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मेघालय

परिचय

मेघालय का अर्थ है बादलों का घर। यहां आकर परेशान यात्रियों को मन को शांति मिलती है। यहां की गारों पहाडियों में उष्‍ण कटिबंधी वन घाटी ने मानसून के दौरान बादल हमेशा पाए जाते हैं और खासी तथा जेंतिया पहाडियों के मध्‍यम पाइन वन यहां की सुंदरता बढ़ाते हैं। भारत के पूर्वोत्तर कोने पर स्थित मेघालय उत्तरी और पूर्वी दिशाओं में असम से घिरा है तथा इसके दक्षिण और पश्चिम में बंगला देश के मैदान हैं। खासी और जेंतिया पहाडियों की ऊंची श्रृंखला में एक ठण्‍डा और खुशनुमा मध्‍यम प्रकार का मौसम रहता है जबकि ठण्‍ड के मौसम में यहां अच्‍छी ठण्‍ड होती है।

मेघालय की राजधानी शिलॉन्‍ग एक सबसे अधिक लोकप्रिय पर्यटन गंतव्‍य है। इसे आम तौर पर पूर्व का स्‍टॉकलैंड कहा जाता है। जिसका कारण है यहां की ऊंची ऊंची पहाडियां। शिलॉन्‍ग में अनेक दर्शनीय स्‍थल है जैसे एलीफेंटा फॉल, शिलॉन्‍ग व्‍यू पॉइंट, लेडी हैदरी पार्क, वार्ड्स लेक, गोल्‍फ फोर्स, संग्रहालय, कैथोलिक, केथेड्रल, आर्चरी और एंगलीकेन सिमेंटरी और चर्च।

चेरापूंजी का स्‍थानीय और आधिकारिक नाम सोहरा है जो शिलॉन्‍ग से 56 किलो मीटर की दूरी पर है तथा यह सभी पर्यटकों के लिए अवश्‍य जाने योग्‍य एक गंतव्‍य है। यह खासी पहाड़ी के दक्षिणी किनारें पर स्थित एक छोटा सा कस्‍बा है। चेरापूंजी में होने वाली घनी बारिश से यहां अनेक चट्टानों में शिल्‍पकार्य हो गया है, उनमें दरारें पड़ गई हैं और सभी दक्षिणी ढलानों पर पानी के झरने बन गए हैं। चेरापूंजी के कुछ महत्‍वपूर्ण पर्यटन स्‍थल हैं माकडॉक / डिमपेप घाटी का दृश्‍य जो शिलॉन्‍ग और चेरापूंजी के बीच स्थित है, सोहरा बाजार और रामकृष्‍ण का मंदिर, संग्रहालय, नोखालीकाई जल प्रापत, प्रथम प्री साइबेरियन चर्च, वेल्‍श मिशनरियों की दरगाहें, एंगलिकन सिमेंटरी, इको पार्क डबल डेकर रुट ब्रीज़, चेरापूंजी मौसम विज्ञान वेधशाला।

पर्यटन आकर्षण

पर्वतीय स्‍थल

शिलॉन्‍ग

शिलॉन्‍ग समुद्र तल से 1496 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यह असम को काट कर बनाया गया है। यहां का मनोरम प्राकृतिक परिवेश पूरे वर्ष अवकाश बिताने के लिए उत्तम है। गाड़ी से जाने योग्‍य पर्वतीय स्‍थानों में से एक माना जाने वाला शिलॉन्‍ग ऐसा पर्यटन स्‍थल जहां इतना अधिक पैदल नहीं चलना होता। यहां की उपयुक्‍त सुविधाएं, मनोरम दृश्‍य, खुशहाल लोग, बादल और लंबे पाइन के पेड़, पर्वत, घाटियां, दलदल और एक शानदार गोल्‍फ कोर्स शिलॉन्‍ग को एक अच्‍छा गंतव्‍य बनाते हैं। खांसी, जेंतिया और गारो पहाडियों के लोग एक रंग बिरंगी जीवन शैली जीते हैं और साथ ही वे अपनी परंपराएं भी निभाते हैं। शिलॉन्‍ग मेघालय में अन्‍य स्‍थानों पर जाने के लिए एक आधार के तौर पर कार्य कर सकता है।

वन्‍य जीवन अभयारण्‍य

नोकरेक नेशनल पार्क

पश्चिमी गारो पहाड़ी जिले में स्थित नोकरेक नेशनल पार्क और बायोस्‍फीयर रिजर्व तूरा से लगभग 45 किलो मीटर की दूरी पर है। नोक रेक गारों पहाडियों को सबसे ऊंचा‍ बिन्‍दु है और यहां हा‍थी तथा हू लॉक गिब्‍बन सहित अनेक प्रकार की वन्‍य प्रजातियां पाई जाती हैं। नोक रेक नेशनल पार्क की स्‍थापना नोकरेक में तथा इसके आस पास वाले स्‍थानों में जंगली हाथियों के समूह, पक्षियों की दुर्लभ किस्‍में तथा दुर्लभ ऑर्किड के संरक्षण के लिए की गई थी। इस पार्क में सिट्रस इंडिका की अत्‍यंत दुर्लभ प्रजाति पाई जाती है जिसका नाम है मेमांग नारंग (भावनाओं का संतरा)। नोकरेक को जंगली मनुष्‍य का घर माना जाता है और नोकरेक के गांव के आस पास इन्‍हें देखे जाने के मामले बताए गए हैं।

बालपकराम नेशनल पार्क

यह राष्‍ट्रीय वन्‍य जीवन पार्क तूरा से लगभग 167 किलोमीटर की दूरी पर है। यह दुनिया के सबसे अधिक दुर्लभ लाल पांडा का घर माना जाता है। इसका सामान्‍य रूप से नाम लेसर पांडा है। बालपकाराम का अर्थ है लगातार चलती हवाओं का घर जो बाघ, हाथी, बायसन, काले भालू, चीते, सांभर, हिरण सहित अनेक प्रकार के वन्‍य जंतुओं के साथ लगभग 220 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह मेघालय के पश्चिमी गारों पहाड़ी जिले में स्थित बाघ मारा से जुड़ा हुआ है। इस पार्क के पश्चिमी हिस्‍से के साथ सिमसेंग नदी के किनारे सिजू पक्षी वन अभयारण्‍य है।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषय वस्‍तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित