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छत्तीसगढ़

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 1,36,034 वर्ग कि.मी.
जनसंख्‍या 20,795,956
राजधानी रायपुर
मुख्‍य भाषा हिंदी

इतिहास और भूगोल

मध्‍य प्रदेश का हिस्‍सा निकालकर बनाया गया यह राज्‍य भारतीय संघ के 26 वें राज्‍य के रूप में 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्‍व में आया। यह राज्‍य यहां के आदिवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है। प्राचीनकाल में इस क्षेत्र को दक्षिण कोशल के नाम से जाना जाता था। इस क्षेत्र का उल्‍लेख रामायण और महाभारत में भी मिलता हैं। छठी और बारहवीं शताब्दियों के बीच सरभपूरिया, पांडुवंशी, सोमवंशी, कलचुरी और नागवंशी शासकों ने इस क्षेत्र पर शासन किया। कलयुरी और नागावंशी शासकों ने इस क्षेत्र पर शासन किया कलचुरियों ने छत्तीसगढ़ पर सन 980 से लेकर 1791 तक राज किया सन 1854 में अंग्रेजों के आक्रमण के बाद महत्‍व बढ़ गया सन 1904 में संबलपुर उड़ीसा में चला गया और सरगुजा रियासत बंगाल से छत्तीसगढ़ के पास आ गई।

छत्तीसगढ़ पूर्व में दक्षिणी झारखंड और उड़ीसा से, पश्चिम में मध्‍य प्रदेश और महाराष्‍ट्र से, उत्तर में उत्तर प्रदेश और पश्चिमी झारखंड और दक्षिण में आंध्र प्रदेश से घिरा है। छत्तीसगढ़ क्षेत्रफल के हिसाब से देश का नौवां बड़ा राज्‍य है और जनसंख्‍या की दृष्टि से इसका 17वां स्‍थान है।

कृषि

राज्‍य में 80 प्रतिशत आबादी कृषि और संबंधित गतिविधियों में लगी है। 137.9 लाख हेक्‍टेयर भौगोलिक क्षेत्र में से कुल कृषि क्षेत्र भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 35 प्रतिशत है। खेती का प्रमुख मौसम खरीफ हैं। चावल यहां की मुख्‍य फसल है। अन्‍य महत्‍वपूर्ण फसलें हैं: मक्‍का, गेंहू कच्‍चा अनाज, मूंगफली और दलहन। राज्‍य में धान का जर्मप्‍लाज्‍म का सर्वाधिक भंडार है। लगभग 3.03 लाख हेक्‍टेयर में बागवानी फसलें उगाई जाती हैं।

उद्योग

छत्तीसगढ़ में वन,खनिज और भूजल जैसे प्राकृतिक संसाधनों का असीम भंडार है। पिछले कुछ वर्षो में राज्‍य में महत्‍वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं और यह उद्योगों के मामले में बहुत फल-फूल रहा है। छत्तीसगढ़ में देश का लगभग 15 प्रतिशत इस्‍पात तैयार होता है। भिलाई इस्‍पात संयंत्र, राष्‍ट्रीय खनिज विकास न्रिगम, साउथ-ईस्‍टर्न कोल फील्‍ड्स लिमिटेड एन.टी.पी.सी. जैसे भारत सरकार के उपक्रम और ए.सी.सी. गुजरात अंबुजा, ग्रासिम, एल एंड टी सी सी आई और फ्रांस के ला-फार्गे जैसे बड़े सीमेंट प्‍लांट तथा 53 इस्‍पात परियोजनाएं क्रियान्‍वयन के विभिन्‍न चरणो में हैं। राज्‍य में लगभग 133 इस्‍पात ढालने के कारखाने, अनेक लघु इस्‍पात संयंत्र, 11 फैरो-एलॉय कारखाने, इंजीनियरिंग और फैब्रीकेशन इकाइयों सहित बड़े पैमाने पर कृषि आधारित और खाद्य प्रसंस्‍करण, रसायन, प्‍लास्टिक, भवन निर्माण सामग्री और वनोत्‍पाद पर आधारित कारखाने हैं।

अनुकूल औद्योगिक वातावरण की वजह से, छत्‍तीसगढ़ में विशाल औद्योगिक निवेश किया जा रहा है। नए उद्योगों की स्‍थापना और विद्यमान औद्योगिकी इकाइयों के विस्‍तार के लिए 85,000 करोड़ रुपए के 80 आशय - पत्रों पर हस्‍ताक्षर किए गए। राज्‍य में जनवरी - दिसंबर 2006 के दौरान 1,07,899 करोड़ रुपए के प्रस्‍तावित निवेश होने की वजह से छत्‍तीसगढ़ को भारत सरकार के उद्योग मंत्रालय की औद्योगिकी उद्यमशीलता ज्ञापन रिपोर्ट में प्रथम स्‍थान मिला।

भारत के केंद्र में स्थित छत्‍तीसगढ़ राज्‍य कारखानों में हर समय बिजली उपलब्‍ध कराने में सक्षम है। राज्‍य में कोयले के विशाल भंडार (देश के 17 प्रतिशत) की वजह से राज्‍य के पास कम लागत पर अत्‍यधिक बिजली उत्‍पादन के अवसर हैं और अन्‍य के पास 50,000 मेगावॉट की बिजली उत्‍पादन क्षमता है। एन.टी.पी.सी बिलासपुर जिले में अपना अब तक का सबसे बड़ा बिजली उत्‍पादन संयंत्र स्‍थापित कर रहा है। एन.टी.पी.सी. ने सीपट में 2,640 मेगावॉट के और कोरबा में 600 मेगावॉट के सुपर ताप बिजलीघर का निर्माण शुरू कर दिया है। कई अन्‍य राज्‍य भी यहां अपने संयंत्र लगाना चाहते हैं। निजी क्षेत्र के 25,000 मेगावॉट से अधिक के संयंत्रों के अनुबंध-पत्र (एम.ओ.यू) विचाराधीन हैं। छत्‍तीसगढ़ औद्योगिक विकास निगम लि., रायपुर ने राज्‍य में लगभग 3,500 हेक्‍टेयर औद्योगिक जमीन के विकास, रखरखाव और प्रबंधन का काम अपने हाथ में ले लिया है। निगम द्वारा विकसित जमीन में 925 से अधिक उद्योग खोले जा चुके हैं जिन पर 1,800 करोड़ रुपए से भी अधिक का निवेश है और जिनमें 80,000 लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

सूचना प्रौद्योगि‍की

छत्‍तीसगढ़ में ई-शासन जनता को सरकार तक पहुंचने का आश्‍वासन देती है। इससे सरकार अधिक स‍क्रिय और पारदर्शी हुई है। चिप्‍स (छत्‍तीसगढ़ इंफोटेक एंड बायोटेक प्रोमोशन सोसायटी) मुख्‍यमंत्री की अध्‍यक्षता में उच्‍चाधिकार प्राप्‍त परिषद् की देखरेख में गठित की गई है और यह राज्‍य में सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी को प्रोत्‍साहित करेगी। ई-शासन की सारी नागरिक सेवाएं ‘चॉइस’ (छत्‍तीसगढ़ ऑनलाइन इंफॉर्मेशन फॉर सिटीजन एंपावरमेंट) नामक परियोजना के अंतर्गत हैं।

छत्‍तीसगढ़ को, नागरिकों की बेहतरी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके तैयार की गई मानव विकास रिपोर्ट के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र विकास कार्यक्रम पुरस्‍कार, 2007 मिला है।

खनिज संसाधन

छत्तीसगढ़ में आग्‍नेय, कायांतरित और तलछटी क्षेत्रों में अनेक प्रगाकर के खनिज पाए जाते हैं। कोयला, कच्‍चा लोहा, चूना पत्‍थर, बॉसाक्‍साइट डोलोमाइट, तथा टिन के विशाल भंडार राज्‍य के विभिन्‍न हिस्‍सों में फैले हुए हैं। रायपुर जिले में हाल ही में पहचाने गए डाइमंडीफैरस किंबरलाइट्स में से काफी मात्रा में हीरा प्राप्‍त किया जा सकता हैं।इसके अलावा सोना, आधार धातुओं, बिल्‍लौरी पत्‍थर, चिकना पत्‍थर, सेटाइट, फ्लूरोराइट, कोरूंडम, ग्रेफाइट, लेपिडोलाइट, उचित आकार की एम्‍लीगोनाइट के विशाल भंडार मिलने की संभावना है। राज्‍य में देश के 20 प्रतिशत इस्‍पात और सीमेंट का उत्‍पादन किया जाता है। कच्‍चे टिन का उत्‍पादन करने वाला यह देश का एकमात्र राज्‍य है। यहां खनिज संसाधनों से उत्‍खनन, खनिज आधारित उद्योग लगाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की अपार क्षमता है। छत्तीसगढ़ में विश्‍व का सबसे अधिक किंबरलाइट भंडार का क्षेत्र है। आठ ब्‍लॉकों में हीरे की संभावना का पता लगाने के लिए उनकी पहचान की गई है। हीरे के अलावा सोने की संभावना के लिए चार तथा आधार धातुओं के लिए पांच ब्‍लॉक‍ चिहिन्‍त किए गए है।

सिंचाई और बिजली

जब राज्‍य अस्तित्‍व में आया तब यहां कुल सिंचाई क्षमता 13.28 लाख हेक्‍टेयर (1 नवम्‍बर 2000 के अनुसार) थी। इसके बाद दो वर्ष और नौ माह बाद 1.25 लाख हेक्‍टेयर की अतिरिक्‍त क्षमता का सृजन किया गया और इसके लिए विभिन्‍न विभागों और सार्वजनिक भागीदारी के स्रोतों की उगाही की गई, किसानों के खेतों पर 50,000 अवशेषों का निर्माण किया गया, कुल 5 लाख हेक्‍टेयर अतिरिक्‍त क्षमता का सृजन किया गया। प्रमुख रूप से पूरी की गई परियोजनाएं हैं तंडुला, कोदार और पेयरी। हसदेव, महानदी रिजर्वायर परियोजना, सोंधुर और जोंक कुछ अन्‍य परियोजनाएं हैं।

राज्‍य बिजली बोर्ड की कुल क्षमता 1,68,1.05 मेगावाट है, जिसमें से 1,260 मेगावाट तापबिजली और शेष पनबिजली है। राज्‍य बिजली बोर्ड आधुनिकीकरण तथा प्रेषण व वितरण व्‍यवस्‍था को सुदृढ़ करने तथा सृजन क्षमता को बढ़ाने का काम कर रकहा है। राज्‍य बिजली बोर्ड ने कोरबा में 500 मेगावाट की अतिरिक्‍त स्‍थापित उत्‍पादन क्षमता (2x250 मेगावाट यूनिट) बढ़ाई है। निजी क्षेत्र को बिजलीघर बनाने और इनमें उत्‍पन्‍न बिजली राज्‍य से बाहर बेचने के लिए प्रोत्‍साहित किया जा रहा है। राज्‍य के कुल 19,270 बसे हुए गांवों में से 93 प्रतिशत गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है।

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स्रोत: भारत २००८ – एक संदर्भ वार्षिक