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केरल

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 38,863 वर्ग कि.मी.
जनसंख्‍या 31,841,374
राजधानी तिरूवनंतपुरम
मुख्‍य भाषाएं मलयालम

इतिहास और भूगोल


केरल - बैकवाउटर

केरल भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर स्थित है। जब स्‍वतंत्र भारत में छोटी रियासतों का विलय हुआ तब त्रावनकोरे तथा कोचीन रियासतों को मिलाकर 1 जुलाई, 1949 को त्रावनकोर कोचीन राज्‍य बना दिया गया, किंतु मालाबार मद्रास प्रांत के अधीन रहा। राज्‍य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत त्रावनकोर-कोचीन राज्‍य तथा मालाबार को मिलाकर 1 नवंबर, 1956 को केरल राज्‍य बनाया गया।

पूर्व में ऊंचे पश्चिमी घाट और पश्चिम में अरब सागर के बीच स्थित इस प्रदेश की चौडाई 35 कि. मी. से 120 तक है। भौगोलिक दृष्टि से केरल को पर्वतीय क्षेत्र, घाटी, मध्‍यवर्ती मैदान तथा तटवर्ती क्षेत्र में विभाजित किया जा सकता है। केरल नदियों और तालाबों के मामले में समृद्व है। 44 नदियां (41 पश्चिम की ओर और तीन पूर्व की ओर बहने वाली) अपनी सहायक नदियां और उपधाराओं के साथ केरल से होकर गुजरती हैं। समुर्दी झीलें केरल में आकर्षण के केंद्र तथा आर्थिक दृष्टि से बहुत म‍हत्‍वपूर्ण है।

कृषि

केरल की कृषि की विशेषता यह है कि यहां व्‍यापारिक फसलें अधिक उगाई जाती हैं। राज्‍य की लगभग 50 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। नारियल, रबड, काली मिर्च, अदरक, चाय, इलायची, काजू तथा काफी आदि का केरल प्रमुख उत्‍पादक राज्‍य है। अन्‍य फसलों में सुपारी, केला, अदरक तथा हल्‍दी शामिल हैं। राज्‍य में जायफल, दालचीनी, लौंग आदि मसालों के वृक्ष भी उगाए जाते है। चावल तथा टैपियोका यहां की मुख्‍य खाद्य फसलें हैं। आठवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान चावल के क्षेत्र में वार्षिक कमी 22,000 हेक्‍टेयर थी। नौवीं योजना में यह घटकर 13000 हेक्‍टेयर रह गई। 2003-04 के 2.87 लाख हेक्‍टेयर की तुलना में यह बढकर 2004-05 में 2.90 लाख हेक्‍टेयर हो गई। यह वृद्वि 2,634 हेक्‍टेयर थी। चावल का उत्‍पादन 5.70 मीट्रिक टन से बढकर 6.67 लाख टन हो गया। यह वृद्वि 17 प्रतिशत थी।

हाल के वर्षो के अभूतपूर्व सूखे की वजह से धान उत्‍पादन में 2003 से 2004 में कमी आई किंतु 2004 से 05 में उत्‍पादन में वृद्वि हुई। 2004 से 05 में चावल के उत्‍पादन में वृद्वि अल्‍लपुज्‍जा (75 प्रतिशत), पलक्‍कड (37 प्रतिशत) में दर्ज की गई।

आय और रोजगार की दृष्टि से अपने बहुविध योगदान के कारण नारियल केरल की ग्रामीण अर्थवयवस्‍था का मुख्‍य आधार है। नारियल का फसल क्षेत्र नौ लाख हेक्‍टेयर है, जो कुल फसल क्षेत्र का 41 प्रतिशत है। केरल में नारियल से 35 लाख लोगों की रोजी रोटी चलती है।

मुख्‍य निर्यात वस्‍तुओ में काली मिर्च ऐसी वस्‍तु है, जिसमें केरल अन्‍य उत्‍पादक राज्‍यों में हमेशा से ही सर्वश्रेष्‍ठ बना हुआ है। देश भर में काली मिर्च के उत्‍पादन का 98 प्रतिशत केरल मे होता है और इस तरह इस क्षेत्र में केरल का एकाधिकार बना हुआ है।

केरल का चार बागानी फसलों रबड, काफी, चाय तथ इलायची में खास हिस्‍सा है। इन चार फसलों की 6.53 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में खेती होती है। यह राज्‍य के कुल कृषि क्षेत्र का 29 प्रतिशत और राज्‍य में इन फसलों के अधीन क्षेत्र का 43 प्रतिशत है।

देश के कुल रबड़ क्षेत्र का 83 प्रतिशत क्षेत्र केरल में है। वर्ष 2004-05 में रबड़ का कुल फसल क्षेत्र 4.81 लाख हेक्‍टेयर था, जोकि पिछले वर्ष से 2141 हेक्‍टेयर अधिक रहा। इस वर्ष केरल में रबड़ का उत्‍पादन 6.91 लाख टन रहा जोकि पिछले वर्ष से 5 प्रतिशत अधिक था। उत्‍पादकता में वृद्धि 2004-05 में भी बनी रही।

वर्ष 2004-05 में देश में कॉफी का उत्‍पादन क्षेत्र 3.28 लाख हेक्‍टेयर था जिसमें से 0.846 लाख हेक्‍टेयर केरल में है जो कुल क्षेत्र का 26 प्रतिशत है। वर्ष 2004-05 के दौरान केरल की हिस्‍सेदारी 19.7 प्रतिशत रही। देश के कुल 2.75 लाख मीट्रिक टन कॉफी उत्‍पादन के मुकाबले केरल का उत्‍पादन 0.54 लाख मीट्रिक टन था, देश में 5.11 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्रफल में चाय के कुल बागानों की तुलना में केरल में केवल 0.37 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में चाय की खेती की गई। चाय उत्‍पादन में केरल की हिस्‍सेदारी 2004 में पिछले वर्ष के 7 प्रतिशत से गिरकर इस वर्ष 6 प्रतिशत रह गई। पिछले तीन वर्षों से उत्‍पादन में गिरावट का रूझान चल रहा है। बड़ी कंपनियों के चाय बागानों में संगठित क्षेत्र के 84,000 से ज्‍यादा मजदूर काम करते हैं।

इलायची एक अन्‍य बागानी फसल है जिसका उत्‍पादन 2004-05 में 28 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गया।

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स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल