कर्नाटक
| ब्यौरे | विवरण |
|---|---|
| 1,91,791 वर्ग कि.मी. | |
| 52,850,562 | |
| बंगलौर | |
| कन्नड |
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इतिहास और भूगोल
कर्नाटक का लगभग 2,000 वर्ष का लिखित इतिहास उपलब्ध है। कर्नाटक पर नंद, मौर्य और सातवाहन राजाओ का शासन रहा। इसके अलावा चौथी शताब्दी के मध्य से इस राज्य पर इसी क्षेत्र के राजवंशों बनवासी के कदंब तथा गंगों का अधिकार रहा। श्रवणबेलगोला में विश्व प्रसिद्ध गोमतेश्वर की विशाल प्रस्तर प्रतिमा गंग वंश के एक मंत्री चामुंडराया ने ही बनवाई थी। बादामी के चालुक्य वंश (500-735 ई. तक) ने नर्मदा से कावेरी तक के एक विस्तृत क्षेत्र तक पुलिकेशी द्वितीय (609-642 ई.) के समय से राज किया और उसने कन्नौज के शाक्तिशाली सम्राट हर्षवर्धन को पराजित किया। इस राजवंश ने बादामी, एहोल और पट्टादकल में अनेक सुंदर कलात्मक तथा कालजयी स्मारकों का निर्माण किया। इनमें चट्टानों को तराशकर बनाए गए मंदिर भी शामिल है। एहोल देश के ऐसे स्थानों में से है जहां मंदिर वास्तुकला पनपी।
चालुक्यों की जगह लेने वाले माल्खेड के राष्ट्रकूटों ने तो (753-973 ई.) कन्नौज साम्राज्य के वैभव वाले युग में वहां के शासकों से कर भी प्राप्त किये। इस काल में कन्नड साहित्य का विकास हुआ। भारत के श्रेष्ठ जैन विद्वान इन राजाओं के दरबारों की शोभा बढाते थे। कल्याण के चालुक्य राजाओं (973-1189 ई.) और उनके परवर्ती हलेबिड के होयसाल सामंतो ने सुंदर मंदिरों का निर्माण किया और साहित्य तथा ललित कलाओं को प्रोत्साहित किया। सुविख्यात न्यायशास्त्री विज्ञानेश्वर (कृति: मिताक्षर) कल्याण के रहने वाले थे। महान धार्मिक नेता बसावेश्वर भी कल्याण साम्राज्य के मंत्री थे। विजयनगर साम्राज्य (1336-1646 ई.) ने अपनी देशज परपंराओं का पोषण किया और कला, धर्म तथा संस्कृत, कन्नड, तेलुगु और तमिल साहित्य को प्रोत्साहित किया। इस काल में विदेशों में व्यापार खूब फला-फूला।
बहमनी सुलतानों (राजधानी: गुलबर्गा एवं बाद में बीदर) और बीजापुर के आदिलशाहों ने भारतीय सारासानी शैली के भव्य भवनों का निर्माण किया और उर्दू व फारसी साहित्य को प्रोत्साहन दिया। पुर्तगालियों के आगमन से राज्य में कई नई फसलों (तंबाकू, मक्का, मिर्च, मूंगफली, आलू आदि) की खेती होने लगी। पेशवा (1818) और टीपू सुलतान (1799) की पराजय के पश्चात कर्नाटक ब्रिटिश शासन के अधीन हो गया। 19वीं शताब्दी में ईसाई मिशनरियों ने अंग्रेजी शिक्षा तथा मशीनों से छपाई का प्रसार किया तथा परिवहन, संचार और उद्योग के क्षेत्र में क्रांति आई। शहरी नगरों में मध्य वर्ग का उदय हुआ।
मैसूर राजवंश ने पहल की और औद्योगिकीकरण तथा सांस्कृतिक वृद्धि में सहायता ली। आजादी के संग्राम के बाद कर्नाटक में एकता लाने का अभियान आरंभ किया गया। स्वतंत्रता के बाद 1953 में मैसूर राज्य का निर्माण किया गया, जिसमें कन्नड़ बहुल क्षेत्रों को एक साथ लाकर एक बड़े मैसूर राज्य का निर्माण 1956 में किया गया तथा इसे 1973 में कर्नाटक का नया नाम दिया गया।
कर्नाटक राज्य 11031' और 18014' उत्तरी अक्षांश तथा 74012' और 78010' के बीच स्थित है।
वन और वन्य जीवन
वन विभाग राज्य 20.15 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र का प्रबंध करता है। वनों को इस प्रकार वर्गीकृत किया गया है - सुरक्षित वन, संरक्षित वन, अवर्गीकृत वन, ग्रामीण वन और निजी वन। यहां 5 राष्ट्रीय पार्क और 23 वन्य जीव अभयारण्य है। ईंधन की लकड़ी, चारा और इमारती लकड़ी की कमी को पूरा करने के लिए बेकार जंगलों और भूमि को विकसित किया जा रहा है। प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट जैसी अनेक योजनाएं केंद्रीय सहायता से लागू की जा रही हैं। विदेशी सहायता से अनेक वन परियोजनाएं शुरू की गई हैं। जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन से कर्नाटक के लिए फारेस्ट मैनेजमेंट और बायो-डार्यवर्सिटी परियोजना की स्वीकृति दी है और यह पूरे कर्नाटक में 2005-06 से 2012-13 तक लागू की जा रही है।
कृषि
कनार्टक की करीब 66 प्रतिशत आबादी ग्रामीण है और लगभग 55.60 प्रतिशत श्रम शक्ति कृषि और इससे संबंधित गतिविधियों में लगी है। राज्य की 60 प्रतिशत (114 लाख हेक्टेयर) भूमि खेती योग्य है, जिसके 72 प्रतिशत क्षेत्र में भरपूर वर्षा होती है। शेष 28 प्रतिशत में सिंचाई की जाती है। राज्य में 10 कृषि मौसमी क्षेत्र हैं। लाल मिट्टी यहां की प्रमुख मिट्टी मानी जाती है इसके बाद काली मिट्टी का स्थान आता है। कुल भूमि का 51.7 प्रतिशत भाग राज्य का निवल बुआई क्षेत्र है। वर्ष 2007-08 में 117.35 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन की संभावना है, जबकि लक्ष्य 119.70 लाख टन था।
डेयरी
कर्नाटक देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादनों में से है। कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के पास 21 प्रसंस्क्रण संयंत्र हैं जिनकी क्षमता 26.45 लाख लीटर प्रतिदिन है तथा 42 प्रतिशत केंद्रों की क्षमता 14.60 लाख हैं।
बागवानी
राज्य में 16.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी होती है। इसमें 101 लाख मी. टन उत्पादन होता है। केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय बागवानी मिशन’ के तहत 171.29 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं।
बड़ी और लघु सिंचाई
कर्नाटक में 28 प्रतिशत कृषि योग्य क्षेत्र में सिंचाई होती है। 2006-07 के दौरान कुल 33.14 लाख हेक्टयेर सिंचाई क्षमता अर्जित की गई जिसमें से 23.21 लाख हेक्टेयर बड़ी व मंझोली तथा 9.93 लाख हेक्टेयर लघु सिंचाई परियोजनाएं है।
बिजली उत्पादन
कर्नाटक देश का पहला ऐसा राज्य है जहां पनबिजली संयंत्र स्थापित किए गए। आज कर्नाटक की बिजली उत्पादन की स्थापना क्षमता 7222.91 है और 2007-08 में 31229 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ।
सूचना प्रौद्योगिकी
कनार्टक सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अतुलनीय बना हुआ है। 2006-07 में यहां से 48700 करोड़ रुपए का सॉफ्टवेयर निर्यात हुआ। 2007-08 में नवंबर, 2007 तक 24,450 करोड़ रुपए का निर्यात हो चुका था। पिछले वर्ष की उपलब्धि से इसमें 25 प्रतिशत वृद्धि की आशा है। नैसकॉम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मैंगलौर और मैसूर सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे है।
जैव प्रौद्योगिकी
कनार्टक राज्य और विशेषकर बैंगलोर शहर देश का सबसे बड़ा जैव भंडार बन गया है। 2006-07 के दौरान एसएलएलडब्ल्यूए ने तीन परियोजनाएं स्वीकृत की हैं। इन पर 535.50 करोड़ रुपए का निवेश होगा। जैव प्रौद्योगिकी का निर्यात 21.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा।
स्रोत: भारत २००८ – एक संदर्भ वार्षिक ![]()

