- उड़ीसा पर्यटन विकास निगम लि. (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- होटल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- टूर ऑपरेटर (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- उड़ीसा का मानचित्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- कमरे बुक करें (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- हॉप ऑन हॉप ऑफ बस सर्विस (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- गाइड (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
उड़ीसा
परिचय
उड़ीसा को 500 कि.मी. लंबी तटरेखा का वरदान प्राप्त है तथा विश्व के कुछेक सर्वाधिक सुंदर समुद्र तट यहां विद्यमान है। चिलका, जो एक एशिया की सबसे बड़ी ब्रैकिश जल की झील है, न केवल सैंकड़ों पक्षियों को आश्रय स्थल प्रदान करती हैं बल्कि की भारत के उन कुछेक स्थानों में से एक है जहां हम डॉल्फिन का नज़ारा भी देख सकते हैं। उड़ीसा का लहलहाता हरित वन आवरण फलफूलों तथा पशु पक्षियों की व्यापक किस्मों के लिए मेजबान का काम करता है जिनमें सुप्रसिद्ध रायल बंगाल टाइगर शामिल है। चित्रलिखित सी पहाडियों तथा घाटियों के मध्य अनेक चौंका देने वाले जल प्रपात तथा नदियां हैं जो विश्व भर से अतिथियों को आकृष्ट करती हैं।
उड़ीसा में जनजातीय समुदायों की सबसे विशाल विविधता है जो सामाजिक - आर्थिक विकास के विभिन्न चरणों पर है। एक सिरे पर वे समूह है जो जीवनयापन की सापेक्षतया एकांतिक तथा पुराकालीन विधि का अनुसरण करते हैं जिससे उनकी मूल संस्कृति सशक्त बनी हुई है। जनजातीय लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान तथा सुभिन्नता को अपने सामाजिक संगठन, भाषा, रीतिरिवाजों तथा त्यौहारों में तथा साथ ही अपनी वेशभूषा, अलंकरणों, कला तथा शिल्पकारिता में अभिव्यक्त करते हैं।
उड़ीसा में पुरातन स्मारकों की प्राचुर्यता है जो शिशु पालनगृह के खंडहरों से लेकर भव्य लिंगाराज तथा जगन्नाथ के मंदिरों, कोणार्क सूर्य मंदिर के विरासत स्थल से लेकर अद्भुत शिल्पकारिता वाले मुक्तेश्वर तथा ऐसे अन्य मंदिरों में परिलक्षित होता है। रतनगिरी, ललितगिरी, उदयगिरी तथा अन्य अवस्थलों में पाए जाने वाले विभिन्न पुरातत्वीय अवशेष सिद्ध करते हैं कि उड़ीसा बौद्ध मतधारा से भी प्रभावित रहा है। जैन मत ने भी खंडागिरी और उदयगिरी की चट्टानों से काटकर बनाई गई गुफाओं के रूप में उड़ीसा पर अपने निशान छोड़े है।
पर्यटक आकर्षण
- भुवनेश्वर (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- पुरी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- चिलका (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- रथ यात्रा पर्व (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- नंदन कानन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- पुरी जगन्नाथ (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- कोणार्क (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
तट
बालेश्वर तट
