त्रिपुरा
| ब्यौरे | विवरण |
|---|---|
| 10,491.69 वर्ग कि.मी. | |
| 3,199,203 | |
| अगरतला | |
| बांग्ला और काकबरक |
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इतिहास और भूगोल
त्रिपुरा का बडा पुराना और लंबा इतिहास है। इसकी अपनी अनोखी जनजातीय संस्कृति तथा दिलचस्प लोकगाथाएं है। इसके इतिहास को त्रिपुरा नरेश के बारे में ‘राजमाला’ गाथाओं तथा मुसलमान इतिहासकारों के वर्णनों से जाना जा सकता है। महाभारत और पुराणों में भी त्रिपुरा का उल्लेख मिलता है। राजमाला के अनुसार त्रिपुरा के शासकों को ‘फा’ उपनाम से पुकारा जाता था जिसका अर्थ ‘पिता’ होता है। 14वीं शताब्दी में बंगाल के शासकों द्वारा त्रिपुरा नरेश की मदद किए जाने का भी उल्लेख मिलता है। त्रिपुरा के शासकों को मुगलों के बार-बार आक्रमण का भी सामना करना पडा जिसमें आक्रमणकारियों को कमोबेश सफलता मिलती रहती थी। कई लड़ाइयों में त्रिपुरा के शासकों ने बंगाल के सुल्तानों कों हराया। 19वीं शताब्दी में महाराजा वीरचंद्र किशोर माणिक्य बहादुर के शासनकाल में त्रिपुरा में नए युग का सूत्रपात हुआ। उन्होने अपने प्रशासनिक ढांचे को ब्रिटिश भारत के नमूने पर बनाया और कई सुधार लागू किए । उनके उत्तराधिकारों ने 15 अक्तूबर, 1949 तक त्रिपुरा पर शासन किया। इसके बाद त्रिपुरा भारत संघ में शामिल हो गया। शुरू में यह भाग-सी के अंतर्गत आने वाला राज्य था और 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के बाद यह केंद्रशासित प्रदेश बना। 1972 में इसने पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त किया। त्रिपुरा बांग्लादेश तथा म्यांमार की नदी घाटियों के बीच स्थित है। इसके तीन तरफ बांग्लादेश है और केवल उत्तर-पूर्व में यह असम और मिजोरम से जुड़ा हुआ है।
सिंचाई
त्रिपुरा राज्य मुख्यत: पहाड़ी इलाका है। इसका भौगोलिक क्षेत्र 10,49,169 हेक्टेयर है। अनुमान है कि 2,80,000 हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। 31 मार्च, 2008 तक 93,359 हेक्टेयर भूमि क्षेत्र में लिफ्ट सिंचाई, गहरे नलकूप, दिशा परिवर्तन, मध्यम सिंचाई व्यवस्था, शैलो ट्यूबवैल आदि के जरिए सुनिश्चित सिंचाई के प्रबंधन किए गए हैं। यह राज्य की सिंचाई योग्य भूमि का 79.97 प्रतिशत और कृषि योग्य भूमि का लगभग 33.34 प्रतिशत है। लोक निर्माण विभाग (जल संसाधन) द्वारा 1411 डाइवर्जन स्कीम, 166 गहरे नलकूप स्कीमें पूरी की जा चुकी हैं। 3 मध्यम सिंचाई योजनाओं (गुमती, खोवई और मनु) के जरिए कमान एरिया के कुछ भाग को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। नहर प्रणाली का कार्य 2009-10 तक पूरा हो जाने की आशा है।
बिजली
इस समय राज्य की व्यस्त समय की बिजली की मांग लगभग 162 मेगावॉट है। राज्य में अपनी परियोजनाओं से लगभग 80 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। लगभग 40 मेगावॉट बिजली पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित केंद्रीय क्षेत्र के विद्युत उत्पादन केंद्रों से राज्य के लिए आबंटित हिस्से से प्राप्त की जाती है। यह आकलन किया गया है कि वर्ष 2012 के दौरान सर्वोच्च मांग लगभग 396 मेगावॉट को भी और यह मांग राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना तथा राज्य के औद्योगिकीकरण के परिणामस्वरूप उत्पन्न होगी।
त्रिपुरा में नई विद्युत परियोजनाओं
1. बारामुरा 1 x 21 मेगावॉट जीटी परियोजना, एनईसी के अंतर्गत पश्चिम त्रिपुरा एनईसी, कार्यान्वयन एजेंसी: टीएसईसीएल, काम प्रगति पर है, पूरा करने की अनुसूची: - दिसंबर 2009। 2. पालटाना, उदयपुर, ओटीपीसी विद्युत परियोजना (740 मेगावॉट), दक्षिण त्रिपुरा : त्रिपुरा का हिस्सा 200 मेगावॉट है। 2011-12 में शुरू होने की संभावना है। 3. मोनारचक जी.टी. परियोजना (104 मेगावॉट) : कार्यान्वयन एजेंसी : नीपको, 2010- चालू हो जाने की संभावना है।
परिवहन
सडकें: त्रिपुरा में विभिन्न प्रकार की सड़कों की कुल लंबाई 1,997 कि.मी. है, जिसमें से मुख्य जिला सड़कें 90कि.मी., अन्य जिला सड़कें 1,218 कि.मी. और प्रांतीय राजमार्ग 689 कि.मी हैं।
रेलवे: अगरतला-सबरूम संपर्क रेल लाइन विस्तार के कार्य को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। अगरतला और सबरूम के बीच एक नई बड़ी लाइन के लिए इंजीनियरिंग और यातायात के सर्वेक्षण को मंजूरी दी गई थी।
उड्डयन: मुख्य हवाई अड्डा अगरतला में है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अनुरोध किया गया है कि वह इंडियन एयरलाइंस और इस क्षेत्र में काम कर रही अन्य निजी उड्डयन कंपनियों से कहें कि वे अगरतला और सिलचर के बीच बारास्ता कैलाशहर व कमालपुर उडान सेवा शुरू करें। मंत्रालय ने राज्य सरकार से कहा है कि वह पूर्वोत्तर परिषद के साथ एक आशय-पत्र हस्ताक्षर कर ले और कैलाशहर व कमालपुर हवाई अड्डों के विकास पर आने वाले व्यय को वहन करें। राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव पर सहमत होने में अपनी असमर्थता जताई हैं।
त्योहार
पर्यटन समारोह:
- आरेंज एंड टूरिज्म फेस्टिवल वांगमुन
- उनोकेटि टूरिज्म फेस्टिवल
- नीरमहल टूरिज्म फेस्टिवल
- पिलक टुरिज्म फेस्टिवल।
सांस्कृतिक/धार्मिक उत्सव

लोक नृत्य
निम्नलिखित त्यौहार मनाया जाता है:
- तीर्थमुख और उनाकोटी में मकर संक्रांति
- होली
- उनोकोटी, ब्रहाकुंड (मोहनपुर) में अशोकाष्टमी
- राश
- बंगाली नववर्ष
- गारिया, धामेल, बिजू और होजगिरि उत्सव
- नौका दौड और मनसा मंगल उत्सव
- केर और खाची उत्सव
- दुर्गापुजा
- दिवाली
- जंपुई पहाडियों में क्रिसमस
- बुद्ध पूर्णिमा
- रॉबिंदर-नजरूल-सुकांता उत्सव
- गली नाट्य उत्सव
- चोंगप्रेम उत्सव
- खंपुई उत्सव
- वाह उत्सव
- सांस्कृतिक उत्सव (लोक उत्सव)
- मुरासिंग उत्सव
- संघाटी उत्सव
- बैसाखी उत्सव (सबरूम) आदि हर वर्ष मनाए जाते हैं।
पर्यटन

अगरतला
वेस्ट - साउथ त्रिपुरा टूरिज्म वृत्त:
- अगरतला
- कमल सागर
- सेफाजाला
- नील महल
- उदयपुर
- पिलक
- महामुनि
वेस्ट - नॉर्थ त्रिपुरा टूरिज्म वृत्त:
- अगरतला
- दुम्बूर झील
- उनोकोटि
- जामपुई हिल
स्रोत: भारत २००८ - एक संदर्भ वार्षिक ![]()

