छठवां केन्द्रीय वेतन आयोग - अध्ययन
- निष्पादन संबंधी वेतन (पीआरपी) की व्यवहार्यता पर अध्ययन
- सरकारी कर्मचारियों के लिए सुआवजे के आकलन और सरकार पर आने वाली लागत का अध्ययन
- केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के अंतिम लाभों पर अध्ययन
निष्पादन संबंधी वेतन (पीआरपी) की व्यवहार्यता के परीक्षण का अध्ययन
सरकार में वेतन और भत्ते सर्विस इंक्रीमेंटल वेतनमान और पदोन्नतियाँ विभिन्न सेवा नियमों के तहत जुड़े हैं। पदोन्नति को एक प्रोत्साहन प्रदान करने वाले साधन के रूप में उपयोग किया जाता है, विशेषकर वरिष्ठ प्रबंधन स्तरों पर। वार्षिक वेतन वृद्धियों पर वेतन में वृद्धि और वेतन कर्मचारियों के निष्पादन के आधार पर निर्भर करने के बजाय उसकी सेवा अवधि और ग्रेड पर निर्भर करता है।
इस अध्ययन का उद्देश्य एक ऐसा मॉडल की व्यवहार्यता की परीक्षा करना है, जिसके द्वारा प्रत्येक पद के लिए एक मूलभूत वेतन के साथ कौशलों और दायित्व के पारम्परिक मानदण्ड जुड़े हों; साथ ही एक अन्य घटक आरंभ किया गया है जो कर्मचारी के वैयक्तिक या सामूहिक निष्पादन और उत्पादकता के आधार पर वेतन के प्रतिशत के रूप में देय हो।
इस अध्ययन में वेतन वृद्धियों और उनके संबंध, यदि कोई हों के सही आधार की परीक्षा की जानी चाहिए, कर्मचारियों की उत्पादकता और निष्पादन के संदर्भ में; तथा पीआरपी और नागरिकों/संगठनों/अन्य विभागों को सेवा की आपूर्ति के बीच एक प्रत्यक्ष सह-संबंध की संभावना की जाँच की जाए, जैसा भी मामला हो।
- इस अध्ययन में विभिन्न सरकारी संगठनों* में कार्यरत कर्मचारियों के विभिन्न ग्रेडों के निष्पादन और उत्पादकता का निर्णय लेने के लिए उनके कार्य के प्रकार और प्रयोक्ताओं/ग्राहकों के साथ संबंध पर निर्भर करते हुए मापन योग्य, मात्रा ज्ञात करने योग्य मानदण्डों का विकास किया जाना चाहिए।
- इसके साथ ही इस अध्ययन में इस विषय में सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं की जाँच की जाए।
- इस अध्ययन में भारतीय परिस्थितियों के लिए उपयुक्त एक मॉडल का विकास किया जाए जो पारदर्शी, मापन योग्य, जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला हो और सेवाओं से जुड़ा हो।
- इस अध्ययन में ऐसे साधनों का विकास किया जाए जिनके द्वारा पीआरपी की शुरूआत सरकार में की जा सके। इसमें विशेष रूप से इन बातों पर विचार किया जाए:
- पीआरपी सभी कार्यों और सभी क्षेत्रों पर अथवा उच्च प्रबंधकीय पदों/कार्यों के प्रतिशत या क्षेत्रों पर लागू किया जाए।
- पीआरपी वैयक्तिक या समूह के आधार पर होना चाहिए।
- पदों की संख्या सीमित रखी जाए जिन पर पीआरपी दिया जाना है और इसका विशिष्ट प्रतिशत है।
यह अध्ययन भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद द्वारा आयोजित किया जाएगा।
दल के प्रमुख से संपर्क के विवरण:
प्रो. बिजू वर्क्के
भारतीय प्रबंधन संस्थान, वस्त्रपुर, अहमदाबाद - 380015
टेलीफोन नं.: 079-26324874
ई-मेल: bvarkkey@iimahd.ernet.in
भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद द्वारा अध्ययन का आयोजन किया जाएगा। संकल्पनात्मक रूपरेखा में निम्नलिखित शामिल होंगे:
- निष्पादन के पाँच मापों के लिए मेट्रिसेज़ को अभिचिन्हाकन, जो हैं।
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- सक्षमता/कौशल
- प्रयास/सक्रियता
- परिणाम/परिणामी/मूल्य वर्धित उपाय
- दक्षता/उत्पादकता
- गुणवत्ता/ग्राहक संतुष्टि
- पीआरपी के कार्यान्वयन की सुविधा के लिए संशोधित वेतन संरचना का सुझाव अर्थात स्थिर और परिवर्ती घटक सहित वेतन संरचना के साथ निष्पादन साधनों से संबंधित परिवर्ती घटक।
- पीआरपी के लिए समर्थनकारी परिस्थितियों का सुझाव।
चुने गए मंत्रालयों/मंत्रालयों के समूह हैं:
- समूह I
- स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग)
- शहरी विकास मंत्रालय (शहरी विकास विभाग)
- समूह II
- कम्पनी कार्य मंत्रालय
- वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर मण्डल और केन्द्रीय उतपाद शुल्क और सीमा शुल्क मण्डल)
- समूह III
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग)
- संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (दूरसंचार-डाक विभाग)
- रक्षा मंत्रालय (रक्षा और आयुध फैक्टरी विभाग)
- गृह मंत्रालय (गृह विभाग)
- रेल मंत्रालय
सरकारी कर्मचारियों को मुआवजा पैकेज देने तथा सरकार पर आने वाली लागत का आकलन
इस अध्ययन का उद्देश्य सरकार द्वारा विभिन्न श्रेणियों और क्षेत्रों के कर्मचारियों पर आने वाली कुल लागत का अनुमान लगाना है। इस अध्ययन में वेतन, विभिन्न भत्तों तथा अन्य लाभों जैसे आवास/एचआरए, परिवहन सुविधाओं/परिवहन भत्तों, टेलीफोन, मुफ्त पास/एलटीसी, आवासीय भृत्य/अर्दली, पेंशन संबंधी लाभ, मुफ्त राशन (जहां लागू हो), नौकरी की सुविधा और अन्य किसी लाभ को विचार में लिया जाएगा जो सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को दिए जाते हैं चाहे ये सुनिश्चित हो अथवा नहीं।
अध्ययन के विचारार्थ विषय इस प्रकार हैं:
- सरकार की ओर से अपने कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन, भत्तों तथा अन्य सभी लाभों चाहे ये मौद्रिक हो या वस्तु के रूप में (वास्तविक अथवा अवास्तविक) तथा सरकार में कार्यरत वेतनमान में से प्रत्येक के लिए प्रति कर्मचारी उसकी लागत का अभिकलन करना, जो ये लाभ उठाते हैं अथवा नहीं।
- लाभों को मौद्रिक रूप में ज्ञात करना, चाहे ये भत्तों के रूप में हो अथवा वस्तुओं के रूप में, ये सरकार के विभिन्न क्षेत्र में कर्मचारियों के लिए उपलब्ध हैं जैसे सशस्त्र सेना, पुलिस, रेलवे तथा डाक विभाग और यह भी अध्ययन करना कि इन लाभों की दक्षता अपने उद्देश्य पूरे करती है या नहीं।
- एक ऐसे मुआवजा पैकेज के विकास की व्यवहार्यता का निर्धारण करना जो केवल मौद्रिक संदर्भ में विभिन्न वेतनमानों/क्षेत्रों में वर्तमान समय में कर्मचारियों को मुआवजा देने के एक अधिक सक्षम रूप में उपलब्ध है।
- सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध संविधान की धारा 311 के तहत सुरक्षा और निरापदता का मौद्रिक अध्ययन करना। क्या इसका कोई प्रभाव सरकारी कर्मचारियों पर है बशर्तें कि मौजूदा नियम भी सरकारी नौकरी से कर्मचारी बड़ी आसानी से बाहर कर सकती है।
जेवियर लेबर रिलेशन इंस्टीट्यूट (एक्सएलआरआई), जमशेदपुर द्वारा यह अध्ययन किया जा रहा है और आशा है कि यह 4 माह की अवधि में पूरा हो जाएगा।
दल के प्रमुख से संपर्क का विवरण:
प्रो. आर के प्रेम राजन जेवियर
लेबर रिलेशन इंस्टीट्यूट,
जमशेदपुर - 831001
टेलीफोन नं.: 91–657–2225506–12
ई-मेल: prem@xlri.ac.in
विधि:
- इस अध्ययन को निम्नलिखित चरणों में किया जाएगा:
- चरण 1 – सभी सरकारी क्षेत्रों में मिलने वाले वेतन और भत्तों के संदर्भ में उपयुक्त आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए लागत का अभिकलन।
- चरण 2 – ग्राहियों और विशेषज्ञों के सभी इनपुट के साथ वास्तविक और अवास्तविक लाभों के मौद्रिक मूल्य का आकलन।
- चरण 3 – सरकार के लिए कार्यरत कुछ न्यूनोक्त लाभों का आकलन, जो है नौकरी की सुरक्षा और निरापदता, धारा 311, आसानी से निष्कासित न करने की कीमत आदि। वेतन मिश्रण पर लाभों से जुड़े मौद्रिक मूल्य का आकलन और प्रभाव।
- चरण 4 – ऐसी वेतन संरचना की व्यवहार्यता के साथ सभी नकद प्राप्त करने की दक्षता पर चर्चा।
- अध्ययन के इस प्रयोजन के आंकड़े दो भागों में जमा किए जाएंगे, नामत: प्राथमिक और माध्यमिक। प्राथमिक आंकड़े साक्षात्कारों, प्रश्नावलियों तथा केन्द्रित सामूहित चर्चा के माध्यम से दक्षता और दक्षता संबंधी निर्णयों पर पहुंचने के प्रयोजन के साथ जमा किए जाएंगे। माध्यमिक आंकड़े अभिलेखों, रिपोर्टों, वक्तव्यों, नियमों तथा प्रभावी विनियमों के माध्यम से जमा किए जाएंगे। इस अध्ययन से मुआवजे की लागत, मौद्रिक तथा अन्य लाभों के संबंध में लगने वाली लागत के अभिकलन की शक्ति मिलेगी।
केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले अंतिम लाभों पर अध्ययन
केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों को अंतिम लाभ देने के लिए सरकार की देयता में कमी लाने के दीर्घ अवधि साधनों के रूप में केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों पर अंतिम लाभों का अध्ययन करना।
अध्ययन का उद्देश्य:
केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों के साथ अखिल भारतीय सेवाओं, सशस्त्र सेना कार्मिकों और संघ राज्य क्षेत्रों के कर्मचारी गणों को मिलने वाले सेवा निवृत्ति लाभों की मौजूदा के प्रकाश में अध्ययन करना, जिनकी नियुक्ति 1.1.2004 से पहले हुई, इससे अगले तीन से चार दशकों में कार्यस्थलों के आयु प्रोफाइल को विचार में रखते हुए यह लाभ प्रदान करने के लिए सरकार की मौजूदा और भावी देयता का आकलन किया जाएगा। इस लक्ष्य के प्रति अंतिम लाभों की मौजूदा योजना में उपयुक्त परिवर्तनों का सुझाव दिया जा सकता है।
अध्ययन के विचारार्थ विषय:
- सरकार द्वारा केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए उपलब्ध सेवानिवृत्ति लाभों की मौजूदा योजना के तहत सरकार द्वारा वर्तमान व्यय का विश्लेषण करना, इस पर प्रक्षेपण करना तथा इस देयता को पूरा करने के उपाय सुझाना।
- जिन कर्मचारियों ने 1.1.04 के पहले कार्यभार संभाला था उनकी आयु रूपरेखा तथा अगले तीन से चार दशकों में उनके अंतिम लाभों की उठने वाली देयता का अनुमान लगाना।
- इस अंतिम उद्देश्य के साथ केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों की पेंशन के निधिकरण का उपयुक्त स्थायी मॉडल बनाने के विभिन्न विकल्प सुझाना, ताकि इस प्रकार धनराशि से सरकार की संपूर्ण पेंशनदेयता की पर्याप्तता सुनिश्चित की जा सके।
- उस वित्तीय देयता का आकलन करना जो इन स्वत: स्थायी मॉडलों के कार्यान्वयन हेतु सरकार द्वारा आरंभ में व्यय किए जाने के लिए आवश्यक होगी।
यह अध्ययन इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एण्ड इकोनोमिक चेंज, बैंगलोर द्वारा किया जा रहा है और आशा है कि यह सितंबर 2007 तक 7 माह की अवधि में पूरा हो जाएगा।
दल के प्रमुख से संपर्क का विवरण:
डॉ. के गायत्री
सेंटर फॉर इकोनोमिक स्टडीज़ एण्ड पोलिसी,
इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एण्ड इकोनोमिक चेंज, नगरभावी, बैंगलोर - 560072
टेलीफोन नं.: 080 23217010
ई-मेल: gayithri@isec.ac.in
विधि:
इस अध्ययन में अंतिम लाभों से संबंधी व्यय के प्रक्षेपण और कुछ अन्य विकल्पों का प्रस्ताव दिया गया है, जिन्हें पणधारियों के साथ बातचीत के द्वारा विचार में लिया जाएगा।
प्रत्येक श्रेणी के मौजूदा कर्मचारी और उनके आयु विवरण तथा अंतिम लाभ उपलब्धता के आधार पर जमा किए जाएंगे और इन्हे भविष्य में आकलन के लिए उपयोग में लाया जाएगा। वर्तमान में उपलब्ध मौजूदा आंकड़े/प्रक्षेपणों की जांच की जाएगी और बेहतर विधि अपनाने का प्रयास किया जाएगा। जीवन प्रत्याशा बढ़ने के संदर्भ में जनांकिकी संक्रमण के प्रभाव को इस अध्ययन में सार्थक रूप से शामिल किया जाएगा। इस अध्ययन में उपयुक्त अर्थशास्त्रीय साधनों को उपयोग में लाया जाएगा जो आकलन करते समय सभी संभावित परिवर्तनों को विचार में लेते हैं।
स्रोत: छठवां केन्द्रीय वेतन आयोग ![]()

