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मध्‍य प्रदेश

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 3,08,000 वर्ग कि.मी.
जनसंख्‍या 60,385,118
राजधानी भोपाल
मुख्‍य भाषा हिंदी

इतिहास और भूगोल

मध्‍य प्रदेश 30, 8,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल के साथ दूसरा सबसे बड़ा भारतीय राज्‍य है। भौगोलिक दृष्टि से यह देश में एक केन्‍द्रीय स्‍थान रखता है।

सम्राट अशोक ने सबसे पहले उज्‍जैन पर शासन किया। मध्‍य भारत का काफी बड़ा हिस्‍सा गुप्‍त साम्राज्‍य (300-500 ईसवी) का भाग था। ग्‍यारहवीं शताब्‍दी के प्रारंभ में मध्‍य भारत में मुसलमानों का आगमन हुआ। सबसे पहले महमूद गजनवी यहां आया और फिर मुहम्‍मद गौरी आया, जिसने वहां के कुछ भागों को अपनी दिल्‍ली की सल्‍तनत में मिला लिया। मध्‍य भारत मुगल साम्राज्‍य का भी हिस्‍सा रहा। मराठों का प्रभाव आरंभ होने से लेकर 1794 में माधोजी सिंधिया के देहांत तक मध्‍य भारत पर मराठों का बोलबाला रहा। परंतु उसके बाद छोटे छोटे स्‍वतंत्र राज्‍य बनने लगे। ये छोटे राज्‍य ही आगे चलकर ब्रिटिश सत्‍ता के जमने का कारण बने।

इंदौर की रानी अहिल्‍याबाई होल्‍कर, गोंड की महारानी कमलापति और रानी दुर्गावती आदि कुछ महान महिला शासकों ने अपनी उत्‍कृष्‍ट शासन के लिए भारतीय इतिहास में अपना नाम स्‍वर्णाक्षरों में लिखवा दिया। मध्‍य प्रदेश की स्‍थापना 1 नवंबर, 1956 को हुई। नया राज्‍य छत्‍तीसगढ़ बनाने के लिए हुए विभाजन के बाद यह अपने वर्तमान स्‍वरूप में 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्‍व में आया। मध्‍य प्रदेश उत्तर में उत्तर प्रदेश, पूर्व में छत्‍तीसगढ़ तथा पश्चिम में राजस्‍थान और गुजरात में, दक्षिण में महाराष्‍ट्र से घिरा है।

कृषि

कृषि राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था का आधार है, क्‍योंकि राज्‍य की 74.73 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और खेती पर निर्भर है। राज्‍य की करीब 49 प्रतिशत जमीन खेती योग्‍य है। 2004-2005 में शुद्ध बुवाई क्षेत्र 1247 लाख हेक्‍टेयर रहने का अनुमान था और अनाज का कुल उत्‍पादन 14.10 करोड़ मीट्रिक टन रहा। गेहूं, चावल, दलहन जैसी प्रमुख फसलों का उत्‍पादन भी अच्‍छा रहा। 20 जिलों में राष्‍ट्रीय बागवानी मिशन क्रियान्वित किया गया है। बागवानी और खाद्य प्रसंस्‍करण विभाग नाम से अलग विभाग गठित किया गया है।

उद्योग और खनिज

मध्‍य प्रदेश ने इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, दूरसंचार, मोटरवाहनों, सूचना प्रौद्योगिकी आदि उच्‍च तकनीकी उद्योगों के क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। दूरसंचार प्रणालियों के लिए यह राज्‍य ऑप्टिकल फाइबर का उत्‍पादन कर रहा है। इंदौर के पास पीठमपुर में बडी संख्‍या में मोटर वाहन उद्योग स्‍थापित हुए है। राज्‍य में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उद्योग है-भोपाल में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्‍स लि., होशंगाबाद में सिक्‍योरिटी पेपर मिल, देवास में नोट छापने की प्रेस, नेपानगर में अखबारी कागज की मिल और नीमच की अल्‍कालॉयड फैक्‍ट्री।

गत वर्ष राज्‍य में सीमेंट का उत्‍पादन 12.49 लाख मीट्रिक टन हुआ। पीठमपुर में जल्‍दी ही एक मालवाहक विमान परिसर स्‍थापित किया जा रहा है। भारत सरकार इंदौर में विशेष आर्थिक क्षेत्र स्‍थापित कर रही है। समग्र आर्थिक विकास नीति लागू कर प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्‍साहित किया जा रहा है। राज्‍य ने निवेश को आकर्षित करने के लिए आकर्षक छूट देने के लिए औद्योगिक प्रोत्‍सा‍हन नीति की घोषणा की है। अब तक उद्योग लगाने की इच्‍छा जाहिर करने वाले 5200 करोड रूपये के निवेश प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए है। सागर जिले के बीना में काफी समय से लंबित 10,300 करोड़ रूपये की लागत वाली ओमान बीना तेलशोधक परियोजना का रास्‍ता साफ हो गया है। भारत सरकार ने धार जिले के पीठमपुर में एक राष्‍ट्रीय ऑटोमोटिव परीक्षण, अनुसंधान तथा विकास परियोजना को मंजूरी दे दी है।

राज्‍य सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक नई सूचना प्रौद्योगिकी नीति लागू की है।

खनिज उत्‍पादन के क्षेत्र में राज्‍य का विशिष्‍ट स्‍थान है। वर्ष 2005-06 में 5312.65 करोड़ रूपये के खनिजों का उत्‍पादन हुआ। राज्‍य में 21 तरह के खनिज निकाले जाते है। 2006 में डोलोमाइट का उत्‍पादन 128 हजार मीट्रिक टन, हीरे का उत्‍पादन 44149 हजार कैरेट और चूना पत्‍थर का 25865 हजार मीट्रिक टन, बॉक्‍साइट का उत्‍पादन 87 हजार मिलियन मीट्रिक टन, ताम्र अयस्‍क का उत्‍पादन 1706 हजार मिलियन मीट्रिक टन और कोयले का उत्‍पादन 54000 हजार मिलियन मीट्रिक टन रहा। यह राज्‍य चंदेरी और माहेश्‍वर के पारंपरिक हस्‍तशिल्‍प और हथकरघे से बने कपड़ों के लिए प्रसिद्ध है।

सिंचाई और बिजली

2004-2005 में कुल 61.9 लाख हेक्‍टेयर इलाके में सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध थी। सिंचाई सुविधाओं में 39 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक वृद्धि का लक्ष्‍य है। 30 जिलो की विद्यमान सिंचाई प्रणालियों का नवीकरण करके 5 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र मे सिंचाई सुविधाओं की फिर से बहाली के लिए 1919 करोड़ रूपये की जल क्षेत्र पुनर्निर्माण परियोजना पर काम चल रहा है।

मध्‍य प्रदेश में निम्‍न स्‍तर का कोयला प्रचुर मात्रा में होता है, जो बिजली उत्‍पादन के अनुकूल है। पनबिजली उत्‍पादन की भी यहां अपार क्षमता है। यहां राज्‍य में वर्ष 2005-2006 में विद्युत उत्‍पादन की कुल स्‍थापित क्षमता 7934.85 मेगावाट थी। यहां 902.5 मेगावाट बिजली उत्‍पादन क्षमता के आठ पनबिजली केंद्र है। राज्‍य के 51,806 में से 50,475 गांवों में बिजली पहुंच चुकी है।

विकास की पहल

मध्‍य प्रदेश ग्रामीण रोजगार योजना 18 जिलों में लागू की गई है। इस योजना को लागू करने में मध्‍य प्रदेश प्रथम पर है। राज्‍य बागवानी उत्‍पादन और उत्‍पादकता को बढाने के लिए राष्‍ट्रीय बागवानी मिशन शुरू किया गया है।

परिवहन

सड़कें: मध्‍य प्रदेश में सड़कों की कुल लंबाई 73311 किलोमीटर है। राष्‍ट्रीय राजमार्गो की लंबाई 4280 कि.मी और प्रांतीय राजमार्गो की लंबाई 8729 कि.मी. है। राज्‍य में सड़को के निर्माण तथा सुधार का कार्य बडे पैमाने पर किया जा रहा है तथा लगभग 60 हजार कि.मी. सड़कों का निर्माण तथा सुधार का कार्य किया जाएगा। वर्ष 2005 को ‘सडकों का वर्ष’ के रूप मे मनाया गया। इस दौरान प्रत्‍येक माह एक महत्‍वपूर्ण सड़क का निर्माण कार्य पूरा किया गया।

रेलवे: उत्‍तर भारत को दक्षिण भारत से जोडने वाला प्रमुख रेलमार्ग मध्‍य प्रदेश से होकर गुजरता हैं। राज्‍य में भोपाल, बीना, ग्‍वालियर, इंदौर, इटारसी, जबलपुर, कटनी, रतलाम और उज्‍जैन मुख्‍य जंक्‍शन है। रेलवे के क्षेत्रीय मुख्‍यालय भोपाल, रतलाम और जबलपुर में है।

त्‍योहार

मध्‍य प्रदेश में कई त्‍योहार और उत्‍सव मनाए जाते हैं। आदिवासियों का एक महत्‍वपूर्ण त्‍योहार भगोरिया है, जो पंरपरागत हर्षोल्‍लास से मनाया जाता है। खजुराहो, भोजपुर, पचमढी और उज्‍जैन में शिवरात्रि के पर्व के दौरान स्‍थानीय परंपराओं का रंग दिखाई देता है। चित्रकूट और ओरछा में रामनवमी पर्व के आयोजन की अनोखी परंपरा है। ओरछा, मालवा और पचमढी के उत्‍सवों में कला और संस्‍कृति का बडा सुंदर मेल दिखाई देता है। ग्‍वालियर के तानसेन संगीत समारोह, मैहर के उस्‍ताद अलाउद्दीन खां संगीत समारोह, उज्‍जैन के कालिदास समारोह और खजुराहों के नृत्‍य समारोह मध्‍य प्रदेश के कुछ प्रसिद्ध कला उत्‍सव हैं। जबलपुर में संगमरमर की चट्टानों के लिए मशहूर भेडाघाट में इस वर्ष से वार्षिक नर्मदा उत्‍सव की शुरूआत की गई है। शिवपुरी में इस वर्ष से शिवपुरी उत्‍सव शुरू किया गया है।

पर्यटन स्‍थल


मध्‍य प्रदेश के लोक नृत्‍य

अपनी मध्‍यकालीन विशेषताओं को सहेजकर रखे हुए मध्‍य प्रदेश के शहर, स्‍फूर्ति भर देने वाले वन्‍य जीव अभयारण्‍य, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य वाले स्‍थान और देश के पवित्र तथा महत्‍वपूर्ण तीर्थ इस राज्‍य में पर्यटकों के आकर्षण के केंद्र हैं। पचमढी की अद्भुत सौंदर्य, भेडाघाट की चमचमाती संगमरमरी चट्टाने और धुआंधार जलप्रपातों का शोर, कान्‍हा राष्‍ट्रीय उद्यान, जहां अनूठे बारसिंगे रहते हैं, बांधवगढ़ राष्‍ट्रीय उद्यान जहां प्रागैतिहासिक गुफाएं और वन्‍य जीवन है-ये सब राज्‍य के प्रमुख आकर्षण हैं। ग्‍वालियर, मांडू, दतिया, चंदेरी, जबलपुर, ओरछा, रायसेन, सांची, विदिशा, उदयगिरि, भीमबेटका, इंदौर और भोपाल ऐतिहासिक महत्‍व के स्‍थल हैं। माहेश्‍वर, ओंकारेश्‍वर, उज्‍जैन, चित्रकूट और अमरकंटक ऐसे स्‍थान हैं, जहां आकर तीर्थयात्रियों के मन को शांति मिलती है। खजुराहो के मंदिर विश्‍व में अनूठे हैं। इसके अलावा ओरछा, भोजपुर और उदयपुर के मंदिर इतिहास में रूचि रखने वाले लोगों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। सतना, सांची, विदिशा, ग्‍वालियर, इंदौर, मंदसौर, उज्‍जैन, राजगढ़, भोपाल, जबलपुर, रीवां और अन्‍य अनेक स्‍थानों के संग्रहालयों में पुरातत्‍वीय महत्‍व के भंडारों को संरक्षित रखा गया है। माहेश्‍वर, ओंकारेश्‍वर तथा अमरकंटक को उनके धार्मिक महत्‍व के अनुसार समग्र विकास के लिए पवित्र शहर घोषित किया गया है। बुरहानपुर को नए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

स्रोत: भारत २००८ – एक संदर्भ वार्षिक