- कृषि (472 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- वाणिज्य (277 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- वित्त (339 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- संचार (131 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- रक्षा (86 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- शिक्षा (405 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- ग्रामीण विकास (94 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- जल संसाधन (122 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- सड़क परिवहन
- उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली
- वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी विकास (355 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (406 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- पर्यावरण (156 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

भारतीय मानक ब्यूरो
भारतीय मानक संस्था (आईएसआई) - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं पंजीकृत संस्था के रूप में 6 जनवरी, 1947 को अस्तित्व में आया जिसका उद्देश्य मानकीकरण, गुणवत्ता प्रमाणन और विपणन के क्रियाकलापों का सद्भावनापूर्ण विकास करना है। इस संगठन को 26 नवम्बर 1986 के संसदीय अधिनियम के द्वारा कानूनी दर्जा दिया गया है और भारतीय मानक ब्यूरो (बी आई एस) - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं भारत के राष्ट्रीय मानक निकाय के रूप में 1 अप्रैल, 1987 को अस्तित्व में आया जिसका क्षेत्र विस्तृत था और अधिक शक्तियां थी जिसने आईएसआई के कर्मचारियों, परिसम्पत्तियों, दायित्वों और कार्यों को अपने अधिकार में लिया। बी आई एस के मुख्य कार्यों में मानकों की तैयारी और क्रियान्वयन, उत्पाद और प्रणाली दोनों के लिए प्रमाणन योजना का संचालन, परीक्षण प्रयोगशालाओं की व्यवस्था एवं प्रबंधन, उपभोक्ता जागरूकता का सृजन तथा अंतरराष्ट्रीय मानक निकायों के साथ निकट संबंध बनाए रखना है।
दिल्ली में मुख्यालय के साथ साथ बी आई एस के पांच क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता, चंडीगढ, मुम्बई, दिल्ली और चेन्नई में हैं। देश में इसके 33 शाखा कार्यालय हैं। तकनीकी समिति में सदस्य के रूप में 26,500 से भी अधिक तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से राष्ट्रीय प्राथमिकता के अनुसार बी आई एस आवश्यकता आधारित मानकों का विकास कर रहा है। मानकीकरण परियोजनाओं का उनकी उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए बी आई एस में जांच की जाती है। वर्ष 2002-03 के दौरान 446 मानक तैयार किए गए। 31 मार्च 2004 की स्थिति के अनुसार 17,928 मानक प्रवर्तन में हैं जिनमें अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण खंड शामिल किए गए हैं जो उद्योग को उनके सामान और सेवाओं की गुणवत्ता का उन्नयन करने में सहायता करता है।
बी आई एस उत्पाद प्रमाणन मुहरांकन योजना उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता का आश्वासन दिलाती है जो राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। 31 मार्च, 2004 को कुल कार्यरत लाइसेंसो की संख्या 17,798 थी जिसमें लगभग 1,145 विभिन्न मदें शामिल थी जिनमें खाद्य उत्पाद से लेकर इलेक्ट्रोनिक थे। इस योजना की प्रकृति मूल रूप से स्वैच्छिक है। तथापि, सुरक्षा, स्वास्थ और कुछ उत्पादों की भारी मात्रा में खपत को देखते हुए एलपीजी सीलेंडर, खाद्य रंग, बोतल बंद पेय जल, आदि जैसी 109 मदों के लिए यह अनिवार्य बनाया गया है। अविवेकपूर्ण व्यापारियों और बी आई एस चिन्ह का दुरूपयोग करने वाले विनिर्माताओं से आम उपभोक्ता की रक्षा करने के लिए बी आई एस के विभिन्न कार्यालयों द्वारा प्रवर्तन छापा मारा जाएगा और जहां आवश्यक हो अभियोजन के मामले कानूनी अदालत में दर्ज किए जाएगें।
उपभोक्ता के हित तथा बाजार मांग के मद्देनज़र स्वर्ण आभूषण प्रमाणन (लोकप्रिय रूप से स्वर्ण आभूषण की हालमार्किंग के नाम से जाना जाता है) स्वैच्छिक आधार पर अप्रैल 2000 में शुरू किया गया। योजना का उद्देश्य स्वर्ण की शुद्धता या इसकी सूक्षमता के संबंध में उपभोक्ताओं को तृतीय पक्ष आश्वासन देना है। यह योजना पूरे देश में क्षेत्रीय और शाखा कार्यालयों के बी आई एस नेटवर्क के जरिए संचालित की जाती है। अब तक इस योजना के तहत 730 जौहरियों का प्रमाणन किया जा चुका है। बी आई एस प्रमाणित जौहरियों की सूची और बी आई एस से मान्यता प्राप्त हॉलमार्किंग केंद्रों की सूची बी आई एस वेबसाइट पर डाल दी गई हैं।
बी आई एस ने विदेशी विनिर्माताओं के लिए प्रमाणन योजना तथा आयातकों के लिए प्रमाणन योजना आरंभ की है। इस योजनाओं के प्रावधानों के अध्यधीन विदेशी विनिर्माता बी आई एस मानक चिन्ह से अपने उत्पादों को चिहिनत करने के लिए बी आई एस से प्रमाणन मांग सकते हैं और भारतीय आयातक देश में आयातित हो रहे उत्पादों पर बी आई एस मानक चिहृ लगाने के लिए बी आई एस प्रामणन मांग सकते है। विदेशी विनिर्माताओं के लिए बी आई एस प्रमाणन योजना के तहत अब तक 37 लाइसेंस दिए गए हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अधीन विदेश व्यापार महानिदेशलय ने एक अधिसूचना जारी की थी जिसमें 109 मदों के लिए भारतीय मानक का अनुपालन अनिवार्य बना दिया गया है (जो बी आई एस सांविधिक प्रमाणन योजना के तहत शामिल किए गए हैं)।
बी आई एस गुणवत्ता प्रणाली प्रमाणन योजना जो अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रबंधन मानक (आई एस ओ 9001) पर आधारित है, के 31 मार्च 2004 की स्थिति के अनुसार 1,380 से भी अधिक लाइसेंस हैं। यह योजना नीदरलैंण्ड के राड वूर अक्रेडीटेटी (आरवीए) जो प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रत्यायन निकाय है, से 23 प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रत्यायन प्राप्त किया है। बी आई एस ने एच ए सी सी पी एकीकृत गुणवत्ता प्रणाली प्रमाणन भी शुरू किया है जो एक ही लेखापरीक्षा के जरिए एच ए सी सी पी और आई एस ओ 9000 के लिए प्रमाणन देने संबंधी दोहरा लाभ प्रदान करता है। यह खाद्य एवं खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में निर्यातकों के लिए सहायक होता है विशेषत: यू एस ए और यूरोप में निर्यात के लिए।
बी आई एस ने आई एस/आई एस ओ 14001-1006 के अनुसार 1997 में पर्यावरणीय प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन योजना का श्रीगणेश किया है। यह योजना औद्योगिक एककों को पर्यावरणीय प्रतिरक्षा, प्रदूषण की रोक और पर्यावरणीय कानूनों के अनुपालन के लिए अपना समर्पण प्रदर्शित करने में मदद करती है। विभिन्न प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में 88 लाइसेंस दिए गए हैं। बी आई एस ने आई एस 18001:2000 के अनुसार जनवरी 2003 में व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन (ओ एच एंड एस एम) की भी पुन: स्थापना की है। जो अनिवार्य रूप से संगठन को महत्वपूर्ण आपदाओं और जोखिमों के बारे अपेक्षाओं और सूचनाओं, विधानों को ध्यान में रखते हुए नीति और उद्देश्य की आयोजना बनाने एवं प्रबंधन करने तथा पारिभाषित करने में समर्थ बनाती है, जिसे संगठन नियंत्रित कर सकता है और उसे अपने कर्मचारियों और दसूरों की रक्षा करने की आशा करता और उस पर दबाव डाल सकता है। जिनका स्वास्थ और जिनकी सुरक्षा संगठन के क्रियाकलापों द्वारा प्रभावित होती हैं।
उत्पाद प्रमाणन के कार्यकलाप को सहायता देने के लिए पांच क्षेत्रों में आठ प्रयोगशालाओं की श्रृंखला स्थापित की गई है अर्थात सहिबाबाद मोहाली, मोहाली, कोलकाता, मुम्बई और चेन्नई और कुछ शाखा कार्यालयों में अर्थात पटना, बंगलौर और गुवाहटी। विदेशी मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं को भेजे जा रहे नमूनों के अलावा प्रतिवर्ष बी आई एस प्रयोगशालाओं में लगभग 30,000 नमूनों का परीक्षण किया गया। विभिन्न उत्पादों के परीक्षण संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम का इन प्रयोगशालाओं द्वारा आयोजन किया जाता हैं। वर्ष 2003-04 के दौरान ऐसे 12 कार्यक्रम आयोजित किए गए।
वर्ष 1947 में इसके आरंभ किए जाने से तब यह आई एस आई था और अब बी आई एस हो गया, जो अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सक्रिय सदस्य रहा है, अर्थात अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आई एस ओ) और अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रो तकनीकी आयोग (आई ई सी)। यह इन अंतरराष्ट्रीय मानक निकायों की विभिन्न नीति निर्धारक समितियों में भाग लेता है। बी आई एस के पास कुछ महत्वपूर्ण आई एस ओ/आई ई सी समितियों का सचिवालय भी है जो भारत के व्यापार के हित में हैं। आई एस ओ के सदस्य के रूप में बी आई एस भारतीय व्यापारियों और उद्योगों के हितों की रक्षा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास में भी सक्रिय रूप से भाग लेता है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण क्रियाकलापों में बी आई एस की सक्रिय सहभागिता को स्वीकार करते हुए आई एस ओ ने सामान्य बी आई एस को निदेशित करने के लिए दक्षिण एशिया क्षेत्र का क्षेत्रीय सम्पर्क अधिकारी का दर्जा प्रदान किया है। भारत इलेक्ट्रोनिक संघटकों के गुणवत्ता मूल्यांकन के आई ई सी प्रणाली (आई ई सी क्यू) और इलेक्ट्रिकल उपकरण की सुरक्षा के लिए मानकों के समनुकूलन परीक्षण के लिए आई ई सी प्रणाली का प्रमाणन सदस्य हैं। बी आई एस भारतीय उद्योग और व्यापार के विश्व व्यापी मानक सूचना, प्रमाणन प्रणाली और तकनीकी विनियमन प्रदान करने के लिए विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू टी ओ) - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं के अधीन केंद्रीय पूछ-ताछ बिंदु के रूप में भी कार्य कर रहा हैं।
बी आई एस ने 1997 में नई दिल्ली में अपने मुख्यालय में एक ही स्थान से सूचना तथा एस एस आई सुविधा प्रकोष्ठ की स्थापना की थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय उद्योगों को विशेषत: लघु क्षेत्रों को विभिन्न प्रकार की सूचना/सहायता प्रदान करना हैं। बडी संख्या में उद्यमी, उपभोक्ता और व्यावसायी अपनी पूछ-ताछ के लिए इसे केंद्र में आते हैं।
राजीव गांधी राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रदाय का संस्थापन विनिर्माताओं के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना जगाने के लिए 1991 में किया गया। उसी प्रकार के अंतरराष्ट्रीय प्रदाय की तुलना वार्षिक प्रदाय से की जाती है जैसाकि मालकोम, बालड्रिज, नेशनल क्वालिटी पुरस्कार, यू एस ए और यूरोपीय गुणवत्ता पुरस्कार।
बी आई एस ने 1995 मे नई दिल्ली में उद्योग की बढ़ती आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए अलग से प्रशिक्षण विभाग स्थापित किया है। यह राष्ट्रीय मानकीकरण प्रशिक्षण संस्थान - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं के नाम में कार्यरत है। यह उद्योग के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है तथा प्रबंधन प्रणाली, एस क्यू सी आदि के संबंध में बी आई एस कर्मचारियों के लिए भी प्रशिक्षण चलाता है। एन आई टी एस विकासशील देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाता हैं।
हाल ही में, बी आई एस ने कुछ नयी पहलें/सुधार शुरू किया है, जिसमें मानक तैयार करने में लिया जाने वाला अधिक समय को कम करना, तकनीकी समिति के पुनर्गठन और अधिकाधिक सक्रिय तरीका प्राप्त करने के लिए बाहर से मानक तैयार करने का कार्य कराना शामिल हैं। प्रमाणन के अधीन लाइसेंस प्रदान करने की शक्रि को विकेन्द्रीकृत किया गया है, लाइसेंस प्रदान करने के लिए आवेदन प्रपत्र का सरलीकरण किया गया है, लाइसेंस प्रदान करने के लिए समय मानदंड कम किया गया है, चुनिंदा उपभोक्ता उत्पादों पर संकेद्रित निगरानी, एन जी ओ और वी सी ओ की भागीदारी और बाहर से निरीक्षण कराने को प्रमाणन प्रणाली में अधिकाधिक पारदर्शिता लाने के लिए शामिल किया गया है।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: १४-०३-२००८
