असम
परिचय
असम राज्य भारत के सर्वाधिक सुंदर क्षेत्रों में से एक है। ऐसा शायद ही कोई राज्य है जहां प्राकृतिक दृश्यों में इतने अधिक रंग और विविधता दिखाई देती है और साथ ही यहां रहने वालों का सांस्कृतिक खजाना भी विविधता से भरा है। कल कल बहती ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा गुवाहाटी शहर पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार है। पूर्व के प्रकाश में प्राग ज्योति शिप ज्योषिपुरा, जो नाम एक समय इसे दिया गया था, कहा जाता है कि यह महाभारत के वैदिक युग के दौरान एक विशाल राज्य था। आज गुवाहाटी शहर इस क्षेत्र का केन्द्र है और यहा का सबसे बड़ा शहर भी है।
पर्यटन में महत्व रखने वाले गुवाहाटी के आस पास के स्थान हैं कामाख्या मंदिर, कुमार नंदा (पीकॉक आइलैंड), नवग्रह मंदिर, विशिष्ट आश्रम, दोलगोविंद, गांधी मंडप, शासकीय चिडियाघर, शासकीय संग्रहालय, सुकरेश्वर मंदिर, गीता मंदिर, मदन कामदेव मंदिर, ऐतिहासिक और पुरातात्वकि महत्व के अनेक भव्य स्थान तथा सराईघाट पुल।
राज्य के पर्यटक महत्व के अन्य स्थान इस प्रकार हैं : काजीरंगा नेशनल पार्क (यह एक सींग वाले राइनो के लिए प्रसिद्ध है), मानस टाइगर प्रोजेक्ट, पोबी तोरा और ओरंग (वन्य जीवन अभयारण्य), शिवसागर जो रनग्गर - कारेंगर का मंदिर है, तेजपुर (भैरवी मंदिर और प्राकृतिक सुंदरता), भालुक पुंग (अंग लिंग) हाफलॉग (जतिंगा पहाडियों के साथ स्वास्थ्य रिजॉर्ट) मजुली (दुनिया की सबसे बड़ी नदी का द्वीप) चांदुबी झील (पिकनिक स्थल) हाजो (बौद्ध, हिन्दु और इस्लाम धर्म का मिलन बिन्दु)। बाताद्रव्य (महान वैष्णव संत शंकर देव का जन्म स्थान) और सुआलकुजी (रेशम उद्योग के लिए प्रसिद्ध)।
पर्यटन आकर्षण
- गंतव्य (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- आवास (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- पर्यटन कार्यालय (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- मार्गदर्शक मानचित्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- पर्यटक मार्गदर्शक सूची (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
पर्वतीय स्थल
हाफलॉन्ग
असम का एक मात्र पर्वतीय स्थल हाफलॉन्ग समुद्री तल से 680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसे असम की मुख्य भाषा में सफेद चीटियों का पहाड़ कहा जाता है। हाफलॉन्ग का इस भाषा में अर्थ होता है सफेद चीटियों का पहाड़। यह उतरी कछार पहाडियों का जिला मुख्यालय है। अपने प्राकृतिक दृश्यों के अलावा हाफलॉन्ग की पहाड़ी को 2 लाख अलग अलग प्रकार के फूलों के लिए भी जाना जाता है, जिसमें अनेक ऑर्किड जैसे ब्लूवेंडा, पक्षियों की दुर्लब प्रजातियां, पाइन एपन, पेरा, नाशपाती और संतरे शामिल है। हाफलॉन्ग में ऑर्किड का एक उद्यान है जो देखने योग्य स्थल है। हाफलॉन्ग को कभी कभार नीली पहाडियों का घर कहा जाता है। यह शांत और छोटा सा पर्वतीय स्थल नीली पहाडियों, नदियों और झरनों से भरपूर है जिसे पर्यटन ने अब तक स्पर्श नहीं किया है।
उमारंगसो
यह असम और मेघालय की सीमाओं पर स्थित है। यह हाफलॉन्ग से 112 किलो मीटर की दूरी पर है। यह पर्वतीय स्थल उत्तरी कछार पहाड़ी क्षेत्र की प्राकृतिक पृष्ठभूमि से समृद्ध है। इस मनोरंजक यात्रा का आनंद लेने के लिए पर्यटकों को जोवाई के रास्ते हाफलॉन्ग पहाड़ी से उमारंगसो की ओर जाना चाहिए और यहां से शिलॉन्ग की पहाड़ी जाया जा सकता है। उमारंगसो के पास गर्म पानी का एक झरना है जिसमें चिकित्सीय गुण होने का विश्वास किया जाता है।
वन्य जीवन अभयारण्य
काजीरंगा नेशनल पार्क
काजीरंगा नेशनल पार्क इस राज्य का एक मात्र नेशनल पार्क है जो मध्य असम में 430 वर्ग किलो मीटर के क्षेत्रफल में फैला है। यह भारतीय एक सींग वाले राइनोसेरोस (यूनीकोर्निस) का निवास है। काजीरंगा का प्राकृतिक परिवेश वनों से युक्त है, जहां बड़ी एलिफेंट ग्रास, मोटे वृक्ष, दलदली स्थान और उथले तालाब हैं। एक सींग वाला राइनो सिरॉस, हाथी, भारतीय भैंसा, स्वैम्प हिरण, सांभर, हॉट डीयर, स्लॉथ बीयर, बाघ, चीते, सुअर, लैपर्ड कैट, जंगली बिल्ली, हॉग बैजर, कैप वाले लंगूर, हुलॉक गिब्बन, भेडिया, साही,पाइथन, भैंसे और अनेक प्रकार की चिडिया जैसे पेलीकन, बत्तख, गीज़, हॉर्नबिल, आइबिस, कोरमोरेंट, अगरेट, हेरॉन, काली गर्दन वाले स्टॉर्क, लेसर एडजुलेंट, रिंगटेल फिशिंग इगल आदि बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
आप यहां अथवा कार्बी अंगलोग के पास कॉफी और रबर के घने बागानों की सैर भी कर सकते हैं। आप कार्बी लोगों से मिलने के लिए कार्बी गांव में भी जा सकते हैं और इनकी जीवन शैली देख सकते हैं। या आप चाय के बागानों में ढूंढ कर देख सकते हैं कि आप जिस चाय को हर दिन पीते हैं, उसे कैसे बनाया जाता है। वन्य जीवन पर फिल्म शो की व्यवस्था भी अनुरोध करने पर पर्यटक लॉज में की जाती है।
काजीरंगा नेशनल पार्क के बारे में और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
मानस टाइगर रिजर्व
असम का मानस टाइगर रिजर्व भारत में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरूआत के समय 1973 में बनाया गया था। इस आरक्षित क्षेत्र को 6 जिलों में विस्तारित किया गया है, कोकराझार, बोंगई गांव, बारपेटान, नालबाड़ी, कामरूप और दारांग। जीव जंतुओं तथा वनस्पति की विविधता वाले इस आरक्षित वन में जंतुओं की 22 प्रजातियां पाई जाती है जो विश्व भर में खतरे में पड़ी है। वर्ष 1985 में इसे विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया था। यहां के नम साल वन। पूर्वी हिमालय का निचला भाबर साल और पूर्वी तराई साल वन, नदियां, नमी युक्त मिले जुले पतझड़ी वन और इसके अलावा अन्य प्रकार की प्रजातियां जैसे बाघ, चीता, क्लाउडिड चीता, सुनहरी बिल्ली, लेपर्ड कैट, पेंगोलिन, भारतीय हाथी और राइनोसिरोस, एशियन वॉटर बैफेलो, गौर, स्वाम्प डीयर और पिगमी हॉग पाई जाती है।
इस क्षेत्र की कम से कम दो वन्य जंतु प्रजातियां संकट में हैं, जो हैं पिगमी हॉग और गोल्डन लंगूर। पिगमी हॉग अब केवल इसी टाइगर रिजर्व में पाए जाते हैं, यहां वितरण की जानी मानी रेज हैं जबकि गोल्डन लंगूर (प्रेस वाइटिस गी) को टाइगर रिवर्ज की इस सीमा के आगे कभी देखा नहीं गया है। यहां स्तनधारियों की 21 खतरे में पड़ी प्रजातियां दर्ज की गई हैं। ये हैं केपयुक्त लंगूर, सुनहरे लंगूर, स्लो लोरिस, बाघ, काला चीता, लेपर्ड कैट, क्लाउडिड लेपर्ड, सुनहरी बिल्ली, फिशिंग कैट, बीयर कैट, स्लॉथ बीयर, एशियाई हाथी, भारतीय पेंगोलिन, एक सींग वाला राइनोसिरोस, एशियाई वॉटर बैफेलो, स्वाम्प डीयर, कई रंगों वाली उड़ने वाली गिलहरी, हिस्पीड हेयर और गंगा में पाई जाने वाली डॉलफिन।
मानस टाइगर रिजर्व के बारे में और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषय वस्तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित
