बिहार
परिचय
बिहार का अनोखापन इसके नाम से लिए स्पष्ट है, जो प्राचीन शब्द विहार (मठ) से आया है। यह बेशक मठों का स्थान है। इस प्राचीन भूमि पर हिन्दु, बौद्ध, जैन, मुस्लिम और सिक्ख धार्मिक स्थल पाए जाते हैं, जहां भारत का प्रमुख राजवंश उठा और गिरा। बिहार एक ऐसा स्थान है जहां विश्व का सबसे प्रारंभिक शिक्षा केन्द्र माना जाने वाला विश्व विद्यालय अपने भग्नावशेष के रूप में मौजूद है। गंगा का मार्ग मैदानी इलाकों से बह कर बिहार के मैदान में पहुंचता है और फिर बंगाल के डेल्टा क्षेत्र में गंगा का वितरण होता है।
सभी भारतीय राज्यों में बिहार को महात्मा बुद्ध के जीवन से सबसे अधिक गहराई के साथ जोड़ा जाता है, जिसके परिणामस्वरूप यहां धार्मिक यात्राएं की जाती है, जो बौद्ध धर्म का जाना माना स्थान है। बौद्ध यात्राएं राज्य की राजधानी पटना से शुरू होती है, जहां हिन्दु और बौद्ध शिलालेखों का एक संग्रह तथा महात्मा बुद्ध की अस्थियों के अवशेष मिट्टी के पात्रों में रखे गए हैं।
पर्यटन महत्व रखने वाले अन्य महत्वपूर्ण स्थान हैं राजगिर, नालंदा, वैशाली, पावापुरी (जहां भगवान महावीर ने अपनी अंतिम सांसें ली और निर्वाण प्राप्त किया) बोध गया, विक्रम शिला (जो उच्चतर शिक्षा के बौद्ध विश्वविद्यालय का भग्नावशेष है), गया, पटना (पाटली पुत्र का पुराना शहर) सासाराम (शेरशाह सूरी का मकबरा) और मधुबनी (प्रसिद्ध मधुबनी चित्रकला के लिए ज्ञात)।
पर्यटन आकर्षण
- बिहार में होटलों की सूची (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- टूर ऑपरेटर और यात्रा एजेंटों की सूची (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- पर्यटन कार्यालय (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- वोल्वो लक्जरी बसों का आगमन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- बिहार का मानचित्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
वन्य जीवन अभयारण्य
वाल्मीकि नेशनल पार्क
वाल्मीकि नगर पश्चिमी चंपारण जिले के सबसे उत्तरी भाग में नेपाल की सीमा के पास बेटिया से लगभग 100 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक छोटा कस्बा है जहां कम आबादी है और यह अधिकांशत: वन क्षेत्र के अंदर है। पश्चिमी चंपारण जिले का एक रेलवे स्टेशन नरकटिया गंज के रेल हैड के पास स्थित है। यह पार्क उत्तर में नेपाल के रॉयल चितवन नेशनल पार्क और पश्चिमी जिले पर हिमालय पर्वत की गंडक नदी से घिरा हुआ है।
यहां पर आप बाघ, स्लॉथ बीयर, भेडिए, हिरण, सीरो, चीते, अजगर, पीफोल, चीतल, सांभर, नील गाय, चीते, हाइना, भारतीय सीवेट, जंगली बिल्लियां, हॉग डीयर, जंगली कुत्ते, एक सींग वाले राइनोसिरोस तथा भारतीय भैंसे कभी कभार चितवन से चलकर वाल्मीकि नगर में आ जाते हैं।
भीमबंध अभयारण्य
भीमबंध वन्य जीवन अभयारण्य मुंगेर जिले के दक्षिण पश्चिम में स्थित है। यह जंगल 681.99 वर्ग किलो मीटर में फैला है। यह मुंगेर से 56 किलो मीटर की दूरी पर, जमुई रेलवे स्टेशन से 20 किलो मीटर की दूरी पर और पटना हवाई अड्डे से 200 किलोमीटर की दूरी पर है।
यह जंगल प्रसिद्ध खड़गपुर पहाड़ी श्रृंखला में स्थित है, जो गंगा नदी के दक्षिण में है और यह चारों ओर घनी आबादी के साथ गैर वन्य क्षेत्रों से घिरा हुआ है। इन वनों की वनस्पति बहुत घनी है, जहां साल, केंड, एवं अन्य पेड़ पहाड़ी तराई के साथ साथ उगते हैं, ये सूर्य की किरणों से कोमल बेलों की सुरक्षा करते हैं जो यहां भरपूर मात्रा में उगती हैं।
यहां कई तरह के जीव पाए जाते हैं जैसे बाघ, चीते, स्लॉथ बीयर, नील गाय, सांभर, बार्किंग डीयर, वन्य भालू, चार सींग वाले एंटीलोप इन जंगलों में घूमते रहते हैं। यहां के घाटी वाले हिस्से में तथा पहाड़ के निचले हिस्से में गर्म पानी के कई झरने हैं जो भीम बंध, सीताकुंड और ऋषि कुंड के नाम से जाने जाते हैं। गर्म पानी के सभी झरनों का तापमान पूरे साल एक जैसा रहता है और मौसम में बदलाव से इन पर शायद ही कुछ असर होता है।
राजगीर अभयारण्य
राजगीर अभयारण्य राजगीर रेलवे स्टेशन से दो किलो मीटर की दूरी पर और पटना हवाई अड्डे से 105 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। यह अभयारण्य 35.84 वर्ग किलो मीटर के क्षेत्र में फैला है। यह अभयारण्य छोटी छोटी पहाडियों से भरा हुआ है जहां भूमि ऊंची नीची है। इस क्षेत्र में गर्म पानी के कई झरने हैं। इन गर्म झरनों में सल्फर की काफी मात्रा पाई जाती है।
इस अभयारण्य में उपस्थित वन्य जीवन इन जंतुओं से भरपूर है जैसे चीते, हाइना, बार्किंग डीयर और नील गाय आदि। यहां पाए जाने वाली चिडियां हैं पीफाउल, जंगल फाउल, पार्टिज, काले और भूरे क्वेल्स, हार्न बील, तोते, डव, माइना आदि। इस क्षेत्र में जंगली भालू आम तौर पर देखा जा सकता है।
इस अभयारण्य के अतिरिक्त यहां बांस का एक पार्क (वेनूवाना) है। मूल रूप से यह पार्क राजा बिम्ब सार का उद्यान था। वन विभाग ने चीतलों, नील गाय और सांभरों के साथ यह सुंदर डीयर पार्क बनाया है। यहां ऐतिहासिक महत्व के अन्य सभी सुंदर स्थान जोड़ने के लिए हवाई रोप वे है जो जापानियों द्वारा निर्मित पहाड़ की चोटी पर स्थित बौद्ध स्तूप में जाने का रास्ता प्रदान करते हैं।
इस अभयारण्य में राज्य सरकार के पर्यटन, वन और लोक निर्माण विभाग द्वारा ठहरने और भोजन आदि की अच्छी सुविधाएं प्रदान की गई हैं।
कैमूर अभयारण्य
कैमूर वन्य जीवन अभयारण्य डीएफओ शाह बाद प्रभाग के तहत कैमूर जिले में स्थित है। इस अभयारण्य का क्षेत्रफल 1342 वर्ग किलोमीटर है जो मुख्यत: पहाडियों और ऊंची नीची भूमि तक सीमित है। इन वनों में ब्लैक बक, नील गाय, चिंगारा, बाघ, चीते, हाइना, जंगली सुअर, स्लॉथ बीयर आदि सामान्य रूप से पाए जाते हैं। यह अभयारणय रेल और सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा है। यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन सासाराम, देहरी - ऑन - सन और भाभुआ है। यहां आस पास पर्यटक स्थलों में शेरशाह का संग्रहालय, जो सासाराम धुआकुंड (एक प्राकृतिक झरना), करकट गाध आदि हैं।
गौतम बुद्ध अभयारण्य
यह अभयारण्य गया से 20 किलो मीटर की दूरी पर और बोध गया से 60 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। इस अभयारण्य का क्षेत्रफल 259 वर्ग किलो मीटर है और यह राष्ट्रीय राजमार्ग 2 के दोनों ओर स्थित है। इस अभयारण्य का वन पहाड़ी के निचले हिस्से में स्थित है और यहां के ऊंचे नीचे रास्ते पहाड़ी तराई के उत्तर में स्थित है जो छोटा नागपुर के पठार का विस्तार हैं। यहां पाए जाने वाले वन्य जंतुओं में बाघ, चीते, हाइना, स्लॉथ बीयर, जंगली कुत्ते, जंगली सुअर, सांभर, चित्तीदार हिरण और नील गाय आदि शामिल हैं।
उदयपुर अभयारण्य
उदयुपर वन्य जीवन अभयारण्य बेटिया से लगभग 15 किलो मीटर की दूरी पर पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित है। यह लगभग 8.87 वर्ग किलो मीटर के क्षेत्र में फैला है। यहां चित्तीदार हिरण, बार्किंग डीयर, जंगली सुअर, नील गाय, भेडिए, जंगली बिल्लियां आदि पाई जाती हैं।
काबर झील पक्षी अभयारण्य
काबर झील पक्षी अभयारण्य बेघू सराय के उत्तर पश्चिम में 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस अभयारणय का क्षेत्रफल 63.11 वर्ग किलोमीटर है। यह झील बूढ़ी गंडक नदी के किनारे बनी है जो लगभग 59 प्रकार के प्रवासी पक्षियों और 106 स्थानीय प्रजातियों के साथ मछलियों की 31 प्रजातियों का घर भी है।
गोगाबिल पक्षी अभयारण्य
यह अभयारणय कटिहार से 26 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है और यह लगभग 217.99 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला है। अपने वैश्विक, राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय महत्व के कारण राज्य सरकार ने गोगाबिल पक्षी अभयारण्य को एक सीमित क्षेत्र घोषित किया है। यह आर्द्र भूमि तरह तरह के जलीय जीवों और वनस्पति से भरपूर है तथा यह प्रवासी पक्षियों के लिए शीतकालीन आवास का कार्य होता है।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषय वस्तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित
