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राजस्‍थान

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग कि.मी.
जनसंख्‍या 56,473,122
राजधानी जयपुर
मुख्‍य भाषाएं हिंदी और राजस्‍थानी

इतिहास और भूगोल

क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्‍थान भारत का सबसे बडा राज्‍य है। आजादी से पहले यह क्षेत्र राजपूताना (राजपूतों का स्‍थान) कहलाता था। रणबांकुरे राजपूतों ने कई सदियों तक इस क्षेत्र पर राज्‍य किया।

राजस्‍थान का इतिहास प्रागैतिहासिक काल से शुरू होता है। ईसा पूर्व 3000 से 1000 के बीच यहां की संस्‍कृति सिंधु घाटी सभ्‍यता जैसी थी। सातवीं शताब्‍दी में यहां चौहान राजपूतों का प्रभुत्‍व बढने लगा और बारहवीं शताब्‍दी तक उन्‍होंने एक साम्राज्‍य स्‍थापित कर लिया था। चौहान के बाद इस योद्धा जाति का नेतृत्‍व मेंवाड के गहलोतों ने संभाला। मेवाड के अलावा जो अन्‍य रियासतें ऐतिहासिक दृष्टि से प्रमुख रहीं, वे हैं - मारवाड, जयपुर, बूंदी, कोटा, भरतपुर और अलवर। अन्‍य सभी रियासतें इन्‍हीं रियासतों से बनी। इन सभी रियासतों ने 1818 में अधीनस्‍थ गठबंधन की ब्रिटिश संधि स्‍वीकार कर ली जिसमें राजाओं के हितों की रक्षा की व्‍यवस्‍था थी, लेकिन इस संधि से आम जनता स्‍वाभाविक रूप से असंतुष्‍ट थी।

वर्ष 1857 के विद्रोह के बाद लोग स्‍वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए महात्‍मा गांधी के नेतृत्‍व में एकजुट हुए। सन 1935 में अंग्रेजी शासन वाले भारत में प्रांतीय स्‍वायत्‍तता लागू होने के बाद राजस्‍थान में नागरिक स्‍वतंत्रता तथा राजनीतिक अधिकारों के लिए आंदोलन और तेज हो गया। 1948 में इन बिखरी हुई रियासतों को एक करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो 1956 में राज्‍य में पुनर्गठन कानून लागू होने तक जारी रही। सबसे पहले 1948 में मत्‍स्‍य संघ बना, जिसमें कुछ ही रियासतें शामिल हुई। धीरे-धीरे बाकी रियासतें भी इसमें मिलती गई। सन 1949 तक बीकानेर, जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर जैसी मुख्‍य रियासतें इसमें शामिल हो चुकी थीं और इसे बृहत्तर राजस्‍थान संयुक्‍त राज्‍य का नाम दिया गया। सन 1958 में अजमेर, आबू रोड तालुका और सुनेल टप्‍पा के भी शामिल हो जाने के बाद वर्तमान राजस्‍थान राज्‍य विधिवत अस्तित्‍व में आया।

राजस्‍थान की समूची पश्चिमी सीमा पर पाकिस्‍तान पडता है जबकि उत्तर में पंजाब, उत्तर पूर्व में हरियाणा, पूर्व में उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में मध्‍य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिम में गुजरात है।

कृषि

राज्‍य में वर्ष 2006-07 में कुल कृषि योग्‍य क्षेत्र 217 लाख हेक्‍टेयर था और वर्ष (2007-08) में अनुमानित खाद्यानन उत्‍पादन 155.10 लाख टन रहा। राज्‍य की मुख्‍य फसलें हैं। चावल, जौ, ज्‍वार, बाजरा, मक्‍का, चना, गेहूं, तिलहन, दालें कपास और तंबाकू। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षो में सब्जियों और संतरा तथा माल्‍टा जैसे नींबू प्रजाति के फलों के उत्‍पादन में काफी वृद्धि हुई है। यहां की अन्‍य फसलें है लाल मिर्च, सरसों, मेथी, जीरा, और हींग।

उद्योग और खनिज

राजस्‍थान सांस्‍कृतिक रूप में समृद्ध होने के साथ-साथ खनिजों के मामले में भी समृद्ध रहा है और अब वह देश के औद्योगिक परिदृश्‍य में भी तेजी से उभर रहा है। राज्‍य के प्रमुख केंद्रीय प्रतिष्‍ठानों में देबरी (उदयपुर) में जस्‍ता गलाने का संयंत्र, खेतडी (झुंझनूं) में तांबा परियोजना और कोटा में सूक्ष्‍म उपकरणों का कारखाना शामिल है। मार्च, 2006 तक राज्‍य में लघु उद्योगों की 2,75,400 इकाइयां थी। जिनमें 4,336.70 करोड रूपये की पूंजी लगी थी और लगभग 10.55 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ था। मुख्‍य उद्योग हैं :वस्‍त्र, ऊनी कपडे, चीनी, सीमेंट, कांच, सोडियम संयंत्र, आक्‍सीजन, वनस्‍पति रंग, कीटनाशक, जस्‍ता, उर्वरक, रेल के डिब्‍बे, बॉल बियरिंग, पानी व बिजली के मीटर, टेलीवीजन सेट, सल्‍फ्यूरिक एसिड, सिंथेटिक धागे तथा तापरोधी ईंटें आदि। बहुमूल्‍य और कम मूल्‍य के रत्‍नों के अलावा कास्टिक सोडा, कैलशियम कार्बाइड, नाइलोन तथा टायर आदि अन्‍य महत्‍वपूर्ण औद्योगिक इकाइयां हैं।

राज्‍य में जिंक कंसंट्रेट, पन्‍ना, गार्नेट, जिप्‍सम, खनिज चांदी, एस्‍बेस्‍टस, फैल्‍सपार तथा अभ्रक के प्रचुर भंडार हैं। राज्‍य में नमक, रॉक फास्‍फेट, मारबल तथा लाल पत्‍थर भी काफी मात्रा में मिलता है। सीतापुर (जयपुर) में देश पहला निर्यात संवर्द्धन पार्क बनाया गया है जिसने काम करना प्रारंभ कर दिया है।‍

सिंचाई और बिजली

मार्च 2007 के अंत तक राज्‍य में विभिन्‍न प्रमुख, मध्‍यम और छोटी सिचाई परियोजनाओं के माध्‍यम से 34.85 लाख हेक्‍टेयर की सिंचाई संभा‍व्‍यता का सृजन किया गया (2007-08) और 92,200 हेक्‍टेयर (आईजीएनपी और सीएडी के अलावा) की अतिरिक्‍त सिंचाई संभाव्‍यता का सृजन मार्च 2007 तक किया गया है। राज्‍य में संस्‍थापित विद्युत क्षमता दिसम्‍बर 2007 तक 6335.33 मेगावॉट हो गई है, जिसमें से 4000 मेगावॉट राज्‍य की अपनी परियोजनाओं द्वारा उत्‍पन्‍न की जाती है, 521.85 मेगावॉट सहयोगी परियोजनाओं से तथा 1813.18 मेगावॉट केन्‍द्रीय विद्युत उत्‍पादन स्‍टेशनों से आबंटित की जाती है।

परिवहन

सडकें: मार्च 2006 में राजस्‍थान में सड़को की कुल लंबाई 1,58,250 कि.मी. है।

रेलवे: जोधपुर, बीकानेर, सवाई माधोपुर, कोटा और भरतपुर राज्‍य के प्रमुख रेलवे जंक्‍शन है।

उड्डयन: दिल्‍ली और मुंबई से जयपुर, जोधपुर तथा उदयपुर के लिए नियमित विमान सेवाएं हैं।

त्‍योहार

राजस्‍थान मेलों और उत्‍सवों की धरती है। होली, दीपावली, विजयदशमी, क्रिसमस जैसे प्रमख राष्‍ट्रीय त्‍योहारों के अलावा अनेक देवी-देवताओं, संतो और लोकनायकों तथा नायिकाओं के जन्‍मदिन मनाए जाते है। यहां के महत्‍वपूर्ण मेले हैं तीज, गणगौर(जयपुर), अजमेर शरीफ और गलियाकोट के वार्षिक उर्स, बेनेश्‍वर (डूंगरपुर) का जनजातीय कुंभ, श्री महावीर जी (सवाई माधोपुर मेला), रामदेउरा (जैसलमेर), जंभेश्‍वर जी मेला(मुकाम-बीकानेर), कार्तिक पूर्णिमा और पशु-मेला (पुष्‍कर-अजमेर) और श्‍याम जी मेला (सीकर) आदि।

पर्यटन स्‍थल


हवा महल, जयपुर

जैसलमेर के रेगिस्‍तान

राज्‍य में पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, माउंट आबू, अलवर में सरिस्‍का बाघ विहार, भरतपुर में केवलादेव राष्‍ट्रीय पक्षी विहार, अजमेर, जैसलमेर, पाली, चित्‍तौडगढ़ आदि।

स्रोत: भारत २००८ - एक संदर्भ वार्षिक