जम्मू और कश्मीर
| ब्यौरे | विवरण |
|---|---|
| 2,22,236 वर्ग कि.मी. | |
| 10,069,987 | |
| श्रीनगर (ग्रीष्मकाल में) जम्मू (शीतकाल में) | |
| उर्दू, डोगरी, कश्मीरी, लद्दाखी, बाल्टी, पहाड़ी, पंजाबी, गुजरी और ददरी। |
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इतिहास और भूगोल
राजतरंगिणी तथा नीलम पुराण नामक दो प्रामाणिक ग्रंथों में यह आख्यान मिलता है कि कश्मीर की घाटी कभी बहुत बड़ी झील हुआ करती थी। इस कथा के अनुसार कश्यप ऋषि ने यहां से पानी निकाल लिया और इसे मनोरम प्राकृतिक स्थल में बदल दिया। किंतु भूगर्भशास्त्रियों का कहना है कि भूगर्भीय परिवर्तनों के कारण खदियानयार, बारामुला में पहाड़ों के धंसने से झील का पानी बहकर निकल गया और इस तरह पृथ्वी पर स्वर्ग कहलाने वाली कश्मीर घाटी अस्तित्व में आई। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सग्राट अशोक ने कश्मीर में बौद्ध धर्म का प्रसार किया। बाद में कनिष्क ने इसकी जड़ें और गहरी कीं। छठी शताब्दी के आरंभ में कश्मीर पर हूणों का अधिकार हो गया।
यद्यपि सन 530 में घाटी फिर स्वतंत्र हो गई लेकिन इसके तुरंत बाद इस पर उज्जैन साम्राज्य का नियंत्रण हो गया। विक्रमादित्य राजवंश के पतन के पश्चात कश्मीर पर स्थानीय शासक राज करने लगे। वहां हिंदू और बौद्ध संस्कृतियों का मिश्रित रूप विकसित हुआ। कश्मीर के हिन्दू राजाओं में ललितादित्य (सन 697 से सन 738) सबसे प्रसिद्ध राजा हुए जिनका राज्य पूर्व में बंगाल तक, दक्षिण में कोकण, उत्तर-पश्चिम में तुर्किस्तान, और उत्तर-पूर्व में तिब्बत तक फैला था। ललितरदित्य ने अनेक भव्य भवनों का निर्माण किया। कश्मीर में इस्लाम का आगमन 13 वीं और 14वीं शताब्दी में हुआ। मुस्लिम शासको में जैन-उल-आबदीन (1420-70) सबसे प्रसिद्ध शासक हुए, जो कश्मीर में उस समय सत्ता में आए, जब तातरो के हमले के बाद हिंदू राजा सिंहदेव भाग गए। बाद में चक शासकों ने जैन-उल-आवदीन के पुत्र हैदरशाह की सेना को खदेड़ दिया और सन 1586 तक कश्मीर पर राज किया। सन 1586 में अकबर ने कश्मीर को जीत लिया। सन 1752 में कश्मीर तत्कालीन कमजोर मुगल शासक के हाथ से निकलकर अफगानिस्तान के अहमद शाह अब्दाली के हाथों में चला गया। 67 साल तक पठानों ने कश्मीर घाटी पर शासन किया।
जम्मू का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। हाल में अखनूर से प्राप्त हड़प्पा कालीन अवशेषों तथा मौर्य, कुषाण और गुप्त काल की कलाकृतियों से जम्मू के प्राचीन स्वरूप पर नया प्रकाश पड़ा है। जम्मू 22 पहाड़ी रियासतों में बंटा हुआ था। डोगरा शासक राजा मालदेव ने कई क्षेत्रों को जीतकर अपने विशाल राज्य की स्थापना की। सन 1733 से 1782 तक राजा रंजीत देव ने जम्मू पर शासन किया किंतु उनके उत्तराधिकारी दुर्बल थे, इसलिए महाराजा रंजीत सिंह ने जम्मू को पंजाब में मिला लिया। बाद में उन्होंने डोगरा शाही खानदान के वंशज राजा गुलाब सिंह को जम्मू राज्य सौंप दिया। गुलाब सिंह रंजीत सिंह के गवर्नरों में सबसे शक्तिशाली बन गए और लगभग समूचे जम्मू क्षेत्र को उन्होंने अपने राज्य में मिला लिया। सन 1947 में जम्मू पर डोगरा शासकों का शासन रहा। इसके बाद महाराज हरि सिंह ने 26 अक्तूबर, 1947 को भारतीय संघ में विलय के समझौते पर हस्ताक्षर किए।
जम्मू और कश्मीर राज्य 32-15 और 37-05 उत्तरी अक्षांश और 72-35 तथा 83-20 पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है। भौगोलिक रूप से इस राज्य को चार क्षेत्रों में बांटा जा सकता है। पहला पहाड़ी और अर्द्ध-पहाड़ी मैदान जो कंडी पट्टी के नाम से प्रचलित है; दूसरा, पर्वतीय क्षेत्र जिसमें शिवालिक पहाडियां शामिल हैं; तीसरा कश्मीर घाटी के पहाड़ और पीर पांचाल पर्वतमाला तथा चौथा क्षेत्र तिब्बत से लगा लद्दाख और करगिल क्षेत्र। भौगोलिक तथा सांस्कृतिक रूप से राज्य के तीन जिला क्षेत्र जम्मू कश्मीर और लद्दाख हैं।
उद्योग
हस्तशिल्प यहां का परपंरागत उद्योग है। हाथ से बनी वस्तुओं की व्यापक रोजगार क्षमता और विशेषज्ञता को देखते हुए राज्य सरकार हस्तशिल्प को उच्च प्राथमिकता दे रही है। कश्मीर के प्रमुख हस्तशिल्प उत्पादों में कागज की लुगदी से बनी वस्तुएं, लकड़ी पर नक्काशी, कालीन, शाल और कशीदाकारी का सामान आदि शामिल हैं। हस्तशिल्प उद्योग से काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। हस्तशिल्प उद्योग में 3.40 लाख कामगार लगे हुए हैं। उद्योगों की संख्या बढ़ी है। करथोली, जम्मू में 19 करोड़ रूपये का निर्यात प्रोत्साहन औद्योगिक पार्क बनाया गया है। ऐसा ही एक पार्क ओमपोरा, बडगाम में बनाया जा रहा है। जम्मू में शहरी हाट हैं जबकि इसी तरह के हाट श्रीनगर में बनाए जा रहे है। राग्रेथ श्रीनगर में 6.50 करोड़ रूपये की लागत से सॉफ्टेवयर टेक्नोलॉजी पार्क शुरू किया गया है।
कृषि
राज्य की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। धान, गेहूं और मक्का यहां की प्रमुख फसलें हैं। कुछ भागों में जौ, बाजरा और ज्वार उगाई जाती है। लद्दाख में चने की खेती होती है। फलोद्यानों का क्षेत्रफल 242 लाख हेक्टेयर है। राज्य में 2000 करोड़ रूपये के फलों का उत्पादन प्रतिवर्ष होता है जिसमें अखरोट निर्यात के 120 करोड़ रूपये भी शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर राज्य सेब और अखरोटों के लिए कृषि निर्यात क्षेत्र घोषित किया गया है। बाजार हस्तक्षेप योजना की शुरूआत से उचित ग्रेडिंग सुनिश्चित करते हुए फलों की गुणवत्ता में सुधार लाया जाता है।
25 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष अथवा रूप से बागवानी क्षेत्र से रोजगार मिलता हैं।
बिजली
राज्य में बिजली क्षेत्र को उच्च प्राथमिकता दी गई है जिसमें राज्य की 20,000 मेगावाट की विशाल संभाव्य पनबिजली क्षमता के उपयोग पर विशेष बल दिया गया है।
25 मेगावाट तक की लघु पनबिजली परियोनाओं मे निजी निवेश को प्रोत्साहन देने हेतु नई नीति घोषित की गई है। एन.एच.पी.सी. को 2,798 मेगावाट की क्षमता की सात पनबिजली परियोजनाएं सौंपी गई हैं। राज्य की कुल आवश्यकता नेशनल ग्रिड से बिजली खरीद कर पूरी होती है।
शिक्षा
जनगणना 2001 के अनुसार राज्य की साक्षरता दर 54.46 प्रतिशत है; ग्रामीण साक्षरता 48.22 प्रतिशत और शहरी साक्षरता 72.17 प्रतिशत हैं। राज्य में पुरूष साक्षरता अनुमानत: 67.75 प्रतिशत और महिला साक्षरता 41.82 प्रतिशत हैं। यहां पांच विश्वविद्यालय और 41 महाविद्यालय हैं जिनमें से 8 निजी क्षेत्र के हैं।
परिवहन
सड़कें: राज्य में लोक निर्माण विभाग द्वारा रखरखाव की जाने वाली सड़कों की लंबाई 15,012 कि.मी. तक पहुंच गई है।
रेलवे: अब तक रेल सेवाएं केवल जम्मू तक उपलब्ध हैं। जम्मू-उधमपुर रेल लाइन के निर्माण का काम पूरा हो गया है। न्ीनगर तथा बारामुला तक रेलमार्ग विस्तार का काम शुरू हो गया है।उधमपुर-कटरा और काजीगुंज-बारामुला रेल लिंक परियोजना एक राष्ट्रीय परियोजना है जिसके 2007 तक पूरा होने की संभवना है।
उड्डयन: श्रीनगर, जम्मू और लेह राज्य के मुख्य हवाई अड्डे हैं जो जम्मू और कश्मीर को हवाई मार्ग से देश के अन्य भागों से जोड़ते हैं। श्रीनगर हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया गया है।
त्योहार
आश्विन मास में शुक्ल पक्ष की दशमी को रावण पर राम की विजय के प्रतीक रूप में दशहरा या वियजदशमी का त्योहार मनाया जाता है। शिवरात्रि भी जम्मू और कश्मीर में श्रद्धा और भाक्ति के साथ मनाई जाती है। राज्य में मनाए जाने वाले चार मुस्लिम त्योहार हैं-ईद-उल-फितर, ईद-उल-जुहा, ईद-ए-मिलाद-उन्नबी और मेराज आलम। मुहर्रम भी मनाया जाता हैं। लद्दाख का विश्व प्रसिद्ध गोम्पा उत्सव जून महीने में मनाया जाता है। हेमिस उत्सव का प्रमुख आकर्षक मुखौटा नृत्य है। लेह में स्पितुक बौद्ध विहार में हर साल जनवरी में होने वाले पर्व में काली की प्रतिमाएं बड़े पैमाने पर प्रदर्शित की जाती हैं। इसके अलावा सर्दी के चरम का त्योहार लोहड़ी तथा रामबन और पड़ोस के गांवों में सिंह संक्रांति और अगस्त माह में भदरवाह में मेला पात मनाया जाता हैं।
पर्यटन स्थल

कश्मीर की डल झील में फूल बेचने वाले
कश्मीर घाटी को पृथ्वी का स्वर्ग माना जाता है। कश्मीर घाटी में चश्मेशाही झरना, शालीमार बाग, डल झील, गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और अमरनाथ की पर्वत गुफा तथा जम्मू के निकट वैष्णो देवी मंदिर, पटनी टाप और लद्दाख के बौद्ध मठ राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्र हैं। 15 सितंबर को लद्दाख महोत्सव तथा जून सिंधु दर्शन प्रसिद्ध त्योहार हैं।
स्रोत: भारत २००८ - एक संदर्भ वार्षिक ![]()

