तमिलनाडु
परिचय
तमिलनाडु को अब एक अवश्यमेव पर्यटक गंतव्य का स्थान दिया जा रहा है। यह एक ऐसी भूमि है जहां परम्पराए तथा संस्कृति का मेल होता है तथा वे सुमेल ढंग से रहना जारी रखते है। राज्य में स्मारकों तथा मंदिरों की प्रचुरता है जो प्राचीन स्थल है तथा प्रत्येक स्थल की अपनी स्वयं की धार्मिक कलात्मक तथा सांस्कृतिक उपलब्धि एवं विशिष्टता की कहानी होती है जिसे सुनने के लिए सभी प्रतीक्षारता रहते है।
तमिलनाडु की एक लम्बी तटरेखा है जो लगभग 1000 कि. मी. तक विस्तारित है। बंगाल की खाड़ी के साथ कोरोमंडल तट सूर्य और समुद्री लहरों के कई आदर्श अवस्थलों के लिए गोरवान्वित है। बीच की स्वर्णिक रेत में जगह जगह कोकोनट पॉम तथा कैसुरीन के पेड़ों के झुंड है। समुद्र पत्थरों तथा सीपियों व शैलों को तट पर फेंक देता है तथा हलकी मृड हवा याचों तथा कैटामारान को समुद्र के गहरे जल में हिचकोले देती है तथा पानी से तट पर छोटे छोटे टीले बन जाते है। एक छेद से निकल कर तथा दूसरे में आश्रय लेकर केंकड़े यहां छुपन छुपाई का खेल खेलते हैं। समुद्री पक्षी आकाश में विचारते है और फिर मातिस्यकी नावों की पालो पर विश्राम करते है। यहां ऐसे कई और विस्मयकारी द़श्य नजर आते है जो आपकों तमिलनाडू में आनंदित करेंगे तथा आपको चित्रलिखित सा कर देंगे।
पर्यटक आकर्षण
- कन्याकुमारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- रामेश्वरम (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- मीनाक्षी मंदिर (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- वन्य जीवन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- ट्रेकिंग (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- ऊटी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- कोडाइकनाल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- तट (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
तट
कोवेलॉग तट
कोवेलॉग समुद्रतट अपने सौम्य सौदर्य तथा विभिन्न अन्य समुद्र तटीय क्रियाकलापों के लिए उल्लेखनीय एक सर्वाधिक लोकप्रिय समुद्रतट है। जीवट प्रेमी इस तट पर अनेक जल क्रीडाओं में शामिल हो सकते हैं। वे यह पवन क्रीड़ाओं तथा तैराकी जैसी जल खेलकूदों का आनंद ले सकते है जो यहां के पर्यटकों के लोकप्रिय क्रियाकलाप है। इस विस्मयकारी सुन्दर कोबेलॉग समुद्री तट के अन्य आकर्षण पुराना डच किला, चर्च तथा मस्जिद है।
दखिना चित्र समुद्र तट
दखिना चित्र समुद्र तट अपने परिवार तथा मित्रों के साथ छुटिट्यां बिताने का एक आदर्श स्थल है। यह सूर्य स्नान के लिए एक श्रेष्ठ अवसर उपलब्ध कराता है। जो विदेशी पर्यटकों में अत्यंत आम बात है। बंगाल की खाड़ी का शीशे के समान स्वच्छ नीला जल सम्पूर्ण क्षेत्र को एक सौम्य आकार प्रदान करता है। हम दखिन चित्रा के समुद्र तट से सूर्योदय तथा सूर्यास्त का आनंद उठा सकते है जो पर्यटकों को आनंद ओर उत्साह की एक अदभुत भावना से सरोबोर कर देता है।
इलियट समुद्र तट
इलियट समुद्रतट तमिलनाडु में स्वच्छतम समुद्र तटो में से एक है। भीड भाड़ वाले इलाकों से दूर किसी स्वच्छ समुद्रतट के इच्छुक बैकपैकरों का इस तट पर स्वागत है, यह समुद्र तट वस्तुत: चैन्नई में प्रसिद्ध मेरीना समुद्र तट का विस्तार है। हम यदि अन्ना मेमोरियल से नीचे दक्षिण की ओर चले तो हम लगभग पांच मिनट में इलियट समुद्र तट पर पहुंच जाएंगे। अपने प्रियजनों के साथ उत्कृष्ट समय बिताने के लिए यह समुद्र तट उपयुक्त स्थल है।
कुरु सदई द्वीपसमूह
इस क्षेत्र में कुरुसदई द्वीपसमूह को आम तौर पर प्राणि विज्ञानियों के लिए स्वर्ग कहा जाता है। यह कोरल रीफ तथा समुद्री जीवन की विरली प्रजातियों जैसे डॉल्फिन के लिए उल्लेखनीय है। जीवविज्ञानी तथा अनुसंधाताओं इस द्वीपसमूह में आते रहते हैं। आप मात्स्यिकी विभाग के साथ सम्पर्क करके कुरुसदई द्वीपसमूह की यात्रा की अपनी योजना बना सकते हैं।
कोडीकरई समुद्रतट
कोडिकरई समुद्र तट वेलांकनी के दक्षिण में स्थित है जो पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में पाल्क स्ट्रेट से घिरा हुआ है। यहां वन्य जीवन अभयराण्य लागभग 333 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैला हुआ है जिसमें 25 कि.मी. क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय शुष्क वन है। यहां स्तनपायी जैसे नीला हरिण, चित्तल हिरण, जंगली सूअर, अर्थ वन्य टट्टू, बोनेट मकाड देखा जा सकता है - जलपक्षी जैसे फिलामिंगोज, इबिसेस, बगुला स्पूनबिल ओलिव एडिली। समुद्री कच्छुआ तारांकित कच्छुआ, वाइपर, दलदली मगरमच्छ आदि कुछ विलुप्त होते सरीसृप हैं।
कन्याकुमारी समुद्र तट
कन्याकुमारी समुद्र तट अपने बहुरंगी बालू के लिए जाना जाता है और भारत के सबसे दक्षिणी छोर में स्थित है। कन्याकुमारी सूर्य की चमक और सूर्यास्त विशेषकर पूर्णिमा के दिनों में के मनोहर दृश्य के लिए प्रसिद्ध है। समुद्र अपने आप में सुन्दर दृश्य है जिसमें बहुरंगी बालू हैं। एक प्रकाश स्तंभ है जहां से कोई भी नयनाभिराम दृश्य देख सकता है।
मरीना समुद्र तट
मरीना समुद्र तट एशिया में सबसे लम्बा समुद्र है। यह 12 कि. मी. लम्बा है इसका विस्तार विश्व में दूसरा सबसे लंबा है। यह चैन्नई के पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी से सटा हुआ है। समुद्र तट से सूर्यास्त और सूर्योदय देखना अचंम्भित करने वाला अनुभव होता है। नहाना और तैरना खतरनाक हो सकता है क्योंकि नीचे की लहर काफी शक्तिशाली होती है।
महाबलीपुरम समुद्र तट
महाबलीपुरम समुद्र तट तमिलनाडु का अत्यन्त प्राचीन समुद्र तट के रूप में है। समुद्र तट सालभर हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह समुद्र तट सूर्य स्नान और सुस्त पड़े रहने के लिए आदर्श जगह है। समुद्र अशांत है और तैरने की सलाह नहीं दी जाती है। गोल्डन सैंड, अच्छा सर्किंग के अवसर और झिलमिलाता स्वच्छ नीला समुद्री जल समुद्र तट के प्रेमियों को इस जगह लुभाने के लिए काफी है।
मुटुक्कादु समुद्र तट
मुटुक्कादु समुद्र तट चैन्नई तमिलनाडु की राजधानी से 36 कि.मी. दूर स्थित है। यह मोटर बोट की सवारी और सर्फिंग के लिए आदर्श जगह है। यह बन्सी या मच्छली पकड़ने की आदर्श जगह है। यहां भारी मात्स्यिकी होती है। गोल्डन सैंड, अच्छा सर्फ और झिलमिलाता स्वच्छ नीला समुद्र यह एक ही जगह उपलब्ध है, यही मुटुक्कादु समुद्र तट है।
पलिकट समुद्र तट
पलिकट समुद्र तट तमिलनाडु के उत्तरी छोर पर स्थित है। यह ठहरा पानी के मिलने से बना है। यह भारत में दूसरा लैगून और इको पर्यटन के लिए सर्वोत्तम स्थान है। फ्लेमिंगो उत्प्रवासी पक्षी का झुंड यहां देखा जा सकता है, उनमें सबसे प्रसिद्ध फ्लेमिंगो है।
रामेश्वरम समुद्र तट
रामेश्वरम समुद्र तक शांत समुद्र तट है और यहां का छिछला पानी तैरने और सन बेदिंग के लिए आदर्श है। रामेश्वरम प्रसिद्ध तीर्थ केन्द्र है। महाकाव्य रामायण के अनुसार रावण के चुंगल से अपनी पत्नी सीता हो छुड़ाने के लिए भगवान श्री राम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी। ऐसा विश्वास किया जाता है। कि भगवान राम ने श्रीलंका जाने के लिए पौराणिक कथा के पुल का निर्माण किया।
वट्टाकोटाई समुद्र तट
समुद्र से ऊपर वट्टाकोटाई समुद्र तट वृत्ताकार शांत पर्यटक स्थल है। यह कन्याकुमारी से 6 कि.मी. दूर स्थित है। इस जगह पर ग्रेनाइट का किला स्थित है। यह सुन्दर वनभोज का स्थल है और नारियल के पेड़ों के बीच आराम करने का आदर्श स्थान है। इसके निकट समुद्र शांत है और देश भर के पर्यटकों के लिए यह आदर्श जगह है।
पर्वतीय स्थल
कोडईकेनाल
1875 में भारतीय रेल में अपनी लाइन चैन्नई से तिरूनेलवेली तक विस्तारित किया और अमियानयाकानौर में एक स्टेशन बनाया गया और इसे बाद में कोदई रोड का पुन नामकरण किया गया जिससे कोदई केनाल के लिए गेटवे प्रदान किया जा सके। कोडईकेनाल की सुंदरता इसकी जंगली ढलानों में निहित है और विशाल पेड़ों में। विशाल चट्टान बोवर्स क्रीक और ढलान दर्शकों को मोहित करते हैं। घास के मैदान, लम्बा फैला हुआ जंगल, सुंदर स्थल और हरे चरागाह में चरते भेड़ों का झुंड आनंद के स्रोत हैं दर्शकों के लिए उल्लास ओर रोमांच प्रदान करते हैं। कोदई में विभिन्न चट्टानों की चढ़ाई उत्साह वर्धक है। विलर रोक पर अथक चढान जो 400 फीट ऊंची है, प्रत्येक पहाडी सैरगह के दर्शकों के लिए जरूरी है।
कोडईकेनाल पर और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
नीलगिरी की पहाड़ी
नीलगिरी ट्रेकर्स के लिए स्वर्ग है। प्राकृतिक रूप में भूआकृति, पहाडियों से घिरा है जो प्राकृति प्रेमियों के लिए ट्रेक हेतु उत्तम है। जहां भी जाएं सभी दिशाओं में ट्रेक ही ट्रेक भरे पड़े हैं चाहे जहां से भी आप आरंभ करते है। ट्रेक रोमांच भरा हो सकता है उत्तेजना और साहसिक और प्राकृति को इसकी सुंदरता और भव्यता के साथ निहारने का एक अच्छा तरीका है।
नीलगिरी की पहाड़ी पर और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
कूनूर
प्रकृति और नीलगिरी की पहाडियों की गोद में कूनूर नयनाभिराम पहाडी सैरगाह है। लंबे समय के कूनूर का पहाडी सैर गाह अवकाश तलबी प्रकृति प्रेमियों साहसिक खेल खोजने वालों, फिल्म निदेशक और इसी प्रकार के लोगों को आकर्षित करता आया है। प्रकृति स्थल के अलावा कूनूर साहसिक खेलों के लिए अवसर प्रदान करता है जैसे ट्रेकिंग और हाइकिंग भी। गर्मी के महीनों में पहाड़ी सैर जगह में गर्म और धूल भरी जगहों से आने वालों की भीड़ उमड़ पड़ती है।
ऊटी
यह पहाडी स्थल की रानी कहलाती है नयनभिराम हरा उदागमनदलय जो ऊटी के रूप में बेहतर जाना जाता है दक्षिण में अति लोकप्रिय पहाड़ी स्थल है। यह पश्चिमी घाट में 2240 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। उदागमनदलय नीलगिरी जिला का मुख्यालय है जहां दोनों घाटों की श्रृंखलाएं मिलती है। इस क्षेत्र के लिए प्रकृति बड़ा उदार रही है यह राज्य में अत्यन्त सुन्दर जगह है। कॉफी और चाय बागानों के अलावा वृक्ष जैसे कोनीफर यूक्लिपटस, देवदार और वटल यहां वहां उदागमनदलम के पहाड़ी की ओर हैं। गर्मी में तापमान मुश्किल से 250 से. होता है और न्यूनतम 100 से. और सर्दी में विशिष्ट ठण्ड पड़ती है 210 से. और न्यूनतम 50 से.। यह जिज्ञासा भरा है कि स्वर्ग का यह टुकड़ा महान दक्षिणी वंशों द्वारा अछूता रहा और ब्रिटिशों ने 1800 के आरंभ में इसकी खोज की। परन्तु उदागमनदलम को आधुनिक बनाने और अभिगमय बनाने का श्रेय ब्रिटिश को जाता है जिन्होंने इसे क्षेत्र में पहली रेल पटरी का निर्माण किया और इसे मद्रास प्रेसीडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाई।
ऊटी पर और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
येरकौद
येरकौद तमिलनाडु राज्य में अन्य पहाडी सैरगाहों में तुलना में कम भीड़भाड़ वाला पहाडी सैरगाह हैं यह सलेम जिला में शेवारोय रॉय पर्वत श्रृंखला में समुद्र तल से 1500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यरकौद शेवारॉय हिल भी कहलाता है क्योंकि यह शेवारॉय पर्वत श्रृंखला में पूर्वी घाट में स्थित है। यह जगह 383 वर्ग कि. मी. क्षेत्र में फैला हुआ है यह गरीबों की ऊटी के नाम से लोकप्रिय है चूंकि यह अपेक्षाकृत कम खर्चीला है तथापि अधिक लोकप्रिय पहाड़ी सैरगाह की तरह ही नयनाभिराम है। शब्दिक रूप से तमिल में यह नाम येरकौद का अर्थ है झील और जंगल और ऐसा कहा जाता है कि इसका नामकरण शहर के बीचो बीच वन वृक्षों के बीच झील से हुआ है।
कोटगिरी
कोटगिरी पहाड़ी सैरगाह प्रसिद्ध नीलगिरी की पहाडियों पर बसा हैं। कोटगिरी ऊटी से केवल 16 कि.मी. दूर है। कोटगिरी का शब्द्रिक अर्थ है। कोटाओं के घर की पंक्तियां। कोटागिरी नीलगिरी से अलग किया हुआ है और यह ब्रिटिश का ग्रीष्मकालीन सैरगाह बनाया गया था। आज की तारीख में कोटगिरी पहाडी सैरगाह की सुन्दरता पर्यटकों को आकर्षित करती है। ऊटी और कूनूर से अलग कोटगिरी खुला टैटस मैसीफ पर बसा हुआ हैं। यह 1985 मीटर की ऊंचाई पर है नगर ने अपने चारों ओर असंख्य टीलाएं और घाटियां विकसित की है। कोटगिरी का मौसम कूनूर के मौसम से अधिक स्फूर्तिकारक एवं ऊटी से अधिक सुहावना है।
वन्य जीवन अभयारण्य
एरिगनर अन्ना जियोलॉजिकल पार्क
एरिगनर अन्ना जियोलॉजिकल पार्क वन्दलुर में स्थित है जो मेट्रोपोलिहन शहर चैन्नई से 32 कि.मी. दूर है। इस चिडियाघर में पश्चिमी और पूर्वी घाट की सतंर्जक एवं लुप्त होती प्रजातियां हैं। यहां लुप्तप्राय एवं विदेशी प्रजातियां भी है। यह चिडियाघर व्यापक किस्म के वनस्पति और जीव-जन्तु के लिए प्रजाति बैंक और जीन बैंक की भूमिका निभाता है। यह शैक्षिक केन्द्र है और प्रास्थितिकी जागरूकता और संरक्षण एवं जनता की शिक्षा के लिए बहुत अधिक संभावना प्रदान करता है। यह विभिन्न पहलुओं संबंधी मूल और अनुप्रयोग अनुसंधान के स्थल के रूप में कार्य करता है, जैसे पशु आचरण, पोषण प्रास्थितिकी जीव विज्ञान रोग और जैव विविधता के संरखण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। चिडियाघर में लुप्त होती प्रजातियों के मूल निवास के प्रचार और पुन: स्थापना के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी सुविधाएं है।
एरिगनर अन्ना जियोलॉजिकल पार्क पर और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
इंदिरा गांधी वन्य जीवन अभयारण्य
इंदिरा गांधी वन्य जीवन अभयारण्य और नेशनल पार्क, जो पहले अन्नामलाई वन्य जीवन अभयारण्य कहलाता था एक संरक्षित क्षेत्र है जिसका नाम प्रधान मंत्री के नाम पर पडा जिसने 7 अक्टूबर 1961 में इसका दौरा किया था। एक प्रास्थितिकीय स्वर्ग इस अभयारण्य में एक राष्ट्रीय उद्यान है जिसका क्षेत्रफल 108 वर्ग कि.मी. है।
लगभग 800 प्रजातियों के वनस्पति यहां पाए जाते है। अभयारण्य में वृक्षवासी जानवर पाए जाते हैं जैसे शेर जैसी पूंछ वाले मकाक, बोनेट मकाक, सामान्य लंगूर, नीलगिरी लंगूर, मलाबर विशाल गिलहरी और ग्रिजल्ड विशाल गिलहरी। भूमि के सूचीबद्ध पशु हैं - बाघ-चीता, हाथी, गौरे, पंगोलिन, सम्बर, चितरा हरिण, बार्किंग हिरण, माउस हिरण, जंगली सूअर, घोले, स्लोथ भालू, साही, नीलगिरी तार, सीवेट बिलार, और तोड़ी बिलाट। उड़ने वाले जीव जन्तुओं में शामिल हैं रैकेट पूंछ वाला ड्रोंगो, काले सिर वाला ओरिओल, पाराडाइज र्फ्लेर कैचर, हिवस्लिंग थ्रस्ट, एमेरल फख्ता, हरा कबूतर, टिकेल फलावर पेकर, रुफुस वुड पेकर, गुलाबी पाराकीट, काला बाज, ग्रेट इंडियन मलाबार पाइड होर्न बिल, फाइरी ब्लू बर्ड और ग्रीन बिल्ड मलकोहा आदि।
श्री विलीपुथर ग्रिजल्ड गिलहरी वन्य जीवन अभयारण्य
दक्षिणी तमिलनाडु में श्री विलीपुथर में ग्रिजल्ड गिलहरी वन्य जीवन अभयारण्य को दिसंबर 1989 में अभयारण्य घोषित किया गया। यह 480 वर्ग कि.मी. से भी अधिक फैला हुआ है। यह अभयारण्य दक्षिण-पश्चिमी ओर पेरियर टाइगर आरक्षित वन से सटा हुआ है और उत्तरी पश्चिमी छोर पर मेगामलाई आरक्षित वन से सटा हुआ है तथा दक्षिणी सीमा तिरूनेतवील वन डिवीजन के सिवगिरी प्रारक्षित वन से सटा हुआ है। अभयारण्य में व्यापक दायरे का वास है ऊपर पहाडी जंगलों और घास भूमि से, मध्य ऊपरी गीली सदाबहार, अर्ध सदाबहार आर्द्रता भरा पतझड़ जंगल खुला पतझड़ जंगल, बंद पतझड़ जंगल और घास भरी भूमि और पहाडी की तराई पर छुट-पुट जंगल।
ग्रिजल्ड गिलरी अभयारण्य में व्यापक दायरे में शाकाहारी, मांसाहारी और सर्वाहारी हैं। निवासी और उत्प्रवासी हाथी सामान्य हैं। अन्य महत्वपूर्ण पशु हैं - बाघ, चीता, गोरे, नीलगिरी तार, चित्तला, हरिण, बार्किंग हरिण, सम्बर जंगली सूअर, साही नीलगिरी लंगूर, शेर की पूंछ वाले मकाक, सामान्य लंगूर, स्लेंडर, लोरीज, बोनेट मकाक, स्लोथ भालू, भारतीय विशाल गिलहरी और उड़ने वाले गिलहारी हैं। अभयारण्य में सांपों की 18 प्रजातियां, छिपकलियों की 15 प्रजातियां, 10 प्रजातियां अभयरों की और अब 56 प्रजातियों की तितलियां है
गीन्डी नेशनल पार्क
गीन्डी नेशनल पार्क महाबालम में स्थित है, जो चैन्नई के गीन्डी तलुक में है। यह 270 हेक्टेयर से भी अधिक सूखा सदाबहार झाडियों और कंटीली जंगलों में फैला हुआ है और देश में सबसे छोटा नेशनल पार्क है। गीन्डी नेशनल पार्क में 400 काले हिरण का निवास है, 2000 चित्तला हरिण 24 सियार, विभिन्न किस्म के सांप, गेको, सांपों और मेढकों की विभिन्न किस्में पक्षी की 100 किस्म 60 से भी अधिक प्रजातियों की तितलियां और मकडियां, विभिन्न प्रकार की टिड्डियां, चींटियां, दीमक, केंकड़ा, घोंघा, शम्बूक, बिच्छू, कुटकी, मकड़ी, केंचुए, मिलिपेड आदि हैं। इस उद्यान के भीतर एक स्नेक पार्क (सर्पोद्यान) में विभिन्न प्रकार के सांप मगरमच्छ और कच्छुए रहते हैं।
जीएनपी का लगभग 22 एकड़ चिडियाघर के लिए निकाला गया है। यह जनता के देखने के लिए विभिन्न प्रजातियों को बन्धक बनाकर रखना आवश्यक बना देता है। बाल उद्यान यह चिडियाघर बच्चों को प्राकृतिक वातावरण प्रदान करने, जानवरों के बारे में उन्हें शिक्षा देने और संरक्षण संबंधी जागरूकता सृजित करने की दृष्टि से शुरू किया गया था।
गीन्डी नेशनल पार्क पर और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
मन्नार की खाड़ी समुद्री नेशनल पार्क
मन्नार की खाडी समुद्री नेशनल पार्क का मुख्य खेत्र लगभग 560 वर्ग कि.मी. है जो रामेश्वरम से टूटीकोरीन तक मन्नार की खाडी बायोस्फेयर प्रारक्षित के भीतर बसा है। जिसका क्षेत्रफल 10,500 वर्ग कि.मी. है। यह भारत के दक्षिण पूर्व तट पर स्थित है। इसमें रामेश्वरम तट, टूटीकोरीन तिरूनेलवेली और कन्याकुमारी शामिल हैं। यह समुद्री जैव विविधता की दृष्टि से विश्व का सबसे समृद्ध क्षेत्र है और दक्षिण पूर्व एशिया में पहला समुद्री बायोस्फेर संरक्षण है। बायोस्फेर संरक्षण में 21 द्वीप नदमुख सहित, कच्छार, बीच तट वातावरण के निकट जंगल, जिसमें समुद्री संघटक शामिल हें जैसे सैवाल समुदाय, समुद्री घास, कोराल रीफ, नमक टीले ओर मैन्ग्रोव।
प्रत्येक द्वीप में सीधी लाइन आड़े काट हैं जो 500-1000 मीटर हैं ये द्वीप के आकार और आकृति पर निर्भर करते हैं और 15 मी. परिधि के प्लोट समान अंतराल पर रखे गए और प्रजातियों के स्तर पर वनस्पति के प्रकार का द़श्य अनुमान और शामिल किए गए क्षेत्र का प्रत्येक ट्रान्सेकट में रिकार्ड किया जाता है। यह तब प्रत्येक द्वीप के वनस्पति क्षेत्र का पता लगाने के लिए बहिर्वेशन किया गया। यद्यपि सभी द्वीपों में आरंभ किए गए प्रोसोपीस बहुतायत में पायी जाने वाली वृक्ष प्रजाति है, पेम्फिस, एसिडुला एक मात्र लुप्तप्राय प्रजाति मन्नार की खाड़ी समुद्री नेशनल पार्क द्वीप समूह में है। कुल 10 वास्तविक मैन्ग्रोव और 24 मैन्ग्रोव संबंधित प्रजातियां इन द्वीप समूह से रिकार्ड किए गए। कुल 92 वन्य और 9 रोपे गए वनस्पति की प्रजातियां द्वीपों में रिकार्ड किए गए। अनोखे जानवर जैसे बलानोग्लोसिस जीवित, फोसील संबंधी रीढीदार और अरीढीदार यहां के देशज हैं। पांच लुप्त होते समुद्री कच्छुओं के लिए बालूआही द्वीप का किनारा चारा-पानी की जगह है ग्रीन टर्टल, ओलिव रीडली टर्टल, होक्सबिल टर्टल, लेदर बैक टर्टल और लोगर हेड टर्टल और पहले दो यहीं प्रजनन भी करते हैं।
कलाक्कादु वन्य जीवन अभयारण्य
यह तिरूनेलवेली जिला में 223 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में स्थित है यह पश्चिमी घाट और निकवर्ती क्षेत्रों के नीचे स्थित है। यहां की वनस्पतियों में उष्णकटिबंधीय सदाबहार से उष्णकटिबंधीय पतझड़ ओर निचली पहाडियां में कंटीली जंगल हैं। कलाकाछु वन्य जीवन अभयारण्य वनस्पति वैज्ञानिकों, पक्षिविज्ञानी के लिए बहुत लोकप्रिय है चूंकि यहां विभिन्न किस्म के जीवजन्जु और पक्षी रहते हैं।
शेर की पूंछ वाले मकाक, नीलगिरी लंगूर बोनेट मकाक, सामान्य लंगूर, नीलगिरी तार, सम्भर, स्लोथ भालू, गौर, हाथी, बाघ, उड़ने वाली गिलहारी, पैन्थर, जंगली कुत्ता, और पंगोलिन कुछ वन्य जीवन हैं जिन्हें अभयारण्य में देखा जाता है। विभिन्न किस्म के पक्षी और सरीसृप भी यहां पाए जाते है। वन अधिकारी विभाग से पूर्व अनुमति लेकर यहां ट्रेकिंग किया जा सकता है।
प्वाइंट कैलिमर वन्य जीवन अभयारण्य
प्वाइंट कैलिमर वन्य जीवन अभयारण्य 1967 में काला हिरण के संरक्षण के लिए बनया गया था यह भारत की लुप्त होती स्थानीय प्रजातियां हैं। यह अभयारण्य तमिलनाडु के नगापटिनम जिला में स्थित है। यह विशाल प्वाइंट कैलिमर का दलदली भूभाग भारत का एक महान पक्षी प्रदर्शनी का दृश्य है। प्वाइंट कैलिमर 17.26 वर्ग कि.मी. बालूआही तट पर फैला हुआ है। यहां खरा दलदल कंटीली झाडियां जो ठहरा हुए पानी के इर्द-गिर्द पाए जाते हैं। प्वाइंट कैलिमर हिन्दु धर्म और पौराणिक कथाओं से संबंधित हैं। प्वाइंट कैलिमर के जंगल जो पहले वेद के वेद्रोणायम वन के रूप में जाना जाता था। (जो हिन्दुओं की पवित्र पुस्तक है)।
