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लक्षद्वीप

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 32 वर्ग कि.मी.
जनसंख्‍या 60,650
राजधानी कवारत्ती
मुख्‍य भाषाएं जेसरी (द्वीप भाषा) और माहल

इतिहास और भूगोल

इन द्वीपों के बारे में, इनके पूर्व इतिहास के बारे में अधिक जानकारी उपलब्‍ध नहीं है। समझा जाता है कि पहले-पहल लोग आकर अमीनी, अनद्रौत, कवारत्ती और अगात्ती द्वीपों पर बसे। पहले यह विश्‍वास किया जाता था कि द्वीप में आकर बसने वाले मूल लोग हिंदू थे और लगभग 14वीं शताब्‍दी में किसी समय अरब व्‍यापारियों के प्रभाव में आकर मुसलमान बन बए। परंतु हाल में पुरातत्‍वीय खोजों से पता चलता है कि लगभग छठी या सातवीं शताब्‍दी के आसपास यहां बौद्ध रहते थे। सर्वप्रथम इस्‍लाम धर्म को अपनाने वाले जिन लोगों और निवासियों का पता चलता है वे हिजरी वर्ष 139 (आठवीं शताब्‍दी) के समय के मालूम होते हैं। इस तारीख का पता अगात्ती में हाल में खोजे गए मकबरों के पत्‍थरों पर खुदी तारीखों से लगता है। स्‍थानीय पंरपरागत मान्‍यताओं के अनुसार, इस द्वीप में अरब सूफी अबैदुल्‍ला हिजरी सन 41 में इस्‍लाम को लेकर आए।

शायद 16वीं शताब्‍दी तक स्‍वतंत्र इन द्वीपों में बसने वाले लोगों को पुर्तगालियों के उपनिवेशों के आधिपत्‍य से मुक्ति पाने के लिए चिरक्‍कल के राजा की सहायता लेनी पडी। इससे वह यहां अपनी प्रभुत्‍व जमा सका और बाद में इन द्वीपों को कन्‍नानूर में मोपला समुदाय के प्रमुख अली राजा को जागीर के रूप में सौंप दिया जो बाद में स्‍वतंत्र शासक बन बैठा। अरक्‍कल शासन लोकप्रिय नहीं हुआ और 1787 में टीपू सुल्‍तान ने इन द्वीपों पर कब्‍जा करने की उत्तर के द्वीपवासियो की याचिका को स्‍वीकार कर लिया। टीपू सुल्‍तान के पतन के बाद ये द्वीप ईस्‍ट इंडिया कंपनी के अधिकार में दे दिए गए, परंतु इन पर कन्‍नानूर के शासक वस्‍तुत: तब तक शासन करते रहे जब तक कि अंतत: 20वीं शताब्‍दी के आरंभ में अंग्रेजों ने इन पर कब्‍जा नहीं कर लिया। 1956 में इन द्वीपों को मिलाकर केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया और त‍ब इसका शासन केंद्र सरकार के प्रशासक के माध्‍यम से चल रहा है। सन 1973 में लक्‍का दीव, मिनीकाय और अमीनदीवी द्वीपसमूहों का नाम लक्षद्वीप कर दिया। लक्षद्वीप प्रवाल द्वीपों का एक समूह है जिसमें 12 प्रवाल द्वीप, तीन प्रवाल भित्ति और जलमग्‍न बालू के तट शामिल हैं। यहां के कुल 27 द्वीपों में से 11 में आबादी है। ये द्वीप उत्तर में 8 डिग्री और 12 डिग्री, 3, अक्षांश पर तथा पूर्व में 71 डिग्री और 74 डिग्री देशांतर पर केरल तट से लगभग 280 से 480 कि.मी. दूर अरब सागर में फैले हुए हैं।

कृषि

यहां की प्रमुख फसल नारियल है और प्रतिवर्ष 580 लाख नारियल का उत्‍पादन होता है। 2,598 हेक्‍टेयर भूमि में यहां खेती की जाती है। यहां के नारियल को जैव उत्‍पाद (आर्गेनिक प्रोडक्‍ट) के रूप में जाना गया हैं। भारत में सार्वाधिक नारियल उत्‍पादन लक्षद्वीप में होता है तथा प्रति हेक्‍टेयर उपज 22,310 नारियल है और प्रत्‍येक पेड़ से प्रतिवर्ष औसतन 97 खजूरों का उत्‍पादन होती है। लक्षद्वीप के नारियलों में विश्‍व के अन्‍य नारियलों के मुकाबले सर्वाधिक तेल (72 प्रतिशत) पाया जाता है।

मछली पालन


मछली पालन

मछली पकड़ना यहां का एक अन्‍य प्रमुख कार्य है। इसके चारों ओर के समुद्र में मछलियां बहुत अधिक हैं। लक्षद्वीप में प्रति व्‍यक्ति मछली की उपलब्‍धता देश में सर्वाधिक है। सन 2006 में इस प्रदेश में 11,751 टन मछलियां पकड़ी गईं।

उद्योग

नारियल के रेशे और उससे बनने वाली वस्‍तुओ का उत्‍पादन यहां का मुख्‍य उद्योग हैं। सरकारी क्षेत्र के अधीन नारियल के रेशों की सात फैक्ट्रियां, सात रेशा उत्‍पादन एवं प्रदर्शन केंद्र और चार रेशा बंटने वाली इकाई हैं। इन इकाइयों में नारियल रेशों और सुतली के उत्‍पादन के अतिरिक्‍त नारियल के रेशों से बनी रस्सियां, कॉरीडोर मैट, चटाइयों और दरियों आदि का भी उत्‍पादन किया जाता है। विभिन्‍न द्वीपों में निजी क्षेत्र में भी कई नारियल रेशा इकाइयां काम कर रही हैं।

परिवहन

मुख्‍य भूमि से कोचीन और बेपोर बंदरगाह तक यात्रियों को लाने, ले जाने के लिए एम.वी.टीपू सुल्‍ताल, एम.वी. भारत सीमा एम.वी. आमीनदीनी, एम.वी. मिनीकाय और एम.वी. द्वीपसेतु नामक यात्री जलपोत माल ढोने के लिए एम.वी. उबेदुल्‍ला, एम.वी. थिन्‍नाकारा और एम.वी. लक्षदीव और एम.वी. चेरियम नामक चार मालवाही जहाज हैं। 60 मीट्रिक टन का तेलवाहक एम.वी. सुहेली का उपयोग यहां के छोटे जहाजों (फेरी) और मोटर नौकाओं आदि को ईंधन की आपूर्ति के लिए किया जाता है। कादीजा बीवी और हुमीदात बी हुमीदात बी जहाज मिनीकाय के अलावा अन्‍य द्वीपों को आपस में जोडता है। इसके अलावा एक द्वीप से दूसरे द्वीप और मुख्‍य भूमि से जोडने के लिए हेलीकाप्‍टर ऐंबुलेंस सेवा भी उपलब्‍ध है। इंडियन एयरलाइंस अगाती और कोच्चि के बीच दैनिक (रविवार छोडकर) हवाई सेवा है।

लक्षदीप की अगले 15 वर्षों की जहाजरानी आवश्‍यकताओं के लिए केंद्र सरकार के जहाजरानी मंत्रालय ने एक वृहद् योजना को मंजूरी दी है। भारत सरकार ने 3x150 का उच्‍चगति यात्री जहाज, 2x250 यात्री व 100 मीट्रिक टन मालवाहक जलपोत, 100/150 मीट्रिक टन तेल का बजरा एलपीजी सिलेंडर जहाज, आठ जमीनी बजरे, एक 400 यात्रियों का जलपोत, और दो माल ढोने वाली गाड़ियों के अधिग्रहण की संस्‍तुति की है। इसके अलावा भारत सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सुरक्षा योजना के तहत 3x50 यात्री जलपोत और 15 यात्रियों की क्षमता वाली एक नौका अंतरद्वीपीय सेवा हेतु भी स्‍वीकृत की है। प्रशासन ने इसमें से 3x150 यात्री जलपोत, एक 15 यात्री वाले जलयान और एक 10 टन माल ढोने वाले जहाज के निर्माण का ऑर्डर दिया है। ढोने वाली गाड़ी 9 मई, 2006 को सौंप दी गई और यह शीघ्र ही काम करना शुरू कर देगी। 15 यात्री और 150 यात्री वाले जलयान जून 2007 में दे दिए जाएंगे, जैसी कि वृहद योजना में सिफारिश की गई है। 2006-07 में 2x250 यात्री जलयान, छह जमीनी बजरे, एक 150 मी. टन तेल बजरा, एक ढोने वाली गाड़ी तथाएक एलपीजी सिलेंडर जलपात और 2007-08 में एक 400 यात्री जलयान तथा दो जमीनी बजरे अधिग्रहीत करने का प्रस्‍ताव है। 2x250 यात्री जलयान व 100 मी.टन मालवाहक जलपोत के लिए निर्माण अनुबंध के अनुसर से क्रमश: दिसंबर 2009 तथा जून 2010 में दिए जाएंगे।

पर्यटन स्‍थल


एक तट

प्रदेश में पर्यटन महत्‍वपूर्ण उद्योग बनता जा रहा है। महत्‍वपूर्ण पर्यटन स्‍थल हैं : अगात्ती, बनगारम, कलापेनी, कादमत, कवारत्ती और मिनीकाय आदि। वर्ष 2006 में यहां 23,303 पर्यटक घूमने आए। इनमें से 2,622 विदेशी थे।

प्रदेश में पर्यटन महत्‍वपूर्ण उद्योग बनता जा रहा है। महत्‍वपूर्ण पर्यटन स्‍थल हैं अगात्ती, बनगारम, कलापेनी, कादमत, कवारत्ती और मिनीकाय आदि।

स्रोत: भारत २००८ – एक संदर्भ वार्षिक