो विगत वर्ष के दौरान 23.2 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में था। फुटकर स्तर पर कीमत स्थायी प्रवृत्ति दर्शायी है।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: १४-०३-२००८
