पुडुचेरी
| ब्यौरे | विवरण |
|---|---|
| 480 वर्ग कि.मी. | |
| 974,345 | |
| पुडुचेरी | |
| तमिल, तेलुगु, मलयालम, फ्रेंच और अंग्रेजी |
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इतिहास और भूगोल
पुदुचेरी के क्षेत्र में दक्षिण में फैले पुदुचेरी, कराईकल, माहे और यनाम के वे क्षेत्र शामिल हैं जहां पहले फ्रांसीसियों का शासन था। पांडिचेरी इस प्रदेश की राजधानी है जो कभी भारत में फ्रांस के निवासियों का मूल मुख्यालय हुआ करता था। यह 138 वर्षों तक फ्रांसीसी शासन के अधीन रहा। और 1 नवंबर 1954 को भारत में इसका विलय हो गया। इसके पूर्व में बंगाल की खाड़ी और शेष तीन तरफ तमिलनाडु है। पांडिचेरी से लगभग 150 किलोमीटर दक्षिण में पूर्वी तट पर कराईकल है जबकि माहे पश्चिम मे केरल से घिरे पश्चिमी घाटों के मालाबार तट पर स्थित है। यहां पर कालीकट हवाई अड्डे से पहुंचा जा सकता है जो माहे से 70 किलोमीटर दूर है। यनाम आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले से सटा हुआ है और विशाखापत्तनम से 200 कि.मी. की दूरी पर है।
कृषि
यहां की लगभग 24.37 प्रतिशत जनता कृषि और इससे संबंधित व्यवसायों में लगी है तथा इस क्षेत्र में 80.7 प्रतिशत कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हैं। धान मुख्य फसल है। दलहन उत्पादन में दूसरे नंबर पर है। माहे क्षेत्र का यहां की पौध-संपत्ति में प्रमुख योगदान है। नारियल, सुपारी और मसाले भी यहां उगाए जाते हैं। यनाम में उगाई जाने वाली दालें, मूंगफली तथा मिर्च यहां की वर्षा आधारित मुख्य व्यापारिक फसलें हैं।
उद्योग
कुल 7,982 औद्यौगिक इकाइयों द्वारा 2,177.78 करोड़ रु. के सकल निवेश से 93,044 लोगों को रोजगार मार्च 2008 तक प्रदान किया गया। इन औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन का कुल मूल्य 13,455.34 करोड़ रु. निकाला गया था।
वित्तीय वर्ष 2006-2007 ( मार्च 2007 तक) के दौरान निर्यात उन्मुख इकाइयों द्वारा निर्मित विभिन्न उत्पादों के संदर्भ में निर्यात का मूल्य 901.06 करोड़ रु. रहा।
सिंचाई
यूरोपीय संघ से सहायता के तहत कई तालाबों का सुधार किया गया है। शंकर परनी और पेन्नार नदियों पर अनेक स्थानों पर 8 बेड बांध बनाए गए हैं। उपरोक्त के अतिरिक्त भूतल को पुन: ठीक करने के लिए बेड बांध के निर्माण के अनिवार्य प्रस्ताव अराटचिकुप्पम, पेम्बियार, सेलीपेट के संकेंद्रण बिंदु पर वाडुकुप्पम के मलातार में पुडुचेरी में तथा कराइकनाल के मुलइयार, प्रवाडानायार और वंजीर एवं विलानुर में पुल एवं बेराज निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
बिजली
केंदशासित प्रदेश पुदुचेरी की बिजली की जरूरतें केंद्र सरकार के बिजली उत्पादन केंद्रों से अपना हिस्सा लेकर और पड़ोसी राज्यों के बिजली बोर्डों - तमिलनाडु बिजली बोर्ड, केरल राज्य बिजली बोर्ड से बिजली खरीदकर और पुदुचेरी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड, कराइकल से पूरी की जाती है। इस प्रदेश की कुल बिजली उपलब्धता 396.58 मेगावॉट है।
परिवहन
पुडुचेरी के लोक निर्माण विभाग द्वारा विभिन्न श्रेणियों की लगभग 677.525 कि. मी. सड़कों का रखरखाव किया जाता है। सड़कों के सुधार और पुलों के निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
शहरी विकास
पुदुचेरी उपनगरीय क्षेत्रों में अवजल निकासी की एक योजना 4.48 करोड़ रूपये की लागत से चल रही है। सर्वेक्षण के बाद कराईकल में अंडर ग्राउंड ड्रेनेज स्कीम पर काम चल रहा है। इस पर 34 करोड़ रूपये की लागत आएगी। सी.एस.एस. के अंतर्गत 2.47 करोड़ रूपये की लागत से भारती पार्क को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव है। बढ़ती हुई जरूरतों को पूरा करने के लिए लाजपेट तथा डुबरेपेट में नए अवजल शोधन संयंत्रों को चलाया जा रहा है।
पर्यटन

श्री अरबिंदो आश्रम, पुडुचेरी
चेन्नई के दक्षिण में 160 कि.मी. की दूरी पर स्थित पुदुचेरी (तमिल में पोडुचेरी के नाम से जाना जाता है)। यह प्रारंभिक अठारहवीं सदी से फ्रांस का एक उपनिवेश रहा है। यह एक दिलकश भारतीय शहर है जिसमें सुद्र के अतिरिक्त फ्रांस की सांस्कृतिक विरासत के जीवंत नमूने तथा एक आश्रय मौजूद है। अन्य फ्रांसीसी स्थलों—कराईकल (तमिलनाडु), माहे (केरल), यनाम (आंध्र प्रदेश), को मिलाकर पांडिचेरी केंद्रशासित प्रदेश बना है। इस नगर की खासियत यहां की सुनियोजित नगर योजना तथा फ्रांसीसी-तमिल वास्तुकला का संगम है। यह शहर फ्रांस के 18 वीं सदी के किलेबंद समुद्रतटीय शहर ‘बास्टाइड के नमूने पर बना है।
पुदुचेरी का प्रसिद्ध संतों की भूमि के रूप में प्रसिद्ध होने, रोम तथा यूनान के साथ प्राचीन व्यापारिक संबंध होने, फ्रांसीसी भारत की एक समय राजधानी होने तथा आध्यात्मिक शाक्ति को केंद्र होने का कारण पांडिचेरी के उथले पानी, नदियों, समुद्री तटों तथा दूसरे क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए प्रचुर पर्यटन संसाधन उपलब्ध है। पूर्व तथा पश्चिम संस्कृति से प्रभावित पांडिचेरी में हस्तशिल्प से तैयार चमड़े की वस्तुएं, मिट्टी के बरतन, हाथ से तैयार कागज, धूप तथा पुराना औपनिवेशिक फर्नीचर आदि अनोखी वस्तुएं मिलती हैं। हमारे पहले प्रधानमंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पांडिचेरी को ‘फ्रांसीसी संस्कृति की खिड़की’ कहा था।

ऑरोविले
महान संत, कवि तथा भारतीय आध्यात्मिकता के महान प्रवर्त्तक श्री अरविंद अपने जीवन के अंत तक अपनी दृष्टि तथा विचारों का प्रसार करते रहे। उनका आश्रम आज भी अपनी खास जीवन शैली के कारण विश्व-भर से लोगों को आकर्षित करता है।
स्रोत: भारत २००८ – एक संदर्भ वार्षिक ![]()