बालेसोर (जिसे बालेश्वर या बालेस्वर भी कहा जाता है) पूर्वी भारत के उड़ीसा राज्य का एक शहर है। बालेश्वर का शांत समुद्र तट निश्चित रूप से देश के अनेक अति सुंदर सतुद्रतटों में से एक है। विसर्पी लताओं तथा हवा से गूंजी आकाश बेलों से युक्त रेतीले टीलों की हरियाली लहरों के खेल का अवलोकन करने में मग्न पर्यटकों के लिए एक अद्भुत क्षण का सृजन करती है।
बालीघई तट
आकाश बेलों से ढका बालीघई का समुद्र तट जो पुरी से 8 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है, एक सुप्रसिद्ध पिकनिक स्थल है। कोमल आकाश बेलों की रेखायुक्त नदी के साथ भारी आवाज के साथ गिरता विध्वंसकारी महासमुद्री तट का सान्निध्य एक विस्मयकारी तथा अत्यंत सुंदर नजारा है। सूर्योदय तथा सूर्यास्त का अवलोकन चिरसंचित यादगार बन जाता है। एक धार्मिक स्वरलहरी इस बहुमुखी समुद्र तट की यात्रा को और भी अधिक अर्थपूर्ण बना देती है।
चांदीपुर तट
चांदीपुर आकाश बेल के वृक्षों की संगीतमय गूंज तथा विसर्पी रेतीले टीलों से ढका हुआ हैं। यह एक शांत समुद्री तट है। निम्न ज्वार के समय समुद्र का जल लगभग 5 किलोमीटर पीछे हट जाता है तथा ऊंचे ज्वार के समय पुन: तट रेखा तक बढ़ जाता हैं; प्रत्येक दिन इस समुद्री तट को अद्वितीय बना देता है। यह समुद्री तट इसकी उथली गहराइयों में चलने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रलोभनीय सौंदर्य के साथ साथ यह समुद्री तट प्राचीन धरोहर तथा धार्मिक मंदिरों से भरा हुआ है।
समुद्र पर गोपालपुर
दक्षिणी उड़ीसा के क्लब बेरहामपुर से मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर बंगाल की खाड़ी में गोपाल पुर का छोटा सा नगर अवस्थित है। उड़ीसा का एक लोकप्रिय समुद्री तट होने की ख्याति प्राप्त होने के साथ साथ इसका गहरा तथा स्पष्ट नीला जल उन लोगों को तत्काल उत्तेजित कर देना है जो अच्छे तैराक है।
कोणार्क तट
कोणार्क समुद्री तट पुरी की सड़क पर सुप्रसिद्ध सूर्य मंदिर से 3 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है। इस विश्व सबसे उत्कृष्ट समुद्र तटों में से एक माना गया है। हम यहां स्थानीय मात्स्यिकी बेड़े को काम करते हुए देख सकते है। इस समुद्र तट पर सूर्योदय का दृश्य अत्यंत आकर्षक होता है तथा सूर्य स्नान के लिए यह सर्वथा आदर्श स्थान है। स्वच्छ रेत के दीर्घ विस्तार तथा अपनी स्वयं की लुभावनी सौम्यता के साथ यह समुद्र तट संपूर्ण बर्फ पर्यटकों को आकृष्ट करता है।
पारदीप तट
पारादीप के समुद्री तट का बहुत महत्व है। एक आकर्षक पर्यटक स्थल होने के अलावा, उड़ीसा में पारादीप का समुद्री तट देश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक समुद्री पत्तनों में से एक है। यह हरे जंगलों से आच्छादित है तथा प्राकृतिक दर्रों तथा द्वीपसमूह द्वारा अंलकृत है, पाराद्वीप का समुद्री तट सभी समुद्र प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है। पर्यटक सहज ही समुद्र में नहाते हुए या सुंदर नीले जल में खिलवाड़ करते हुए कई घंटे बिता सकते हैं।
पुरी तट
पुरी का समुद्र तट भगवान जगन्नाथ के निवास स्थल पर पारम्परिक पवित्रीकरण डुबकी लगाने वाले असंख्य तीर्थ यात्रियों के लिए गमन स्थल रहा है। इसे एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण हिंदु तीर्थ स्थल गंतव्य भी माना जाता है। पुरी का समुद्र तट उड़ीसा की विशाल तथा विदेशागत तटरेखा पर तथा इसके दक्षिणपूर्वी क्षेत्र में अवस्थित है। इस तट की यात्रा संपूर्ण वर्ष कभी भी की जा सकती है, तथापि पुरी समुद्र तट पर जाने का आदर्श समय वार्षिक पुरी समुद्री तट के समारोह के दौरान है जिसका आयोजन नवंबर के माह में किया जाता है।
स्वर्गद्वार तट
स्वर्गद्वार समुद्र तट पुरी में सर्वाधिक वांछनीय पर्यटक आकर्षणों में से एक है। यह पर्यटकों द्वारा अवश्य दर्शनीय स्थलों की श्रेणी में आता है। इस स्थान का लोगों के लिए अत्यधिक धार्मिक महत्व हे क्योंकि यह श्री चैतन्य देव, जो एक सुविख्यात वैष्णव गुरू थे, का स्थान स्थल है। लहरों की गर्जन ध्वनि के साथ यहां की शीतल हवा अत्यधिक रोमांचक लगती है।
तालासरी
तालासरी समुद्र तट बालासोर से 88 कि.मी., चंदनेश्वर से 4 किलोमीटर तथा दीघा (पश्चिम बंगाल) 8 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है। यहां बंगाल की खाड़ी के चमकते वैभव को देखना आश्चर्य चकित कर देता है जो, जहां तक नजर जाती है, दमकते हीरों के गलीचे की तरह विस्तारित है। तालासरी बीच वस्तुत: ही विस्मयाकुलक प्रतीत होता है जब सांय के समय हम स्वर्णिम रेत पर टहलने जाते हैं।
वन्य जीवन अभयारण्य
सिम्लीपाल नेशनल पार्क
भुवनेश्वर (उड़ीसा) से 320 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित सिम्लीपाल नेशनल पार्क एक 2750 वर्ग कि.मी. के क्षेत्रफल वाला अभ्यारण्य तथा एक परियोजना टाइगर प्रारक्षित क्षेत्र है। सिम्लीपाल टाइगर रिजर्व बंगाल निहारा सीमा क्षेत्र के निकट उड़ीसा के उत्तरी भाग में मयूरगंज जिले में अवस्थित है। यह घने वनों का एक सघन पहाड़ी क्षेत्र है जो 2,750 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में विस्तारित है। रॉयल बंगाल टाइगर के वास स्थल के रूप में इसका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यहां सात प्रमुख नदियां है। इस नेशनल पार्क में लगभग 1076 पौध प्रजातियां, 231 पक्षी प्रजातियां तथा 42 स्तनधारी प्रजातियां और 29 रेंगने वाले जीवों की तथा 12 एम्फीबियन प्रजातियां है। यहां हम टाइगर, लेपर्ड, हाथी, स्लोथ बियर तथा चित्तीदार हिरण को देख सकते हैं। पक्षी प्रजातियां हैं - पीफोऊल, जंगल फोऊल, हिल हिना, चील तथा पाराकीट। मगरमच्छ, घडियाल, छिपकलियां, टर्टल तथा कोबरा जैसे रेंगने वाले जीव यहां आम तौर पर पाए जाते हैं।
नंदन कानन अभ्यारण्य तथा नेशनल पार्क
बारंग रेलवे स्टेशन के निकट कोलकाता चैन्नई रेलवे लाइन के साथ अवस्थित नंदन कानन प्राणिविज्ञान पार्क की स्थापना 27 दिसंबर 1960 को की गई थी। नंदन कानन का अर्थ है 'आनंद का बाग' तथा कंजिया झील के छलछलाते जल के साथ साथ चंदक वन के भव्य पर्यावरण में भुवनेश्वर से 20 कि. मी. की दूरी पर चिडियाघर, वनस्पति बगीचे तथा अभ्यारण्य का यह संयोजन इस विवरण के सर्वथा उपयुक्त है। अपनी परिधियों के भीतर, यह प्राणिविज्ञान पार्क 362 हेक्टेयर