- कर्नाटक हेरिटेज (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- कर्नाटक प्रकृति (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- कर्नाटक तट (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- कर्नाटक वन्य जीवन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- कर्नाटक के रोमांच (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
कनार्टक
परिचय
कर्नाटक 1500 वर्ष से अधिक पुराने इतिहास वाला राज्य है। यहां आप शताब्दियों पुराने वास्तुकलात्मक भवन देख सकते हैं, प्रसिद्ध स्मारकों का नजारा ले सकते हैं, वैश्विक विरासत को देख कर चकित हो सकते हैं, पत्थर को काट कर बनाई गई पुरानी गुफाएं देख सकते हैं, चौंका देने वाली प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कर सकते हैं, आध्यात्मिक मंत्र सुन सकते हैं, ताजी खुशबू वाली कॉफी के साथ आस पास के वन्य जीवन का आनंद ले सकते हैं। यहां आपको अंतहीन मनमोहक समुद्र तट दिखाई देते हैं।
कर्नाटक में ढेरों पर्यटन आकर्षण हैं। यहां की पूर्व राजशाही वाला शहर मैसूर वृंदावन गार्डन और श्री रंगपट्टन के साथ आपका स्वागत करता है, यहां प्रसिद्ध श्रवण बेल गोला जहां गोमटेश्वर की 57 फीट ऊंची एक पत्थर से बनाई गई मूर्ति है, बेलुर, हालेबिड और सोमनाथ पुरा के साथ प्रसिद्ध होयसाला स्मारक; बादामी, एहोल और पट्टाडकाल 1300 वर्ष पुरानी चट्टानी बनावट और मंदिर है; हम्पी यहां का प्रसिद्ध मुक्त संग्रहालय है (प्राचीन विजय नगर); दक्षिण कन्नड़, ऊडपी और उत्तर कन्नड़ जिले के सुंदर तट; मैंगलोर और क्वार के पत्तन; चित्र दुर्गा, बिदार, बासव कल्याण और गुलबर्गा के साथ बने आकर्षक किले; बंदी पुर नेशनल पार्क बन्नेर घाट नेशनल पार्क वन्य जीवन के अच्छे उदाहरण है; रंग थीटू, टोकरे बेल्लूर, मदनगड्डे, गुडावी, अत्तीवेरी, कुछ प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य हैं; जोग, साथोडी, शिवनासामुद्रा, मोगोड, गोकक, अब्बी, उंचाली, इरुपु, हेब्बे, कलहट्टी कुछ मनमोहक जल प्रपात हैं; माडीपीली, केमानुगुंडी, बी आर पहाडियां, नंदी पहाडियां, खुदरे मुख, कोडा चदरी कुछ मनोरम पहाड़ी स्थल हैं। गोकर्ण, उडुपी, धर्मशाला, मेलकोटे, गंगापुरा, सौदत्ती, कोल्लूर, श्रृंगेरी, होरानाडु, कलासा, कुक्के, सुब्रमण्या, येडीयूर, कोडालासंगमा, अल्वी, नंजनगढ़ कुछ प्रसिद्ध तीथ स्थान हैं।
पर्यटक आकर्षण
- एयर चार्टर सेवा (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- पर्यटक सूचना केन्द्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- कर्नाटक के होटल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- टूर ऑपरेटर (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- कर्नाटक में रहने के स्थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
तट
भटकाल तट
भटकाल तट तटीय कर्नाटक के सर्वाधिक सुंदर तटो में से एक है जो अरब सागर के किनारे स्थित है। यहां के तट के किनारे लगी हरियाली इस स्थान की सुंदरता को बढ़ा देती है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता के साथ मिलों लंबी रेत की पट्टी इसे अवकाश के लिए एक आदर्श स्थल बनाती है। गरजते समुद्र और बलखाती पहाडियों से घिरा यह स्थान एक मनपसंद पर्यटन स्थल है और यहां तट के किनारे विशाल मंदिर बने हुए हैं।
देवबाघ तट
मनोरम देवबाघ तट एक ऐसे द्वीप के किनारे स्थित है जहां करवार तट से तेज चलने वाली नावों द्वारा पहुंचा जा सकता है। यह एकांत में पढ़ा तट केसू रिना ग्रूव्स से भरा हुआ है जो शहर के जीवन का एक मनमोहक दृश्य प्रदान करते हैं। यहां का गदंगी रहित पानी और धवल सफेद तट आपके थके हुए शरीर और आत्मा दोनों को ही तृप्त कर देता है। इस तट पर पूरे वर्ष जाया जा सकता हे।
करवार तट
करवार तट सच्चे अर्थों में एक अछूता तट है जो अब तक आधुनिकता के प्रभाव से वंचित है। यह तट उष्ण कटिबंधी भूमि की पतली पट्टी पर स्थित है जो पश्चिमी घाटों और अरब सागर के बीच किसी भी दर्शक को एक पवित्र वातावरण प्रदान करता है। यहां का मनोहारी प्राकृतिक परिवेश पर्यटकों को द्वीप के विशिष्ट चित्र प्रदान करता है। ऐसा कहा जाता है कि महान भारतीय विद्वान रविन्द्र नाथ टैगोर को अपने पहले नाटक के लिए इसी स्थान पर प्रेरणा मिली थी।
मेल्प तट
मेल्प तट उडपी से लगभग 6 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। यहां बिकरी सुनहरी रेत और पाम के पेड़ तथा केसुररिना के पेड़ इस तट पर नीले आकाश के साथ अपनी विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। मेल्प तट एक प्राकृतिक बंदर गाह है और यह कर्नाटक के समृद्ध वर्ग को योगदान देने वाला महत्वपूर्ण मछली पकड़ने का केन्द्र है। यह तट पर्यटकों को एक शांत और आदर्श अवकाश का पूरा अवसर देता है। इस तट पर नाव की सवारी, मछली पकड़ने और तैरने का आनंद ही कुछ और है।
मारावंथे तट
मारावंथे तट अबर सागर और सातुपरनिका नदी के बीच स्थित है और इसकी पृष्ठ भूमि में कोडाचारी पहाडियां हैं। यहां अंतहीन दूरी तक फैली सुनहरी रेत, लहराते पाम वृक्ष, नीला आसमान और मन को शांत कर देने वाला समुद्र कर्नाटक का यह तट दर्शकों को इस दुनिया के परे का अनुभव करा देता है। वास्तव में यह सूर्यास्त के समय एक परियों के देश जैसा स्थान लगता है जब आकाश का रंग नारंगी हो जाता है और सूर्य की सुनहरी किरणें समुद्र तथा नदी में प्रतिबिम्बित होती हैं।
मुरुदेश्वर तट
मुरुदेश्वर तट विशाल मंदिरों और मनपसंद पर्यटक गंतव्य के लिए जाना जाता है। इस तट पर आकर आप एकांत के लिए अपने प्रेम को दोबारा खोज सकते हैं। स्वयं को पहाड़ी के किसी एक बिन्दु पर स्थापित करें और वहां से आने वाली अथक तरंगों को देखते रहें। यहां शिव मंदिर को देखना नहीं भूलें, जहां भारत की सबसे बड़ी शिव मूर्ति है।
सेंट मेरी आइलैंड तट
सेंट मेरी आइलैंड तट मैंगलोर से 58 किलो मीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित है। यह बेसाल्ट चट्टानों का बना हुआ एक अनोखा तट है जहां खड़े अष्टभुजी खण्डों में बटे हुए स्तंभी क्रिस्टलाइज्ड हो गए हैं। यह द्वीप समूह जाने का रास्ता मेल्प तट से फेरी के जरिए है जो मछली पकड़ने का एक बड़ा केन्द्र है। इस तट पर वॉलकेनिक चट्टानों के बारे में अध्ययन करने वाले छात्र और अनुसंधसानकर्ता बड़ी संख्या में आते हैं।
पर्वतीय स्थल
कूर्ग
कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड और दक्षिण का कश्मीर कहा जाता है, जहां कि सहज लोक कला और शांत वातावरण शहरी जीवन की कठिनाइयों से एक दम अलग है। कूर्ग को लोगों तथा प्रकृति, दोनों की सुंदरता के लिए अनेक समान और प्रशंसाएं प्राप्त हुई हैं। यह मनोहारी, आकर्षक कस्बा समुद्र तल से 5 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जो आपको चौंका देने वाले दृश्य दिखाता है। कोडागू (कूर्ग) का मुख्यालय मेडीकेरे में है। कोडागू भारत का अत्यंत सुंदर पर्वतीय स्थान माना जाता है और यहां विश्व की सर्वोत्तम कॉफी, शहद और मसालों का उत्पादन भी होता है।
कोडाचारी
कर्नाटक का यह पर्वतीय स्थल एकांत की तलाश करने वाले लोगों के लिए उपयुक्त स्थान है। यदि आप पहाड़ों से प्रेम करते हैं और अपनी छुट्टियां एक ऐसे अछूते पहाड़ की तराई में बिताना चाहते हैं तो आप कोडाचारी अवश्य आएं। समुद्र तल से लगभग 1843 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कोडाचारी पहाड़ी पश्चिमी घाटों पर है। जंतु और वनस्पति जगत की कुछ संकटापन्न प्रजातियों का घर यह स्थान पहाड़ी पर चढ़ाई करने वालों के लिए भी एक चुनौतीपूर्ण स्थान है, जहां वे अवश्य चढ़ने का सपना देखती हैं।
कुंदाद्री
कुंदाद्री पर्वतीय स्थल समुद्र तल से लगभग 3200 फीट ऊंचा एक चट्टान से बना विशाल पर्वतीय स्थल है। यहां घने सदाबहार वन हैं। यहां आने वाले पर्यटक एकांत का आनंद उठाने के लिए इन शांत पहाडियों पर आने की योजना बनाते हैं। यहां पश्चिम की ओर से आने वाली ठण्डी हवा बहती है और यहां का साफ नीला पानी और डूबता सूर्य अधिकांश लोगों का मनमोह लेता है। पहाड़ की तराई से बहने वाली नदियां पर्वत की छोटी से देखी जा सकती हैं और वराही बांध का पानी इस प्राकृतिक सुंदरता को और अधिक बढ़ा देता है।
याना
याना सहयाद्री पर्वत के सदाबहार वनों के बीच स्थित एक शांत पर्वतीय स्थान है। याना में विहंगम प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचे पहाड़, भव्य चट्टानी संरचनाएं, ऊंचे जल प्रपात और पवित्र मंदिर हैं। यह पर्वतीय स्थल उन पर्यटकों का मनपसंद स्थान है जो 120 मीटर की ऊंचाई पर भैरवेश्वर मंदिर देखना चाहते हैं। वास्तव में याना पर्वतीय स्थल का अपना एक अनोखा आकर्षण है जो पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।
चिकमंगलुर
चिकमंगलुर आपके लिए सर्वाधिक उपयुक्त पर्वतीय स्थल है यदि आप मौज मस्ती करना चाहते हैं और पहाडियों के बीच घूमना चाहते हैं, इसके आस पास प्राकृतिक सुंदरता बिखरी पड़ी है, जहां आप ठण्डी हवा के झोंकों का आनंद लेने के साथ घाटी का सुंदर दृश्य देख सकते हैं। कर्नाटक का चिकमंगलुर पर्वतीय स्थल चौंका देने वाले दृश्यों से भरपूर है। यह लगभग 1900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जहां ऊंचे पहाड़, मनमोहक उतार चढ़ाव, चांदी के समान पानी और गहरी घाटियां हैं।
केम्मानगुंदी
केम्मानगुंदी पर्वती स्थल में विहंगम जल प्रपात है जो यहां की ढलानों से नीचे गिरते हैं, यहां उत्कृष्ट वन्य जीवन और पौधों की दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती है। यहां पहाड़ पर चढ़ने वाले पर्यटक आस पास के मनोरंजक दृश्यों का लाभ उठा सकते हैं। केम्मानगुंदी के जंगलों और पर्वत की चोटियों पर जाने का रोमांचक अनुभव ले सकते हैं। आप यहां के पर्वतीय ढलानों पर चढ़ाई कर सकते हैं, तरह तरह के पक्षी और भव्य जल प्रपातों को देख सकते हैं।
नंदी पहाडियां
बैंगलोर से 60 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर में नंदी पहाड़ी नामक यह ग्रीष्म कालीन स्थल है। इसे नंदी दुर्गा भी कहते हैं और एक समय यह टीपू सुल्तान के लिए मनपसंद ग्रीष्मकालीन अवकाश स्थल हुआ करता था। यह 1478 मीटर ऊंची पहाड़ी कर्नाटक की कई नदियों का स्रोत है और यहां के वनों में ढेर सारे वन्य जीव जंतु पाए जाते हैं। नंदी पहाड़ी के आस पास ऐसी कई छोटी पहाडियां हैं जहां पैदल जाना संभव है, नंदी पहाडियां वर्ष के सभी मौसमों में मध्यम मौसम के साथ आने योग्य स्थान है।
मदीकेरी
मदीकेरी एक सुंदर मनमोहक कस्बा है जो समुद्र तल से लगभग 5000 फीट (1525 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। यहां ऊंची नीची सड़कों पर गुजरते हुए आपको ठण्डी हवा के झोंके स्पर्श करते हैं। यहां के अनोखे नजारे आपको चकित कर देते हैं। यहां की सुंदर महिलाएं आपके सामने मुस्कुराकर गुजरती है और कॉफी के फूलों की खुशबू आपको घेरे रहती है।
वन्य जीवन अभयारण्य
बंदीपुर नेशनल पार्क
बंदीपुर टाइगर रिजर्व भारत के कर्नाटक राज्य के मैसूर जिले में है, जो 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरूआत के समय भारत में बनाए गए प्रारंभिक नौ टाइगर रिजर्व में से एक है। यह तमिनाडु राज्य में स्थित मधुमलाई वन्य जीवन अभयारण्य से दक्षिण में और केरल के वायनाड वन्य जीवन अभयारण्य में दक्षिण पश्चिम से सटा हुआ है। इसके उत्तर पश्चिम में नागरहोल नेशनल पार्क है। इसका सबसे ऊंचा बिन्दु गोपालस्वामी पहाड़ी है।
यह अभयारण्य 90 वर्ग किलो मीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है जिसे 1931 में बंदीपुर आरक्षित वन में बनाया गया था, वेणु गोपाल वन्य जीवन पार्क 1941 में बनाया गया था और यह 800 वर्ग किलोमीटर से अधिक हिस्से में फैला हुआ है। इस पार्क को पहाड़ी के ऊपर बने वेणुगोपाल के मंदिर के नाम पर नाम दिया गया है। बंदीपुर टाइगर रिजर्व को तत्कालीन वेणु गोपाल वन्य जीवन पार्क के वन क्षेत्र और बंदीपुर के इसके केन्द्र को मिलाकर 1973 में बनाया गया था और इसे बंदीपुर नेशनल पार्क नाम दिया गया।
इस आरक्षित वन में शामिल किए गए सभी वन्य क्षेत्र आजादी से पहले अधिसूचित आरक्षित वन हैं। प्रस्तावित बंदीपुर नेशनल पार्क की अधिसूचना 1985 में जारी की गई थी। यह क्षेत्र बाघों, चीतों, हाथियों, गौर, सांभर, चित्तीदार हिरण, स्लॉथ बीयर, माउस बीयर, जंगली कुत्तों, चार सीग वाले एंटीलॉप जैसी संकटापन्न प्रजातियों का आश्रय स्थल है। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें . . .
बंदीपुर नेशनल पार्क पर और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
नागरहोल नेशनल पार्क
लगभग 644 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को शामिल करते हुए नागरहोल नेशनल पार्क काबिनी नदी और बंदीपुर नेशनल पार्क के बीच स्थित है। नागरहोल नेशनल पार्क में मुख्यत: उत्तरी और पश्चिमी भागों में नम पतझड़ी वन और दक्षिण विभाग में सूखे पतझड़ी वन हैं। नागर होल भारत के कुछ ऐसे वन्य जीवन अभयारण्यों में से एक है जिसे हाथियों के लिए सुरक्षित माना जाता है। आप यहां अनेक चीजों का आनंद उठा सकते हैं, उनमें से एक है हाथियों का शो। नागर होल नेशनल पार्क में हाथियों का बड़ा समुदाय रहता है। नागरहोल नेशनल पार्क का नाम नागा अर्थात सांप और होल अर्थात धारा से बनाया गया है।
नागर होल नेशनल पार्क में बाघ, स्लॉथ बीयर, हाइना, चीते, जंगली कुत्ते, चित्तीदार हिरण, सांभर, बार्किंग बीयर, चार सींग वाला एंटीलॉप, जंगली सुअर और गौर भी पाए जाते हैं। यहां पाए जाने वाले बाघ एक अकार्षण है जो अन्य अनेक नेशनल पार्क में भी कम दिखाई देते है, किन्तु यहां आप सांभर, जंगली सुअर, गौर, जंगली कुत्ते और चित्तीदार हिरण जैसे जानवरों की झलक अवश्य देख सकते हैं। पार्क में पाई जाने वाली 250 पक्षी प्रजातियों में से सबसे आम पक्षी हैं बुलबुल, बेबलर, बीइटर, क्रेस्टेड सर्पेंट, डव, हॉर्नबिल, एलेक्सेंड्राइन, मोर, कठफोड़वा, मालाबार पाइड, वार्बलर, ग्रेट इंडियन रीड, क्रेस्टेड हॉक, बाज़, गोल्डन बैक पाराकित, और दक्षिणी ट्रीपाइ।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषय वस्तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित
