अरुणाचल प्रदेश
| ब्यौरे | विवरण |
|---|---|
| 83,743 वर्ग किलोमीटर | |
| 1,097,968 | |
| ईटानगर | |
| मोनपा, मिजी, अका, शेरदुकपेन, निशी, अपतानी,तगिन, अदी, दिगारू-मिशमी, इदु-मिशमी, मिजु-मिशमी, खमटी, नोकटे, तंगसा और वांचू |
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इतिहास और भूगोल
अरुणाचल प्रदेश को पहले पूर्वात्तर सीमांत एजेंसी (नार्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी-नेफा) के नाम से जाना जाता था। इसके पश्चिम, उत्तर-पूर्व, उत्तर और पूर्व में क्रमश: भूटान, तिब्बत चीन, और म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं। अरुणाचल प्रदेश की सीमा नगालैंड और असम से भी मिलती है। यह राज्य पहाड़ी तथा अर्द्ध-पहाड़ी क्षेत्र में है और इन पहाडियों की ढलान असम के मैदानी भाग की ओर हैं। कामेंग, सुबनसिरी, सिआंग, लोहित और तिरप नदियां इन्हें अलग-अलग घाटियों में बांट देती हैं।
इस क्षेत्र के इतिहास के बारे में कोई लिखित रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। केवल मौखिक परंपरा के रूप में कुछ साहित्य और अनेक ऐतिहासिक खंडहर हैं जो इस पर्वतीय क्षेत्र में बिखरे पड़े हैं। समय-समय पर की गई खुदाइयों और खोजबीन के परिणामस्वरूप निचले इलाकों से पता चलता है कि ये ईसवी सन प्रारंभ होने के समय के हैं। इन ऐतिहासिक प्रमाणों से यह भी पता चलता है कि यह न केवल जाना-पहचाना क्षेत्र था बल्कि जो लोग यहां रहते थे उनका देश के अन्य भागों से निकट संबंध था।
अरुणाचल प्रदेश का आधुनिक इतिहास 24 फरवरी, 1826 को संपन्न हुई यंडाबू संधि के बाद असम में ब्रिटिश शासन लागू होने से शुरू होता हैं।
सन 1962 से पहले इस क्षेत्र को नार्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (नेफा) के नाम से जाना जाता था संवैधानिक रूप से यह असम का एक हिस्सा था। परंतु इस क्षेत्र के सामरिक महत्व के कारण 1965 तक यहां के प्रशासन की देखभाल विदेश मंत्रालय करता था। उसके बाद असम के राज्पाल के माध्यम से यहां का प्रशासन गृह मंत्रालय के अधीन आया। सन 1972 में इसे केंद्र शासित क्षेत्र बना दिया गया और इसका नया नामकरण अरुणाचल प्रदेश किया गया। इसके पश्चात् 20 फरवरी, 1987 को यह भारतीय संघ का 24वां राज्य बना।
त्योहार

अरुणाचल प्रदेश के लोक नृत्य
राज्य के कुछ महत्वपूर्ण त्योहारों में अदीस लोगों द्वारा मनाए जाने वाले मापिन और सोलंगु, मोनपा लोगों का त्योहार लोस्सार, अपतानी लोगों का द्री, तगिनों का सी-दोन्याई, इदु-मिशमी समुदाय का रेह, निशिंग लोगों का न्योकुम आदि शामिल हैं। अधिकांश त्योहारों के अवसर पर पशुओं को बलि चढ़ाने की प्रथा है।
कृषि और बागवानी
अरुणाचल प्रदेश के लोगों के जीवनयापन का मुख्य आधर कृषि है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्यत: झूम खेती पर आधरित है। अब नकदी फसलों, जैसे-आलू और बागावानी की फसलों जैसे सेब, संतरे और अनन्नास आदि को बढ़ावा दिया जा रहा है।
खनिज और उद्योग
राज्य की विशाल खनिज संपदा का पता लगाने तथा उसके संरक्षण के लिए 1991 में अरुणाचल प्रदेश खनिज विकास और व्यापार निगम लिमिटेड (ए. पी. एम. डी. टी. सी. एल.) की स्थापना की गई। निगम ने नामचिक-नामफुक कोयला क्षेत्र को अपने अधिकार में ले लिया है। विभिन्न व्यापारों में दस्तकारों को प्रशिक्षण प्रदान करना, रोइंग, टबारीजो, दिरांग, युपैया और मैओ में राज्य में कार्यरत पांच सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) हैं। आईटीआई युपैया अरुणाचल प्रदेश में महिलाओं के लिए विशिष्ट रूप से बनाया गया आईटीआई है जो पापुम पारे जिले में स्थित है।
सिंचाई और बिजली
अरुणाचल प्रदेश में 87,500 हेक्टेयर से अधिक सिंचित क्षेत्र है। राज्य की संस्थापित क्षमता लगभग 30,735 मेगावॉट है। राज्य के3,649 गांवों में से लगभग 2,600 गांवों को विद्युतीकृत किया गया है।
परिवहन
सड़कें: अरुणाचल प्रदेश में 330 किलोमीटर लम्बा राष्ट्रीय राजमार्ग है।
पर्यटन स्थल

सेला झील
राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं- तवांग, दिरांग, बोमडिला, टीपी, ईआनगर, मालिनीथन, लीकाबाली, पासीघट, अलोंग, तेजू, मियाओ, रोइंग, दापोरिजो, नामदफा, भीष्मकनगर, परशुराम कुंड और खोंसा।
पंचायती राज
ग्रामीण और निचले स्तर पर त्वरित विकास के लिए अरुणाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार के सहयोग से मई, 2008 में राज्य में पंचायती चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराए।
स्रोत: भारत २००७ – एक संदर्भ वार्षिक ![]()