क्षेत्र का मौसम मानसूनी है परन्तु यह मानसूनी की तरह नहीं है क्योंकि यहां वर्षा विषम है। यहां उत्तर पूर्वी मानसून से वर्षा होती है और कम मात्रा में दक्षिण-पश्चिम मानसून से। काला हिरण जो स्थानीय भाषा में वेलियन कहलाता है, अभयारण्य की मुख्य प्रजाति है। वे अधिकांशत: खुले घास के क्षेत्रों में चरते हुए नजर आते है। अभयारण्य के अन्य महत्वपूर्ण पशुओं में चित्तला हिरण, सियार, गन्धविलाव, जंगली सूअर, वन बिलाव बोनेट मकाव काला खरगोश, और सामान्य भारतीय नेवला शामिल हैं। जंगली घोडों की उपस्थिति इस अभयारण्य की एक महत्वपूर्ण विशेषता हैं।
मुदुमलाई वन्य जीवन अभयारण्य
मुदुमलाई वन्य जीवन अभयारण्य और नेशनल पार्क तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के त्रि-संगम पर स्थित है जो नीलगिरी की उत्तरी-पूर्वी ढलान पर है और पश्चिमी घाट का भाग है जो मैसूर के पठार की ओर गिरता है। इसके उत्तर में बंदीपुर ब्याघ्र संरक्षण और पश्चिम में वीनाड वन्य जीवन अभयारण्य से यह क्षेत्र विभिन्न वन्य जीवन के लिए एकल, सतत रूप से व्यावहार्य निवास का निर्माण करता है यह नीलगिरी बायोस्फेर आरक्षण का एक भाग है।
प्रात: काल का समय दिन में वह समय है जब पक्षी अधिकतर सक्रिय रहते है और चहचहाते हैं। नदी और भरने अच्छी जगह है जहां चिडियों के संगीत सुना जा सकता है। यहां सरीसृप भी काफी तदाद में हैं। यहां विषैले और विषहीन सांपों की अनेक प्रजातियां हैं यहां अजगर भी हैं। कुछ अजगर इतने बड़े हैं कि वे मध्यम आकार के हिरणों और गवल के बच्छड़ों को भी अपनी कुंडली में लपेटने से नहीं हिचकते हैं अनियमित दर्शकों द्वारा सामान्य रूप से देखे जाने वाले जानवर हैं चित्तला हिरण, हाथी, सामान्य लंगूर, कभी कभी साम्भर और गौर।
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मुकुरती नेशनल पार्क
मुकुरती नेशनल पार्क नीलगिरी का एक दूसरा बड़ा आकर्षण है। यह नीलगिरी पठार के दक्षिण-पश्चिमी कोने पर स्थित है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में नीलगिरी थार हैं। यह 78.46 कि.मी. से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। मुकुरती नेशनल पार्क की नयनाभिराम विशेषता इसका स्थानिकता और हिमालय वनस्पति एवं जीवन-जन्तुओं से इसका संबंध है।
प्राकृतिक वनस्पति में विशाल घास का मैदान जो असंख्य पृथक सघन रूप से परिभाषित और छोटी-छोटी वन भूमि का झुण्ड है। केवल वृक्ष की परतों की दो मंजिलें दिखाई देती हैं। लैना यहां आम है। अधिपादप काफी मात्रा में हैं और इनमें अधिकांश शैवाक, पर्णांग, ब्रायोफिट्स और विभिन्न फल के बागान हैं। अनेक पौधे जो नीलगिरी पठार के हैं उनका हिमालय से निकटतम संबंध है। रोडोडन्ड्रोन्स, जामुन, रास्पबेरीज आदि पेकिन्सुलर भारत में कहीं नहीं पाए जाते हैं, नीलगिरी और हिमालय के बीच में।
मुकुर्थी के जंगली जानवरों में मैदानी और पहाड़ी जानवरों का मिश्रण शामिल है। जंगली जानवरों के नजदीक जाने का मौका मुकुर्थी में दुर्लभ है यहां पाई जाने वाली सामान्य स्तनधारी जातियां नील गिरी ताहर, सांभर, बार्किंग डीयर, हाथी, ब्लैक नेप हेयर, जंगली बिल्ली, जंगली कुत्ते, भेडिए, पट्टी दार मेंगूज, नीलगिरी मार्टिन, ओटर, बड़ी गिलहरियां आदि हैं। यहां पाए जाने वाले पक्षियों में अधिकांशत: पहाड़ी चिडिया केस्ट्रेल, ब्लैक इगल, भूरे जंगली फाउल, वुड कॉक और थ्रश।
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मुंडनथुराई वन्य जीवन अभयारण्य
मुंडनथुराई - कलाकड वन्य जीवन अभयारण्य तिरूनेलवेली जिला में वर्ष 1988 से राष्ट्रीय ब्याघ्र संरक्षण के रूप में विकसित किया गया है। कुल 817 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में पश्चिमी घाट श्रृंखला के विलकुल दक्षिण में स्थित है। निकटतम स्टेशन हैं चेरनमहादेवी और अम्बासमुद्रम जो तिरूनेलवेली से क्रमश 20 कि.मी. और 15 कि.मी. है। पहाडी भूआकृति यहां की विशेषता है जिसकी वजह से नीचली ढलान पर उष्णकटिबंधीय पतझड़ वन है और ऊपरी छोर पर उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार जंगल है।
यहां का मौसम सूखा, आर्द्र और मैदान में गर्म है और ऊपर की ओर सुखद ठंडा मौसम है। यह संरक्षण बाघ के लिए सबसे दक्षिणी निवास स्थान है। अन्य परभक्षी जैसे पैन्थर, जंगली बिलाव, गन्ध बिलाव,धोल, सियार, चित्रा हिरण भी यहां पाए जाते हैं। हम यहां सरीसृप और अभयचर भी देख सकते हैं जैसे नागराज, सामान्य करैत, दुबाईया, गहरे धब्बे वाले दुबाईया, मोनीटर लिजर्ड, गार्डेन लिजर्ड, कच्छुआ, मगरमच्छ और मेढकों की विरल प्रजातियां। वृक्षों पर रहने वाले जीव-जन्तुओं के संबंध में पक्षियों की 80 से अधिक प्रजातियां इस क्षेत्र में पायी जाती है। यहां बारंबार देखी गई कुछ प्रजातियों में बगुला, जंगली मुर्गी, कंट मुर्गी, बटेर, फख्ता, सहेली, बी केटर, गौरेया, उल्लू, पील, पाराडाइज, फ्लाई कैचर और पाराकीट आदि हैं। 24 अभिचिन्हांकित प्राकृतिक पगडंडियां हैं जो संरक्षण में फैले हुए हैं। यह ट्रैकरों को दिलचस्प लगता हैं।
वेदान्थांगल नेशनल पार्क
वेदान्यांगल पक्षी अभयारण्य देश का सबसे छोटा और सबसे पुराना है इसका विशिष्ट इतिहास है। स्थानीय लोग शताब्दियों से अभयारण्य की रक्षा करते आए हैं अब क्योंकि उन्होंने यह अनुभव किया है कि पक्षी के मल टंकियों में गिरते है और पानी में नाइट्रोजन तत्व बढ़ा देते हैं और जब फसल की सिंचाई करने के लिए उपयोग किया जाता है फसल का उत्पादन बहुत अधिक होता है ओर उर्वरक की लागत बचाता है। बहुत पहले 1798 में ग्रामीणों में प्राधिकारियों को विश्वास दिलाया कि वे 30 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले वेदान्थांगल टैंक के पक्षी को संरक्षण प्रदान करें। लगभग प्रत्येक क्षेत्र में 30,000 पक्षी आते हैं यद्यपि क्षेत्र केवल 30 हेक्टेयर है। यह तब बगुलों, तालाब बगुलों, स्टोर्क इबिसेस और स्पून बिल के झुंडों को आकर्षित करता है। यदि भारी वर्षा होती है ये पेड़ आंशिक रूप से डूब जाते हैं। इसका आकार छोटा होने के बावजूद वेदान्थांगल देखने लायक हैं विशेषकर अक्टूबर और जनवरी के बीच तब निकट से हजारों पक्षियों को घोंसला बनाते देखा जा सकता है।
पहले पहल वेन्दान्थांगल में आने वाले पक्षी हैं ओपन बिल्ड स्टोर्क और ये अभयारण्य छोड़ने के पहले एक ही मौसम में दो बार प्रजनन करते हैं। बगुला स्पोट बिल्ड पेलीकन, पेहिड स्टोर्क, ग्रेट करमोरेन्ट इंडियन कोरमोरेन्ट, डार्टर यूरेसियन स्पून बिल, एशियाई ओपन बिल, काला सिर वाला बुज्जा, भूरा बगुला, बैंगनी बत्तक जैसे कोम्ब डक, पिनटेल, सामान्य टील्स, डबचिक, शोवलर, और काले पंख वाला पनलवा।
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स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषय वस्तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित
