यह पृष्‍ठ अंग्रेजी में (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

राजस्‍थान

परिचय

नायकत्‍व और प्रेम की लोक कथाएं जो यहां के विशाल स्‍मारकों में गूंजती रहती हैं एक बीते हुए युग की कहानी जादुई अंदाज में सुनाती हैं। रंग बिरंगे राजस्‍थान का जादू - इसकी समृद्ध विरासत, रंग बिरंगी संस्‍कृति, चौका देने वाले रेगिस्‍तानी मैदान, चमकती रेत के टीले, घने जंगलों और विविध वन्‍य जीवन - कुल मिलाकर इसे एक अत्‍यंत आकर्षक पर्यटन स्‍थल बनाते हैं। राजस्‍थान को बहुधा एक ऐसे संग्रहालय के रूप में प्रस्‍तुत किया जाता है जो इस प्रकार संरक्षित किया गया है कि यह सबसे अधिक संकोची यात्री के मन को भी खुश कर देता है।

यह बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए एक अतुलीय गंतव्‍य है जहां घोड़ों, ऊंटों, हाथियों और यहां तक कि जीपों में बैठ कर भी अरावली की सैर की जा सकती है जो पृष्‍ठभूमि में भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला है। अपनी आंखों को तरावट देने के लिए यहां आप रेत के टीले देख सकते हैं, शेरों के बीच एक सैर कर सकते हैं या जलाशयों के पास बैठ कर पक्षियों को निहार सकते हैं। आप यहां की ऐशो आराम वाली विरासत में भी अपना मन बहला सकते हैं। राजस्‍थान में सभी के लिए कोई न कोई आकर्षण है - यहां केवल आपको अपनी रुचि के अनुसार गतिविधि चुननी है।

पर्यटक आकर्षण

पर्वतीय स्‍थल

माउंट आबू

माउंट आबू महाराजाओं की अवधि के दौरान शाही और अर्ध शाही परिवारों के अवकाश का एक स्‍थान था। यह स्‍थान ब्रि‍टिशशैली में बने बंगलों तथा हरे भरे घने जंगलों में रहने वाले विभिन्‍न जनजातीय समुदायों के साथ शाही परिवारों के अवकाश कालीन विश्राम स्‍थलों से मिलकर बना है जो क्षेत्र की पहाडियों पर फैले हैं। माउंट आबू को दुनिया भर में अपने भव्‍य जैन मंदिरों के लिए जाना जाता है। माउंट आबू की यात्रा देल वाड़ा मंदिरों की यात्रा के बिना अधूरी है। ये मंदिर माउंट आबू की बहुत बड़ी विशेषता है।

माउंट आबू के बारे में और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

वन्‍य जीवन अभयारण्‍य

केओलादेव घाना नेशनल पार्क

केओलादेव घाना नेशनल पार्क को आम तौर पर भरतपुर पक्षी अभयारण्‍य कहा जाता है। यह दुनिया भर के सबसे अच्‍छे पक्षी अभयारण्‍यों में से एक है। यह देश के छोटे उद्यानों में से एक है किन्‍तु यह दुनिया का एक उत्‍कृष्‍ट पक्षी उद्यान है। यह भव्‍य पक्षी अभयारण्‍य वास्‍तव में भरपुर के महाराजा सूरजमल के लिए बतखों का शिकार करने के लिए संरक्षित किया गया था। यहां गंभीर नदी और बांध गंगा नदी के उथले दबाव से बारिश के मौसम के दौरान वर्षा जल के जमा होने से बना एक जलाशय है। पानी के अधिक बहाव के कारण यहां उथली गीली भूमि का पारिस्थितिकी तंत्र बन गया जिसके कारण यह अनेक प्रकार के पक्षियों के लिए एक आदर्श अधिवास कहा जा सकता है।

केओलादेव घाना नेशनल पार्क के बारे में और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

रणथम्‍भौर नेशनल पार्क

रणथम्‍भौर नेशनल पार्क राजस्‍थान राज्‍य के सवाई माधोपुर जिले में है। रणथम्‍भौर टाइगर रिजर्व अरावली तथा विंध्‍य पहाडियों के मध्‍य स्थित है और यह जंतुओं को देखने का एक उत्तम स्‍थान है, विशेष रूप से यहां बैठ कर उन्‍हें अच्‍छी तरह देखा जा सकता है। यहां पार्क लगभग 400 वर्ग किलो मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और यदि इसे सवाई मान सिंह अभयारण्‍य क्षेत्र में जोड़ दिया जाए तो इसका क्षेत्रफल लगभग 500 वर्ग किलोमीटर हो जाता है। रणथम्‍भौर नेशनल पार्क को 1957 वन्‍य जीवन अभयारण्‍य घोषित किया गया था और 1974 में इसे प्रोजेक्‍ट टाइगर की सुरक्षा का दर्जा प्रदान किया गया। इसे 1981 में नेशनल पार्क का दर्जा दिया गया था।

रणथम्‍भौर में बाघ ही एक मात्र आकर्षण नहीं है। यहां अनेक प्रकार के पक्षी, बंदर, चीते, काराकल, हाइना, भेडिए तथा जंगली बिल्लियां, दलदली घडियाल, जंगली सुअर, भालू और विभिन्‍न प्रकार के हिरण यहां के अन्‍य आकर्षण है। पार्क के अंदर महत्‍वपूर्ण भौगोलिक विशेषता यहां की विशाल दीवार है जहां विंध्‍याचल का पठार अरावली पर्वत से मिलता है। इसके दक्षिण में चंबल नदी और नेशनल पार्क के उत्तर में बानस नदी है। इस पार्क में जगह जगह पत्‍थर की चट्टानें हैं तथा रणथम्‍भौर किले के वास्‍तुकलात्‍मक अवशेष जिसे दसवीं शताब्‍दी में बनाया गया था, यहां की दृश्‍यावली को और भी सुंदर बना देते हैं।

रणथम्‍भौर नेशनल पार्क के बारे में और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

सरिस्‍का टाइगर रिजर्व

सरिस्‍का टाइगर रिजर्व भारत के राजस्‍थान राज्‍य में अरावली जिले के तहत आता है। यह बाघों के सबसे बड़े आश्रय स्‍थलों में से एक है। इस वन को 1958 में वन्‍य जीवन अभयारण्‍य घोषित किया गया था। यह 1979 में प्रोजेक्‍ट टाइगर के तहत सरिस्‍का टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यह वन प्रारूपिक तौर पर सूखे पतझड़ी वृक्षों, मौसम के बदलावों के साथ नए नए रूप लेने वाला एक वन है। यहां वन के लगभग 90 प्रतिशत भाग में ढोक (एनोजिसस पेंडुला) पाया जाता है। यहां बोसवेलिया, सेरेटा और लेनिया पत्‍थरीली चट्टानों पर उगते हैं। कत्‍था और बांस इस घाटी में आम तौर पर पाए जाते हैं।

अरावली की उत्तरी पहाडियों में खड़ी चढाइयों और सकरी लंबी घाटियों के बीच मिली जुली भौगोलिक विशेषताएं पाई जाती हैं। सरिस्‍का की दृश्‍यावली में अरावली की तंग घाटियां और पहाडियां शामिल हैं। सरिस्‍का में अनेक प्रकार के मांसभक्षी जानवर पाए जाते हैं जिनमें चीते, वन कुत्ता, जंगली बिल्‍ली, हाइना, भेडिया और टाइगर शामिल हैं। इन प्रजातियों का मुख्‍य भोजन सांभर, चीतल, नील गाय, चौसींगा, जंगली सुअर और लंगूर है। सरिस्‍का में बंदरों की बड़ी संख्‍या पाई जाती है जो ताल वृक्ष पर घूमते रहते हैं।

सरिस्‍का टाइगर रिजर्व के बारे में और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

डेजर्ट नेशनल पार्क

डेजर्ट नेशनल पार्क भारत में जेसलमेर के पास राजस्‍थान के पश्चिम भारतीय राज्‍य में स्थित है। यह 3100 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैले बड़े नेशनल पार्क में से एक है। यह डेजर्ट अभयारण्‍य अपने जंतुओं और वनस्‍पतियों के कारण एक भंगुर पारिस्थितिकी तंत्र रखता है।

इस अधिवास में रेत होने के कारण यहां विविध और विहंगम पक्षी पाए जाते हैं। ग्रेट इंडियन बस्‍टर्ड यहां पाई जाने वाली एक अद्भुत चिडिया है, जिसकी संख्‍या यहां काफी अधिक है। यह अलग अलग मौसमों में प्रवास करती है। इस क्षेत्र को प्रवासी और स्‍वदेशी पक्षियों का घर माना जा सकता है। यहां आप अनेक प्रकार के बाज, हेरियर, फालकन, बजार्ड, केस्‍ट्रेल और गिध। यहां छोटे पैरों वाले बाज, टाउनी इगल, चित्तीदार इगल, लेगर फालकन, केस्‍ट्रेल आदि पाए जाते हैं। सेंड ग्राउस भी छोटी झीलों या तालाबों के पास देखे जा सकते हैं। इस पार्क में समुद्री शैल और बड़ी मात्रा में जीवाश्‍म बन चुके पेड़ों के तने इस रेगिस्‍तान के भौगोलिक इतिहास के प्रमाण माने जा सकते हैं।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषय वस्‍तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित