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महाराष्‍ट्र

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 3,07,713 वर्ग कि.मी.
जनसंख्‍या 96,752,247
राजधानी मुंबई
मुख्‍य भाषा मराठी

इतिहास और भूगोल

महाराष्‍ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ई.पु. 230 से 225 ई.) थ जोकि महाराष्‍ट्र के संस्‍थापक थे। उन्‍होनें अपने पीछे बहुत से साहित्यिक, कलात्‍मक तथा पुरातात्विक प्रमाण छोडे है। उनके शासनकाल में मानव जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर प्रगति हुई।

इसके बाद वाकाटक आए, जिन्‍होंने सर्व भारतीय साम्राज्‍य की स्‍थापना की। उनके शासनकाल में महाराष्‍ट्र मे शिक्षा, कला तथा धर्म सभी दिशाओं में विकास हुआ। उनके शासन के दौरान ही अजंता की गुफाओं में उच्‍च कोटि के भित्तिचित्र बनाए गए। वाकाटको के बाद कुछ समय के लिए कलचुरी वंश ने शासन किया और फिर चालुक्‍य सत्‍ता में आए। इसके बाद तटवर्ती इलाकों मे शिलाहारों के अलावा महाराष्‍ट्र पर राष्‍ट्रकूट तथा यादव शासकों का नियंत्रण रहा। यादवों ने मराठी को शासन की भाषा बनाया और दक्षिण के एक बडे भाग पर अपना आधिपत्‍य कायम किया।

जबकि बहमनी शासकों ने महाराष्‍ट्र तथा इसकी संस्‍कृति को कुछ हद तक समन्वित किया, पर शिवाजी के कुशल नेतृत्‍व में महाराष्‍ट्र का सर्वांगीण विकास हुआ और यह एक अलग पहचान के साथ उभरकर सामने आया। शिवाजी ने स्‍वराज तथा राष्‍ट्रीयता की एक नई भावना पैदा की। उनकी प्रचंड शाक्ति ने मुगलों को भारत के इस भाग में नहीं बढने दिया। पेशवाओं ने दक्षिण के पठार से लेकर पंजाब पर हमला बोल कर मराठाओं का आधिपत्‍य स्‍थापित किया।

स्‍वतंत्रता संग्राम में महाराष्‍ट्र सबसे आगे था। भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का जन्‍म भी यहीं हुआ। मुंबई तथा महाराष्‍ट्र के अन्‍य शहरों के अनगिनत नेताओं ने पहले तिलक और बाद में महात्‍मा गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस के आंदोलन को आगे बढाया। गांधी जी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्‍ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्‍ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।

देश के राज्‍यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 मई, 1960 को महाराष्‍ट्र राज्‍य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ। यह राज्‍य आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया, जोकि पहले चार अलग अलग प्रशासनों के नियंत्रण में थे। इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन तथा गोवा के बीच का जिला, हैदराबाद के निजाम की रियासत के पांच जिले, मध्‍य प्रांत (मध्‍य प्रदेश) के दक्षिण के आठ जिले तथा आसपास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थी, जो समीपवर्ती जिलों में मिल गई थी। महाराष्‍ट्र प्रायद्वीपीय भारत के उत्तर में बसा हुआ है और भौगोलिक दृष्टि से यह राज्‍य मुख्‍यत: पठारी है। महाराष्‍ट्र पठारों का पठार है। इसके उठे हुए पश्चिमी किनारे सहाद्रि पहाडियों का निर्माण करते है और समुद्र तट के समानांतर हैं तथा इसकी ढलान पूर्व तथा दक्षिण पूर्व की ओर धीरे धीरे बढ़ती है। राज्‍य के उत्तरी भाग में सतपुडा की पहाडियां है, जबकि अजंता तथा सतमाला पहाडियां राज्‍य के मध्‍य भाग से होकर जाती है। अरब सागर महाराष्‍ट्र की पश्चिमी सीमा का प्रहरी है, जबकि गुजरात और मध्‍य प्रदेश इसके उत्तर में है। राज्‍य की पूर्वी सीमा छत्तीसगढ है और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश इसके दक्षिण में है।

कृषि

महाराष्‍ट्र के लगभग 65 प्रतिशत श्रमिक कृषि तथा संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। यहां की प्रमुख फसलें हैं धान, ज्‍वार, बाजरा, गेहूं, तूर, उडद, चना और दलहना। यह राज्‍य तिलहनों का प्रमुख उत्‍पादक है और मूंगफली, सूरजमूखी, सोयाबीन प्रमुख तिलहनी फसलें है। महत्‍वपूर्ण नकदी फसलें है कपास, गन्‍ना, हल्‍दी और सब्जियां। राज्‍य में 12.90 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में विभिन्‍न प्रकार के फल, जैसे आम, केला, संतरा, अंगूर, काजू आदि की फसलें उगाई जाती है।

उद्योग

महाराष्‍ट्र को पूरे देश का औद्योगिक क्षमता का केंद्र माना जाता है और राज्‍य की राजधानी मुंबई देश की वित्‍तीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र है। राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में औद्योगिक क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। खाद्य उत्‍पाद, तंबाकू और इससे बनी चीजें, सूती कपडा, कपड़े से बना सामान, कागज और इससे बनी चीजें, मुद्रण और प्रकाशन, रबड, प्‍लास्टिक, रसायन व रासायनिक उत्‍पाद, मशीनें बिजली की मशीनं, यंत्र व उपकरण तथा परिवहन उपकरण और उनके कल पुर्जे आदि का राज्‍य के औद्योगिक उत्‍पादन में महत्‍वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005-06 में औद्योगिक उत्‍पादन (निर्माण) वर्ष 2004-05 के मुकाबले 8.9 प्रतिशत अधिक रहा।

सिंचाई और बिजली

जून 2005 के अंत तक 32 बड़ी, 178 मंझोली और राज्‍य के क्षेत्र की 2,274 लद्यु सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चूकी थीं इसके अलावा 21 बडी 39 मंझोली सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है। 2004 से 2005 में राज्‍य में कुल सिंचित क्षेत्र 36.36 लाख हेक्‍टेयर था।

2004-05 में महाराष्‍ट्र की कुल स्‍थापित विद्युत उत्‍पादन क्षमता 12,909 मेगावाट थी। राज्‍य में प्‍लांट लोड फैक्‍टर (पी.एल.एफ) 81.6 प्रतिशत था और बिजली उत्‍पादन 68,507 करोड किलोवाट घंटा था।

परिवहन

सड़क: मार्च 2005 तक राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 2.29 लाख कि.मी. थी, जिसमें राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4, 367 कि.मी. प्रांतीय राजमार्गों की 33,406 कि.मी., प्रमुख जिला सड़कों की 48,824 कि.मी., अन्‍य जिला सड़कों की लंबाई 44,792 कि.मी. और ग्रामीण सड़कों की कुल लंबाई 97,913 कि.मी. थी।

रेलवे: महाराष्‍ट्र में 5,527 कि.मी. रेल मार्ग है। इसमें से लगभग 78.6 प्रतिशत बड़ी रेल लाइनें, 7.8 प्रतिशत मीटर गेज तथा 13.6 प्रतिशत छोटी रेल लाइनें है।

उड्डयन: राज्‍य में कुल 24 हवाई अड्डे/हवाई पट्टियां है। इनमें से 17 महाराष्‍ट्र सरकार के नियंत्रण में है। चार हवाई अड्डे अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण/भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के नियंत्रण में हैं, ज‍बकि बाकी तीन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। राज्‍य सरकार के नियंत्रण वाले हवाई अड्डों पर अभी व्‍यावसायिक उड़ानो की सुविधा नहीं है।

बंदरगाह: मुबंई प्रमुख बंदरगाह है। राज्‍य में दो बड़े और 48 छोटे अधिसूचित बंदरगाह है।

पर्यटन स्‍थल


महाराष्‍ट्र की एलोरा गुफाएं

यहां के महत्‍वपूर्ण पर्यटन केंद्र है अजंता, एलोरा, एलिफेंटा, कन्‍हेरी और कारला गुफाएं, महाबलेश्‍वर, माथेरन और पंचगनी, जवाहर, मालशेजघाट, अंबोली, चिकलधारा और पन्‍हाला पर्वतीय स्‍थल। पंढरपुर, नासिक, शिरडी, नांदेड, औधानागनाथ, त्रयंबकेवर, तुलजापुर, गणपतिपुले, भीमशंकर, हरिहरेश्‍वर, शेगाव, कोल्‍हापुर, जेजुरी तथा अंबजोगई धार्मिक स्‍थान है।

स्रोत: भारत २००८ – एक संदर्भ वार्षिक