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मेघालय

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 22,429 वर्ग कि.मी.
जनसंख्‍या 2,318,822
राजधानी शिलांग
मुख्‍य भाषा खासी, गारो तथा अंग्रेजी

इतिहास और भूगोल


चेरापूंजी

मेघालय का गठन असम के अंतर्गत 2 अप्रैल, 1970 को एक स्‍वायत्तशासी राज्‍य के रूप में किया गया। एक पूर्ण राज्‍य के रूप में मेघालय 21 जनवरी, 1972 को अस्तित्‍व में आया। इसकी उत्तरी और पूर्वी सीमाएं असम से और दक्षिणी तथा पश्चिमी सीमाएं बंगलादेश से मिलती हैं। मेघालय, जिसका शाब्दिक अर्थ हैं मेघों का आलय यानी बादलों का घर, मूलत: एक पहाड़ी राज्‍य है। यहां मुख्‍यत: खासी, जयंतिया और गारों आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। मेघालय के मध्‍य और पूर्वी भाग, जिसमें खासी और जयंतिया पहाडियां हैं एक विशाल पठारी क्षेत्र हैं। इस इलाके में विस्‍तृत मैदान, पहाडियां और नदी घाटियां हैं। इस पठार के दक्षिणी इलाके में गहरे खड्ड तथा ढलानें हैं और पहाड की तलहटी पर समतल भूमि की संकरी पट्टी बंगलादेश की अंतरराष्‍ट्रीय सीमा के साथ लगी है।

कृषि और सिंचाई

मेघालय बुनियादी तौर पर कृ‍षि प्रधान राज्‍य है। यहां की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्‍या आजीविका के लिए मुख्‍य रूप से खेती-बाड़ी पर निर्भर है। यहां की मिट्टी और जलवायु बागवानी के अनुकूल होने के कारण बागवानी के विकास की यहां काफी क्षमता है। शीतोष्‍ण, उपोष्‍ण और उष्‍ण कटिबंधी फलों और सब्जियों के उत्‍पादन की भी यहां संभावनाएं हैं।

चावल और मक्‍का यहां की मुख्‍य फसलें हैं। इनके अतिरिक्‍त मेघायल अपने संतरे (खासी मेंडेरियन), अनान्‍नास, केला, कटहल और आलूबुखारा, नाशपाती तथा आडू जैसे शीतोष्‍ण फलों के लिए प्रसिद्ध है। नकदी फसलों तथा प्रचलित व परंपरागत ढंग से उगाई जाने वाली फसलों में आलू, हल्‍दी, अदरक, काली मिर्च, सुपारी, पान टैपियोका, छोटे रेशे वाली कपास, पटसन और मेस्‍टा, सरसों और तोरिया शामिल हैं। इस समय गैर- परंपरागत फसलों जैसे तिलहनों (मूंगफली, सोयाबीन और सूरजमुखी), काजू, स्‍ट्रॉबरी, चाय और कॉफी, मशरूम, जड़ी-बूटियों, आर्किड और व्‍यावसायिक दृष्टि से उगाए जाने वाले फूलों की खेती पर विशेष ध्‍यान दिया जा रहा है।

उद्योग

मेघालय औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड राज्‍य की वित्तीय एवं औद्योगिक विकास संस्‍था है, जो स्‍थानीय उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। जिला औद्योगिक केंद्र लघु, ग्रामीण, बहुत छोटे स्‍तर के तथा कुटीर उद्योगों के विकास तथा संवर्धन के क्षेत्र में कार्य कर रहा हैं। लोहे तथा इस्‍पात सामग्री, सीमेंट तथा अन्‍य उपभोक्‍ता वस्‍तुओं के उत्‍पादन के लिए अनेक उपक्रमों की स्‍थापना की गई हैं।

त्‍योहार


वांगला त्‍योहार, मेघालय

पांच दिन तक मनाया जाने वाला ‘का पांबलांग-नोंगक्रेम’ खासियों का एक प्रमुख धार्मिक त्‍योहार है। यह नोंगक्रेम नृत्‍य के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह हर साल शिलांग से लगभग 11 कि.मी. दूर स्मित नाम के गांव में मनाया जाता है। शाद सुक मिनसीम खासियों का एक अन्‍य महत्‍वपूर्ण पर्व है। यह पर्व हर वर्ष अप्रैल के दूसरे सप्‍ताह में शिलांग में मनाया जाता है। बेहदीनखलम जयंतिया आदिवासियों का सबसे महत्‍वपूर्ण तथा खुशनुमा त्‍योहार है। यह आमतौर पर जुलाई के महीने में जयंतिया पहाडियों के जोवई कस्‍बे में मनाया जाता है। गारो आदिवासी अपने देवता सलजोंग (सूर्य देवता) से सम्‍मान में अक्‍तूबर-नवंबर में वांगला त्‍योहार मनाते हैं। ये त्‍योहार एक हफ्ते तक चलता है।

परिवहन

सड़कें: मेघालय से छह राष्‍ट्रीय राज मार्गगुजरते हैं। राज्‍य में लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार की गई पक्‍की और कच्‍ची सड़कों की कुल लंबाई 7,977.98 किलोमीटर है।

उड्डयन: राज्‍य में एक मात्र हावई अड्डा उमरोई में हैं, जो शिलांग से 35 किलोमीटर दूर हैं।

पर्यटन स्‍थल

मेघालय में जगह-जगह ऐसे खूबसूरत पर्यटन स्‍थल हैं, जहां प्रकृति अपने भव्‍य रूप में दिखाई देती है। राजधानी शिलांग में कई रमणीक स्‍थान हैं। इनमें वार्ड लेक, लेडी हैदरी पार्क, पोलो ग्राउंड, मिनी चिडियाघर, एलीफेंट जलप्रपात, और शिलांग चोटी प्रमुख हैं। शिलांग चोटी से पूरे शहर का नजारा दिखाई देता है। यहां का गोल्‍फ कोर्स देश के बेहतरीन गोल्‍फ कोर्सों में से एक हैं।

स्रोत: भारत २००८ – एक संदर्भ वार्षिक