पर्यटन
पर्यटन रोजगार के अवसर पैदा करने, गरीबी दूर करने और मानव विकास के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरा है। रोजगार के अवसर जुटाने में इसका योगदान बहुत ज्यादा है। वर्ष 2003-04 के दौरान 2 करोड़ 15 लाख 40 हजार बेरोजगारों को इससे प्रत्यक्ष लाभ हुआ है। पर्यटन से राष्ट्रीय एकता और अंतराष्ट्रीय सद्भाव को बढ़ावा मिलता है तथा स्थानीय हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलता है।
पिछले तीन दशकों में देश में पर्यटन में भारी वृद्धि हुई है। वर्ष 2004 के मुकाबले वर्ष 2003-04 में भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में 13.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विश्व पर्यटन में भारत का हिस्सा वर्ष 2004 में 0.44 प्रतिशत था जबकि 2005 में यह 0.49 प्रतिशत हो गया। 2005 में 25,172 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की गई जबकि वर्ष 2004 में 21,828 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की गई थी।
सामाजिक और सांस्कृतिक लगाव और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय लक्ष्य तक पहुंचने में घरेलु पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी इसका काफी योगदान है। पिछले कुछ वर्षों में लोगों की आय बढ़ने और मध्यम वर्ग के एक शक्ति के रूप में उभरने के साथ ही घरेलू पर्यटन में वृद्धि के लिए अच्छी संभावनाएं पैदा हुई हैं। वर्ष 2004 के दौरान घरेलू पर्यटकों की संख्या लगभग 36.60 करोड़ थी। 2005 में यह संख्या 38.20 करोड़ तक पहुंच गई।
संगठन
पर्यटन विकास में सहयोग देने वाले केंद्रीय संगठन हैं – पर्यटन मंत्रालय, भारतीय पर्यटन तथा यात्रा प्रबंध संस्थान, राष्ट्रीय होटल प्रबंध तथा खान-पान टेक्नोलॉजी परिषद्, भारतीय पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, भारतीय स्कीइंग तथा पर्वतारोहण संस्थान और राष्ट्रीय जल-क्रीड़ा संस्थान।
पर्यटन मंत्रालय देश में पर्यटन विकास तथा विदेशी पर्यटकों को देश की ओर आकृष्ट करने के कार्यक्रमों और नीतियों का निर्माण करने व सुचारु रूप से उन्हें लागू करने के लिए उत्तरदायी है। यह पर्यटन के बुनियादी ढांचे के विकास, प्रचार और प्रोत्साहन, सूचनाओं, के प्रसार, तथा संबंधित उद्योग और यात्रा प्रबंध व्यवसाय से जुड़े विभिन्न क्षेत्र, जैसे – होटल, ट्रैवेल एजेंसी, टूर आयोजक की गतिविधियों की देखरेख तथा उनमें समन्वय स्थापित करने के प्रयास करता है।
पर्यटन मंत्रालय के 20 क्षेत्रीय कार्यालयों के अलावा विदेश में 13 कार्यालय हैं, जो विकास और प्रोत्साहन गतिविधियों में व्यस्त हैं। विदेशों में स्थित कार्यालय जहां पर्यटकों को भारत आने और पर्यटन के लिए प्रोत्साहित कर उनसे तथा यात्रा संस्थान और प्रचार माध्यम से बराबर संपर्क रखते हैं, वहीं भारत स्थित क्षेत्रीय कार्यालय उनको सुविधा सेवाएं प्रदान करते हैं और मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए प्रत्येक राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाए रखते हैं। विश्व के संभावित पर्यटन बाजार में ये कार्यालय मंत्रालय की महत्वपूर्ण बाहरी चौकी का काम करते हैं। उनमें रणनीति विकसित कर उनको लागू करके स्वदेश आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ाना ही उनका प्रमुख क्रियाकलाप है।
भारतीय पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (आईटीडीसी)
भारतीय पर्यटन विकास निगम का गठन अक्तूबर, 1966 में किया गया। पर्यटन ढांचे के विस्तृत विकास सहित देश को विश्व में पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनाना ही इसका प्रमुख ध्येय है। निगम ने समूचे देश में एक बृहद् होटल श्रेणी बनाने में सफलता हासिल की है। प्रत्येक होटल में पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था, खान-पान, परिवहन, घरेलू पर्यटक एजेंसी, करमुक्त खरीददारी (ड्यूटी-फ्री शॉपिंग), मनोरंजन, प्रचार सेवाएं आदि उपलब्ध हैं। निगम निजी व सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों को पर्यटन विकास परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध कराता है।
सरकार की विनिवेश नीति के अनुपालन के तहत अब तक 18 होटलों का विनिवेश किया जा चुका है। बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निगम का पुनर्गठन युक्तिसंगत ढंग से किया गया है, ताकि वह देश में पर्यटन के विकास के अपने मूल लक्ष्य को निरंतर पूरा करता रहे। मौजूदा व्यापार क्षेत्रों को मजबूत करके और उनका विस्तार करते हुए आईटीडीसी ने नए आयामों/नई सेवाओं में विविधता को अपनाया है। इन सेवाओं में फुल फ्लेज्ड मनीचेंजर सेवाएं और वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर, आतिथ्य के क्षेत्र में प्रशिक्षण परामर्श और पर्यटन और इंजीनियरिंग परियोजनाओं के कार्यान्वयन और परामर्श सेवाएं आदि शामिल हैं।
भारतीय पर्यटन विकास एक ही छत के नीचे पर्यटन सेवाएं और सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला एक अग्रणी पर्यटन संगठन है। कुछ होटलों के विनिवेश के बाद निगम के मौजूदा नेटवर्क में अशोक समूह के आठ होटल, संयुक्त उपक्रम के सात होटल (एक निर्माणाधीन सहित), दो रेस्तरां (एक हवाई अड्डे पर है), 13 परिवहन इकाइयां और एक पर्यटक सेवा केंद्र, 37 करमुक्त खरीददारी केंद्र (जो अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू कस्टम हवाई अड्डों, दोनों पर हैं), एक करमुक्त भुगतान केंद्र, एक ध्वनि एवं प्रकाश कार्यक्रम और चार खान-पान दुकानें शामिल हैं। इसके अलावा निगम भरतपुर में एक होटल और कोसी में पर्यटन विभाग के स्वामित्व में एक रेस्तरां और अहमदाबाद के साबरमती में एसइएल शो का भी प्रबंध करता है।
निगम के अशोक इंटरनेशनल ट्रेड डिविजन की ओर से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को विश्व स्तर की करमुक्त खरीददारी सुविधाएं 38 बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध हैं और इससे देश के लिए महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है।
अशोक ट्रैवल्स एंड टूर्स (एटीटी) घरेलू/अंतर्राष्ट्रीय टिकटिंग, होटल आरक्षण और टूर पैकेजों, परिवहन व्यवस्था, मुद्रा परिवर्तन, वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर और सीमा शुल्क आदि सुविधाओं की व्यवस्था करता है।
विभिन्न सेवाओं को प्रोत्साहन देने के लिए विदेशी टूर ऑपरेटरों के साथ प्रत्यक्ष वार्तालाप सुनिश्चित करने के वास्ते आईटीडीसी के अशोक आरक्षण और विपणन सेवा प्रभाग ने जैसे राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों में बर्लिन में आईटीबी में हिस्सा लिया।
भारतीय पर्यटन विकास निगम का अशोक इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटेलिटी एंड टूरिज्म मैनेजमेंट (एआईएच एंड टीएम) तीन दशक से भी ज्यादा समय से मानव संसाधन विकास क्षेत्र के प्रमुख प्रयासों से जुड़ा रहा है। पर्यटन और स्वागत प्रबंधन के क्षेत्र में शिक्षा देने वाला यह प्रमुख संस्थान है। एआईएच एंड टीएम को आईएसओ-9001:2000 प्रमाणपत्र दिया गया है और इसने अपने स्तर पर पाकशास्त्र पर भी 18 महीने का क्राफ्ट/सर्टिफिकेट कोर्स आरंभ किया है। वैसे संस्थान प्रबंधन प्रशिक्षणार्थियों/अप्रेंटिसों को प्रशिक्षण तो देता ही है, आईटीडीसी के अधिकारियों के लिए कार्यकारी विकास कार्यक्रम भी चलाता है। इस संस्थान ने प्रतिष्ठित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के साथ हस्ताक्षरित समझौता-ज्ञापन के अधीन अगस्त 2004 से अंतर्राष्ट्रीय आतिथ्य और वाणिज्य प्रबंधन में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किया है।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 11-01-2011

