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केरल

परिचय

पश्चिम में अरब सागर के साथ पूर्व में 500-2700 मीटर ऊंचे पश्चिमी घाट और 44 नदियों से घिरा हुआ केरल राज्‍य एक अनोखी भौगोलिक विशेषता रखता है जहां एशिया के सबसे अधिक पर्यटक आते है। यहां का अच्‍छा मौसम, लंबी तटीय रेखा के साथ शांत तट, पन्‍ने के समान हरे पानी के लंबे दौर, हरे भरे पर्वतीय स्‍थल, विशिष्‍ट वन्‍य जीवन और जल प्रपात केरल का दूसरा नाम है। आकर्षक हरे भरे बागान और धान के खेत के साथ आयुर्वेदिक स्‍वास्‍थ्‍य अवकाश इस राज्‍य का प्रमुख फोकस हैं और इसके अलावा सभी पर्यटक यहां आने के लिए केवल दो घण्‍टे की दूरी तय करके एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पहुंच सकते हैं। यह एक ऐसा लाभ है जो अन्‍य किसी पर्यटक स्‍थल पर नहीं है।

केरल भारत का सबसे उन्‍नत समाज में है। यहां के शत प्रतिशत लोग साक्षर हैं और यहां विश्‍व स्‍तरीय स्‍वास्‍थ्‍य परिचर्या प्रणालियां उपलब्‍ध हैं। यहां भारत में सबसे कम शिशु मृत्‍यु दर और सबसे अधिक जीवन अपेक्षा दर दर्ज की गई है। केरल भारत का सबसे अधिक साफ सुथरा राज्‍य होने के अलावा यहां जीवन की गुणवत्ता अच्‍छी, शांत और पवित्र है।

प्रशासनिक प्रयोजन से केरल राज्‍य को 14 जिले में बांटा गया है। इनमें से अधिकांश जिले राज्‍य के पर्यटन उत्‍पादों के लिए प्रसिद्ध हैं।

पर्यटक आकर्षण

तट

अलप्‍पुझा तट

अलाप्‍पुझा तट एक लोकप्रिय पर्यटक संघ है जो आराम देने के लिए जाना जाता है। यहां समुद्र की ओर बढ़ता हुआ भूमि का हिस्‍सा लगभग 140 वर्ष पुराना है। यहां लैगून, चौड़ी झीलों और मीठे पानी की अनेक नदियों जैसी प्राकृतिक सुंदरता उपलब्‍ध है, जो सुंदर और विहंगम हैं। यहां के लंबे रेतीली तट पाम के पेड़ों से घिरे हुए हैं। तट की सुंदरता बढ़ाने वाले पुराने लाइट हाउस यहां लगे हुए हैं।

बेपोर तट

नदी चलियार के तट पर स्थित बेपोर तट आपको शांति और आकर्षण के जाल में बांध लेगा और आपको एक स्‍वप्‍न जैसा दृश्‍य दिखाई देगा। अरब सागर के व्‍यापक विस्‍तार में देखें और आपको ध्‍वनि की कोमल तरंगों से नींद आ जाएगी और जैसे जैसे आप इसे देखते रहेंगे, आप बेपोर तट के परीदेश जैसे परिवेश में खो जाएंगे। पत्‍थर के बने पुल पर लगभग 2 किलोमीटर दूर पैदल जाने पर और वापस आने के दौरान सूर्य की शानदार चमक को देखा जा सकता है।

धर्मधाम तट

कन्‍नूर से 17 किलो मीटर की दूरी पर स्थित धर्मधाम तट एक छोटा 5 एकड़ एके क्षेत्रफल वाला सुंदर द्वीप है जहां नारियल पाम और हरी भरी झाडियां हैं। यह द्वीप धर्मधाम की मुख्‍य भूमि से लगभग 100 मीटर की दूरी पर है और इस निजी द्वीप पर जाने के लिए विशेष अनुमति की जरूरत होती है। जब आप इस तट पर आते हैं तो आप यहां की सुंदरता देखकर मौन रह जाएंगे। यहां आकर आपको केवल प्रकृति मां की गोद में खो जाना है।

