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सिक्किम

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 7,096 वर्ग कि.मी.
जनसंख्‍या 540,493
राजधानी गैंगटोक
प्रधान भाषाएं लेप्‍चा, भूटिया, लिम्‍बू

इतिहास और भूगोल


ताशीडिंग मठ

सिक्किम का प्रारंभिक इतिहास 13वीं शताब्‍दी में उत्तरी सिक्किम में काब लुंगत्‍सोक लेपचा राजा थेकॉन्‍ग टेक और तिब्‍बती युवराज ख्‍ये बूमसा के बीच रक्‍त संबंध के भाई चारे के समझौते पर हस्‍ताक्षर करने के साथ आरंभ होता है। इसके बाद सन 1641 में तिब्‍बत के सम्‍मानित लामा संतों ने पश्चिमी सिक्किम के युकसाम प्रांत की ऐतिहासिक यात्रा की, जहां उन्‍होंने खे-हूमसा के छठी पीढ़ी के वंशज फुंत्‍सोग नामग्‍याल का सिक्किम के पहले चोग्‍याल के रूप में राज्‍याभिषेक किया और इस तरह सिक्किम में नामग्‍याल राजवंश का उदय हुआ। समय के बदलाव के साथ सिक्किम लोकतांत्रिक प्रक्रिया से गुजरा और 1975 में वह भारतीय संघ का अभिन्‍न अंग बन गया। गुरु पदमसंभव ने अपने तिब्‍बत प्रवास के दौरान इस स्‍थान को आशीर्वाद दिया गया। सिक्किम में सभी समुदायों के लोग आपसी सद्भाव से रहते हैं। सिक्किम में भिन्‍न भिन्‍न मतों से जुड़े लोग हैं और शायद यह भारतीय संघ में साम्‍प्रदायिक सद्भाव और मानवीय संबंधों का बढ़ावा देने वाला सर्वाधिक शांति वाला राज्‍य है जिसकी भारत जैसे बहुसामाजिक व्‍यवस्‍था वाले देश में नितांत आवश्‍यकता भी है।

सिक्किम एक छोटा पर्वतीय प्रदेश है। उत्तर में यह तिब्‍बत के पठार, पूर्व में तिब्‍बत की चुम्‍बी घाटी और भूटान साम्राज्‍य, पश्चिम में नेपाल साम्राज्‍य और दक्षिण में दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) से घिरा है। राज्‍य का कुल क्षेत्रफल 7,096 वर्ग किलो मीटर है और इसका भू भाग उत्तर से दक्षिण तक 112 किलो मीटर तथा पूर्व से पश्चिम तक 64 किलोमीटर में फैला है। यह उत्तर-पूर्व हिमाचल में 27 डिग्री 00'46" से 28 डिग्री 07'48" उत्तरी अक्षांश और 88 डिग्री 00'58" से 88 डिग्री 55'25" पूर्व देशांतर के मध्‍य स्थित है।

विश्‍व की तीसरी सबसे बड़ी ऊंची चोटी, कंचनजंगा, जिसे सिक्किम की रक्षा देवी माना जाता है, इस राज्‍य पर अपनी मंत्रमुग्‍ध करने वाले प्राकृतिक सौंदर्य की छटा बिखेरती है। सिक्किम जैव विविधताओं से भरा दुनिया के 18 प्रमुख क्षेत्रों में एक है। सिक्किम हिमालय जैव विविधता से भरपूर है। राज्‍य में आवृत्तबीजी वनस्‍पतियों की 5000 प्रजातियां पाई जाती हैं जो देश भर में पाई जाने वाली आवृत्तबीजी प्रजातियों का एक तिहाई है। यहां फूलदार पौधों की 4000 प्रजातियां, 300 पर्णांग और सम्‍बद्ध प्रजातियां, आर्चिड्स की 450 से 500 प्रजातियां, रोडोडेंड्रोन की 36 प्रजातियां, बांज की 40 प्रजातियां, प्राइमुल्‍स और बांस की 30 से 40 प्रजातियां, स्‍तनधारियों की 144 प्रजातियां, पक्षियों की 500 से 600 प्रजातियां, तितलियों और कीटों की 400 से अधिक प्रजातियां और सरीसृपों की बहुत सी प्रजातियां पाई जाती है। दुर्लभ नीली भेड़, तिब्‍बती मास्टिफ, याल और लाल पांडा भी यहां पाए जाते हैं।

कृषि

सिक्किम की अर्थव्‍यवस्‍था मूलत: कृषि प्रधान है। राज्‍य की 64 प्रतिशत से अधिक जनसंख्‍या जीवनयापन के लिए कृषि पर निर्भर है। सिक्किम में कृषि योग्‍य भूमि लगभग 1,09,000 हेक्‍टेयर है जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 15.36 प्रतिशत है। किसान सामान्‍यत: मिलीजुली फसलें उगाते हैं। मक्‍का, चावल, गेहूं, आलू, बड़ी इलायची, अदरक और संतरा यहां की प्रमुख फसलें हैं। सिक्किम देश में बड़ी इलायची का सबसे अधिक उत्‍पादन करने वाला राज्‍य है और इसके अधिकांश भू-भाग में इलायची का उत्‍पादन होता है। अदरक, आलू, संतरा तथा गैर-मौसमी सब्जियां यहां की अन्‍य नकदी फसलें हैं।

उद्योग

हालांकि सिक्किम को औद्योगिक रूप से पिछड़ा राज्‍य घोषित किया गया है, लेकिन कई सदियों पहले यहां दस्‍तकारी आधारित परंपरागत सिक्किम कुटीर उद्योग रहे हैं। लेपचा लोग बांस के सामान, लकड़ी के सामान, धागा बुनाई और गलीचे की बुनाई परंपरागत तरीकों से बड़ी कुशलता से करते हैं, वहीं भूटिया लोगों को गलीचा और कंबल बुनाई की प्राचीन तिब्‍बती पद्धति में महारत हासिल हैं तथा नेपालियों द्वारा निर्मित धातु और चांदी तथा लकड़ी के सामान की कारीगरी का अपना ही महत्‍व है।

सिक्किम ज्‍वैलस लिमिटेड राज्‍य का तथा बहुत से नाजुक उपकरण बनाने वाला उद्योग है जहां पानी और बिजली के मीटरों तथा घडियों आदि के लिए ज्‍वैल बियरिंग्‍स बनाई जाती हैं। राज्‍य में 10 सहायक इकाइयां स्‍थापित की गई हैं जिनमें घडियों के लिए ज्‍यूलस बनाए जा रहे हैं। सिक्किम औद्योगिक विकास और निवेश निगम लिमिटेड (सिडिको) यह कुटीर, लघु और मझौले उद्योग लगाने, होटल, अस्‍पताल, नर्सिंग होम और टैक्सियां खरीदने के लिए दीर्घावधि ऋण उपलब्‍ध कराता है।

सिंचाई और बिजली

दसवीं पंचवर्षीय योजना में 34,118 हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने का लक्ष्‍य रखा गया है। राज्‍य में बिजली की कुल संस्‍थापित क्षमता 36 मेगावॉट है जो 123 एमवीए की ट्रांस फॉरमेशन क्षमता के साथ पनबिजली आधारित है। रंगीत हाइडल परियोजना को 560 मेगावॉट क्षमता के साथ सथापित किया गया है। राज्‍य की कुल विद्युत संभाव्‍यता 8,000 मेगावॉट आंकी गई है। तिस्‍ता घाटी परियोजना अब पूर्वी जिले के नदी के बहाव पर निर्माणाधीन है तथा इस परियोजना की प्रस्‍तावित संस्‍थापित क्षमता 510 मेगावॉट है।

परिवहन

सड़कें: गंगटोक सड़क मार्ग से दार्जिलिंग, कलिमपोंग, सिलिगुड़ी तथा सिक्किम के सभी जिला मुख्‍यालयों से जुड़ा है। 41 कि.मी. राष्‍ट्रीय राजमार्ग सहित, राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 2,383 कि.मी. है।

रेलवे और उड्डयन: राज्‍य के निकटवर्ती रेलवे स्‍टेशन सिलिगुड़ी (113 कि.मी.) और न्‍यू जलपाईंगुड़ी (125 कि.मी.) हैं जहां से कोलकाता, दिल्‍ली, गुवाहाटी, लखनऊ तथा देश के अन्‍य महत्‍वपूर्ण शहरों के लिए आया जाया जा सकता है। सिक्किम में कोई ह‍वाई अड्डा नहीं है, जबकि गंगटोक और बागडोगरा के बीच राज्‍य द्वारा बहुत ही सस्‍ती दरों पर हेलीकॉप्‍टर सेवा उपलब्‍ध कराई गई है। राज्‍य में जिला और उप मंडल मुख्‍यालयों तथा महत्‍वपूर्ण पर्यटन स्‍थलों को जोड़ने के लिए कई हेलीपेडों के निर्माण का काम शुरू किया है।

सूचना प्रौद्योगिकी

राज्‍य में एक नया सूचना प्रौद्योगिकी विभाग बनाया गया है और इस विभाग को प्रमुखता देने के लिए वृह्त परियोजनाएं तैयारी की गई हैं। नव सृजित विभाग ने सिक्किम के बारे में बड़ी संख्‍या में वेबसाइटें शुरू की हैं और सूचना उपकरणों के प्रयोग के साथ इसकी ई-शासन की योजना चल रही है। सिक्किम सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विकसित और दुरुस्‍त रखी जा रही सरकारी वेबसाइट हैं। - www.sikkimgovt.org

त्‍यौहार

सिक्किम में मुख्‍य रूप से भीटिया, लेपचा और नेपाली समुदायों के लोग रहते हैं। माघे संक्रांति, दुर्गापूजा, लक्ष्‍मीपूजा और चैत्र दसाई/राम नवमी, दसई त्‍यौहार, सोनम लोसूंग, नामसूंग, तेन्‍दोग हलो रूम फाट (तेन्‍दोंग पर्वत की पूजा), लोसर (तिब्‍बतीय नव वर्ष) राज्‍य के प्रमुख त्‍यौहार है। अन्‍य त्‍यौहारों में साकेवा ( राय), सोनम लोचर (गुरूंग), बराहिमज़ोग (मागर), आदि शामिल हैं।

पर्यटन


गंगटोक, सिक्किम

सिक्किम अपने हरे-भरे पौधों, जंगलों, दर्शनीय घाटियों और पर्वतमालाओं और भव्‍य सांस्‍कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है और यहां के शांतिप्रिय लोगों की वजह से यह प्रदेश पर्यटकों के लिए सुरक्षित स्‍वर्ग के समान है। राज्‍य सरकार पर्यावरण से दोस्‍ती पूर्ण पर्यटन तथा तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा दे रही है और वे तमाम सुविधाएं प्रदान कर रही है जिससे कि यहां आने वाले लोग सिक्किम की जीवनशैली और धरोहर के आनंद का अनुभव कर सकें। पर्यटन उद्योग की संभावनाओं को स्‍वीकारते हुए राज्‍य सरकार दक्षिण सिक्किम में चैमचेय गांव में हिमालयन सेंटर फॉर एडवेंचर टूरिज़्म की स्‍थापना कर रही है। सूरजकुण्‍ड मेला, 2002, जो सिक्किम पर केंद्रित था, ने सिक्किम क्राफ्ट, लोककलाओं और धरोहर की ओर लोगों को आकृष्‍ट किया।

सिक्किम का प्रमुख बौद्ध मठ पेलिंग में स्थित पेमायांत्‍से है। इसके अलावा यहां पश्चिमी सिक्किम में ताशिदिंग मठ भी है, जो सिक्किम के सभी मठों में सबसे पवित्र माना गया है। सिक्किम का सबसे प्राचीन मठ युकसोम है, जिसे ड्रबडी मठ के नाम से जाना जाता है। यह लहातसुन चेम्‍पों (सिक्किम के प्रमुख संत) का व्‍यक्तिगत आश्रम था जो संभवत: 1700 ईसवी में बना था। कुछ अन्‍य मठों के नाम हैं - फोडोंग, फेन्‍सांग, रूमटेक, नगाडक, तोलुंग, आहल्‍य, त्‍सुकलाखांग, रालोंग, लाचेन, एन्‍चेय। अन्‍य हिंदू मंदिर है - गंगटोक के मध्‍य में स्थित प्रमुख रूप से जाना जाने वाला ठाकुर बाड़ी। इसके बाद दक्षिण जिले की एक पवित्र गुफा है जिसमें एक शिवलिंग है जो इस गुफा को जगमाता है जहां कोई अन्‍य रोशनी नहीं पहुंच पाती। राज्‍य में कुछ महत्‍वपूर्ण गुरुद्वारे और मस्जिदें भी हैं और उनमें से प्रमुख गंगटोक और रावनगला में हैं।

स्रोत: भारत २००८ - एक संदर्भ वार्षिकी