पश्चिम बंगाल
| ब्यौरे | विवरण |
|---|---|
| 88,752 वर्ग किलोमीटर | |
| 80,176,197 | |
| कोलकाता | |
| बांग्ला |
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इतिहास और भूगोल
भारत के प्रागैतिहासिक काल के इतिहास में भी बंगाल का विशिष्ट स्थान है। सिकंदर के आक्रमण के समय बंगाल में गंगारिदयी नाम का साम्राज्य था। गुप्त तथा मौर्य सम्राटों को बंगाल पर विशेष प्रभाव नहीं पडा। बाद में शशांक बंगाल नरेश बना। कहा जाता है कि उसने सातवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में उत्तर-पूर्वी भारत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके बाद गोपाल ने सत्ता संभाली और पाल राजवंश की स्थापना की। पालों ने विशाल साम्राज्य खड़ा किया और चार शताब्दियों तक राज्य किया। पाल राजाओं के बाद बंगाल पर सेन राजवंश का अधिकार हुआ, जिसे दिल्ली के मुस्लिम शासकों ने परास्त किया। सोलहवीं शताब्दी में मुगलकाल के प्रारंभ से पहले बंगाल पर अनेक मुसलमान राजाओं और सुलतानों ने शासन किया।
मुगलों के पश्चात् आधुनिक बंगाल का इतिहास यूरोपीय तथा अंग्रेजी व्यापारिक कंपनियों के आगमन से आरंभ होता है। सन 1757 में प्लासी के युद्ध ने इतिहास की धारा को मोड़ दिया जब अंग्रेजों ने पहले-पहल बंगाल और भारत में अपने पांव जमाए। सन 1905 में राजनीतिक लाभ के लिए अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन कर दिया लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व में लोगों के बढ़ते हुए आक्रोश को देखते हुए 1911 में बंगाल को फिर से एक कर दिया गया। इससे स्वतंत्रता आंदोलन की ज्वाला और तेजी से भड़क उठी, जिसका पटाक्षेप 1947 में देश की आजादी और विभाजन के साथ हुआ।
1947 के बाद देसी रियासतों के विलय का काम शुरू हुआ और राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की सिफारिशों के अनुसार पड़ोसी राज्यों के कुछ बांग्लाभाषी क्षेत्रों को पश्चिम बंगाल में मिला दिया गया।
इस राज्य के पूर्व बांग्लादेश, पश्चिम में नेपाल, उत्तर-पूर्व में भूटान, उत्तर में सिक्किम, पश्चिम में बिहार, झारखंड, दक्षिण-पश्चिम में उड़ीसा तथा दक्षिण में बंगाल की खाड़ी हैं।
कृषि
राज्य की आमदनी में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और राज्य के हर चार में से तीन व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि कार्यों में लगे हैं। वर्ष 2006-07 में राज्य में कुल खाद्य उत्पादन 15820 हजार टन था जिसमें से चावल का उत्पादन 14745.9 हजार टन, गेहूं और दलहनों का उत्पादन क्रमश: 799.9 हजार टन और 154.4 हजार टन रहा। इसी अवधि में तिलहनों का उत्पादन 645.4 हजार टन और आलू का 5052 हजार टन हुआ। 2006-07 में पटसन का उत्पादन 8411.5 हजार गांठें रहा।
उद्योग
वर्ष 2007 में, उपलब्ध जानकारी के अनुसार 3677.51 करोड़ रुपए की निवेश वाली 96 परियोजनाएं चालू की गईं। इसके अलावा हलदिया पेट्रो केमिकल्स की 34 अधोगामी परियोजनाओं में 160.15 करोड़ रु. का निवेश किया गया है और इस प्रकार कुल निवेश 3837.66 करोड़ रु. हो गया है यह अपेक्षित है कि 150 यूनिट की कुल संख्या के साथ 4014.84 करोड़ रु. का कुल निवेश 2007 के अंत तक राज्य में कार्यान्वित किया जाएगा और कार्यान्वित परियोजनाओं की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी।
राज्य में 2007 के दौरान कार्यान्वित सबसे महत्वपूर्ण परियोजना जय बालाजी इंडस्ट्री लि. द्वारा 153.73 करोड़ रु. की केप्टिव विद्युत संयंत्र परियोजना है जो समेकित इस्पात संयंत्र है। हुगली मेट कोप और विद्युत कंपनी लि., 140 करोड़ रु. की लागत से मैट नर्जिकल कोक एण्ड पावर प्लांट, अम्भुजा सीमेंट लि., 165 करोड़ रु. की विशाल विस्तार परियोजना, फरक्का, मुर्शिदाबाद और आईओसीएल 154.36 करोड़ रु. वाली विस्तार परियोजना पुरबा मेदिनीपुर में की जानी है। छोटे इस्पात संयंत्र, स्पंज आयरन, ढलाई वाला पिग आयरन आदि में भारी निवेश किया गया है। बिजली की आसानी से उपलब्धता, मालभाड़ा साम्यता को हटाने, उद्योग के लिए संगत प्राकृतिक संसाधनों के पास स्थित होने तथा श्रमिक बल के पारंपरिक रूप से लौह और इस्पात इकाइयों में प्रचालन दक्षता पाए जाने के कारण इस क्षेत्र में निवेश में वृद्धि हुई है। हाल के वर्षों में सीमेंट उद्योग में निवेश भी बढ़ गया है।
जनवरी से अगस्त 2007 के दौरान 34 हलदिया पेट्रो केमिकल्स लि. अधोगामी इकाइयों में 160.15 करोड़ रु. का निवेश किया गया है। ये इकाइयां अधिकांशत: निर्माण प्लास्टिक मदों में संलग्न हैं जैसे बाल्टियां पात्र, मोल्डीड फर्नीचर, बैटरी के पात्र, नायलॉन की जालियां, घरेलू सामान आदि।
राज्य सरकार ऑटो मोबाइल क्षेत्र में एक सशक्त अवसर देखती है और इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए विशिष्ट नीतिगत पहलों को लगाया गया है। टाटा मोटर्स लि. की छोटी कार वाली परियोजना 2.50 लाख कार प्रतिवर्ष की योजनाबद्ध क्षमता के साथ पहले ही कार्यान्वयन अधीन है। संयंत्र में 1700 करोड़ रु. के निवेश के अलावा सहायक उद्योगों में 500 करोड़ रु. के निवेश से सिंगूर में लगाई गई टाटा मोटर परियोजना से इस क्षेत्र की सामाजिक – आर्थिक परिस्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।
पश्चिम बंगाल में किए गए कुल निवेश में से उच्चतम निवेश इस्पात और विद्युत क्षेत्र में होगा। राज्य में उच्च संभाव्यता निवेशक सेल था, जिसने कुलटी, बनपुर और दुर्गापुर में इस्पात उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए 20,000 करोड़ रु. के निवेश की योजना घोषित की है। इसके बाद एल एण्ड टी पावर डेवलपमेंट का स्थान है, जिसमें हलदिया में विद्युत उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए हलदिया में 20,000 करोड़ रु. की योजना बनाई है।
राज्य सरकार ने औद्योगिक निवेश की संभाव्यता के सृजन द्वारा तीव्र आर्थिक विकास की जरूरत को पहचाना है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश और इस क्षेत्र में राष्ट्रीय वृद्धि दर के 30 प्रतिशत की तुलना में निर्यात की वृद्धि दर में 48 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कोलकाता में लगभग 45000 व्यावसायिकों को शामिल करते हुए 250 सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवाओं की कंपनियां कार्यरत थीं। साल्ट लेक के सेक्टर 5 में सूचना प्रौद्योगिकी केन्द्र भारत का पहला पूरी तरह समेकित इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स है जो हवाई अड्डे के पास प्रदूषण मुक्त 150 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है।
बिजली और सिंचाई
राज्य में बड़ी एवं मंझोली सिंचाई परियोजनाओं, राज्य में इस समय तीस्त बैराज परियोजना एवं सुवर्णरेखा बैराज परियोजना पर काम चल रहा है। इनकी वजह से दसवीं परियोजना में 51.475 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता ही सृजित की जा सकी। 11वीं योजना का लक्ष्य 210 हजार हेक्टेयर सिंचाई संभाव्यता का सृजन करना है। कुल 1,38,520 हेक्टेयर की संचित सिंचाई 2006-07 तक तिस्ता बराज परियोजना में बनाई गई है जो 5,27,000 हेक्टेयर की अंतिम संभाव्यता की तुलना में है। सुबाम रेखा बराज परियोजना में खरीफ की 99248 हेक्टेयर तथा रबी की 30,766 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई पूरबा और पश्चिम मैदनीपुर जिलों में संकल्पित है।
पुरुलिया जिले में मध्यम 32 सिंचाई योजनाओं में से 25 सिंचाई योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। राज्य में अंतिम लघु सिंचाई संभाव्यता 44.34 लाख हेक्टेयर आंकी गई है, जिसमें से 31.34 लाख हेक्टेयर भूमि भूजल संसाधनों तथा 13.00 लाख हेक्टेयर भूमि सतही जल संसाधनों से संचित की जानी है। वर्ष 2006-07 तक 38.64 लाख हेक्टेयर लघु सिंचाई संभाव्यता का सृजन किया गया, जिसमें से 81.96 प्रतिशत का उपयोग वर्ष के दौरान 31.67 लाख हेक्टेयर में किया जा सका।
पश्चिम बंगाल में इस समय पश्चिम बंगाल विद्युत विकास निगम लिमिटेड, पश्चिम बंगाल राज्य बिजली बोर्ड, कोलकाता विद्युत आपूर्ति निगम, दुर्गापुर परियोजना लि., दिशेरगढ़ विद्युत आपूर्ति निगम इत्यादि द्वारा बिजली का उत्पादन किया जाता है। वर्ष 2007-08 के दौरान राज्य में (अप्रैल से नवम्बर) तक कुल 21926.2 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया गया। वर्ष 2007-08 के दौरा (नवंबर 2007 तक) कुल 36,944 मौजों का विद्युतीकरण किया गया एवं 1,14,516 पंपसेटों को चालू किया गया।
परिवहन
सडकें: 31 मार्च 2002 को राज्य में सड़कों की कुल लंबाई 91,970 किलोमीटर थी जिसमें 1,898 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल थे। सड़कों की लंबाई इस प्रकार है : प्रांतीय राजमार्ग - 3533 किलोमीटर, लोक निर्माण विभाग सड़कें - 12565 कि.मी. और जिला सड़कें - 42,479 कि.मी.।
रेलवे: वर्ष 2005-06 में राज्य में कुल 4499.82 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग थे। राज्य के प्रमुख रेलवे जंक्शन हैं : हावड़ा, आसनसोल, सियालदह, बंडिल, बर्दमान, खड़गपुर तथा यू जलपाईगुडी।
त्योहार

दुर्गा पूजा, पश्चिम बंगाल
दुर्गा पूजा सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है इसके अलावा काली पूजा या दीपावली और वसंत पंचमी, लक्ष्मी पूजा, होली, शिव रात्रि, जन्माष्टमी, इदुल फितर, आदि।
पर्यटन स्थल

रॉयल बंगाल टाइगर, पश्चिम बगाल
महत्वपूर्ण पर्यटन केन्द्र हैं कोलकाता, दीघा (मिदनापुरे), बाक्खाली सी रिजॉर्ट, सागर द्वीप और सुंदरबन्स (साउथ 24 परगना), बंदेल, ताराकेश्वर, कमरापुकार (हुगली), गधियारा (हावड़ा), शांति निकेतन और बकरेश्वर (बिरभूम), दुर्गापुर (बर्दवान), मुकुटमणिपुर और विष्णुपुर (बाकुरा), अयोध्या पर्वत (पुरुलिया), मुर्शिदाबाद, गौर, पडुवा (मालदा), दार्जिलिंग, मिरिक, कालीमपोंग, संदाकफू और फलूत तथा कुर्सेयॉग (दार्जिलिंग) जलदापारा और डूअर्स (जलपाईगुड़ी)।
स्रोत: भारत २००८ - एक संदर्भ वार्षिक ![]()

