हरियाणा
| ब्यौरे | विवरण |
|---|---|
| 44,212 वर्ग कि.मी. | |
| 21,144,564 | |
| चंडीगढ़ | |
| हिंदी |
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इतिहास और भूगोल
हरियाणा का इतिहास बड़ा गौरवपूर्ण है और यह वैदिक काल से आरंभ होता है। यह राज्य पौराणिक भरत वंश की जन्मभूमि माना जाता है जिसके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा। हमारे महान महाकाव्य महाभारत में हरियाणा की चर्चा हुई है। कौरवों और पांडवों की युद्धभूमि कुरूक्षेत्र हरियाणा में ही है। मुसलमानों के आगमन और दिल्ली के भारत की राजधानी बनने से पहले तक भारत के इतिहास में हरियाणा अग्रणी भूमिका निभाता रहा इसके बाद हरियाणा दिल्ली का ही एक हिस्सा बन गया और 1857 में स्वतंत्रता के प्रथम महासंग्राम से पूर्व तक यह गुमनाम बना रहा। सन 1857 के विद्रोह को कुचलने के बाद जब ब्रिटिश प्रशासन फिर से स्थापित हुआ तो झज्झर और बहादुरगढ़ के नवाबों, बल्लभगढ़ के राजा तथा रिवाड़ी के राव तुलाराम की सत्ता छीन ली गई। उनके क्षेत्र या तो ब्रिटिश क्षेत्रों में मिला लिए गए या पटियाला, नाभ और जींद के शासकों को सौंप दिए गए। इस तरह हरियाणा पंजाब प्रांत का हिस्सा बन गया। एक नवंबर, 1966 को पंजाब के पुनर्गठन के बाद हरियाणा पूर्ण राज्य बन गया।
हरियाणा के पूर्व में उत्तर प्रदेश, पश्चिम में पंजाब, उत्तर में हिमाचल प्रदेश और दखिण में राजस्थान है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली हरियाणा से जुड़ा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के दायरे में हरियाणा भी है।
कृषि
हरियाणा की 65 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या की जीविका का आधार कृषि है और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान 26.4 प्रतिशत है। खाद्यान्न उत्पादन, जो हरियाणा के राज्य बनने के समय 25.92 लाख टन था, वर्ष 2007-08 में बढ़कर 153.08 लाख टन हो जाने का अनुमान है क्योंकि ज्यादा फसलें बोई जा रही हैं और मुख्य फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है। चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का, जौ, गन्ना, कपास दलहन, तिलहन और आलू राज्य की प्रमुख फसलें हैं। फसलों में विविधता लाने के लिए गन्ना, कपास, तिलहन और सब्जियों तथा फलों जैसी नकदी फसलें अधिक उगाई जा रही हैं। सूरजमुखी तथा सोयाबीन, मूंगफली तथा बागवानी को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। राज्य में गहन और विस्तृत खेती को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। मृदु उर्वरता रखने के लिए ढेंचा मूंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
सूचना पौद्योगिकी
दुनिया भर में चल रही वैश्वीकरण की प्रक्रिया में सूचना प्रौद्योगिकी के महत्व को देखते हुए हरियाणा सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी की नई व्यापक नीति तैयार की है ताकि राज्य नई सदी में विकास की ओर अग्रसर हो। इसके अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी आई.टी.ई.एस./बी.पी.ओ. उद्योग को प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। सरकार ने हाल ही में टैक्नोलॉजी पार्को के लिए भी एक नीति घोषित की है जिसक अंतर्गत टैक्नोलाजी पार्को और आई.टी. कॉरीडोर्स की स्थापना के लिए लचीला रूख अपनाया गया है। इस नीति का उद्देश्य सूचना प्रौद्योगिकी को नानो प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, मोबाइल कंप्यूटिंग और रोबोटिक्स से जोड़ना है। इसके अलावा गुड़गांव को सूचना प्रौद्योगिकी और आई.टी.ई.एस./बी.पी.ओ. होंगे जो विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करेंगे। गुड़गांव के अलावा, सरकार कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस हाईवे और फरीदबाद के पास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के क्षेत्रों को विकसित करने पर विचार कर रही है। ये गुड़गांव - मानेसर मेगा आई.टी. हब के उपग्रह का काम करेंगे। वर्ष 2007-08 में 17,500 करोड़ रुपये के साफ्टवेयर का निर्यात हुआ।
सरकार राज्य भर में ‘ई-दिशा एकल सेवा केंद्र’ के नाम केंद्र’ के नाम से 1159 ग्रामीण और 104 शहरी सामान्य सेवा केंद्र स्थापित कर रही है। स्थापना का काम शुरू किया जा चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में 100 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 67 प्रतिशत काम हो चुका है। इस समय कंप्यूटर प्रशिक्षण, ई-टिकटिंग, मोबाइल रिचार्ज, जाब प्लेसमेंट सेवा, इंटरनेट सर्फिंग, डी.टी.पी. जैसी ‘बिजनेस टु सिटिजन्स’ (बी2सी) सेवाएं इन केंद्रों से दी जा रही है। सरकार इन केंद्रों से बस के पास, बिजली के बिल वसूलने, नकल (भूमि रिकॉर्ड) जारी करने, अनु.जाति/पिछड़ी/निवास जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने और नए राशन कार्ड जारी करने जैसी ‘गवर्मेंट टु सिटीजन्स’ (जी2सी) सेवाएं प्रदान करने पर विचार कर रही है।
कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 23,000 सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
उद्योग
हरियाण का औद्योगिक आधार विशाल है। राज्य में 1,343 बड़ी और मंझोली तथा 80,000 लघु अद्योग इकाइयां हैं। हरियाणा में हर चीज का उत्पादन होता है। हरियाणा कारों, टैब्टरों, मोटरसाइकिलों, साइकिलों, रेफ्रिजरेटरों, वैज्ञानिक उपकरणो आदि का सबसे बड़ा उत्पादक है। रियाणा विश्व बाजार में कासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यतक है। पचरंगा अचार के अलावा पानीपत की हथकरघे की बनी वस्तुएं और कालीन विश्व भर में प्रसिद्ध है।
जुलाई, 1991 से अब तक 3828 औद्योगिक उद्यमी ज्ञापन जमा किए गए जिनमें से 2228 ज्ञापन लागू कर दिए गए हैं। इसमें 21,578 करोड़ रूपये का निवेश हुआ और 3,92,237 लोगों को रोजगार मिला। नई औद्योगिक नीति के परिणामस्वरूप विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) स्थापित करने के 94 प्रस्ताव राज्य को मिले हैं जिसके अनुसार औद्योगिक ढांचे पर 2.00 करोड़ रूपये की लागत आएगी। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के बाद कई हजार करोड़ रूपये का मानेसर केकेस्तार कि अलावा फरीदाबाद, रोहतक और जगाधरी औद्योगिक आदर्श नगर विकसित कर रहीं है। पानीपत में 33,000 करोड़ रूपये के निवेश का पैट्रो रसायन केंद्र स्थापित कर लिया है। 2,000 करोड़ रूपये की लागत से कुंडल-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस राजमार्ग विकसित किया जा रहा है। इससे राजमार्ग के आसपास अनेक आर्थिक केंद्र बनेंगे जिससे औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में निवेश के अनेक अवसर उपलब्ध होंगे। राज्य बहादुरगढ़ व रोहतक में नई औद्योगिक संपदाएं विकसित करके और सोनीपत, कुंडली, राई और बाड़ी मे औद्योगिक ढांचे का विस्तार करके आर्थिक विकास की संभावनाएं तलाश कर रहा है। राज्य सरकार के पास अंबाला, साहा, यमुनानगर, बरवाल, करनाल, रोहतक और कैथल आदि शहरों में औद्योगिक संपदाएं स्थापित करने के अनेक प्रस्ताव विचाराधीन हैं।
हरियाणा राज्य औद्योगिक विकास निगम और हरियाणा नगर विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित औद्योगिक संपदाओं में भूमि आवंटन हेतु अद्योगो की बहुत मांग है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 94 बड़ी और मंझोली तथा 5031 लघु औद्योगिक इकाइयों स्थापित हुई हैं जिन पर 4124 करोड़ रूपये का निवेश हुआ है और 92,559 लोगों को रोजगार मिला है इसके अलावा अनेक औद्योगिक इकाइयो का विस्तर किया गया है जिसके फलस्वरूप 35,000 करोड़ रूपये से अधिक का नया निवेश हुआ है। हाल ही में भारतीय तेल निगम ने पानीपत में 5,000 करोड़ रूपये के निवेश से पैरेक्सीलीन/पीटीए की स्थापना की है। मारूति उद्योग, हीरो हौंडा और अनेक ऑटोमोबाइल औद्योगों में विस्तार हुआ है जिन पर लगभग 10,000 करोड़ रूपये की लागत आई है। इस समय औद्योगिक क्षेत्र में 70,000 करोड़ रूपये के निवेश प्रसवो को क्रियान्वित किया जा रहा है। इसी तरह राज्य में सूचना पौद्योगिकी और वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में खासकर सिले सिलाए कपड़ों के अनेक उद्योग उभरकर आ रहे हैं।
सिंचाई
पूरे राज्य में सिंचाई और पेय जल के समान वितरण के लिए सरकार 354 करोड़ रुपए की लागत की 109 किलोमीटर लंबी विशाल नहर’ भाखड़ा मुख्य नहर-हांसी शाखा - बुटाना शाखा बहुद्देशीय संपर्क नहर’ का निर्माण कर रही है।
मानसून के मौसम में यमुना नदी के अतिरिक्त पानी को इस्तेमाल करने के लिए 267 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली ‘दादूपुर’-शाहाबाद-वाल्वी नहर परियोजना’ शुरू की है। इसके तहत यमुना नगर, अंबाला और कुरुक्षेत्र में पड़ने वाली 92,532 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई और भूजल रिचार्ज सुविधाओं के लिए 590 क्यूसेक अतिरिक्त जल का उपयोग किया जाएगा।
सरकार ने घग्घर और इसकी सहवर्ती नदियों पर चार कम ऊंचाई के बांध - कौशल्या बांध, दंग्राना बांध, दीवानवाला बांध और छामला बांध - परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन पर क्रमश - 118 करोड़, 63.69 करोड़, 132.70 करोड़ तथा 20.41 करोड़ रुपए की लागत आएगी और इनसे मानसून के मौसम में पानी का फालतू बहाव और संपत्ति को होने वाला नुकसान रोका जा सकेगा।
बिजली
हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्य है जहां 1970 में ही सभी गांवों में 100 प्रतिशत बिजली पहुंचा दी गई थी। सन 1966 में राज्य में 20,000 नलकुप थे जिनकी संख्या मार्च 2008 में बढ़कर 4.51 लाख हो गई है। बिजली की औसत दैनिक उपलब्धता 2007-08 में 723.10 करोड़ यूनिट हो गई है। बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 2007-08 में 42.70 लाख हों गई हैं। 31 मार्च, 2008 तक बिजली की स्थापित उत्पादन क्षमता 4368 मेगावाट थी।
परिवहन
सड़कें: हरियाणा में सभी गांव पक्की सड़कों से जुड़े हैं। राज्य में सड़कों की कुल लंबाई 31,010 किलोमीटर है।
रेलवे: कालका, कुरुक्षेत्र, रोहतक, जींद, हिसार, अंबाला, पानीपत और जखाल यहां के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से हैं। जगाधारी शहर में रेलवे की एक वर्कशॉप है।
उड्डयन: हरियाणा में असैनिक हवाई अड्डे-हिसार, करनाल, पिंजौर, नारनौल और भिवानी में है।
पर्यटन स्थल

हरियाणा सूरज कुंड मेला
हरियाणा में 44 पर्यटक परिसर हैं। प्रमुख पर्यटन केंद्रों में ब्लू जे (समालखा), स्काईलार्क (पानीपत), चक्रवर्ती झील और ओएसिस (उचाना), पराकीट (पीपली), किंगफिशर (अंबाला), मैगपाई (फरीदाबाद), दबचिक (होडल), जंगल बबलर (धारूहेड़ा), रेड बिशप (पंचकुला ब्लू बर्ड (हिसार), शमा (गुड़गांव), गौरैया (बहादुरगढ़), पिंजौर गार्डन (पिंजौर), दिल्ली के निकट सूरजकुंड और बड़खल झील, सुल्तानपुर पक्षी विहार (सुल्तानुपर, गुड़गांव), दमदमा (गुड़गांव) और चीड़ वन के लिए प्रसिद्ध मोरनी हिल्स पर्यटकों के रुचि के कुछ अन्य केंद्र हैं। सूरजकुंड का विश्वप्रसिद्ध शिल्पमेला हर वर्ष फरवरी में आयोजित किया जाता है। इसी तरह पिंजौर विरासत उत्सव प्रतिवर्ष बनाया जाता है।
स्रोत: भारत २००८ - एक संदर्भ वार्षिक ![]()

