हिमाचल प्रदेश
परिचय
देवभूमि के लोकप्रिय नाम से ज्ञात हिमाचल प्रदेश पश्चिमी हिमालय में स्थित उत्तरी भारत का एक सुंदर पर्वतीय राज्य है। इस राज्य में तिब्बत का पठार पूर्वी दिशा में, जम्मू और कश्मीर उत्तर में तथा पंजाब पश्चिम में स्थित है। जबकि यह राज्य स्थलाकृति की विविधता और मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के कारण अपने पड़ोसी राज्यों से एक दम अलग है। यहां फैली लंबी हिमालय पर्वत श्रृंखला के रेगिस्तान से लेकर देवदार के हरे भरे जंगल, सेब के बागीचों से लेकर सीढ़ीदार खेत, बर्फ से ढकी चोटियों से लेकर गिरती बर्फ और लहराती नदियां सुंदरता को बढ़ाती है।
इस राज्य में धार्मिक और नृ विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान हैं। इस राज्य को व्यास ऋषि, पराशर ऋषि, विशिष्ट ऋषि, मार्कंडेय ऋषि तथा तिब्बती लामाओं का घर होने का गौरव प्राप्त है। यहां के गर्म पानी के झरने, ऐतिहासिक किले, प्राकृतिक और मानव निर्मित झीलें, जानवरों को चराते हुए चरवाहे यहां के दृश्यों को पर्यटकों के लिए अत्यधिक आनंददायी बना देते हैं।
पर्यटन आकर्षण
पर्वतीय स्थान
चम्बा घाटी
चम्बा घाटी (915 मीटर) की ऊंचाई पर रवि नदी के दाएं किनारे पर है। पुराने समय में राजशाही का राज्य होने के नाते यह लगभग एक शताब्दी पुराना राज्य है और 6वीं शताब्दी से इसका इतिहास मिलता है। यह अपनी भव्य वास्तुकला और अनेक रोमांचक यात्राओं के लिए एक आधार के तौर पर विख्यात है। यह जिला मुख्यालय भी है। ठण्ड के मौसम में ठण्डी हवाओं के कारण यहां का तापमान बहुत कम हो जाता है और इसलिए यहां भारी ऊनी कपड़ों की जरूरत नहीं है। यहां का मौसम गर्मी में अच्छा होता है।
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डलहौज़ी
पश्चिमी हिमाचल प्रदेश में डलहौज़ी नामक यह पर्वतीय स्थान पुरानी दुनिया की चीजों से भरा पड़ा है और यहां राजशाही युग की भाव्यता बिखरी पड़ी है। यह लगभग 14 वर्ग किलो मीटर फैला है और यहां काठ लोग, पात्रे, तेहरा, बकरोटा और बलूम नामक 5 पहाडियां है। इसे 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश गवर्नर जनरल, लॉड डलहौज़ी के नाम पर बनाया गया था। इस कस्बे की ऊंचाई लगभग 525 मीटर से 2378 मीटर तक है और इसके आस पास विविध प्रकार की वनस्पति-पाइन, देवदार, ओक और फूलों से भरे हुए रोडो डेंड्रॉन पाए जाते हैं डलहौज़ी में मनमोहक उप निवेश युगीन वास्तुकला है जिसमें कुछ सुंदर गिरजाघर शामिलन है। यह मैदानों के मनोरम दृश्यों को प्रस्तुत करने के साथ एक लंबी रजत रेखा के समान दिखाई देने वाले रावी नदी के साथ एक अद्भुत दृश्य प्रदर्शित करता है जो घूम कर डलहौज़ी के नीचे जाती है। बर्फ से ढका हुआ धोलाधार पर्वत भी इस कस्बे से साफ दिखाई देता है।
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धर्मशाला
धर्मशाला की ऊंचाई 1,250 मीटर (4,400 फीट) और 2,000 मीटर (6,460 फीट) के बीच है। यहां से बर्फ की पर्त आसानी से देखी जा सकती है। सूर्य की किरणें जब इस बर्फ पर पड़ती हैं तो उनकी चमक से घाटी में एक सुंदर इंद्रधनुष बनाता है और लोग इसे देखते रह जाते हैं। यह पर्वत 3 तरफ से कस्बे से घिरा हुआ है और यह घाटी दक्षिण की ओर जाती है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, जहां पाइन के ऊंचे पेड़, चाय के बागान और इमारती लकड़ी पैदा करने वाले बड़े वृक्ष ऊंचाई, शांति तथा पवित्रता के साथ यहां खड़े दिखाई देते हैं। वर्ष 1960 से, जब से दलाई लामा ने अपना अस्थायी मुख्यालय यहां बनाया, धर्मशाला की अंतरराष्ट्रीय ख्याति भारत के छोटे ल्हासा के रूप में बढ़ गई है।
कांगड़ा
नई दिल्ली के उत्तर पश्चिम में 526 किलो मीटर पर स्थित धर्मशाला कांगड़ा जिले का मुख्यालय है जो हिमाचल प्रदेश राज्य में स्थित है। कांगड़ा घाटी हिमालय पर्वत श्रृंखला का सबसे अधिक शांत, आरामदायी और अध्यात्मिक स्थान है। अद्भुत दृश्य, विशेष रूप से धर्मशाला में ओक, सेदार, पाइन और इमारती लकड़ी देने वाले पेड़ बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं और यहां उत्कृष्ट दृश्यों के साथ कुछ मनोहारी रास्ते हैं। भारत के ब्रिटिश वाइसराय (1862-63) लॉड एल्गिन को धर्मशाला की प्राकृतिक सुंदरता इंग्लैंड में स्थित उनके अपने घर स्कॉटलैंड के समान लगती थी।
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कुफरी
अनंत दूरी तक चलता आकाश, बर्फ से ढकी चोटियां, गहरी घाटियां और मीठे पानी के झरने, कुफरी में यह सब है और इसके अलावा भी बहुत कुछ। यह पर्वतीय स्थान शिमला के पास समुद्री तल से 2510 मीटर की ऊंचाई पर हिमाचल प्रदेश के दक्षिणी भाग में स्थित है। यह आपको रोमांच और साहस की जादू भरी दुनिया में ले जाता है। कुफरी में ठण्ड के मौसम में अनेक खेलों का आयोजन किया जाता है जैसे स्काइंग और टोबोगेनिंग के साथ चढ़ाडयों पर चढ़ना। ठण्ड के मौसम में हर वर्ष खेल कार्निवाल आयोजित किए जाते हैं और यह उन पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण है जो केवल इन्हें देखने के लिए यहां आते हैं। यह स्थान ट्रेकिंग और पहाड़ी पर चढ़ने के लिए भी जाना जाता है जो रोमांचकारी खेल प्रेमियों का आदर्श स्थान है।
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मनाली
कुल्लू से उत्तर दिशा में केवल 40 किलो मीटर की दूरी पर लेह की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर घाटी के सिरे के पास मनाली स्थित है। यहां का परिदृश्य आपकी सांसें रोक लेता है। सबसे पहले आपको बर्फ से ढकी हुई पहाडियां, साफ पानी वाली व्यास नदी दिखाई देती है। दूसरी ओर देवदार और पाइन के पेड़, छोटे छोटे खेत और फलों के बागान दिखाई देते हैं। यह छुट्टियां बिताने के लिए आदर्श स्थान है और लाहुल, स्पीति, बारा भंगल (कांगड़ा) और जनस्कर पर्वत श्रृंखला पर चढ़ाई करने वालों के लिए यह एक मनपसंद स्थान है। मंदिरों से अनोखी चीजों तक, यहां से मनोरम दृश्य और रोमांचकारी गतिविधियां मनाली को हर मौसम और सभी प्रकार के यात्रियों के बीच लोकप्रिय बनाती हैं।
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कुल्लू
कुल्लू घाटी को पहले कुलंथपीठ कहा जाता था। कुलंथपीठ का शाब्दिक अर्थ है रहने योग्य दुनिया का अंत। कुल्लू घाटी भारत में देवताओं की घाटी रही है। कुल्लू गर्मी के मौसम में लोगों का एक मनपसंद गंतव्य है। मैदानों में तपती धूप से बच कर लोग हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में शरण लेते हैं। यहां के मंदिर, सेब के बागान और दशहरा हजारों पर्यटकों को कुल्लू की ओर आकर्षित करते हैं। यहां के स्थानीय हस्तशिल्प कुल्लू की सबसे बड़ी विशेषता है। कुल्लू में सुंदर पहाडियों और व्यास नदी के आस पास बनी हिल रिजॉर्ट में अवश्य जाएं।
चैल
हिमालय की तराई में स्थित सबसे छोटे पर्वतीय स्थानों में से एक चैल, प्रकृति प्रेमियों और पक्षियों को देखने के शौकीन व्यक्तियों के लिए एक आदर्श स्थान है। समुद्र तल से 2240 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मनोरम हरा भरा पर्वतीय स्थान शिमला के दक्षिण पूर्व में 43 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह हिमाचल प्रदेश की राजधानी है। चैल घने पाइप और देवदार के जंगलों के बीच पृष्ठभूमि में बर्फ से ढकी हुई शिवालिक पहाडियों के साथ खड़ा हुआ है। यहां 3 पहाडियों - राजगढ़ पहाड़ी के ऊपरी भाग में चैल का महल है, गांव में ही साध तिबा पहाड़ी और पंधेवा पहाड़ी स्नो व्यू मेंशन है। शिमला और कसौली हिमाचल प्रदेश के दो प्रमुख पर्वतीय स्थान है जो जहां से देखे जा सकते हैं।
कसौली
समुद्री तल से 1795 की ऊंचाई पर स्थित कसौली हिमाचल प्रदेश का एक छोटा पर्वतीय स्थल है। यह शिमला के दक्षिण में 77 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है और टॉय ट्रेन पर जो समय शिमला की पहाडियों के पास पहुंचने पर कसौली दिखाई देता है। अपनी सफाई और सुंदरता के कारण मशहूर कसौली में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। सप्ताह के अंत में यहां विशेष रूप से पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है। इसे कभी कभार छोटा शिमला कहा जाता है और यह पर्वतीय स्थान फर, रोडोडेंड्रॉन, अखरोड़, ओक और विलो के लिए प्रसिद्ध है। कसौली में 1900 के दौरान पाश्चर संस्थान की स्थापना की गई जहां एंटी रेबीज टीका, पागल कुत्ते के काटने की दवा के साथ हाइड्रो फोबिया रोग का इलाज भी किया जाता है। कसौली प्रसिद्ध लेखक रसकिन बॉन्ड का जन्म स्थान भी है।
शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी और ब्रिटिश कालीन समय में ग्रीष्म कालीन राजधानी शिमला राज्य का सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन केन्द्र है। यहां का नाम देवी श्यामला के नाम पर रखा गया है जो काली का अवतार है। शिमला लगभग 7267 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यह अर्ध चक्र आकार में बसा हुआ है, जहां पूरे वर्ष ठण्डी हवाएं बहने का वरदान है। यहां घाटी का सुंदर दृश्य दिखाई देता है और महान हिमालय पर्वती की चोटियां चारों ओर दिखाई देती है। इसके उत्तर में बर्फ मानों क्षितिज तक जमी हुई है। यहां ठण्डी हवाएं बहती है और ओक तथा रोडोडेंड्रॉन के वनों से गुजरती हैं। शिमला का सुखद मौसम, आसानी से पहुंच और ढेरों आकर्षण इसे उत्तर भारत का एक सर्वाधिक लोकप्रिय पर्वतीय स्थान बना देते हैं।
पालमपुर
पालम पुर हिमाचल प्रदेश का एक सुंदर पर्वतीय स्थान है। यहां उत्तर भारत की चाय राजधानी स्थित मानी जाती है। यहां की ताजी चाय की पत्तियां दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, ,खुशबू भरी हवा और अद्भुत जंगल इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल बनाते हैं। मनमोह लेने वाली प्राकृतिक सुंदरता दुनिया के हर कोने से पर्यटकों को यहां खींच लाती है। पर्यटक यहां की सुंदर दृश्यावली में खो जाते हैं और अवकाश का समय सुखद रूप से बिताते हैं। यह प्रकृति प्रेमियों छुट्टी बिताने वालों और विवाह के बाद घूमने आने वाले जोड़ों के लिए एक आदर्श स्थान है। यहां बिताया गया समय आपके जीवन में यादगार बन जाता है। पालमपुर का मौसम हमेशा अच्छा रहता है और आने वाले पर्यटकों के लिए यहां का हर क्षण आनंद में बीतता है।
वन्य जीवन अभयारण्य
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क
हिमालय के भूरे भालू के क्षेत्र वाला यह नेशनल पार्क कुल्लू जिले में 620 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और यहां समशीतोष्ण एवं एलपाइन वन पाए जाते हैं। यहां कुछ वर्जिन कोनीफेरस वन है। एलपाइन चारागाह और ग्लेशियर का विशाल क्षेत्र इस पार्क का बड़ा हिस्सा है। यहां पश्चिमी हिमालय की अनेक महत्वपूर्ण वन्य प्रजातियां पाई जाती है जैसे मस्क डीयर, ब्राउन बीयर, गोराल, थार, चीता, बरफानी चीता, भराल, सीरो, मोनल, कलिज, कोकलास, चीयर, ट्रागोपान, बरफानी कौआ आदि। रक्तिसार की चढ़ाई, सैंज नदी का उदगम और अलपाइन चारागाहों में कैम्प लगाना अविस्मरणीय अनुभव हैं। इसी प्रकार तीर्थ की ओर चढ़ाई का रास्ता तीर्थन नदी का उदगम है। यहां आने वाले पर्यटक शमशी में नेशनल पार्क के निदेशक अथवा सैंज के वन्य जीवन रेंज अधिकारी अथवा साइरोपा (बंजर) के वन्य जीवन रेंज अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं और सहायता तथा मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। कैम्प लगाने के उपकरण और मार्गदर्शन वन विभाग द्वारा दिए जाते हैं।
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स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषय वस्तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित
