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आंध्र प्रदेश

ब्यौरे विवरण
क्षेत्रफल 2,75,069 वर्ग कि.मी.
जनसंख्‍या 76,210,007
राजधानी हैदराबाद
मुख्‍य भाषाएं तेलुगु और उर्दू

इतिहास और भूगोल

आंध्र के संबंध में प्रारंभिक उल्‍लेख ऐतरेय ब्राहण (2000 ईसा पूर्व) में मिलता है। इसमें संकेत दिए गए हैं कि आंध्र मूल रूप से आर्य जाति के थें और उत्तर भारत में रहते थे, जहां से वे विंध्‍य पर्वतों के दक्षिण में चले गए और बाद में अनार्यो के साथ घुलमिल गए। इतिहासविदों के अनुसार आंध्र प्रदेश का नियमित इतिहास 236 ईसापूर्व से शुरू होता है। इसी वर्ष सम्राट अशोक का निधन हुआ था उसके बाद की शताब्दियों में सातवाहनों, शकों, इक्ष्‍वाकुओं, पूर्वी चालुक्‍यों और काकतीयों ने इस तेलुगु देश पर शासन किया। बाद में विजयनगर और कुतुबशाही शासकों का शासन रहा और उनके बाद मीर कमरूद्दीन 17 वीं शताब्‍दी से अंग्रेजों ने निजाम के कई हिस्‍सों पर नियंत्रण कर लिया और मद्रास प्रांत की स्‍थापना की।

स्‍वतंत्रता के बाद तेलुगु भाषी क्षेत्रों को मद्रास प्रेजीडेंसी से अलग कर 1 अक्‍तूबर 1953 को नए आंध्र प्रदेश राज्‍य का गठन किया गया। राज्‍य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 पारित होन के बाद हैदराबाद राज्‍य का आंध्र प्रदेश में विलय हो गया और परिणामस्‍वरूप 1 नवंबर, 1956 को आंध्र प्रदेश राज्‍य अस्तित्‍व में आया।


चार मीनार, हैदराबाद

आंध्र प्रदेश के उत्तर में उड़ीसा और छत्तीसगढ़ हैं, पश्चिम में महाराष्‍ट्र और कर्नाटक, दक्षिण में तमिलनाडु तथा पूर्व में 974 किलोमीटर की तटरेखा वाली बंगाल की खाड़ी है।

कृषि

आंध्र प्रदेश की आबादी के करीब 62 प्रतिशत हिस्‍से का मुख्‍य व्‍यवसाय खेती है। चावल राज्‍य की मुख्‍य फसल और मुख्‍य आहार है तथा राज्‍य के कुल अनाज उत्‍पादन में चावल का हिस्‍सा 77 प्रतिशत है। अन्‍य प्रमुख फसलें हैं - ज्‍वार, तंबाकू, कपास और गन्‍ना। राज्‍य के कुल क्षेत्रफल के 23 प्रतिशत हिस्‍से में वन हैं। महत्‍वपूर्ण वन उत्‍पादों में सागवान, यूकिलिप्‍टस, काजू, कैस्‍यूरीना और इमारती लकड़ी शामिल हैं।

पावला वाड़ी योजना के तहत सरकार ने खरीफ सत्र (2008) के लिए किसानों को रियायती ब्‍याज दर (3 प्रतिशत) पर फसल ऋण देने का इंतजाम किया है। खाद्यान्‍न उत्‍पादन में बढ़ोत्तरी लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए ऋण राशि वर्ष 2007-08 के 23,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2008-09 में 26,000 करोड़ रुपए कर दी गई है। केंद्र की 60,000 करोड़ रुपए की ऋण माफी योजना के तहत राज्‍य के 77 लाख किसानों का 12,000 करोड़ रुपए का ऋण माफ किया गया। मानसून की भीषणता से किसानों को राहत दिलाने तथा भूमि के हर हिस्‍से पर सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए सरकार ने प्रतिष्ठित ‘जलयागम’ परियोजना तैयार की है।

सिंचाई

राज्‍य में जिन महत्‍वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं का काम चल रहा है उनमें वंशधारा परियोजना चरण - I, गोदावरी डेल्‍टा प्र­­­णाली, येलेरू जलाशय परियोजना, कृष्‍णा डेल्‍टा पेन्‍नार नदी नहर प्रणाली, नीलम संजीव रेड्डी सागर परियोजना, तुंगभद्रा परियोजना -उच्‍च स्‍तरीय नहर चरण- I, तुंगभद्रा परियोजना और राजोजीबंद परियोजना शामिल हैं।

आंध्र प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्‍य है जिसने सिंचाई साधनों के प्रबंध में किसानों को भागीदार बनाया हैं।

बिजली

राज्‍य की महत्‍वपूर्ण बिजली परियोजनाएं हैं- नागार्जुन सागर और नीलम संजीव रेड्डी सागर (श्रीसेलम पनबिजली पारियोजना), ऊपरी सिलेरू, निचला सिलेरू, तुंगभद्रा पनबिजली परियोजना और नेल्‍लोर, रागुंडम, कोठागुडम, विजयवाड़ा और मड्डानूर तापबिजली परियोजना। 770 मेगावाट स्‍थापित क्षमता वाली श्रीसेलम पनबिजली परियोजना और 960 मेगावाट क्षमता वाली नागार्जुन सागर परियोजना राज्‍य में पनबिजली के प्रमुख स्रोत हैं। 1,260 मेगावाट क्षमता वाले ताप बिजलीघर तथा 1180 मेगावाट क्षमता वाले तापीय आधारित कोठागुडम ताप बिजलीघर का उद्देश्‍य आंध्र प्रदेश में ताप विद्युत के मुख्‍य स्रोत हैं। सिंहाद्री ताप विद्युत स्‍टेशन का लक्ष्‍य राज्‍य में उत्‍पन्‍न संपूर्ण 1000 मेगावाट कोयले विद्युत की आपूर्ति करना है। मई 2008 की राज्‍य की स्‍थापित क्षमता 12,382 मेगावॉट है। 8860 मेगावॉट की अतिरिक्‍त क्षमता के लिए (एपीजेनको द्वारा) 17 नई परियोजनाओं का कार्यक्रम तैयार किया गया है, जिनकी अगले पांच वर्षों में पूरी होने की आशा है।

उद्योग और खनिज

हैदराबाद और विशाखपत्तनम के आसपास अनेक बड़े उद्योगों में मशीनी औजार, संश्लिष्‍ट औषाधियां दवाएं, भारी बिजली मशीनें, उर्वरक, इलेक्‍ट्रॉंनिक उपकरण, विमानों के कलपुर्जे सीमेंट और उसके बनने वाले उत्‍पाद, रसायन, एस्‍बेस्‍टस, कांच तथा घडियों आदि का उत्‍पादन होता है। आंध्र प्रदेश में देश के अच्‍छे किस्‍म के क्रिसोलाइट एस्‍बेस्‍टस के विशालतम भंडार हैं। इसके अलावा यहां तांबा, मैगनीज, अभ्रक, कोयला तथा चूना पत्‍थर जैसे महत्‍वपूर्ण खनिज भी पाए जाते है। सिंगरेनी कोयला खानों से समूचे दक्षिण भारत में कोयले की आपूर्ति की जाती है।

राज्‍य सरकार विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में बिजली की दरों, जमीन और श्रम कानूनों में रियायतें देकर निर्माण कर को बड़े पैमाने पर प्रोत्‍साहन दे रही है। आंध्र प्रदेश ने 71 एसईजेड को विकसित करने में सहयोग दिया है जिनमें से 52 केंद्र सरकार द्वारा 35,000 करोड़ रुपए के निवेश के साथ अधिसूचित किए गए है। इनसे 25 लाख व्‍यक्तियों को रोजगार मिलेगा।

आरबीआई की अगस्‍त 2007 की रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश 2006-07 में 25,173 करोड़ रुपए के निवेश आकर्षित करने वाला देश का दूसरा राज्‍य है। निर्माण क्षेत्र में भारतीय उद्योग परिसंघ ने राज्‍य को ‘बेस्‍ट-परफॉर्मिंग स्‍टेट’ का दर्जा दिया है।

सूचना प्रौद्योगिकी

आंध्र प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आईटी क्षेत्र में योग्‍य मानव संसाधन का अधिकतम उपयोग करने के लिए कई योजनाएं शुरू की है। 2007-08 के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी निर्यात 26000 करोड़ रुपए पार कर गया।

सरकार वारंगल, तिरुपति, काकीनाडा, विशाखापट्टनम, विजयवाड़ा, गुंटूर और कडप्‍पा जैसे टायर -II शहरों में सूचना प्रौद्योगिकी विस्‍तार के प्रयास कर रही है। आईआईटी मेडक जिले में अगले सत्र से कार्य करना शुरू कर देगा। बिट्स पिलानी को भी सरकार ने हैदराबाद में कैंपस खोलने के लिए राजी कर लिया है, जो आने वाले शैक्षिक सत्र से प्रचालनरत हो जाएगा।

इसके अतिरिक्‍त योग्‍य कार्मिक तैयार करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी को उच्‍च प्राथमिकता देकर राजीव गांधी ज्ञान प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय के तहत तीन भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्‍थान (कडप्‍पा में इदुपुलपया, कृष्‍णा जिले में नुजविद तथा आदिलाबाद में बसारा में) खोलने के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित कर रही है।

परिवहन

सड़कें: मार्च 2007 तक आंध्र प्रदेश से होकर गुजरने वाले राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4,647 किलोमीटर थी और प्रांतीय सड़कों की लंबाई 63,863 किलोमीटर थी जिसमें 10,412 किलोमीटर प्रांतीय राजमार्ग थे। राज्‍य में 1,24,142 किलोमीटर पंचायती राज सड़कें भी थीं।

रेलवे: आंध प्रदेश में लगभग 5,107 किलोमीटर रेलमार्गो में से 4,633 किलोमीटर बड़ी लाइन वाले, 437 कि.मी. मीटर गेज तथा 37 कि. मी. छोटी लाइन वाले हैं।

उड्डयन: राज्‍य में महत्‍वपूर्ण हवाई अड्डे हैदराबाद, तिरुपति और विशाखापत्तनम में हैं। हैदराबाद से नियमित अंतरराष्‍ट्रीय उड़ानें हैं।

बंदरगाह: विशाखापत्तनम आंध्र प्रदेश का प्रमुख बंदरगाह है। राज्‍य में छोटे बंदरगाह हैं। कार्गों ढुलाई क्षमता में आंध्र प्रदेश का दूसरा स्‍थान है और इसकी क्षमता बढ़ गई है।

पर्यटन स्‍थल


हैदराबाद की हुसैन सागर झील

हैदराबाद में चारमीनार, सालारजंग संग्रहालय और गोलकुंडा किला, वारंगल में सहस्‍त्र स्‍तंभ मंदिर और किला, या‍दागिरिगुट्टा में श्रीलक्ष्‍मी नरसिंह स्‍वामी मंदिर, नागार्जुनकोंडा और नागार्जुन सागर में बौद्ध स्‍तूप, तिरूमाला-तिरूपति में श्री वेंकटेश्‍वर मंदिर, श्रीसेलमक का श्रीमल्लिकार्जुनस्‍वामी मंदिर, विजयवाड़ा का कनक दुर्गा मंदिर, अन्‍नावरम में श्री सत्‍यनारायण स्‍वामी मंदिर, सिम्‍हाचलम में श्री वराह नरसिंह स्‍वामी मंदिर, भद्राचलम में श्री सीताराम मंदिर,अरकुघाटी, होर्सले पहाडियां और नेलापटटू आदि आंध्र प्रदेश के महत्‍वपूर्ण पर्यटन स्‍थल हैं। हैदराबाद की हुसैन सागर झील में टैंकबंद में प्रमुख तेलुगु महापुरूषों की 33 आदमकद मूर्तियां लगाई गई हैं तथा झील के मध्‍य में जिब्राल्‍टर चट्टान पर 60 फुट की विशालकाय बुद्ध प्रतिमा लगाई गई है। यह झील हैदराबाद और सिकंदराबाद शहरों को अलग करती है।

स्रोत: भारत २००८ – एक संदर्भ वार्षिक