भारत के बारे में जानें
यह पृष्‍ठ अंग्रेजी में (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

मणिपुर

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 22,327 वर्ग कि.मी.
जनसंख्‍या 2,293,896
राजधानी इंफाल
मुख्‍य भाषा मणिपुरी

इतिहास और भूगोल

ईसवी युग के प्रारंभ होने से पहले से ही मणिपुर का लंबा और शानदार इतिहास है। यहां के राजवंशों का लिखित इतिहास सन् 33 ई. में पखंगबा के राज्‍यभिषेक के साथ शुरू होता है। उसके बाद अनेक राजाओं ने मणिपुर पर शासन किया। मणिपुर की स्‍वतंत्रता और संप्रभुता 19वीं सर्दी के आरंभ तक बनी रही। उसके बाद सात वर्ष (1819 से 1825 तक) बर्मी लोगो ने यहां पर कब्‍जा करके शासन किया। 1891 में मणिपुर ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया और 1947 में शेष देश के साथ स्‍वतंत्र हुआ। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने पर यह एक मुख्‍य आयुक्‍त के अधीन भारतीय संघ में भाग ‘सी’ के राज्‍य के रूप में शामिल हुआ। बाद में इसके स्‍थान पर एक प्रादेशिक परिषद गठित की गई जिसमें 30 चयनित त‍था दो मनोनीत सदस्‍य थे। इसके बाद 1962 में केंद्रशासित प्रदेश अधिनियम के अंतर्गत 30 चयनित तथा तीन मनोनीत सदस्‍यों की एक विधानसभा स्‍‍थापित की गई। 19 दिसंबर, 1969 से प्रशासक का दर्जा मुख्‍य आयुक्‍त से बढ़ाकर उप राज्‍यपाल कर दिया गया। 21 जनवरी, 1972 को मणिपुर को पूर्ण राज्‍य का दर्जा मिला और 60 निर्वाचित सदस्‍यों वाली विधानसभा गठित की गईं। इसमे 19 अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। राज्‍य से लोकसभा में दो और राज्‍य सभा में एक प्रतिनिधि है।

मणिपुर भारत के पूर्वी सिरे पर स्थित है। यह पूर्व में म्‍यांमार (बर्मा) और उत्तर में नागालैंड राज्‍य से घिरा हुआ है, इसके पश्चिम में असम राज्‍य और दक्षिण में मिजोरम राज्‍य और म्‍यामांर हैं। मणिपुर 23.830 उत्तर और 25.680 उत्तर देशांश तथा 93.030 पूर्व और 94.780 पूर्व अक्षांश के बीच स्थित है। यहां का क्षेत्रफल 22,327 वर्ग किलो मीटर है। भौतिक रूप से मणिपुर में दो भाग हैं, पहाडियां और घाटी। घाटी मध्‍य में है जिसके चारों ओर पहाडियां हैं। ये पहाडियां राज्‍य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 9/10 भाग घेरती हैं। मणिपुर घाटी समुद्री तल से लगभग 790 मीटर ऊपर है। यह पर्वतीय श्रृंखला उत्तर में ऊंची है और धीरे धीरे मणिपुर के दक्षिणी हिस्‍से में पहुंचने पर इसकी ऊंचाई कम हो जाती है। यह घाटी दक्षिण की ओर ढलान बनाती है।

कृषि

कृषि और संबद्ध गतिविधियां राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था का मुख्‍य आधार है। 70 प्रतिशत आबादी इसी पर निर्भर है। राज्‍य में कृषि कुल भौगोलिक क्षेत्र 10.48 प्रतिशत क्षेत्र तक सीमित है। कुल कृषि क्षेत्र का 13.24 प्रतिशत क्षेत्र यानी 30,980 हेक्‍टेयर सिंचित क्षेत्र है। राज्‍य में अन्‍न उत्‍पादन मामूली कम है किंतु तिलहन और दलहन उत्‍पादन बहुत कम होता है। उत्‍पादन बढ़ रहा है लेकिन बढ़ती आबादी के कारण कृषि की हालत कमजोर है।

राज्‍य में कृषि में लगातार वृद्धि हो रही है। राज्‍य का कृषि विभाग 11वीं योजना में कृषि की निरंतरता बनाए रखने और उसके व्‍यावसायीकरण की योजना बना रहा है। इसके लिए वह निम्‍न बातों पर विशेष ध्‍यान दे रहा है:

  1. कुल कृषि क्षेत्र को 3.86 प्रतिशत यानी 10वीं योजना की उपलब्धि से 18.68 प्रतिशत बढ़ाना;
  2. 11वीं योजना में फसल घनत्‍व को 132.73 प्रतिशत से बढ़ाकर 140.45 प्रतिशत करना;
  3. 10वीं योजना की उपलब्धि में फसल उत्‍पादन दर की 7.97 प्रतिशत बढ़ाना तथा 11वीं योजना के अंत तक 39.85 प्रतिशत वृद्धि करना।

उपर्युक्‍त उद्देश्‍य की प्राप्ति के लिए निम्‍न क्षेत्रों पर विशेष बल दिया जा रहा है :-

  1. गुणवत्‍ता वाले बीज का उत्‍पादन,
  2. आश्‍वस्‍त सिंचाई,
  3. फार्म मशीनीकरण,
  4. मृदा स्‍वास्‍थ्‍य प्रबंधन,
  5. जैव फार्मिंग,
  6. बहुस्‍तरीय फसल उगाना,
  7. फसल कटाई के बाद का प्रबंधन,
  8. बाजार का नियमन
  9. जैव-प्रौद्योगिकी और कृषि प्रसंस्‍करण में अनुसंधान और विकास,
  10. कृषि में सूचना प्रौद्योगिकी का आयोग,
  11. प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण : (क) प्रत्‍येक जिले में किसान फील्ड स्‍कूल की स्‍थापना तथा (ख) विस्‍तार प्रबंधन।

वन

राज्‍य के कुल 17,219 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन है। इसमें से घने वन 6,536 में है। इसके अलावा राज्‍य में 10,681 वर्ग किलोमीटर में खुले वन है, जो राज्‍य के भौगोलिक क्षेत्र का 77.12 प्रतिशत है। मणिपुर के उखरूल जिले के शिराय गांव के वनो में स्‍वर्गपुष्‍प कहे जाने वाले शिराय लिली (लिलियम मैक्‍लीनी) फूल मिलते है, जो विश्‍व में किसी भी अन्‍य स्‍थान में नहीं होते। इसी प्रकार जूको घाटी में दुलर्भ प्रजाति‍ के जूको लिली (लिलियम चित्रांगद) पाए जाते है। मणिपुर अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां कई तरह के दुर्लभ पेड़ पौधे और जीव-जंतु पाए जाते है। यह ‘संगाई’ हिरण (सेरवस इल्‍डी इल्‍डी) का भी निवास स्‍थान है, जो विश्‍व की दुर्लभ नस्‍लो में एक है। यह केबुल लामजाओ के प्राकृतिक अधिवास क्षेत्र में पाया जाता है। केबुल लामजो को, जोकि 40 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैला है।

1977 में इस अधिवास कोराष्‍ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया है। इसकी अनोखी विशेषता तैरता हुआ पार्क है जिसमें ’फुमडी’ नाम की वनस्‍पति उगती है। संगाई हिरण इसी वनस्‍पति पर निर्भर है। राज्‍य सरकार द्वारा उठाए गए संरक्षण उपायों के कारण 2003 से ‘संगाई’ की संख्‍या बढ़कर 180 हो गई। 1975 में इनकी संख्‍या मात्र 14 थी।

केइबुल लामजाओ राष्‍ट्रीय पार्क के अलावा एक 184.40 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाले भांगोपोकपी लोकचाओ वन्‍यप्राणी अभयारण्‍य को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। यह चंदेल जिले में है और भारत मलायाई जैव भौगोलिक स्थित है। इस वन्‍यप्राणी अभारण्‍य में मलायान सन भालू पाए जाते हैं।

राज्‍य में जैव संपदा प्रचुरता से मौजूद है। वनों का बडा हिस्‍सा सुरक्षित है। इनमें टेक्‍सस बकाटा, जिनसेंग जैसे दुर्लभ औषधीय पौधे पाए जाते है। यह कई दुर्लभ रंग बिरंगे फूलदार पौघों और सुंदर पौधो का आश्रयस्‍‍थल है।

सिंचाई

राज्‍यों में बडी और मंझोली सिंचाई परियोजनाओं की शुरूआत 1980 में हुई। अब तक जिन आठ बडी, मंझोली तथा बहुउद्देश्‍यीय सिंचाई परियोजनाओं का कार्य आंरभ किया गया है वे हैं: लोकतक लिफ्ट सिंचाई परियोजना, कोफुम बांध, सेकमाइ बौराज, इंफाल बेराज, सिंगडा बहुउद्देश्‍यीय योजना, खूगा बहुउद्देश्‍यीय परियोजना, थोबल बहुउद्देश्‍यीय परियोजना और दोलईथबी बांध बहुउद्देश्‍यीय परियोजना। इनमें से कोफुम बांध, इंफाल बैराज, लोकतक लिफ्ट सिंचाई तथा सिंगडा परियोजना के सिंचाई वाले भाग तथा केथलमानबी के बैराज तथा थोबल बहुउद्देश्‍यीय योजना को आठवीं योजना के अंत तक पूरा कर लिया गया था।

नवीं योजना के अंत तक इन परियोजनाओं से उत्‍पन्‍न सिंचाई क्षमता 28,500 हेक्‍टेयर थी जिसमें से 21,850 क्षेत्र में सिंचाई हो रही थीं। सृजित क्षमता और वास्‍तविक उपयोग के अंतराल को भरने के लिए चालू और रख रखाव योजना चल रही है। इसके अतिरिक्‍त लुअसीपट तथा पोइरोपट के जल भराव वाले क्रमश: 1200 हेक्‍टेयर तथा 900 हेक्‍टेयर क्षेत्रों को थोबुल परियोजना द्वारा खेती के लायक बनाया गया है। सिंगडा बांध से राज्‍य जन स्‍वास्‍थ्‍य इंजीनियरिंग विभाग को 4 एमजीडी कच्‍चे पानी की आपूर्ति होती है। वर्ष 2007 से खुगा बहुउद्देश्‍यीय परियोजना से राज्‍य को 5 एमजीडी कच्‍चे पानी की आपूर्ति होगी।

वर्तमान में तीन परियोजनाएं : खुगा बहुउद्देश्‍यीय परियोजना, थोबुल बहुउद्देश्‍यीय परियोजना तथा डोलाईथबी बैराज परियोजना का कार्य प्रगति पर है तथा इसे दसवीं योजना के दौरान पूरा कर लेने का लक्ष्‍य है। राज्‍य सरकार इन पर विशेष ध्‍यान दे रही है। खुगा परियोजना 2006 में और थोबुल तथा डोलाईथबी परियोजनाएं 2008 में पूरी करने का लक्ष्‍य है। राज्‍य सरकार राज्‍य योजना तथा पूर्वोत्तर परिषद की आर्थिक सहायता से शुरू होने वाली परियोजनाओं के लिए जांच कर रही है।

पृष्ठ: १ | | अगला

स्रोत: भारत २००८ – एक संदर्भ वार्षिक