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सिक्किम

परिचय

सिक्किम अपनी हरी भरी वनस्‍पति, सुंदर प्राकृतिक घाटियों और विशाल पर्वतों के लिए प्रसिद्ध है। यहां समृद्ध और भव्‍य सांस्‍कृतिक विरासत के बीच शांति प्रिय लोक रहते हैं जो पर्यटकों का एक अत्‍यंत सुरक्षित मनोरंजन स्‍थल प्रदान करते हैं। आज यात्री सिक्किम की यात्रा पर आकर यहां की विहंगम प्राकृतिक सुंदरता के रहस्‍य की खोज करते हैं। बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों, फूलों के गुच्‍छों से लदे मैदान, चमकदार रंग बिरंगी संस्‍कृति और मनोरंजक त्‍यौहार के साथ यहां की वनस्‍पति और जीव जंतु यांत्रियों के अवकाश समय को सुंदर और चुनौतिपूर्ण बनाते हैं।

सिक्किम की शान है कंचनजंगा पर्वत जो दुनिया में तीसरा सबसे ऊंचा पर्वत है। बर्फ से ढके पर्वत दुनिया की अविवादित सर्वोच्‍च श्रृंखला कहे जाते हैं। यहां के हरे भरे और घने वन तरह तरह के विशिष्‍ट फूलों से भरपूर हैं और यहां की पर्वतीय विस्‍तार सिक्किम की दो मुख्‍य नदियों के बीच हैं। तिस्‍ता और रंगीत के सुंदर गांव और पानी के झरने तथा गर्म जल प्रपात लोगों को आकर्षित करते हैं।

इन पहाड़ों के बीच अनेक गुफाएं हैं जिन्‍हें लोग पवित्र मानते हैं और इन्‍हें धार्मिक स्‍थल का दर्जा दिया जाता है। यहां 135 फीट ऊंची गुरु पद्म संभव की मूर्ति सामद्रुप से, दक्षिण सिक्किम में स्थित है। सिक्किम में यहां आने वाले पर्यटकों के लिए बहुत कुछ दर्शनीय है। यहां के लोकप्रिय घरेलू आश्रय जहां आपको ग्रामीण सिक्किम का प्रत्‍यक्ष अनुभव होता है और रोमांचक खेलों की असीमित संभावनाएं उपलब्‍ध हैं। इस राज्‍य को सभी प्रकार के गंतव्‍यों और परिवेशों का प्राकृतिक वरदान मिला है, जो पर्यटकों के लिए आवश्‍यक है।

पर्यटक आकर्षण

पर्वतीय स्‍थल

गैंगटोक

गैंगटोक सिक्किम राज्‍य के निचले हिमालय वाले भाग में भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित है। यह शहर समुद्री स्‍‍तर के लगभग 1780 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यहां पूरे वर्ष मध्‍यम तापमान का मौसम रहता है। इस क्षेत्र की अलग अलग संस्‍कृतियों के समेकन से यह पृथ्‍वी के स्‍वर्ग का दर्जा पाता है। इस शहर में अनेक पर्यटक आकर्षण हैं जो दुनिया भर के लोगों को भारत के इस सुंदर शहर में आकर्षित करते हैं। यहां पर्यटक रुचि के अनेक स्‍थान है जैसे एंची मठ, स्‍थायी पुष्‍प प्रदर्शनी जो वाइट मेमोरियल हॉल के पास वाइट हॉल में लगाई जाती है, डो-ड्रुल चार्टन स्तूप, हथकरघा और दस्‍तकारी केन्‍द्र, नम ग्‍याल इंस्‍टीट्यूट ऑफ तिबेतोलॉजी, सरामसा गार्डन, रामटेक धर्म चक्र केन्‍द्र, जवाहर लाल नेहरू वनस्‍पति उद्यान, ताशी व्‍यू पॉइंट, सा- नगोर-चोट शोभ केन्‍द्र और गणेश टोक आदि।

गैंगटोक के बारे में और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

पीलिंग

पीलिंग 2150 मीटर (7200 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। शक्तिशाली हिमालय और कंचनजंगा को पीलिंग से काफी नजदीक देखा जा सकता है। पीलिंग ऐसा आधार बनाता है जहां से पर्वतारोगी और अनेक रोमांचक खेलों के शौकीन व्‍यक्ति पश्चिमी सिक्किम में कठिन और दुर्गम चढ़ाइयां करते हैं। पीलिंग के आस पास की भूमि अभी अछूती है और यहां एल्‍फाइन वनस्‍पति पाई जाती है जिसके साथ पहाडियों के आस पास अनेक जल प्रपात बहते हैं। ठण्‍ड के मौसम में पीलिंग में बर्फ की चादर भी कभी कभार दिखाई देती है।

वन्‍य जीवन अभयारण्‍य

कंचनजंगा नेशनल पार्क

कंचनजंगा नेशनल पार्क लोनक घाटी के ठण्‍डे रेगिस्‍तान से युक सोम के ऐतिहासिक से उत्तरी जिले में लाचेन की रिज तक फैला हुआ है। पार्क की पश्चिमी सीमा रेखा तिब्‍बत की अंतरराष्‍ट्रीय सीमा के साथ चलती है। इस पार्क का क्षेत्रफल 1784 वर्ग किलो मीटर है और यहां सिक्किम के स्‍थलीय क्षेत्र का लगभग 25.14 प्रतिशत हिस्‍सा शामिल है। यह क्षेत्र आरक्षित वनों के तहत आता है और यहां सोका में तिब्‍बती ग्रामीण समुदाय को शामिल नहीं किया गया है, पार्क के अंदर अन्‍य कोई ग्रामीण रिहायश नहीं है।

इस पार्क में विविध अधिवास हैं और इसमें अनेक दुर्लभ तथा संकटापन्‍न प्रजातियां पाई जाती हैं जैसे स्‍नो लेपर्ड, रेड पांडा, मस्‍क डीयर, भारल या ब्‍ल्‍यू शीप, हिमालयन ताहा, सिक्किम की शापी, लेपर्ड, गोरल सीरो, बार्किंग डीयर, लेजर कैट, तिबेतन वोल्‍फ, फोक्‍स, तिबेतन फोक्‍स, हिमालयन ब्‍लैक बीयर और बंदर।

हिमालयन जूलॉजिकल पार्क

हिमालयन जूलॉजिकल पार्क पर्वतीय क्षेत्र के लगभग 205 हेक्‍टेयर में फैला है और यहां मस्‍क डीयर तथा ब्‍ल्‍यू शीप के लिए उपयुक्‍त खड़ी तराई है, यहां हिमालयन ब्‍लैक बीयर, बार्किंग डीयर के लिए कोमल ढलानें हैं, रेड पांडा, डेन फी मुनाई (पक्षी) तथा अन्‍य अनेक संकटापन्‍न हिमालय के जंतुओं के लिए घाटी है।

यहां पाए जाने वाले सुरक्षित जंतुओं की सूची इस प्रकार है : हिमालयन रेड पांडा, हिमालयन ब्‍लैक बीयर, स्‍नो लेपर्ड, क्‍लाउडिड लेपर्ड, लेपर्ड कैट, हिमालयन पाम सीवेट, लार्ज इंडियन सिवेट, मार्बल्‍ड कैट, मस्‍क डीयर, बार्किंग डीयर, ब्‍लू शीप, सीरो, हिमालयन थाट, हिमालयन येलो-थ्रोटेड मारटेन, हिमालयन विसल, तिबेतन वोल्‍फ, रेड फोक्‍स, कॉमन ओटर, कॉमन लंगूर, जंगली सुअर, साही, स्‍पॉटिड डीयर, यार्क, गोराल फिसेंट (8 प्रजातियां) सरीसृप (पाइथन, सांप, छिपकली) पंगोलिन और जलीय अधिवास में रहने वाले अनेक जंतु।

क्‍योंगनोसला एल्‍पाइन अभयारण्‍य

क्‍योंगनोसला एल्‍पाइन अभयारण्‍य गैंगटोक से पूर्व दिशा में 31 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है जो सिक्किम की राजधानी है और यह नाटुला के रास्‍ते में स्थित है। यह ला अथवा पास लासा से कलकत्ता की ओर रेशम ले जाने का पुराना मार्ग है। पहले केवल 4 वर्ग किलोमीटर में बनाया गया यह अभयारण्‍य अब बढ़ा दिया गया है।

इस अभयारण्‍य में जंतु और वनस्‍पति, दुर्लभ और संकटापन्‍न भूमि ऑर्किड तथा रोडो डेंड्रॉन पाए जाते हैं जो ऊंचे जूनीपर और लंबे सिल्‍वर फर से भरे हुए हैं और यहां के महत्‍वपूर्ण पेड़ हैं। रोडो डेंड्रॉन नेवियम सिक्किम का राज्‍य वृक्ष है और साइप्री पेडियम टेबेटिकम अब लुप्‍त होने के कगार पर जिसे यहा लाया गया है।

भूमि की वनस्‍पति में प्राइमुलस, जंगली स्‍ट्रोबेरी, आइरीसेस, अपीम और दुर्लभ रूप से पाई जाने वाली पेनेक्‍स स्‍योडो जिनसेंक शामिल है। औषधीय पौधे जैसे कि पुट की पाइक्रो राइजा, स्‍क्रोफुलेरी फ्लोरा, जट मानसी, नारडोस्‍टेकिस फाइलम एमोडी और यहां तक की जंगली प्‍याज भी यहां आसानी से देखा जा सकता है। अभयारण्‍य के निचले स्‍तरों पर मिट्टी को रोकने वाला बांस अरुंडीनेरिया पाया जाता है।

फैमबोंग लो वन्‍य जीवन अभयारण्‍य

फैमबोंग लो वन्‍य जीवन अभयारण्‍य सिक्किम की राजधानी गैंगटोक से 25 किलो मीटर की दूरी पर है। यहां प्रसिद्ध राम टेक मठ दक्षिण पूर्वी सीमा के पास स्थित है।

यहां की मुख्‍य वनस्‍पति ओक क्‍वेकस, केटस केस्‍टेनोप्सिस, चाम्‍प, माइकेरिया, कावलो मेकिलस, किम्‍बू मोरस, बांस के घने जंगल, फर्न और लोन फर सुगा डूमोसेट टिंजूरी में पाया जाता है। इस अभयारण्‍य में अनेक प्रकार के जंगली आर्किड, मौस तथा और लाइकोपोडियम पाए जाते हैं। यहां पाए जाने वाले स्‍तनधारियों में सीरो, गोराल, बार्किंग डीयर, हिमालयन ब्‍लैक बीयर, रेड पांडा, वीसेल, मारटेन, लेपर्ड कैट, जंगली बिल्‍ली, मार्बल्‍ड कैट, लार्ज इंडियन सिवेट, पाल सीवर, बिंटुरॉन्‍ग शामिल हैं।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषय वस्‍तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित