उत्तर प्रदेश
| ब्यौरे | विवरण |
|---|---|
| 2,40,928 वर्ग किलोमीटर | |
| 166,052,859 | |
| लखनऊ | |
| हिंदी और उर्दू |
राज्य सरकार की जिले की वेबसाइट (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
जिले की वेबसाइट
भारत पर तस्वीरों के ढेर सारे खजाने को देखने के लिए चित्र दीर्घा अनुभाग में देखें
इतिहास और भूगोल
उत्तर प्रदेश का इतिहास बहुत प्राचीन और दिलचस्प है। उत्तर वैदिक काल में इसे ब्रहार्षि देश या मध्य देश के नाम से जाना जाता था। यह वैदिक काल के कई महान ऋषि-मुनियों, जैसे - भारद्वाज, गौतम, याज्ञवल्क्य, वसिष्ठ, विश्वामित्र और वाल्मीकि आदि की तपोभूमि रहा। आर्यो की कई पवित्र पुस्तकें भी यहीं लिखी गईं। भारत के दो महान महाकाव्य रामायण और महाभारत, की कथा भी इसी क्षेत्र पर आधारित लगती हैं।
ईसा पूर्व छठी शताब्दी में उत्तर प्रदेश दो नए धर्मों-जैन और बौद्ध के संपर्क में आया। बुद्ध ने अपनी सर्वप्रथम उपदेश सारनाथ में दिया और अपने संप्रदाय की शुरूआत की तथा उत्तर प्रदेश के ही कुशीनगर में उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया। उत्तर प्रदेश में कई नगर, जैसे- अयोध्या, प्रयाग, वाराणसी और मथुरा विद्या अध्ययन के प्रसिद्ध केंद्र बन गए थे। मध्य काल में उत्तर प्रदेश मुस्लिम शासकों के अधीन हो गया जिससे हिंदू और इस्लाम धर्मों के संपर्क से नई मिली-जुली संस्कृति का जन्म हुआ। तुलसीदास और सूरदास, रामानंद और उनके मुस्लिम शिष्य कबीर तथा कई अन्य संतो ने हिन्दी और अन्य भाषाओं के विकास में योगदान दिया।
उत्तर प्रदेश ने अपनी बौद्धिक श्रेष्ठता को ब्रिटिश शासनकाल में भी बनाए रखा। अंग्रेजों ने आगरा और अवध नामक दो प्रांतो को मिलाकर एक प्रांत बनाया जिसे आगरा और अवध संयुक्त प्रांत के नाम से पुकारा जाने लगा। बाद में 1935 में इसे संक्षेप में केवल संयुक्त प्रांत कर दिया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् जनवरी 1950 में संयुक्त प्रांत का नाम ‘उत्तर प्रदेश’ रखा गया।
उत्तर प्रदेश के उत्तर में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाण, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा पूर्व में बिहार राज्य है। उत्तर प्रदेश को दो प्रमुख भागों में विभक्त किया जा सकता है: 1. दक्षिणी पर्वत, तथा 2. गंगा का मैदान।
कृषि
उत्तर प्रदेश में लगभग 66 प्रतिशत जनसंख्या का मुख्य व्यवसाय कृषि है। राज्य में निवल 167.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि होती है। 2003-04 में राज्य में 255.67 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 130.22 लाख मीट्रिक टन चावल, 23.80 लाख मीट्रिक टन दालें, 6.44 लाख मीट्रिक टन तिलहन और 1127.54 लाख मीट्रिक टन गन्ने का उत्पादन हुआ। 2003-04 में कुल 442.58 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ।
उद्योग और खनिज
वर्ष 2004-05 में राज्य में कुल 5,21,835 लघु इकाइयां थीं जिनमें 5,131 करोड़ रूपये की पूंजी लगी हुई थी और 20,01,000 लोग काम कर रहे थे। वर्ष 2004-05 में राज्य में लगभग 45.51 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। राज्य में 68 कपड़ा मिलें और 32 आटोमोबाइल कारखाने हैं, जिनमें 5,740 करोड़ रूपये की पूंजी लगी हुई है 20,280 लोगों को रोजगार मिला हुआ हैं।
सन 2011 तक नोएडा प्राधिकरण के अंतर्गत 102 सेक्टर विकसित करने की योजना है। इस प्राधिकरण में औद्योगिक क्षेत्र, आवास क्षेत्र, ग्रुप हाउसिंग क्षेत्र, आवासीय भवन, व्यावसायिक परिसंपत्तियां और संस्थागत क्षेत्र शामिल हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के नमूने पर राज्य में अन्य औद्योगिक क्षेत्रों का विकास करने के लिए कदम उठाए गए हैं। साफ्टवेयर निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कानपुर में एक साफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क स्थापित किया गया है। ऐसे ही पांच अन्य साफ्टवेयर पार्क और खोले जाएंगे।
सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत चूनापत्थर, मैगनेसाइट, कोयला, रॉक फास्फेट, डोलोमाइट और सिलिकन रेत का खनन किया जाता है। छोटे खनिजों तथा कुछ और बडे खनिजों, जैसे- चूना पत्थर, सिलिका, मैगनेसाइट, फाइरोफाइलाइट और डायोस्पार के बडे पैमाने पर उत्पादन का अधिकतर कार्य निजी क्षेत्र में है। खनिज आधारित महत्वपूर्ण उद्योगों में सोनभद्र का बडा सीमेंट संयंत्र शामिल हैं।
सिंचाई और बिजली
14 जनवरी, 2000 को उत्तर प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड को पुनर्गठित करके उत्तर प्रदेश विद्युत निगम, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन और उत्तर प्रदेश पनबिजली निगम की स्थापना की गई हैं।
2004-05 के दौरान इस राज्य की सिंचाई क्षमता बढ़ाकर 319.17 लाख हेक्टेयर के स्तर तक पहुंचाने के लिए 98,715 करोड़ रूपये व्यय किए गए। उत्तर प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड अपनी स्थापना के समय इसके पन बिजलीघरों और ताप बिजलीघरों की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 2,635 मेगावाट थी जो बढ़ाकर 4,621 मेगावाट हो गई है।
परिवहन
सड़कें: उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग की सड़कों की कुल लंबाई 1,18,946 किलोमीटर है। इसमें 3,869 किलामीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग, 9,097 किलोमीटर लंबे प्रांतीय राजमार्ग, 1,05,980 किलोमीटर अन्य जिला सड़कें तथा 72,931 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें हैं।
रेलवे मार्ग: रेलवे के उत्तरी नेटवर्क काम मुख्य जंक्शन लखनऊ है। अन्य महत्वपूर्ण रेल जंक्शन हैं - आगरा, कानपुर, इलाहाबाद, मुगलसराय, झांसी, मुरादाबाद, वाराणसी, टूंडला, गोरखपुर, गोंडा, फैजाबाद, बरेली और सीतापुर।
उड्डयन: प्रदेश में लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, आगरा, झांसी, बरेली, हिंडन (गाजियाबाद), गोरखपुर, सरसावा (सहारनपुर) और फुर्सतगंज (रायबरेली में हवाई अड्डे हैं।
त्योहार

कुंभ मेला, इलाहाबाद
इलाहाबाद में प्रत्येक बारहवें वर्ष कुंभ मेला आयोजित होता है जो कि संभवत: दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। इसके अलावा इलाहबाद में प्रत्येक 6 साल में अर्द्ध कुंभ मेले का आयोजन भी होता है। इलाहाबाद में ही प्रत्येक वर्ष जनवरी में माघ मेला भी आयोजित होता है, जहां बडी संख्या में लोग संगम में डुबकी लगाते हैं। अन्य मेलों में मथुरा, वृंदावन व अयोध्या के झूला मेले शामिल हैं, जिनमें प्रतिमाओं को सोने एवं चांदी के झूलों में रखा जाता है। ये झूला मेले एक पखवाडे तक चलते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा में डुबकी लगाना अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसके लिए गढ़मुक्तेश्वर, सोरन, राजघाट, काकोरा, बिठूर, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, और अयोध्या में बडी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं। आगरा जिले के बटेश्वर कस्बे में पशुओं का प्रसिद्ध मेला लगता है। बाराबंकी जिले का देवा मेला मुस्लिम संत वारिस अली शाह के कारण काफी प्रसिद्ध हो गया है।
इसके अतिरिक्त यहां हिंदू तथा मुस्लिमों के सभी प्रमुख त्योहारों को राज्य भर में मनाया जाता है।
पर्यटन स्थल

ताज महल, आगरा
उत्तर प्रदेश में सभी प्रकार के सैलानियों के लिए आकर्षण की कई चीजें हैं। प्राचीन तीर्थ स्थानों में वाराणसी, विंध्याचल, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग, नैमिषारण्य, मथुरा, वृंदावन, देवा शरीफ, फतेहपुर सीकरी में शेख सलीम चिश्ती की दरगाह, सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, संकिसा, कंपिल, पिपरावा और कौशांबी प्रमुख हैं। आगरा, अयोध्या, सारनाथ, वाराणसी, लखनऊ, झांसी, गोरखपुर, जौनपुर, कन्नौज, महोबा, देवगढ, बिठूर और विंध्याचल में हिंदू एवं मुस्लिम वास्तुशिल्प और संस्कृति के महत्वपूर्ण खजाने हैं।
स्रोत: भारत २००८ - एक संदर्भ वार्षिक ![]()