के लहरिया वन क्षेत्रों, प्राकृतिक बंजरभूमि तथा केझिया झील में फैला है जो स्वयं की 66 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में विस्तारित है। यहां स्तनधारियों की 46 प्रजातियों, पक्षियों की 59 प्रजातियों तथा रेंगने वाले जीवों की 21 प्रजातियों का पोषण होता है। श्वेत चीतों के अतिरिक्त, लुप्त प्राय: प्रजातियां जैसे एशियाटिक लायन, तीन भारतीय क्रोकोडिलियन, संघाई, लायन टेलड, मैकेक, नीलगिरी लंगूर, भारतीय पांगोलिन, माउस डियर तथा असंख्य पक्षी, रेंगने वाले जीव तथा मछलियां यहां सफलतापूर्वक वास कर रही है।
नंदन कानन प्राणिविज्ञान पार्क उड़ीसा के प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक है। मूलत: रीवा, मध्य प्रदेश में पैदा होने वाले श्वेत टाइगर के कैप्टिव पोषण के लिए विश्व का मेज़बान चिडियाघर होना इसकी सुभिन्नता है। श्वेत टाइगर के अपने विशाल संग्रहण के लिए अंतरराष्ट्रीय रूप से प्रत्यायित, नंदन कानन वन्य जीवन के प्रति जागरूकता का सृजन करने के लिए लुप्तप्राय: प्रजातियों का सबसे प्रथम कैप्टिव प्रजनन केंद्र भी है। विविध प्रकार के पशुओं के साथ नंदनकानन का अद्वितीय प्राकृतिक परिवेश समस्या ग्रस्त जंगली पशुओं के पुनर्वास केंद्र के रूप में भी कार्य करता है। यह व्यक्त, चोटग्रस्त तथा अशक्त हो चुके पशुओं के लिए बचाव केंद्र के रूप में भी कार्य करता है।
भीतरकनिका वन्य जीवन अभ्यारण्य
भीतर कनिका वन्य जीवन अभ्यारण्य 672 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। कच्छ वनस्पति, विसर्यी नदियों, असंख्य क्रिस क्रॉस वाले ज्वारीय घने दर्रों वाला यह अभ्यारण्य पहले से ही लुप्तप्राय: लवण जल क्रोकोडाइल (क्रोकोडाइल पोरोसस) को अंतिम आश्रय प्रदान करता है। क्रोकोडल के अतिरिक्त, यह अभ्यारण्य एस्टुरीन, एवीकॉना, स्तनधारी तथा रेंगने वाले जीवों की संख्या में समृद्ध है। ये कच्छ वनस्पति वन किंग कोबरा, भारतीय पाइथन तथा वाटर मॉनीटर लिर्ज्ड के लिए अच्छे वास स्थल है। इस क्षेत्र में अनेकों पक्षी आते है। अधिकांश पक्षी एशियाई ओपन बिल, इग्रेट, ब्लैक इबिस, कोर्मोरेंट, डार्टर तथा अन्य हैं।
चिलका झील पक्षी अभ्यारण्य
चिलका झील उड़ीसा में पुरी में स्थित है। इसे एशिया का सबसे बड़े अंतर्देशीय लवण जलीय लागून माना जाता है। नाशपती के आकार की यह झील 1100 वर्ग कि.मी. में फैली हुई है तथा इसके ब्रैकिश जल में तथा इसके ब्रैकिश जल में तथा इसके आसपास पाए जाने वाले जलीय जीवजंतुओं और वनस्पति की श्रृंखला से युक्त इसकी प्रास्थिति की प्रणाली अद्वितीय है। पक्षियों के अलावा, चिलका के तटों पर ब्लैक बक, धब्बेदार हिरण, गोल्डन जैकाल तथा हिना निवास करते है।
इस झील में जलीय जीवजंतुओं की प्रचुरता है - इसके पानी में मछलियां, क्रस्टेसियन तथा अन्य समुद्री जीव जंतुओं की लगभग 160 प्रजातियां रहती हैं जिनमें प्रसिद्ध चिलका डॉल्फिन, झींगा, केंकड़ा तथा मैकेरल शामिल है यहां मात्स्यिकी स्थानीय लोगों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषय वस्तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित
