भारतीय मानक ब्यूरो
भारतीय मानक ब्यूरो एक राष्ट्रीय मानक निकाय है जिसके प्रमुख कार्य - मानक तैयार कर उन्हें लागू करना, उत्पादों व प्रणाली दोनों ही के लिए प्रमाणन योजना संचालित करना, परीक्षण प्रयोगशालाओं का गठन व प्रबंधन, उपभोक्ताओं में जागरुकता पैदा करना तथा अंतर्राष्ट्रीय मानक निकायों के साथ निकट संपर्क बनाए रखना आदि है।
सामान्य
भारतीय मानक ब्यूरो 1 अप्रैल, 1987 को संसद के अधिनियम के माध्यम से अस्तित्व में आया। पूर्व भारतीय मानक संस्थान (आईएसआई) के कर्मचारी, संपत्ति, देनदारी और कार्यों को लेते हुए विस्तृत कार्यक्षेत्र और ज्यादा शक्तियों के साथ यह निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए अस्तित्व में आया:
- मानकीकरण, चिह्नीकरण और गुणवत्ता प्रमाण की गतिविधियों का सुव्यवस्थित विकास
- मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण को नई शक्ति प्रदान करना
- मानकों को मान्यता देने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति तैयार करना और उन्हें औद्योगिक उत्पादन और निर्यातों की वृद्धि और विकास के साथ जोड़ना।
भारतीय मानक ब्यूरो, मानक निरूपण, प्रमाणन, उत्पाद/योजनाओं, प्रयोगशाला सेवाएं, अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों, उपभोक्ता संबंधित गतिविधियों, प्रचारक गतिविधियों, प्रशिक्षण सेवाएं, सूचना सेवाएं एवं प्रकाशकों की बिक्री सेवा उपलब्ध कराता है।
मानक निर्माण
मानक निर्माण के तहत यह रसायन, खाद्य एवं कृषि, सिविल, विद्युत, इलेक्ट्रॉनिक्स व दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, प्रबंधन व तंत्र, धातुकर्मी अभियांत्रिकी, पेट्रोलियम, कोयला व संबंधित उत्पाद, चिकित्सा और अस्पताल नियोजन, वस्त्र, परिवहन अभियांत्रिकी और उत्पादन एवं सामान्य अभियांत्रिकी, चौदह डिवीजन परिषदों के तहत जल संसाधनों जिनके अंदर 308 सेक्शनल समितियां हैं, जैसे 14 क्षेत्रों के लिए भारतीय मानकों के निमार्ण में शामिल है। 31 मार्च, 2008 तक भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्मित 18424 मानकों का उपयोग हो रहा है जबकि 2001-02 में 17658 का हो रहा था। ये अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्सों को शामिल करते हैं जो उद्योगों को अपनी वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद करता है। भारतीय मानक ब्यूरो एक समयबद्ध कार्यक्रम के रूप में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप आवश्यकता के आधार पर भारतीय मानकों का निर्माण करता है।
उत्पाद प्रमाणन योजना
भारतीय मानक ब्यूरो की उत्पाद प्रमाणन स्कीम मूलत: स्वैच्छिक प्रकृति है, फिर भी उपभोक्ता के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के मद्देनजर और व्यापक उपभोग के मामलों में सरकार द्वारा अनेक वैधानिक उपायों जैसे खाद्य मिलावट निषेध अधिनियम, कोल माइन्स रेगुलेशन्स और भारतीय गैस सिलिंडर नियम और भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम के माध्यम से इसे अनिवार्य बनाया गया है। स्वास्थ्य और सुरक्षा के विचार से अनिवार्य प्रमाणन के तहत लायी गई वस्तुओं में से कुछ हैं - दूध का पाउडर, बोतल बंद पेय जल, एलपीजी सिलेंडर, तेल दबाव वाले स्टोव, क्लिनिकल थर्मामीटर इत्यादि। वर्तमान में 31 मार्च, 2008 तक इस स्कीम के तहत 20025 प्रमाणन चिह्न लाइसेंस का प्रयोग हो रहा है जिनमें खाद्य वस्तुओं से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स की लगभग 1000 विभिन्न वस्तुओं को शामिल किया गया है। 2001-2002 में 16195 प्रमाणन चिह्न लाइसेंस का प्रयोग हो रहा था। उत्पादों के सभी विदेशी विनिर्माताओं को जो भारत को निर्यात करना चाहते हैं, उन्हें विदेश व्यापार, निदेशालय, वाणिज्य मंत्रालय के 24 नवंबर, 2000 की अधिसूचना के तहत एक भारतीय मानक ब्यूरो उत्पाद प्रमाणन लाइसेंस प्राप्त करने की आवश्यकता है।
इस दिशा में, भारतीय मानक ब्यूरो ने वर्ष 1999 में विदेशी निर्माताओं के लिए अपनी उत्पाद प्रमाणन स्कीम शुरू की। इस स्कीम के प्रावधानों के तहत विदेशी निर्माता भारतीय मानक ब्यूरो के मानक चिह्न से अपने उत्पादों को चिह्नित करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाण पत्र की मांग कर सकते हैं। इस सकीम के तहत 31 मार्च, 2008 तक लगभग 15 देशों में विदेशी निर्माताओं के लगभग 101 लाइसेंस उपयोग में हैं। भारतीय आयातक इस स्कीम के तहत देश में आयात किए गए उत्पाद के लिए प्रमाणन चिह्न लाइसेंस के लिए आवेदन दे सकते हैं। इसके साथ भारतीय निर्माताओं जैसा व्यवहार किया जाता है। इस स्कीम के तहत तीन लाइसेंस प्रयोग में है। भारतीय मानक ब्यूरो आईईसीईई-सीबी, आईईसीक्यू और आईईसी की आईईसीई एक्स स्कीमों जैसी अन्य प्रमाणन स्कीमों को भी विभिन्न प्रावधानों के अंतर्गत चलाता है। भारत आईईसी सिस्टम ऑफ क्वालिटी असेसमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स (आईईसीक्यू) का और आईईसी सिस्टम फॉर कन्फॉर्मिटी टेस्टिंग टू स्टैंडर्ड्स फॉर सेफ्टी ऑफ इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट (आईईसीईई) का प्रमाणित करने वाल सदस्य है। इसके आगे भारतीय मानक ब्यूरो ने मूल रूप से लाइसेंस देने की प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे नए पहल किए हैं।
प्रयोगशालाएं
उत्पाद प्रमाणन की गतिविधियों में सहयोग देने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के पास 8 प्रयोगशालाएं हैं। इन प्रयोगशालाओं के पास रसायन, खाद्य, विद्युत, और मैकेनिकल विधाओं के उत्पादों के लिए प्रमाणित जांच सुविधाएं हैं। भारतीय मानक ब्यूरो की प्रयोगशालाओं में प्रत्येक वर्ष लगभग 25,000 नमूनों की जांच हो रही है। कुछ मामलों में जहां भारतीय मानक ब्यूरो की प्रयोगशालाओं में आर्थिक रूप से जांच सुविधाओं को विकसित करना आर्थिक रूप से संभव न हो और नमूनों की आवश्यकता से अधिक होने पर और मशीन के खराब होने जैसे अन्य कारणों की वजह से बाहरी मंजूर प्रयोगशालाओं की सुविधाओं का भी उपयोग हो रहा है। दो प्रयोगशालाओं को छोड़कर अन्य सभी प्रयोगशालाओं को एनएबीएल (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) की मान्यता प्राप्त है। भारतीय मानक ब्यूरो ने उत्पाद प्रमाणन उद्देश्यों के लिए लगभग 116 प्रयोगशालाओं को मान्यता दी है। ब्यूरो ने अपनी सभी जांच प्रयोगशालाओं में आधुनिकीकरण की परियोजना शुरू की है ताकि नमूनों की जांच की आंतरिक क्षमता बढ़ सके और जांच में लगने वाले समय को घटाया जा सके।
हॉलमार्किंग
सोने के जेवर के हॉलमार्किंग की एक बहुत लोकप्रिय स्कीम, जो भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 के तहत ऐच्छिक आधार पर अप्रैल, 2002 में शुरू हुई थी, इसका लक्ष्य है उपभोक्ता के हितों का संरक्षण और सोने की शुद्धता पर उपभोक्ता को तीसरे पक्ष की गारंटी प्रदान करना। इस उद्देश्य के लिए 31 मार्च, 2008 तक 91 हॉलमार्किंग केंद्रों को मान्यता दी गई है। इस स्कीम की शुरूआत से 5403 से भी अधिक स्वर्ण विक्रेताओं (जौहरियों) ने भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस ले लिया है जबकि वर्ष 2001-02 में जौहरियों ने लाइसेंस लिया था। अभी तक 381 लाख से भी अधिक आभूषण सामग्रियों की हॉलमार्किंग की गई है। हॉलमार्क युक्त जौहरियों, जिन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो लाइसेंस ले लिया है, की सूची और भारतीय मानक ब्यूरो के द्वारा मान्यता प्राप्त हॉलमार्किंग केंद्रों की सूची भारतीय मानक ब्यूरो की वेबसाइट पर दी गई है। चांदी की हॉलमार्किंग की एक ऐसी ही स्कीम के तहत चांदी की हॉलमार्किंग के लिए अक्तूबर, 2005 में इस स्कीम की शुरूआत से 405 लाइसेंस दिए गए हैं।
प्रबंधन तंत्र प्रमाणन
प्रबंधन तंत्र प्रमाणन के तहत भारतीय मानक ब्यूरो अन्य महत्वपूर्ण तंत्र प्रमाणन की योजनाएं चलाता है। गुणवत्ता प्रबंधन तंत्र प्रमाणन स्कीम (क्यूएमएससीएस) सितंबर, 1991 में शुरू की गई थी जिसके तहत 31 मार्च, 2008 तक 1161 लाइसेंस सक्रिय हैं, जबकि 2001-2002 में 916 लाइसेंसों का प्रयोग हो रहा था। भारतीय मानक ब्यूरो के गुणवत्ता प्रबंधन तंत्र प्रमाणन को 23 प्रमुख आर्थिक गतिविधियों के लिए रॉड मुअर एक्रेडिटैटी (आरसीए), नीदरलैंड द्वारा मान्यता दी गई है।
हैजार्ड एनालिसिस एंड क्रिटिकल कंट्रोल प्वाइंट सर्टिफिकेशन (एचएसीसीपी) समेकित स्कीम के तहत 31 मार्च, 2008 तक 64 प्रमाणित कंपनियां चल रही हैं। एनवायरमेंटल मैनेजमेंट सिस्टम्स सर्टिफिकेशन स्कीम (ईएमएससीएस) के तहत 31 मार्च, 2008 तक सक्रिय लाइसेंसों की कुल संख्या 131 थी, जो 2001-02 में 61 थी। ओकुपेशन हेल्थ एंड मैनेजमेंट सिस्टम्स (ओएचएंडएसएमएस) सर्टिफिकेशन स्कीम जनवरी, 2003 में शुरू की गई थी, 31 मार्च, 2008 तक सक्रिय लाइसेंसों की कुल संख्या 35 थी।
नई स्कीमों में भारतीय मानक ब्यूरो ने गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली पर सरकार या उसके प्रभावशाली क्षेत्रों का न्यूनतम सेवा स्तर बनाए रखने के लिए और सार्वजनिक सेवा संगठनों (आईएस 15700:2005) की अच्छी सेवा देने के लिए सार्वजनिक सेवा डिलीवरी प्रबंधन तंत्र की शुरूआत की है।
प्रवर्तन प्रक्रिया
भारतीय मानक ब्यूरो प्रमाणन चिह्न स्कीम की वृद्धि और लोकप्रियता के साथ-साथ भारतीय मानक ब्यूरो के मानक चिह्न के दुरुपयोग के भी उदाहरण हैं। इसलिए भारतीय मानक ब्यूरो ने ऐसे व्यक्ति या कंपनी जिसके पास भारतीय मानक ब्यूरो का वैध लाइसेंस नहीं है, उनके द्वारा मानक चिह्न या इसके नकल के प्रयोग को रोकने के लिए प्रवर्तन प्रक्रिया पर जोर दिया है। भारतीय मानक ब्यूरो के मानक चिह्न का दुरुप्रयोग करने वाले बेईमान व्यापारियों और निर्माताओं से आम उपभोक्ता को बचाने के लिए प्रवर्तन छापे मारे जाते हैं और जहां कानूनी तौर पर युक्तिसंगत हो, अदालत में आरोप के मामले दर्ज किए जाते हैं। इस प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए दो बाहरी एजेंसियों को गुप्त सूचना प्रदान करने और कानून तोड़ने वालों को ऊपर छापा मारने में मदद करने के लिए चयनित स्थानों में एक वर्ष की शुरूआती अवधि के लिए शामिल किया गया है। 2007-08 में जांच और जब्त करने की प्रक्रियाओं की संख्या 125 है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रक्रियाएं
1947 में अपनी स्थापना के बाद से ही ब्यूरो अंतर्राष्ट्रीय मानक संगठन (आईएसओ) और अंतर्राष्ट्रीय विद्युत तकनीकी आयोग (आईईसी) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का सक्रिय सदस्य रहा है। भारतीय मानक ब्यूरो आईएसओ और आईईसी में एक सदस्य निकाय के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करता है। इसके पास आईएसओ की 259 तकनीकी समितियों/उपसमितियों और आईईसी की 62 तकनीकी समितियों/उपसमितियों और आईईसी की 84 तकनीकी समितियों/उपसमितियों में पर्यवेक्षक सदस्य(ओं) को दर्जा प्राप्त है। यह अंतर्राष्ट्रीय मानक संस्थानों की विभिन्न नीति-नियामक समितियों में भाग लेता है। भारतीय मानक ब्यूरो के पास कुछ महत्वपूर्ण आईएसओ/आईईसी समितियों के सचिवालय भी हैं क्योंकि इन समितियों से भारत के कारोबारी हित जुड़े हैं। यह आईएसओ/आईईसी समितियों के सदस्य के रूप में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के विकास में सक्रिय हिस्सा भी लेता है ताकि भारतीय व्यापार और उद्योगों के हितों की रक्षा होती रहे। भारतीय मानक ब्यूरो मानकीकरण, समरूप मूल्यांकन और मान्यता देने इत्यादि से संबंधित क्षेत्रीय और द्विपक्षीय सहयोग कार्यक्रमों से सक्रिय रूप से जुड़ा है। इसने इस संबंध में आईएसओ और अमेरिका के एएनएसआई समेत 16 देशों/संगठनों के साथ सहमति पत्र/एमआरए पर हस्ताक्षर किया है।
उपभोक्ता संरक्षण
देश में उपभोक्ताओं की बढ़ती उम्मीदों को पूरा करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो ने उपभोक्ता संरक्षण और कल्याण प्रदान करने के लिए और सार्वजनिक शिकायतों से निपटने के लिए विशिष्ट आदेश के साथ एक अलग विभाग की स्थापना की है। यहां विभाग उपभोक्ता मामलों पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद और उपभोक्ता एसोसियेशनों के साथ बातचीत करता है और उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ समन्वय करता है। इसके कार्यों में इसका मार्गदर्शन एक उपभोक्ता नीति परामर्शदायी समिति करती है जो कार्यों को सुचारु ढंग से करने और मानकीकरण और प्रमाणन प्रक्रियाओं को सरल बनाने से संबंधित सभी नीति मामलों पर ब्यूरो को परामर्श देती है। शिकायतों से निपटने के लिए एक सुपरिभाषित प्रक्रिया बनायी गई है। शिकायतों को ऑन लाइन भी दर्ज कराया जा सकता है और सभी दर्ज शिकायतों की नियमित रूप से निगरानी की जाती है। भारतीय मानकों का उन्नयन बहुत महत्वपूर्ण है और यह ब्यूरो का मुख्य उद्देश्य है। सभी मानक सामान्यतया ऐच्छिक प्रकृति के हैं। इसलिए इच्छित लाभों को प्राप्त करने के लिए मानकों के क्रियान्वयन के लिए प्रोत्साहक प्रक्रियाएं आवश्यक हैं।
मानकीकरण के उन्नयन में आम उपभोक्ता से लेकर शैक्षणिक संस्थान तक विभिन्न हित शामिल हैं। लघु उद्योगों में मानकीकरण और गुणवत्ता प्रणाली की विचारधारा को प्रसारित करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो व्याख्यान, विचार-विमर्श और वीडियों फिल्म समेत जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करता है जिसमें भाग लेने वालों को मानकीकरण, गुणवत्ता प्रणाली, उत्पाद प्रमाणन की विचारधाराओं और ब्यूरो की अन्य प्रक्रियाओं से अवगत कराया जाता है।
राजीव गांधी राष्ट्रीय गुणवत्ता पुरस्कार
उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने के लिए निर्माताओं और सेवा संगठनों को प्रोत्साहित करने के लिए 1991 में ब्यूरो द्वारा भारत सरकार की मंजूरी से राजीव गांधी राष्ट्रीय गुणवत्ता पुरस्कार की शुरुआत की गई। यह वार्षिक पुरस्कार अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों जैसे अमेरिका का मैल्कम बैल्ड्रीज नेशनल क्वालिटी अवार्ड और यूरोपियन क्वालिटी अवार्ड के समतुल्य है। इस पुरस्कार के लिए मूल्यांकन नेतृत्व, नीति, उद्देश्य और रणनीति; मानव संसाधन प्रबंधन; संसाधन प्रक्रियाओं; ग्राहक को केंद्र बिंदु बनाना; कर्मचारियों की संतुष्टि; व्यापार परिणाम और पर्यावरण एवं समाज पर प्रभाव जैसी बातों के आधार पर किया जाता है। वर्ष 2007 के लिए पुरस्कार उपभोक्ता मामलों के सचिव श्री यशवंत भावे के द्वारा 10 अप्रैल, 2008 को नई दिल्ली में अशोक होटल में आयोजित पुरस्कार प्रस्तुति समारोह में दिया गया।
सूचना व एसएसआई सुविधा कक्ष
'पूर्ण ग्राहक संतुष्टि' के पथ पर आगे बढ़ते हुए, भारतीय मानक ब्यूरो ने नई दिल्ली में अपने मुख्यालय में एकल खिड़की सूचना व एसएसआई सुविधा कक्ष स्थापित किया था जो भारतीय उद्योगों और खास तौर पर लघु उद्योगों को जो भारतीय उद्योग जगत की रीढ़ है, विभिन्न प्रकार की सूचना/सहयोग प्रदान करने के लक्ष्य के साथ 1997 से शुरू हुआ। उद्यमियों, उपभोक्ताओं और व्यावसायियों की बड़ी संख्या इस केंद्र पर अपने सवालों को लेकर आती है।
मानकीकरण के लिए प्रशिक्षण का राष्ट्रीय संस्थान
उद्योग, उपभोक्ता संगठनों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, सरकारी निकायों और विकासशील देशों के तकनीकी और प्रबंधन कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो ने मानकीकरण के लिए प्रशिक्षण के राष्ट्रीय संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग फॉर स्टैंडर्डाइजेशन - एनआईटीएस), नोएडा की स्थापना की है।
एनआईटीएस, गुणवत्ता प्रबंधन तंत्र को आईएस/आईएसओ 9001, पर्यावरण प्रबंधन तंत्र को आईएस/आईएसओ 14001 के आधार पर, व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रबंधन तंत्र को आईएस 18001, खाद्य सुरक्षा प्रबंधन तंत्र को आईएस/आईएसओ 22000 के आधार पर, हैजार्ड एनालिसिस एंड क्रिटिकल कंट्रोल प्वाइंट्स (एचएसीसीपी) और प्रयोगशाला प्रबंधन तंत्र को आईएस/आईएसओ/आईईसी 17025 के आधार पर प्रशिक्षित करता है। इसके अलावा यह 1968 से प्रत्येक वर्ष एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों के लिए मानकीकरण और गुणवत्ता तंत्र में और प्रबंधन तंत्र पर अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। एनआईटीएस भारतीय मानक ब्यूरो के कर्मचारियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना है। पिछले छ: वर्षों से प्रत्येक वर्ष लगभग 630 कर्मचारी औसतन प्रशिक्षित/पुनर्प्रशिक्षित किए गए हैं।
पुस्तकालय (लाइब्रेरी)
सूचना सेवाओं के तहत भारतीय मानक ब्यूरो तकनीकी पुस्तकालय मानकों और संबंधित मामलों पर सूचना के लिए एक राष्ट्रीय संसाधन केंद्र है और उद्योग, व्यापार, सरकार, अनुसंधानकर्ताओं और उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को समान रूप से पूरा करता है। आज यह दक्षिण एशियाई क्षेत्र में मानकों की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है जिसका सतही क्षेत्रफल 1000 वर्गमीटर है। इसके संग्रह में समस्त विश्व से लाए गए 6 लाख मानक और 50000 तकनीकी पुस्तकें शामिल हैं। ब्यूरो के लाइब्रेरी तंत्र में मुख्यालय की लाइब्रेरी (नई दिल्ली) और मुंबई, कोलकाता, चंडीगढ़ और चेन्नई की चार क्षेत्रीय कार्यालय लाइब्रेरी (पुस्तकालय) शामिल हैं। विश्व व्यापार संगठन के व्यापार समझौते के तकनीकी अवरोधों के तहत भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के द्वारा भारतीय मानक ब्यूरो को डब्ल्यूटीओ/टीबीटी पूछताछ केंद्र का पद दिया गया है।
ब्यूरो ने अपने बिक्री केंद्रों को कम्प्यूटरीकृत करने और उन्हें उपभोक्ताओं को सीधे इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेषाधिकार के माध्यम से भारतीय मानकों को सीडी-रोम पर निकाला है। इस उत्पाद को उद्योग ने सराहा है और यह ब्यूरो द्वारा तैयार किए गए 18000 से अधिक मानकों में पूर्ण-विषय को खोजने की बेहतरीन सुविधा प्रदान करना है।
भारतीय मानक ब्यूरो की वेबसाइट www.bis.org.in है, एक लिंक के माध्यम से ब्यूरो की बेबसाइट का हिंदी संस्करण भी उपलब्ध है। इस वेबसाइट पर ब्यूरो की विविध प्रक्रियाओं, योजनाओं तथा अन्य समर्थन सेवाओं से संबंधित एवं उपभोक्ताओं तथा भारतीय उद्योग के हितों से संबंधित सूचनाएं उपलब्ध हैं (प्रमाणन, मानक निर्माण, उपभोक्ता मामले, विविध आवेदन फॉर्म, प्रयोगशाला सेवाएं इत्यादि)।
वित्त एवं खाता
एक दशक से भी अधिक समय से भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) भारत सरकार से बिना किसी बजटीय समर्थन के अपने गैर-योजना व्यय को पूरा कर रहा है। ब्यूरो का वित्तीय संसाधन निम्नलिखित मदों पर व्यय होता है:
- उत्पाद प्रमाणन।
- प्रबंधन प्रमाणन तंत्र।
- हॉलमार्किंग।
- बीआईएस मानकों और प्रकाशनों की बिक्री।
- प्रशिक्षण संस्थान।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 02-06-2010