एजिमाला तट

एजिमाला तट एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण है। इस पवित्र ओर एकांत में बने तट का मनमोहक दृश्‍य लोगों को आकर्षित करता है। यहां डॉलफिन के कूदने का अद्भुत दृश्‍य भी दिखाया जाता है। पत्‍थर के स्‍तंभों पर काट कर बनाए गए एक प्राचीन मकबरे और प्राचीन गुफा को पहाड़ी की तराई में देखा जा सकता है। ऊंची पहाडियों और रेतीली तटों का यह मिश्रण एजिमाला को पिकनिक का एक सुंदर स्‍थान बनाते हैं। जब आप इस तट पर पानी में तैर रहे हों तो पूरी तरह भार मुक्‍त होकर इसका आनंद उठाएं।

फोर्ट कोची तट

फोर्ट कोची तट पर्यटकों के लिए एक मनपसंद स्‍थान है। नारियल के पेड़ों और घनी झाडियों से घिरा यह दर्शको का मनमोह लेने वाला तट है। इसकी ऐतिहासिक विशेषता को समुद्र की तरंगों द्वारा नजर अंदाज या उपेक्षित नहीं किया गया है और ना ही इस तट के साथ जुड़े इसके रंगीन इतिहास को मिटाया गया है। इस बात में भी कोई शंका नहीं है कि यह छुट्टियां बिताने और शाम के समान प्रकृति की सर्वोत्तम रचना का आनंद उठाने के लिए एक आदर्श स्‍थान है।

कप्‍पड तट

कप्‍पड तट, जिसे स्‍थानीय रूप से कप्‍पड कडाहु कहते हैं तट पर धसी हुई एक सुंदर पहाड़ी है। इसका एक भव्‍य इतिहास है, क्‍योंकि कप्‍पड तट उस स्‍थान से बहुत नजदीक है जहां 27 मई 1948 को पुर्तगाली अन्‍वेषक वास्‍कोडिगामा आया था और अरब सागर के जरिए उसने यूरोप की दिशा में व्‍यापार शुरू किया था। इस ऐतिहासिक नजारे को देखें और इस मनमोहक तट की सुंदरता में खो जाएं तथा समुद्र की तरंगों का संगीत सुनें।

कोवलम तट

कोवतल तट में ठण्‍डे सुखदायी पाम के पेड़ और कोलम तरंगों से एक प्राकृतिक दृश्‍य बनता है। यह तिरुवनंतपुरम की राजधानी से केवल 10 किलो मीटर की दूरी पर है। यह इस क्षेत्र का सबसे अधिक महत्‍वपूर्ण पर्यटक आकर्षण है। अपने नाम के अनुसार यह नारियल के पेड़ों का समूह है और कोवलम तट पर पाम के ढेर सारे पेड़ भी लगे हुए हैं जो अरब सागर के नीले पानी में अठखेलियां करते हैं और यहां बिखरी सफेद रेत स्‍वर्ग जैसा आनंद देती है।

मुझाप्पिलंगड तट

मुझाप्पिलंगड तट में कुछ ऐसा अनोखा है जो इसकी सुंदरता को बढ़ा देता है और यह केरल के कुछ बड़े तटों में से एक है, यह देश का एक मात्र ऐसा तट है जहां गाड़ी के रास्‍ते पहुंचा जा सकता है। यहां तट के किनारे लंबी दूरियों पर घूमा जा सकता है या एक परिवार तट पर ड्राइव का आनंद ले सकता है। यहां सभी दिशाओं से पानी आता है। किनारे पर मौजूद चट्टानें पानी की तेज धाराओं को रोकती हैं जो तट पर टकराती हैं, जिन से एक उथला पूल बनता है जहां पर्यटक तैराकी तथा अन्‍य जल क्रिड़ाओं का आनंद लेते हैं।

पायमबलम तट

सामान्‍य जीवन की उथल पुथल से दूर पायमबलम तट परेशान मन को शांति और ताजगी देने के लिए एक आदर्श गंतव्‍य है जहां आने वाले व्‍यक्ति को मन की सच्‍ची शांति मिलती है। शांत और एकांत में स्थित यह सुंदर रेतीला तट सुकून भरी शान के लिए एक आदर्श स्‍थान है। पायमबलम तट स्‍थानीय लोगों के लिए पिकनिक का एक लोकप्रिय स्‍थान है तथा यहां पर्यटक रिजॉर्ट बनाने की काफी अधिक संभाव्‍यता छुपी हुई है।

पथिरमनल तट

पथिरमनल का अर्थ है रात्रि की रेत - यह जैव विविधता का एक बड़ा खजाना है। पथिरमनल तट एक लंबा और स्‍वच्‍छ तट है। यहां का परिवेश आपको तैरने, सूर्य स्‍नान करने अथवा केवल घूमने फिरने के लिए अनुकूल प्रतीत होता है। जबकि यहां के विशाल जीव जंतु और वनस्‍पति समूह प्रकृति का भरपूर दृश्‍य प्रदान करते हैं, पथिरमनल के आस पास स्थित नहर इसे एक रोमांटिक स्‍थल बना देती है। यह दुर्लभ प्रवासी पक्षियों का मनपसंद प्राकृतिक केन्‍द्र है जो यहां दुनिया के अलग अलग हिस्‍सों से आती हैं। वास्‍तव में यह तट और द्वीप का एक उल्‍लेखनीय संयोजन है।

शंखमुगम तट

शंखमुगम तट सूर्यास्‍त देखने वाले लोगों का मनपसंद स्‍थान है। यह तट तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे और वेली पर्यटक ग्राम के नजदीक है। यहां एक आंतरिक मनोरजंन क्‍लब, मत्‍स्‍य कन्‍या, (जल परी का 35 मीटर लंबा शिल्‍प) और स्‍टार फिश के आकार का एक रेस्‍तरां कुछ आकर्षण है। तट के शांत और धीर गंभीर पानी में सर्फिंग करना एक तरोताजा कर देने वाला अनुभव है।

तनूर तट

तनूर तट एक ऐसा स्‍थान है जहां आपको प्रकृति का भरपूर नजारा मिलता है। यदि आप प्रकृति से प्रेम करते हैं तो यह तट आपके लिए बना है जहां आप पाम के पेड़ों की ठण्‍डी छाया में बैठ कर आराम पा सकते हैं अथवा घण्‍टों तक सूर्य, रेत और तट के बीच घूम सकते हैं। तनूर तट मल्‍लापुरम में स्थित है। तनूर पुरानी पुर्तगाली स्‍थापनाओं में से एक है। यहां 1546 में सेंट फ्रेंसिस जेवियर आए थे।

थंगासेरी तट

थंगासेरी तट कोलम कस्‍बे से 5 किलो मीटर की दूरी पर है। थंगासेरी तट पुर्तगाली तथा डच स्‍थापनाओं की जीती जागती स्‍मृति है। यहां के समुद्र के पास स्थित गांव ऐतिहासिक महत्‍व रखते हैं। यहां के पर्यटन आकर्षण पुराने पुर्तगाली किले और गिरजाघर हैं जो 18वीं शताब्‍दी में बनाए गए थे और अब जिनके खण्‍डहर शेष हैं। थंगासेरी का एक अन्‍य पर्यटक आकर्षण यहां का लाइट हाउस है जो 144 फीट ऊंचा है और यहां पर्यटक सभी दिन जा सकते हैं।

तिरुमुलावरम तट

कोलम से 6 किलो मीटर की दूरी पर स्थित तिरुमुलावरम तट एक सुंदर पिकनिक स्‍थल है। इस तट पर लगे हुए नारियल पाम के पेड़ यहां सुबह की सैर के लिए इसे एक आदर्श स्‍थल बनाते हैं। इस तट पर नहाने की अच्‍छी सुविधाए हैं। समुद्र के अंदर लगभग डेढ़ किलो मीटर की दूरी पर न्‍याराजाचा पारा है, जिसका शाब्दिक अर्थ है रविवार की चट्टान जिसे कम ऊंचाई के किनारे पर से देखा जा सकता है।

वारकला तट

वारकला तट में धार्मिक और पर्यटन दोनों ही प्रकार का मिला जुला परिवेश पाया जाता है। वारकला तट का खनिज तत्‍वों से भरपूर झरना औषधीय गुण रखता है जिसमें आप नहा सकते हैं और पी सकते है। एक भरपूर अवकाश के लिए वारकला तट के किनारे मनमोहक सूर्यास्‍त का दृश्‍य देखें।

पर्वतीय स्‍थल

अट्टापड्डी

पर्वतों, नदियों और जंगलों का एक सुंदर मिश्रण है। अट्टापड्डी नृविज्ञानियों के लिए एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। यह इरुलार और मुडुगास जनजातियों का अधिवास है। मल्‍लीस्‍वर्ण पीक की पूजा की जाती है इसे आधिवासी विशाल शिवलिंग के रूप में मानते हैं जो शिवरात्रि के त्‍यौहार को अत्‍यंत उत्‍साहवपूर्वक मनाते हैं। यहां पर लोक निर्माण विभाग का विश्राम गृह, वीआईपी अतिथि गृह और उच्‍च निजी होटल अगाली में रहने का स्‍थान उपलब्‍ध कराते हैं।

मुन्‍नार

मुन्‍नार एक अत्‍यंत लोकप्रिय पर्वतीय स्‍थल है जो 3 पर्वतीय धाराओं - मुद्रा पुजा, नल्‍ला‍थनी और कुंडाला के मिलन बिन्‍दु पर स्थित है। समुद्र तल से 1600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्‍थान दक्षिण भारत में पूर्व ब्रिटिश सरकार का ग्रीष्‍मकालीन आश्रय होता था। यहां बड़े बड़े चाय के बागान, सुंदर कस्‍बे, तंग गलियां, ट्रेकिंग तथा अवकाश की सुविधाएं हैं, जिनसे मुन्‍नार आने का अनुभव अनोखा बन जाता है। यहां चाय के पौधों का हरा भरा कालीन दिखाई देता है। इस मनोरम स्‍थान का भ्रमण एक अविस्‍मरणीय अनुभव है। टाटा के चाय बागानों और सदाबहार वनों से घिरा हुआ अनयीरंगल बांध है।

मुन्‍नार पर और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

वागामोन

यदि आप छुट्टियों के दौरान सुंदरता, निजता, शांति चाहते हैं तो वागामोन आपके लिए आदर्श स्‍थान है। थोटायम और इडुकी जिलों की सीमा पर पश्चिमी घाट के ऊंचे पर्वतों के बीच स्थित केरल का यह स्‍थान समुद्र तल से 1100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। वागामोन दक्षिण भारत का एक सुंदर पर्वतीय स्‍थल है। इसे एशिया का स्‍कॉटलैंड भी कहते हैं। लगभग 1 शताब्‍दी तक वागामोन छुपा रहा, जब तक ब्रिटिश सरकार ने इसे खोज नहीं निकाला। यहां चाय के बागान लगाए जाते थे, जिसके बाद इसाई मिशनरियों ने यहां सेवा आश्रम बनाएं। वागामोन वर्ष के अधिकांश समय ठण्‍डा बना रहता है।

वायानाड

केरल में समुद्र तल से 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित वायानाड पर्वतीय स्‍थल केरल का सबसे अधिक आकर्षक और शांत पर्वतीय स्‍थल है। हरी भरी वनस्‍पति के साथ धुंध से भरी पहाडियां और शुद्ध हवा आपके वायानाड भ्रमण को एक अविस्‍मरणीय अनुभव बना देती है। यह एक स्‍वर्ग के समान सुंदर स्‍थान है जहां आपको केरल की यात्रा के दौरान अवश्‍य जाना चाहिए। इस पर्वतीय स्‍थल में चाय और मसालों के बागान हैं, जो इस स्‍थान को एक अनोखा पहलु प्रदान करती हैं। वायनाड की यात्रा से आपको निश्‍चित ही एक जीवन भर याद रखने वाला अनुभव मिलेगा।

देवीकुलम

देवीकुलम समुद्र स्‍थल से 1800 मीटर की ऊंचाई और केरल के मुन्‍नार से 16 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। यह पर्वतीय स्‍थल अपने अनोखे जंतु और वनस्‍पति जगत के लिए प्रसिद्ध है। यह पर्वतीय स्‍थल स्‍वर्ग के समान है और ऐसा लगता है कि यहां प्रकृति अपने सर्वोत्तम रूप में मौजूद है। यहां जल प्रपातों के आस पास नर्म सुबह की धुंध के बीच पैदल चलना एक ऐसा अनुभव है जो अतुलनीय है। ये सभी बातें इस स्‍थान को एक जादू भरा वातावरण प्रदान करती हैं और यहां रुमानी सुंदरता जोड़ देती हैं। इसके बारे में हम केवल यही कह सकते हैं कि देवीकुलम में आना प्राकृतिक सुंदरता को अनुभव करने जैसा एहसास है। इस सुंदर पर्वतीय स्‍थान की शांति का शब्‍दों में वर्णन संभव नहीं है।

पोनमुडी

पोनमुडी पर्वतीय स्‍थान, त्रिवेन्‍द्रम शहर से 61 किलो मीटर की दूरी पर स्थित एक पर्वतीय स्‍थान है। अभी तक अछूता गंतव्‍य, पोनमुडी केरल में पहाड़ी के सिरे पर स्थित है और यदि आप अपने भ्रमण का एक अनोखा अनुभव पाना चाहते हैं तो यहां अवश्‍य जाएं। यह स्‍थान समुद्र तल से 600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे गोल्‍डन पीक कहते हैं। पोनमुडी पर्वतीय स्‍थल शहरी जीवन की भाग दौड़ से राहत दिलाता है और आप प्रकृति की गोद में आकर पूरे आराम का अनुभव कर सकते हैं।

पीरमेड

थेकाडी के रास्‍ते में पीरमेड एक छोटा पर्वतीय स्‍थल है। यहां की उपजाऊ भूमि 914 मीटर की ऊंचाई पर है। पुराने समय में त्रावण कोर के राजाओं के ग्रीष्‍कालीन महल वाले इस छोटे और ठण्‍डे पर्वतीय स्‍थल पर रबर, चाय, कॉफी, काली मिर्च और इलायची के बागान लगाए गए हैं। यहां अनेक जल प्रपात और घास के मैदान हैं।

इदुकी

इदुकी केरल का एक सुंदर पर्वतीय स्‍थल है जिसका नाम मलयालम भाषा के इदुकी शब्‍द से रखा गया है और जिसका अर्थ होता है संकरा घाटी मार्ग। इदुकी अपने विशाल पर्वतों, विविध घाटियों और भव्‍य नदियों के कारण प्रसिद्ध है। केरल के दक्षिणी भाग में स्थित इदुकी में पर्यटकों के लिए अनेक आकर्षण हैं जैसे पर्वत श्रृंखलाएं, पहाड़ पर चढ़ाई, मसालों के बागान, प्रकृति की अछूती सुंदरता और वन्‍य जीवन अभयारण्‍य।

वन्‍य जीवन अभयारण्‍य

पेरियार नेशनल पार्क

पेरियार टाइगर रिजर्व उष्‍ण कटिबंधी सदाबहार, अर्ध सदाबहार और नम पतझड़ी वनों से भरा 777 वर्ग किलो मीटर में फैला आरंक्षित वन है। इसे प्रसिद्ध प्रोजेक्‍ट टाइगर के तहत 1978 के दौरान प्रोजेक्‍ट टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। पेरियार नदी के नाम पर इसे पेरियार टाइगर रिजर्व कहा जाता है जो पश्चिमी घाट की ऊंची श्रृंखला पर सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। यहां की भौगोलिक आकारिकी, वन्‍य जीवन और पवित्र सुंदरता के कारण पेरियार टाइगर रिजर्व दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां जलीय पारिस्थितिकी तंत्र भी है। यहां 50 वर्ष पुरानी कृत्रिम झील के असंख्‍य छोटे छोटे टापू हमें स्‍थलीय, जलीय और सबटेरिनियन जीवन रूपों के बीच मिले जुले और आपसी संबंध की याद दिलाते हैं। यह भारत का एकमात्र ऐसा अभयारण्‍य है जहां हाथियों को केवल एक नाव की दूरी से देखा जा सकता है और इनकी तस्‍वीरें ली जा सकती हैं।

सदाबहार वनों में बड़े पेड़ और बेलें हैं। विविध अधिवास प्राकृतिक रूप से स्‍तनधारियों, पक्षियों, सरीसृपों, उभयचरों और मछलियों को सहायता देते हैं। यहां बाघ, चीते और जंगली कुत्ते, हाथी, दौर, सांभर, बार्किंग बीयर, जंगली सुअर, स्‍लॉथ बीयर, नील गिरी ताहर लंगूर, लायन टेल्‍ड मेकेक, ओटर, माला बारी बड़ी गिलहरी, सीवेट आदि आम तौर पर दिखाई दे जाते हैं। यहां किंग कोबरा सहित कई प्रकार के विषैले और विष रहित सांप पाए जाते हैं। यहां की चट्टानों पर आम तौर पर कछुएं देखे जा सकते हैं और झील में ट्री ट्रंक दिखाई देते हैं। मशीर नामक भारत की प्रसिद्ध गेम फिश यहां बड़ी संख्‍या में पाई जाती है। सामान्‍य जलीय पक्षी हैं भारतीय डार्टर, छोटी कोरमोरेंट किंग फिशर और काली गर्दन वाली स्‍टॉर्क, ग्रेट इंडियन हार्न बिल, पी फॉउल, ब्राह्मणी काइट और काले पंखों वाली काइट। यहां चराई को रोकने, गैर कानूनी शिकार समाप्‍त करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रभावी उपाय किए गए हैं। इको विकास भी यहां का एक प्रमुख क्षेत्र है।

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एराविकुलम नेशनल पार्क

दक्षिण भारत की संकटापन्‍न पर्वतीय बकरी के लिए बनाया गया एक अभयारण्‍य, जो नील गिरी ताहिर (हेमीट्रेगस हाइलो क्रिकस) है, एराविकुलम नेशनल पार्क में घास के बड़े मैदान और शोला यहां की सुंदरता का बढ़ाते हैं, यह राज मलाई पहाडियों 97 वर्ग किलो मीटर में फैला पार्क है।

अनामुड्डी हिमालय की सबसे ऊंची दक्षिणी चोटी, (2695 मीटर) अपनी पूरी भव्‍यता के साथ अभयारण्‍य में दिखाई देती है। इन पहाडियों के ढलान पर दुर्लभ प्रकार के जीव जंतु और वनस्‍पतियां पाई जाती है। दुनिया में अपने प्रकार सबसे बड़ा एटलस मॉथ इस पार्क में विशिष्‍ट रूप से निवास करता है। जीव जंतुओं की अन्‍य दुर्लभ प्रजातियां हैं नील गिरी लंगूर, लायन टेल्‍ड मेकाक, चीते, बाघ आदि।

इडुकी नेशनल पार्क

केरल के दक्षिण भारतीय राज्‍य में स्थित इडुकी नेशनल पार्क वन्‍य जीवन के लिए केरल के सर्वोत्तम स्‍थानों में से एक है और यहां हाथियों, भैंसों, भालूओं, जंगली सुअरों, सांभर, जंगली कुत्तों, जंगली बिल्लियों, बाघों, जंगली सुअरों के बड़े झुंड घूमते रहते हैं और यहां कोबरा, वाइपर, क्रेट और अनेक विष रहित सांपों की अनेक प्रजातियों पाई जाती है। इस अभयारण्‍य में पक्षियों की संख्‍या भी काफी अधिक है कुछ महत्‍वपूर्ण पक्षी हैं मैना, जंगली फाउल, काली बुलबुल, लाफिंग थ्रश, कठफोड़वा, पी फाउल, किंगफिशर आदि।

वायनाड वन्‍य जीवन अभयारण्‍य

वर्ष 1973 में स्‍थापित वायनाड वन्‍य जीवन अभयारण्‍य पूर्वोत्तर में कर्नाटक के नागरहोल और बल्‍लीपुर तथा दक्षिण - पूर्व में तमिलनाडु के मुड्डीमलाई के संरक्षित नेटवर्क से जुड़ा है। यहां अपार जैव विविधता है और यह अभयारण्‍य नील गिरी बायोस्‍फीयर रिजर्ववम का अविभाज्‍य भाग है जिसे इस क्षेत्र की जैविक विरासत को सुरक्षित रखने के विशिष्‍ट उद्देश्‍य से स्‍थापित किया गया था।

इस अभयारण्‍य में कई प्रकार के जंतु पाए जाते हैं जैसे हाथी, बाघ, चीते, जंगली बिल्‍ली, सीएट बिल्‍ली, बंदर, जंगली कुत्ते, भैंसे, हिरण, भालू आदि। यहां पाए जाने वाले स‍रीसृप हैं मॉनिटर छिपकली और कई प्रकार के सांप यहां देखे जा सकते हैं। इस क्षेत्र में देखे जाने वाले पक्षियों में मोर, बैबलर, कुक्‍कु, उल्‍लू, कठफोड़वा और जंगली फाउल कुछ प्रमुख हैं।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषय वस्‍तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित