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त्रिपुरा

परिचय

त्रिपुरा भारत के पूर्वोत्तर भाग के 8 राज्‍यों में से एक है। अपने छोटे से भौगोलिक क्षेत्र के अंदर त्रिपुरा में भव्‍य महलों (उज्‍जयंता महल और कुंजबन महल अगरतला तथा नील महल - मेलाघर में लेक पेलिस), पत्‍थर को कोट कर बनाई गई मनमोहक पत्‍थर की मूर्तियों (कैलाश हर के पास उनाकोटी, अमरपुर के पास देव तमुरा और बेलोनिया उप संभाग में पिलक), प्रसिद्ध माता त्रिपुरेश्‍वरी के मंदिर सहित अनेक हिन्‍दु और बौद्ध मंदिरों के कारण पर्यटकों के लिए अत्‍यंत आकर्षक गंतव्‍य है (यहां हिन्‍दु पुराणों के अनुसार 51 पीठासनों में से एक है) यह उदयपुर में स्थित है, यहां अनेक कृत्रिम और प्राकृतिक झीले हैं जिनके नाम है दूमबूर लेख, जो गंडाचेरा उपप्रभाग में है, मेलाघर में रुद्रसागर है, अमर सागर, जगन्‍नाथ दिघी, कल्‍याण सागर आदि भी उदयपुर में हैं जो जमपुई पहाड़ी सीमा मिजोरम का सुंदर पर्वतीय स्‍थल है, यहां के वन्‍य जीवन अभयारण्‍य हैं सेपाही जाला, गुमटी, रोवा और तृष्‍णा तथा राज्‍य में जनजातीय, बंगाली और मणिपुरी समुदायों की समृद्ध सांस्‍कृति विरासत राज्‍य में स्‍पष्‍ट रूप से दिखाई देती है।

राज्‍य का लगभग 2 तिहाई भाग जंगलों से ढका हुआ है जहां पेड़ पौधो, ऑर्किड, पक्षियों और जंगली जानवरों की विभिन्‍न प्रजातियां पाई जाती हैं। त्रिपुरा में पर्यावरण अनुकूल पर्यटन के लिए उत्‍कृष्‍ट अवसर उपलब्‍ध हैं और राज्‍य के विभिन्‍न आकर्षण हैं। उदयपुर में विशाल झीलें हैं जिनके नाम अमरसागर, कल्‍याण सागर, जगन्‍नाथ दिघी, महादेव दिघी और सुख सागर हैं जिन्‍हें तत्‍कालीन महाराजाओं ने बनवाया था। ये झीलें उदयपुर शहर की सुंदरता बढ़ाती हैं जिसे मंदिरों और झीलों का शहर कहा जाता है।

पर्यटक आकर्षण

वन्‍य जीवन अभयारण्‍य

सेपाहीजाला वन्‍य जीवन अभयारण्‍य

सेपाहीजाला वन्‍य जीवन अभयारण्‍य को 2 फरवरी 1987 को बनाया गया था। इस अभयारण्‍य में मोनोकॉट तथा डाइकॉट के के लगभग 456 पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां साल, चमाल, गर्जन और कनक के पेड़ प्रमुख रूप से पाए जाते हैं यहां पाई जाने वाली द्वितीयक प्रजातियां हैं पिचला, कुरचा, आवला, बहेड़ा, हरगाजा, अमकी, बांस और घास इस अभयारण्‍य में 4489 संचयी प्रति हेक्‍टेयर इमारती बायोमास है। इस अभयारण्‍य में राउवालपिया सपेंटिना की बहुलता है और यहां अनेक संकटापन्‍न और खतरे में पड़ी प्रजातियां पाई जाती हैं। एग्रीगेरिया एगलोचा नामक राज्‍य वृक्ष, नागेश्‍वर जो मेसूआ फेरा है और इसे राज्‍य का पुष्‍प घोषित किया गया है, डुपुल (हरे रंग का शाही कबूतर जो राज्‍य का पक्षी) और दर्शनीय लंगूरों का समूह जो राज्‍य का पशु घोषित किया गया है, इस अभयारण्‍य क्षेत्र में आसानी से देखे जा सकते हैं।

सेपाहीजाला के उष्‍ण कटिबंधी नम पतझड़ी वनों में प्राइमेट की पांच प्रजातियां रिसस मेकाक, पिगटेल मेकाक, केब्‍ड लंगूर, दर्शनीय लंगूर, स्‍लॉ लोरी और अनेक प्रकार के अन्‍य वन्‍य जंतु यहां पाए जाते हैं। यहां 100 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। सेपाहीजाला के आश्‍चर्य जनक अधिवास में अनेक प्रकार के प्रवासी पक्षी आते हैं जो हैं लेसर विसलिंग टील, सफेद आईबीस, ओपन बिल्‍ड स्‍टॉर्क कुछ प्रमुख महत्‍व रखते हैं।

तृष्‍णा वन्‍य जीवन अभयारण्‍य

तृष्‍णा वन्‍य जीवन अभयारण्‍य को नवम्‍बर 1988 में अधिसूचित किया गया था। इस अभयारण्‍य का कुल क्षेत्रफल 194.704 वर्ग किलोमीटर है। तृष्‍णा अभयारण्‍य में जंतु और वनस्‍पति की विभिन्‍नता है, यह अभयारण्‍य गाबा नाम के स्‍थानीय भैंसें के लिए प्रसिद्ध हैं और यहां अनेक प्रकार की प्राइमेट प्रजातियां पाई जाती हैं। इस अभयारण्‍य में अनेक बहुवार्षिक जलीय नाले, जलाशय और घास के मैदान हैं बांस की एक प्रजाति ऑक्‍टेमथेरा नाइग्रोसिलेट को केलाई के नाम से स्‍थानीय रूप में उगाया जाता है और इसकी पत्तियां बायसन शौक से खाता है।

गुमती वन्‍य जीवन अभयारण्‍य

गुमती वन्‍य जीवन अभयारण्‍य राज्‍य के दक्षिण पूर्वी कोने में स्थित दक्षिण त्रिपुरा दूसरा अभयारण्‍य है। इसका क्षेत्रफल 389.54 किलो मीटर है। अभयारण्‍य के पास लगभग 300 वर्ग किलो मीटर के क्षेत्र में विशाल जलाशय हैं। यह जलाशय अनेक स्‍वदेशी और प्रवासी पक्षियों का आकर्षण केन्‍द्र है त्रिपुरा में गुमती वन्‍य जीवन अभयारण्‍य में हाथी, बायसन, सांभर, बार्किंग डीयर, जंगली बकरी या सेरो के अलावा अन्‍य जंतु और सरीसृप पाए जाते हैं। यह इको पर्यटन में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए एक आदर्श गंतव्‍य है। इस अभयारण्‍य में ढेर सारे जीव जंतु और वनस्‍पति हैं। यहां अनेक चिकित्‍सीय और औषधीय महत्‍व रखने वाली वनस्‍पतियां अभयारण्‍य में बिखरी पड़ी हैं।

रोवा वन्‍य जीवन अभयारण्‍य

रोवा वन्‍य जीवन अभयारण्‍य जिले के उत्तर में स्थित है और यहां पानी सागर से पहुंचा जा सकता है तथा यह राष्‍ट्रीय राजमार्ग के नजदीक है। त्रिपुरा में रोवा वन्‍य जीवन अभयारण्‍य लगभग 85.85 हेक्‍टयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है और यहां प्राकृतिक जंगल का कुछ हिस्‍सा छोड़ा गया है। इस अभयारण्‍य में दुनिया भर से बड़ी आसानी से पहुंच सकते हैं। रोवा वन्‍य जीवन अभयारण्‍य में वनस्‍पति, पारस्थितिकी, पर्यावरण और वन्‍य जीवन का अध्‍ययन करने वाले लोगों के लिए काफी रुचिकर सामग्री है।

रोवा वन्‍य जीवन अभयारण्‍य में अनेक प्रकार के पक्षी, जंगली जानवर और प्राइमेट तथा सरीसृप जीव पाए जाते हैं। पक्षी प्रेमी, एटिमोलॉजिस्‍ट और वनस्‍पति विज्ञानियों के साथ वन्‍य जीवन में रुचि रखने वाले लोग इस अभयारण्‍य में अच्‍छा समय बिता सकते हैं।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषय वस्‍तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित