अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
| ब्यौरे | विवरण |
|---|---|
| 8,249 वर्ग कि.मी. | |
| 356,152 | |
| पोर्ट ब्लेयर | |
| हिंदी, निकोबारी, तमिल, बांग्ला, मलयालम और तेलुगु। |
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इतिहास और भूगोल
अंडमान और निकोबार द्वीप समूहों का संघ राज्य क्षेत्र 6° और14° उत्तरी अक्षांश और 92° तथा 94° पूर्वी देशांश के बीच स्थित है। ये द्वीप 10° उत्तरी अक्षांश पर स्थित हैं जिसे अंडमान द्वीप समूह कहते हैं जबकि 10° उत्तरी अक्षांश पर स्थित दक्षिणी द्वीप को निकोबार द्वीप समूह कहते हैं। इन द्वीपसमूहों के मौसम को नम, उष्ण कटिबंधी तटीय मौसम के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इन द्वीपों को दक्षिण पश्चिम और उत्तर पूर्वी मानसून से वर्षा प्राप्त होती है और यहां मई से दिसम्बर के बीच अधिकतम बारिश होती है।
इस द्वीप के वनों में रहने वाले मूल अधिवासी शिकार और मछली पकड़ने का कार्य करते हैं। इनकी चार नेग्रीटो जनजातियां हैं, जो हैं ग्रेट अंडमानी, ओंज, जरावा और सेंटीनेलेस जो द्वीप समूहों के अंडमान समूह में पाई जाती हैं तथा दो मंगोली जनजातियां अर्थात निकोबारी और शाम्पेन्स द्वीप के निकोबार समूह में पाई जाती हैं।
कृषि
प्रदेश में कुल 51,694.35 हेक्टेयर भूमि में खेती की जाती है। इसमें से 8,068.71 हेक्टेयर भूमि सुनामी/भूकंप से तबाह हो गई। इसमें से 2,177.70 हेक्टेयर में धान व अन्य फसल तथा 5,891.01 हेक्टेयर में पौधों की फसल नष्ट हो गई। 4206.64 हेक्टेयर खेती की भूमि स्थायी रूप से पानी में डूब गई।
धान यहां अनाज की प्रमुख खाद्यान्न फसल है जो कि मुख्यत: अंडमान द्वीपसमूह में उगाई जाती है जबकि निकोबार द्वीपसमूह की मुख्य नकदी फसलें नारियल और सुपारी हैं। रबी के मौसम के दौरान दालें, तिलहन और सब्जियां उगाई जाती हैं जिसके बाद धान की फसल बोई जाती है। यहां के किसान पहाडी जमीन पर भिन्न-भिन्न प्रकार के फल, जैसे आम, सेपोटा, संतरा, केला, पपीता, अनन्नास और कंदमूल आदि उगाते हैं। यहां बहुफसल व्यवस्था के अंतर्गत मसाले, जैसे - मिर्च, लौंग, जायफल तथा दालचीनी आदि भी उगाए जाते हैं। इन द्वीपों में रबड, रेड आयल, ताड़ तथा काजू आदि भी थोडी-बहुत मात्रा में उगाए जाते हैं।
उद्योग
राज्य में 31 मार्च, 2007 तक 1833 लघु ग्रामीण एवं हस्तशिल्प इकाइयां पंजीकृत थीं। झींगा मछली प्रसंस्करण के क्षेत्र में दो इकाइयां शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख हैं। इसके अतिरिक्त सीपी एवं लकड़ी आधारित हस्तशिल्प इकाइयां हैं। लघु उद्योग इकाइयां पेंट तथा वार्निश, छोटी आटा पिसाई चक्कियां, शीतल पेय एवं शराब, स्टील फर्नीचर एवं अन्य उपकरण, रेडीमेड कपडे, लोहे के दरवाजे, ग्रिल इत्यादि के उत्पादन का कार्य करती हैं। लघु अद्योग इकाइयां सीपी शिल्प, बेकरी उत्पाद, चावल निकालने तथा फर्नीचर बनाने का कार्य भी कर रही है। अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह समन्वित विकास निगम ने पर्यटन, मत्स्य उद्योग तथा औद्योगिक ऋण के क्षेत्रों में काम करना आरंभ कर दिया है तथा एलाएंस एयर/जेट एयरवेज/एयर डेक्कन के अधिकृत एजेंट के रूप में भी कार्य कर रहा है।
परिवहन
अंडमान और निकोबार प्रशासन का मोटर परिवहन विभाग द्वीप समूहों के उत्तरी तथा दक्षिणी समूह 13 स्टेशनों से प्रचालित होता है। विभाग में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रामीण क्षेत्र में मुख्यत: प्रचालन बस द्वारा होता है और यहां कुल 205 बसें चलाई जाती हैं। एटीआर एक्सप्रेस सेवा के लिए कम्प्यूटरीकृत टिकट देने की प्रणाली 15 अगस्त, 2007 से कार्यान्वित की गई है, जहां से अग्रिम टिकट प्राप्त किया जा सकता है।
वर्ष 2007-08 के दौरान कुल 135.88 लाख लोगों ने राज्य परिवहन सेवा की बसों में यात्रा की और विभाग को 1075.22 लाख रु. का राजस्व प्राप्त हुआ। अत: अब यह स्पष्ट है कि विभाग द्वारा न केवल बेहतर सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रदान करने में लगातार प्रगति की जा रही है बल्कि इससे कमाई में भी वृद्धि हुई है।
पर्यटन स्थल

सेल्यूलर जेल, अंडमान
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह एक पर्यावरण अनुकूल सुरक्षित पर्यटक स्थल के रूप में विख्यात है। पर्यटक के इस स्वर्ग में सेल्यूलर जेल, रॉस आइलैंड तथा हैवलॉक आइसलैंड जैसे विशिष्ट स्थान है।
अंडमान के उष्णकटिबंधीय सदाबहार घने वन, सुंदर रूपहले व रेतीले समुद्र तट, सर्पाकार मैंग्रोव युक्त क्रीक, दुर्लभ समुद्री वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं की प्रजातियों युक्त समुद्री परिवेश तथा मूंगे यहां पर्यटकों को एक स्मरणीय अनुभव प्रदान करते हैं। समुद्र तट पर बने रिसार्ट्स, जल क्रीड़ा केंद्रों तथा पानी के साहसिक खेलों, ट्रेकिंग, आईलैंड कैंपिंग, प्रकृति के बीच निवास (नेचर ट्रेल) स्कूबा डाइविंग जैसे साहसिक पर्यटन के रूप में यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।
इन द्वीपों की यात्रा पर आने वाले पर्यटकों के ठहरने की आरामदेह व्यवस्था के लिए पर्यटन विभाग की ओर से द्वीपों के विभिन्न भागों में विश्राम गृहों का संचालन किया जाता है। यहां के प्रमुख पर्यटक स्थलों में नेतृत्व संग्रहालय, समुद्री संग्रहालय, जलक्रीड़ा परिसर, गांधी पार्क उत्तरी खाड़ी (नार्थ बे) वाइपर आईलैंड, रॉस आईलैंड, चिड़िया टापू (बर्ड वाचिंग), रेडस्किन आईलैंड, कोर्बिन्स कोव बीच तथा नील आईलैंड, हैवलॉक आईलैंड, सिंक्बे, लघु अंडमान, दिग्लीपुर (रॉस एवं स्मिथ) इत्यादि हैं।
मुख्यभूमि से द्वीप हवाई और समुद्री यात्रा द्वारा अच्छी तरह संपृक्त हैं। कोलकाता और चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर के बीच इंडियन एयरलाइंस, डेक्केन और जेटलाइट की नियमित उड़ानें हैं। चेन्नई, कोलकाता और विशाखापट्टनम से यहां के लिए नियमित यात्री नौका सेवा है।
वन
इन द्वीपों के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 7,171 वर्ग किलोमीटर भाग वनों से ढका हुआ है। इन द्वीपों पर लगभग सभी प्रकार के वन जैसे उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन, उष्णकटिबंधीय अर्द्ध सदाबहार वन, आर्द्र पर्णपाती, गिरि शिखर पर होने वाले तथा तटवर्ती और दलदली बन पाए जाते हैं। अंडमान निकोबार में विभिन्न प्रकार की लकडियां पाई जाती हैं। सबसे बहुमूल्य लकडियां पाडोक तथा गरजन की हैं। ये निकोबार में नहीं मिलतीं।
वन्यजीवन
इन द्वीपों में 96 वन्यजीव अभयारण्य, नौ राष्ट्रीय पार्क तथा एक जैव संरक्षित क्षेत्र (बायोरिजर्व) हैं।
स्तनपायी - अब तक अधिसूचित कुल 55 स्थलीय एवं 7 समुद्री स्तनपायी प्रजातियों में से 32 क्षेत्र विशेष में पाई जाती हैं।
पक्षी - इन द्वीपों में पक्षियों की 246 प्रजातियां एव उपप्रजातियां मिलती हैं जिनमें से 99 प्रजातियां एवं उपप्रजातियां क्षेत्र विशेष में पाई जाती हैं।
सरीसृप - इस राज्य में सरीसृपों की 76 प्रजातियां पाई जाती हैं जिसमें से 24 क्षेत्र विशेष तक सीमित हैं।
समुद्री जीव - इन द्वीपों के समूद्र में मछलियों की 1200 से अधिक प्रजातियां, इकाइनो डर्म की 350, घोंघा (मोलस्क) समूह की 1000 तथा अन्य सूक्ष्म प्रजातियां पाई जाती हैं। कशेरूकी प्राणियों में मुख्यत: ड्यूगॉग, डॉल्फिन, व्हेल, खारे पानी के घडियाल, समूद्री कछुए तथा समुद्री सर्प इत्यादि मिलते हैं।
मूंगा एवं प्रवाल - अभी तक 61 वर्गों के प्रवालों की 179 प्रजातियों के बारे में जानकारी मिली है। पूर्वी तट पर मुख्यत: झब्बेदार (फ्रिजिंग) प्रकार के तथा पश्चिमी तट पर अवरोधी (बैरियर) प्रकार के प्रवाल पाए जाते हैं।
स्रोत: भारत २००८ – एक संदर्भ वार्षिक ![]()

