उड़ीसा
| ब्यौरे | विवरण |
|---|---|
| 1,55,707 वर्ग कि.मी. | |
| 36,804,660 | |
| भुवनेश्वर | |
| उडिया |
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इतिहास और भूगोल
उडिया लोगों की भूमि उड़ीसा प्राचीन काल में कलिंग के नाम से विख्यात थी। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी (261 ई.पू.) में मौर्य सम्राट अशोक ने कलिंग विजय के लिए शक्तिशाली सेना भेजी, जिससे कलिंगवासियों ने जमकर लोहा लिया। अशोक ने कलिंग जीत तो लिया, किंतु युद्ध की मार-काट से उसके मन में आत्मग्लानि पैदा हो गई। अशोक की मृत्यु के बाद कलिंग फिर से स्वाधीन हो गया। ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में खारवेल राजा के अधीन कलिंग एक शाक्तिशाली साम्राज्य बन गया। खारवेल की मृत्यु के बाद उडीसा की ख्याति लुप्त हो गई। चौथी शताब्दी में विजय अभियान पर निकले समद्रगुप्त ने उड़ीसा पर आक्रमण किया और इस प्रदेश के पांच राजाओं को पराजित किया। सन 610 में उड़ीसा पर शशांक नरेश का अधिकार हो गया। शशांक के निधन के पश्चात हर्षवर्धन ने उड़ीसा पर विजय प्राप्त की।
सातवीं शताब्दी में उड़ीसा पर यहीं के गंग वंश का शासन रहा। सन 795 में महाशिवगुप्त यजाति द्वितीय ने उडीसा का शासन संभाला और इसके साथ ही उड़ीसा के इतिहास का सबसे उज्जवल अध्याय प्रारंभ हुआ। उन्होंने कलिंग, कनगोडा, उत्कल और कोशल को एक करके खारवेल की तरह का विशाल साम्राज्य स्थापित किया। गंग वंश के राजाओं के शासन काल में उड़ीसा की खूब प्रगति हुई। इसी राजवंश के नरसिंह देव कोणार्क का विश्वप्रसिद्ध सूर्य मंदिर बनवाने के लिए प्रसिद्ध हैं। 16 वीं शताब्दी के मध्य से 1592 तक उड़ीसा पर पांच मुस्लिम राजाओं ने शासन किया। सन 1592 में अकबर ने उड़ीसा को अपने राज्य में शामिल कर लिया। मुगलों के पतन के बाद उड़ीसा पर मराठों का अधिकार हो गया। सन 1803 में ब्रिटिश अाधिपत्य से पहले उड़ीसा मराठा राजाओं के अधीन रहा।
1 अप्रैल सन 1936 को उड़ीसा को अलग प्रांत का दर्जा दे दिया गया। स्वतंत्रता के पश्चात उड़ीसा तथा इसके आसपास की रियासतों ने भारत सरकार को अपनी प्रभुसत्ता सौंप दी। रियासतों (गवर्नर के अधीन प्रांतों) के विलय संबंधी आदेश 1949 के अंतर्गत जनवरी 1949 में उडीसा की सभी रियासतों का उडीसा राज्य में पूर्ण विलय कर दिया गया। यद्यपि उडीसा के कलिंग, उत्कल और उद्र जैसे कई प्राचीन नाम हैं, किंतु यह प्रदेश मुख्य रूप से भगवान जगन्नाथ की भूमि के नाम से प्रसिद्ध है। भगवान जगन्नाथ उडीसा के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन से बहुत गहरे जुडे हुए हैं। विभिन्न कालों में उडीसा के लोगों पर जैन, ईसाई और इस्लाम धर्मो का भी काफी प्रभाव पडा।
उडीसा भारतीय प्रायद्वीप के उत्तर पूर्वी भाग में स्थित है। इसके पूर्व में बंगाल की खाडी, उत्तर-पूर्व में पश्चिम बंगाल, उत्तर में झारखंड, पश्चिम में छत्तीसगढ़ और दक्षिण में आंध्र प्रदेश है। राज्य को मोटे तौर पर चार भौगोलिक क्षेत्रों में बांटा जा सकता है। ये हैं - उत्तरी पठार, मध्य नदी थाला, पूर्वी पहाडियां और तटवर्ती मैदान।
कृषि
राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे राज्य के निवल उत्पाद का 28 प्रतिशत प्राप्त होता है और कार्यशील जनसंख्या की 65 प्रतिशत जनता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि कार्य में लगी हुई है। चावल उडीसा की मुख्य फसल है और 2004-2005 मे 65.37 लाख मी.टन चावल का उत्पादन हुआ। गन्ने की खेती किसान बड़े पैमाने पर कर रहे हैं।
उच्च फसल उत्पादन प्रौद्योगिकी के प्रयोग और समन्वित पोषक प्रबंधन तथा कीट प्रबंधन प्रक्रिया अपनाकर कृषि विस्तार को वरीयता दी गई है। विभिन्न फलों की 12.5 लाख और काजू की 10 लाख तथा सब्जियों की 2.5 लाख कलमें किसानों को दी गई है। राज्य में प्याज की फसल को बढावा देने के लिए अच्छी किस्म की प्याज के 300 क्विंटल बीज बांटे गए हैं जो 7,500 एकड जमीन में उगाए जाएंगे। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत, बागवानी को बढावा देने के लिए गुलाब, गुलदाऊदी और गेंदे के फूलों की 2,625 प्रदर्शनियां की गईं। अगले वर्ष 60,000 प्रदर्शनियों का लक्ष्य है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिए उडीसा राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लि. पीएसी, मार्कफेड, नाफेड आदि एजेंसियों के माध्यम से 20 लाख मी. टन चावल खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। सूखे की आशंका वाले क्षेत्रों में लघु जलाशय विकसित करने के लिए 13 लाख हेक्टेयर के क्षेत्र में 2,413 लघु जलाशय विकसित किए जा रहे हैं।
सिंचाई और बिजली
बडी मंझोली और छोटी परियोजनाओं और जल दोहन परियोजनाओं के माध्यम से सिचांई क्षमता को बढाया गया है, और वर्ष 2004-2005 के अंत तक 2,696 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की व्यवस्था की जा चुकी थी। सरकार ने अधिक लाभ तथा सिंचाई क्षमता के सुचारू प्रबंधन के लिए पानी पंचायत योजना और बीजु कृषक विकास योजना लागू की है।
2005-06 के दौरान 12,685 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की छह पूरी हो सकने वाली सिंचाई परियोजनाओं को चिहित किया गया जिनमे से चार तो पूरी भी हो चुकी हैं। 2005-2006 के दौरान उडीसा लिफ्ट सिंचाई निगम ने बीजू कृषक विकास योजना के तहत 500 नए लिफ्ट सिंचाई पाइंट पूरे किए हैं और 1,200 हेक्टेयर नई सिचांई क्षमता अर्जित की है। 26 जनवरी 2006 तक राज्य में 10.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 13,397 पानी पंचायतें बनाई गई। इनमें से 11,583 पानी पंचायतों ने 7.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रणाली का संचालन और रख रखाव प्रारंभ भी कर दिया है।
2004-2005 में राज्य क्षेत्र में बिजली की कुल स्थापित क्षमता 4,845.34 मेगावाट थी तथा सभी स्रोतों से उपलब्ध बिजली 1,995.82 मेगावाट थी। मार्च 2005 तक राज्य के 46,989 गांवों में से 37,744 गांवों में बिजली पहुंचा दी गई है।
न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम के तहत 4,696 गांवों, झुग्गियों और दलित बस्तियों में बिजली पहुंचाने का कार्यक्रम शुरू किया गया और 2,965 गांवो और झुग्गियों में दिसंबर 2005 तक बिजली पहुंचा दी गई। बिजली उत्पादन के मामले में अतिरिक्त विद्युत उत्पादक राज्य होने के कारण उडीसा ने दिसंबर 2005 तक ग्रिडको के माध्यम से विद्युत व्यापार निगम को 420 करोड रूपये की बिजली बेची। भारत सरकार ने त्वरित विद्युत विकास और सुधार कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए 592 करोड़ रूपये की लागत की 7 परियोजनाओं को मंजूरी दी। 2005-2006 के दौरान (अंतरिम) उच्च कार्यकुशल उडीसा विद्युत उत्पादन निगम ने राज्य सरकार को 31.25 करोड़ रूपये के अंशदान का भुगतान किया।
उद्योग
उद्योग प्रोत्साहन तथा निवेश निगम लि. औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड तथा उडीसा राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम ये तीन प्रमुख एजेंसियां राज्य के बडे और मंझोले उद्योगों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इस्पात, एल्यूमीनियम, तेलशोधन, उर्वरक आदि बडे निवेश वाले विशाल उद्योग लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार लघु, ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को बढावा देने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन और रियायतें देकर संस्थागत और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही हैं। वर्ष 2004-2005 में राज्य में 83,075 लघु उद्योग स्थापित किए गए।
दक्षिण कोरिया के इस्पात महारथी पीओएससीओ ने 120 लाख टन प्रतिवर्ष की उत्पादन क्षमता वाला और 1200 करोड रूपये के निवेश वाला इस्पात संयंत्र स्थापित करने के लिए उडीसा सरकार के साथ एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। आदित्य बिडला समूह 10 लाख टन प्रतिवर्ष की उत्पादन क्षमता का अल्यूमिना शोधक संयंत्र लगाने की योजना बना रहा है। उडीसा उत्खनन निगम ने 2005-2006 में 51.20 लाख टन खनिज उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक है। लौह अयस्क का उत्पादन 2005-2006 में 43 लाख टन होगा, जो गत वर्ष से 40 प्रतिशत अधिक है।
औद्योगिक विकास, रोजगार के अवसर और आर्थिक वृद्वि को बढाने के लिए उडीसा उद्योग (सुविधा) अधिनियम, 2004 को लागू करके एक ही जगह से निपटान प्रक्रिया शुरू की गई है ताकि निवेश प्रस्तावों के समयबद्ध निपटान और निरीक्षण कार्य को युक्तिसंगत बनाया जा सके। विशाल निवेश को सहारा देने के लिए ढांचागत सुविधा में सुधार को उच्च प्राथमिकता दी गई है। सूचना प्रौद्योगिकी में बेहतर ढांचागत विकास सृजित करने के लिए भुवनेश्वर में एक निर्यात संवर्द्धन औद्योगिक पार्क स्थापित किया गया है। राज्य में लघु और मध्यम उद्यमों के संवर्द्धन के लिए 2005-2006 में 2,255 लघु उद्योग लगाए गए, जिन पर 123.23 करोड़ रूपये का निवेश हुआ और 10,308 लोगों को रोजगार मिला।
औद्योगिक श्रमिकों और उनके परिवारों के सदस्यों को ईसएआई अस्पतालों और चिकित्सालयों के माध्यम से पूरी स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की गई हैं। वर्ष 2005-2006 में रिवोल्विंग कारपस फंड से ईएसआई के लाभार्थियों के इलाज के भुगतान के लिए 1,02,66,000 रूपये स्वीकृत किए गए। जोखिम वाले धंधों में लगे बाल मजदूरों को मुक्त किया गया और औपचारिक शिक्षा तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिए राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजना कार्यक्रम के तहत भर्ती किया गया। राज्य में 18 जिलों में 18 बाल श्रमिक परियोजनाएं चल रही हैं। अब तक 33,843 बाल श्रमिको को राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजना द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में भर्ती कराया गया है और 64,885 बाल श्रमिकों को औपचारिक स्कूली शिक्षा प्रणाली के जरिए मुख्यधारा में लाया गया। अकुशल, अर्द्ध कुशल, कुशल और अत्धिक कुशल कामगारों को मिलने वाला न्यूनतम वेतन बढा दिया गया है।
मुख्यमंत्री की सीधी देखरेख में राज्य रोजगार मिशन ने तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण निदेशालय के सहयोग से शिक्षित और अर्द्धशिक्षित बेरोजगार युवकों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। 4,225 युवाओं को विभिन्न बाजारोपयोगी पाठ्यक्रमों में कुशलता और पुन: कुशलता के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सूचना प्रौद्योगिकी
सूचना प्रौद्योगिक के क्षेत्र में राज्य तेजी से प्रगति कर रहा है। भुवनेश्वर की इन्फोसिटी में विकास केंद्र खोलने के लिए टीसीएस और विप्रो के साथ आशय-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं। हैक्सावेयर और माइंड फ्री कंसल्टिंग जैसी अन्य कंपनियां राज्य में निवेश के लिए उत्सुक हैं। इन सभी कंपनियों में 2007-08 तक 5000 सॉफ्टवेयर प्रशिक्षित लोगों को सीधा रोजगार मिलने की आशा है और इसके अलावा बहुत लोगों को परोक्ष रोजगार भी मिलेगा।
उडीसा सरकार और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस तथा नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर ने संयुक्त रूप से ई प्रोक्योरमेंट सिस्टम शुरू किया है ताकि टेंडर और प्रोक्योरमेंट में एक पारदर्शी और कुशल प्रणाली शुरू हो सके। राज्य मुख्यालय को सभी जिला मुख्यालयों, सब डिवीजन मुख्यालयों, ब्लाक मुख्यालयों से जोडने के लिए ई-गवर्नेंस के आधार को राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क (स्वान) के जरिए जोडा जा रहा है। उडिया भाषा को कंप्यूटर में लाने के लिए ‘भारतीय भाषाओं के लिए प्रौद्योगिकी विकास’ कार्यक्रम के तहत उडिया भाषा का पैकेज तैयार हो गया है।
बच्चों, अध्यापकों को स्कूलों के त्रिआयामी शिक्षा आंकडों को समन्वित करने के लिए परियोजना ई-शिशु ओपीईपीए (ओपेपा) ने शुरू की है और ओसीएसी द्वारा संयुक्त रूप से लागू की जा रही है। इससे हमारा प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण का लक्ष्य पूरा होगा और राज्य का कोई बच्चा स्कूल जाने से वंचित नहीं रह पाएगा।
पर्यटन
राज्य की आर्थिक प्रगति में पर्यटन के महत्व को स्वीकार करते हुए मीडिया प्रबंधन एजेंसियों और पर्व प्रबंधकों को प्रचार और पर्यटन संवर्द्धन का काम सौंपा गया है। उडीसा को एक जीवंत पर्यटक गंतव्य के रूप में पुन: स्थापित करने के लिए एक नया प्रतीक चिन्ह अपनाया गया है। विभिन्न महत्वपूर्ण पर्यटन परियोजनाओं, यथा: धौली में शांति पार्क, ललितगिरि, उदयगिरि तथा लांगुडी के बौद्ध स्थलों को ढांचागत विकास और पिपिली में पर्यटन विकास का काम शुरू होगा। श्री क्षेत्र उत्सव (पुरी) भुवनेश्वर का एकाग्र उत्सव, कोणार्क का कोणार्क पर्व जैसे मेले व त्योहारों पर आधारित पर्यटन पर्वों के संवर्द्धन और विपणन के लिए पर्यटन और सांस्कृतिक समृद्धि का पूरा उपयोग किया जा रहा है। उडीसा पर्यटन विभाग ने बैंकाक, मास्को, लंदन, कुआलालंपुर, कोच्चि, कोलकाता, रायपुर आदि के भ्रमण व्यापार के आयोजनों में भाग लिया। पर्यटन क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन देने के लिए 373 मार्गदर्शकों (गाइडों) को प्रशिक्षण दिया गया।
मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास
राज्य कृषि नीति में निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप और नई वैज्ञानिक तकनीकी अपनाते हुए, दूध, मछली और मांस उत्पादन पर विशेष बल दिया गया। कुल दुग्ध उत्पादन 36 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया अर्थात 3 लाख लीटर अधिक। डेयरी उत्पादन के संवर्द्धन के लिए उडीसा दुग्ध फेडरेशन के अंतर्गत राज्य के सभी 30 जिलों को मिलाया गया है। फेडरेशन ने दुग्ध संरक्षण को काफी हद तक बढाकर 2.70 लाख लीटर प्रतिदिन कर दिया है। ‘स्टैप’ कार्यक्रम के तहत फेडरेशन 17 जिलों में ‘महिला डेयरी परियोजना’ चला रहा है। राज्य में 837 महिला डेयरी सहकारी समितियां हैं, जिनमें 60,287 महिलाएं हैं।
आरएलटीएपी के तहत, केबीके जिलों में 2005-06 में दुग्ध उत्पादन और संबद्ध कार्यकलापों के लिए 350 लाख रूपये जारी किए गए। जलाशयों में वैज्ञानिक मत्स्यपालन के लिए एक ‘राज्य जलाशय मछली पालन नीति’ की मंजूरी दी गई है। आरएलटीएपी के तहत, केबीके जिलो में मछली पालन के विकास के लिए 5,709 हेक्टेयर क्षेत्र के 13 जलाशय चुने गए हैं। 2005-06 में मछुआरे सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों के जरिए 101 जलाशयों को मछली पालन के लिए चुना गया।
परिवहन
सडकें: 2004-05 तक राज्य में विभिन्न प्रकार की सडको की कुल लंबाई 2,37,332 कि.मी. थी जिसमें राष्ट्रीय राजमार्गों की 3,595 कि.मी., एक्सप्रेस राजमार्गों की 29 किलोमीटर, राजकीय राजमार्गों की 5,102 कि.मी. जिला मुख्य सड़कों की 3,189 कि.मी., अन्य जिला सड़को की 6,334 कि.मी. तथा अन्य ग्रामीण वर्गीकृत सड़कों की 27,882 कि.मी. है, पंचायत समिति सड़कें, 1,39,942 कि.मी., जी.पी. सड़कें, 729 कि.मी. वन सड़कें, 17,282 कि.मी. शहरी सड़कें और 6277 कि.मी. सिंचाई सड़कें तथा 88 कि.मी. ग्रिडको सड़कें हैं।
रेलवे: 31 मार्च 2004 तक इस राज्य में 2,287 किलोमीटर लंबी बडी रेल लाइनें तथा 91 किलोमीटर छोटी लाइनें थी।
उड्डयन: भुवनेश्वर में हवाई अड्डे के विस्तार और आधुनिकीकरण का काम प्रगति पर है। यहां से दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, नागपुर तथा हैदराबाद के लिए सीधी उड़ानें हैं। इस समय राज्य में विभिन्न स्थानों पर 13 हवाई पट्टियां तथा 16 हेलीपैड हैं।
बंदरगाह: पारादीप राज्य का एकमात्र प्रमुख बंदरगाह है। गोपालपुर को पूरे साल काम करने वाले बंदरगाह के रूप में विकसित किया गया है।
पर्यटन स्थल

सूर्य मंदिर, कोणार्क
राज्य की राजधानी भुवनेश्वर लिंगराज मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। पुरी का जगन्नाथ मंदिर और सुंदर सुद्री तट सुविख्यात हैं। राज्य के अन्य प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र हैं कोणार्क, नंदनकानन, चिलका झील, धौली बौद्ध मंदिर, उदयगिरि-खंडगिरि की प्राचीन गुफाएं, रत्नगिरि, ललितगिरि और उदयगिरि के बौद्ध भित्तिचित्र और गुफाएं,सप्तसज्या का मनोरम पहाडी दृश्य, सिमिलिपाल राष्ट्रीय उद्यान तथा बाघ परियोजना, हीराकुंड बांध, दुदुमा जलप्रपात, उषाकोठी वन्य जीव अभयारण्य, गोपानपुर समुद्री तट, हरिशंकर, नृसिंहनाथ, तारातारिणी, तप्तापानी, भितरकणिका, भीमकुंड कपिलाश आदि।
स्रोत: भारत २००८ – एक संदर्भ वार्षिक ![]()

